शिक्षा शास्त्र

शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य

    शिक्षा के सामाजिक परिप्रेक्ष्य

      शिक्षा के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

        शैक्षिक नेतृत्व एवं प्रबंधन

          शैक्षिक निर्देशन एवं परामर्श

            पाठ्यक्रम विकास एवं आकलन

              भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

                girl is drawing on paper

                गृहकार्य व गृहकार्य की विशेषताएं

                गृहकार्य वह साधन है जो छात्रों को स्वयं अभ्यास करके सीखने के लिए अवसर प्रदान करता है। इसके द्वारा छात्रों को कक्षा से बाहर सीखने के अनुभव प्राप्त होते हैं जो शिक्षण के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होते हैं। इस प्रकार गृहकार्य प्रभावशाली शिक्षण का एक महत्वपूर्ण भाग है। गृहकार्य गृहकार्य को निम्न ढंग […]

                भारतीय समाज का बालक पर प्रभाव – 10 New Effects on Child

                भारतीय समाज का बालक पर प्रभाव – बालक जब समाज में जन्म लेता है तो वह एक असहाय प्राणी होता है। बालक का विकास समाज की प्रकृति और स्वरूप पर निर्भर करता है। बालक का विकास उसकी शिक्षा और समाज द्वारा ही होता है। इसलिए समाज की प्रकृति व स्वरूप बालक की शिक्षा व विकास […]

                प्रयोगशाला विधि

                प्रयोगशाला विधि परिभाषा उपयोगिता गुण व दोष

                प्रयोगशाला विधि का सार यह है कि यहां अध्यापक पृष्ठभूमि में ओझल रहता है और समस्याएं स्थूल रूप से सामने प्रस्तुत रहती हैं। कक्षा में पढ़ाते समय वह विद्यार्थियों के सम्मुख रहता है प्रयोगशाला कार्य में वह छात्र की कठिनाई को दूर करने में सहायता करता है। प्रयोगशाला विधि में विद्यार्थी के मस्तिष्क को पूर्णता […]

                बाल केन्द्रित शिक्षा के अंतर्गत पाठ्यक्रम का स्वरूप

                बाल केन्द्रित शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न शिक्षण विधियों को प्रयोग में लाया जाता है जो बालकों के सीखने की प्रक्रिया, महत्वपूर्ण कारक, लाभदायक या हानिकारक दशाएं, रुकावट, सीखने के वक्र तथा प्रशिक्षण इत्यादि तत्वों को सम्मिलित करती हैं तथा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित होती है। बाल केंद्रित शिक्षा का शिक्षा मनोविज्ञान को दिया जाता है। […]

                भारत में नव सामाजिक व्यवस्था

                भारत में नव सामाजिक व्यवस्था – राजतंत्र अर्थतंत्र शिक्षा

                भारत में नव सामाजिक व्यवस्था – नवीन भारत में देश की सामाजिक व्यवस्था मुख्य रूप से राजतंत्र, अर्थतंत्र और शिक्षा व सामाजिक व्यवस्थाओं पर आधारित है। परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि इसके इस स्वरूप निर्धारण में धर्म तथा अन्य सामाजिक व्यवस्थाओं का योगदान नहीं है। भारत में नव सामाजिक व्यवस्था भारत विभिन्न संस्कृतियों […]

                वुड का घोषणा पत्र

                लॉर्ड विलियम बैंटिक की शिक्षा नीति

                बैंटिक की शिक्षा नीति – लॉर्ड विलियम बैंटिक ने मैकाले के विवरण पत्र में उल्लेखित किए गए उसके सभी विचारों का अनुमोदन किया। इस अनुमोदन के बाद 7 मार्च 1835 को एक नई विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें उसने संस्कार की शिक्षा नीति को निम्न शब्दों में व्यक्त किया। शिक्षा के लिए निर्धारित धन का […]

                लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति, मुदालियर आयोग

                राष्ट्रीय पाठ्यक्रम निर्माण 2005

                राष्ट्रीय पाठ्यक्रम निर्माण 2005 – मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा बुलाई गई राष्ट्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कार्यकारिणी सभा में चिंतन किया गया कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम 2000 में क्या सुधार किया जाए? 14 जुलाई से 19 जुलाई 2004 में बुलाई गई सभा में निर्णय लिया गया कि 21 वी शताब्दी के लिए […]

                केंद्र सरकार के शैक्षिक उत्तरदायित्व

                आदर्श शैक्षिक प्रशासक

                एक आदर्श शैक्षिक प्रशासक के लिए विद्यालय प्रबंधन एवं विद्यालय के कर्मचारियों में उचित समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है। विद्यालय हो या अन्य कोई संस्थान बिना उचित समन्वय एवं सहयोग के विकास नहीं कर सकता है। आदर्श शैक्षिक प्रशासक के गुण विद्यालय में तो विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्र तथा शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी वर्ग आते […]

                निर्देशन, पर्यवेक्षण

                परामर्श अर्थ विशेषताएं उद्देश्य

                निर्देशन तथा परामर्श एक सिक्के के दो पहलू हैं। एक दूसरे के अभाव में दोनों निष्प्राण रहते हैं। परामर्श शब्द दो व्यक्तियों के संपर्क को व्यक्त करता है। परामर्श प्रक्रिया में एक परामर्श देने वाला और दूसरा परामर्श चाहने वाला या परामर्श प्रार्थी होता है। परामर्श की प्रक्रिया के अंतर्गत उन सभी प्रकार की स्थितियों […]

                रागदरबारी उपन्यास व्याख्या, उपयोगिता

                पाठ्यक्रम के उद्देश्य

                पाठ्यक्रम के उद्देश्य- पाठ्यक्रम देशकाल एवं परिस्थितियों के अनुरूप बदलता रहता है। किसी भी पाठ्यक्रम का निर्माण तत्कालीन शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु किया जाता है। पाठ्यक्रम के उद्देश्य सामान्य तौर पर पाठ्यक्रम के उद्देश्य निम्न है- इस प्रकार पाठ्यक्रम के उद्देश्य के कारण पाठ्यक्रम का शैक्षिक प्रक्रिया में एक विशेष स्थान है। […]

                प्रकृतिवाद

                प्रकृतिवाद के दर्शन के अनुसार प्रकृति अपने आपमें पूर्ण तत्व है। इस दर्शन के अनुसार, प्रत्येक वस्तु प्रकृति से उत्पन्न होती है और फिर उसी में विलीन हो जाती है। प्रकृतिवादी इंद्रियों के अनुभव से प्राप्त ज्ञान को ही सच्चा ज्ञान मानते हैं तथा उसके अनुसार सच्चे ज्ञान की प्राप्ति के लिए मनुष्य को स्वयं […]

                गृहकार्य, सतत शिक्षा

                सतत शिक्षा

                सतत शिक्षा एक ऐसी व्यापक अवधारणा है जो सभी रूपों में चलने वाले शैक्षिक क्रियाकलापों को अंतर्निहित करती है। इसके अंतर्गत औपचारिक सहज तथा गैर औपचारिक सभी प्रकार की शैक्षिक प्रणालियां आ जाती हैं। सतत शिक्षा मूल्य शिक्षा को जीवन और जीवन को शिक्षा समझने वाली अवधारणा है। व्यापक अर्थ में सतत शिक्षा यह जीवन […]

                मूल्यांकन की आवश्यकता

                मूल्यांकन की आवश्यकता

                मूल्यांकन की आवश्यकता – मूल्यांकन एक सतत प्रक्रिया है जो संपूर्ण शिक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है और शैक्षिक लक्ष्यों से घनिष्ठ रूप से संबंधित है। यह छात्रों की अध्ययन आदतों तथा शिक्षक की विधियों पर अधिक प्रभाव डालता है। इस प्रकार यह न केवल शैक्षिक उपलब्धि के मापन में सहायता करता है जबकि […]

                शिक्षा दर्शन

                शिक्षा दर्शन

                शिक्षा दर्शन, दर्शन की वह शाखा है जिसमें हम शिक्षा संबंधी समस्याओं पर दार्शनिक दृष्टिकोण से विचार करते हैं। यह एक प्रयुक्त दर्शन है। जब हम विशुद्ध दर्शन के आधारभूत प्रत्ययो तथा सिद्धांतों का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में करते हैं। यह एक प्रयुक्त दर्शन है। जब हम विशुद्ध दर्शन के आधारभूत प्रत्ययों तथा सिद्धांतों […]

                जलवायु परिवर्तन

                जलवायु परिवर्तन के कारण

                जलवायु परिवर्तन – अनियन्त्रित औद्योगिक विकास ने पृथ्वी, जल, वायु और आकश का जो हाल कर दिया है वह विश्व भर में वैज्ञानिकों की गम्भीर चिन्ता का विषय बन गया है। यही हाल रहा तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जल्द ही दुनिया रहने लायक नहीं बचेगी प्रदूषित पर्यावरण ऐसी दीर्घकालीन समस्याएँ पैदा करेगा, […]

                कहानी

                मौखिक पठन प्रकार महत्त्व तत्व तथा गद्य व पद्य में मौखिक पठन

                लिखित भाषा का मुख से उच्चारण करते हुए पढ़ने और पढ़कर उसका अर्थ समझने की क्रिया को मौखिक पठन कहते हैं। अर्थ बोध एवं भावानुभूति मौखिक पठन के आवश्यक तत्त्व हैं, यह बात दूसरी है कि पाठक को यह अर्थ बोध एवं भावानुभूति किस सीमा तक होते हैं। यह तो पठनकर्ता के ज्ञान एवं कौशल […]

                शिक्षण

                बोध स्तर शिक्षण के 7 गुण 5 दोष व 11 सुझाव

                बोध स्तर शिक्षण स्मृति स्तर के शिक्षण की तुलना में अधिक विचार युक्त माना जाता है इसलिये मानसिक शक्तियों एवं बौद्धिक क्षमताओं हेतु स्मृति स्तर की अपेक्षा उच्च स्तर की आवश्यकता होती है। बोध शब्द को शिक्षण के क्षेत्र में कई अलग-अलग अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है. कुछ प्रमुख अर्थ इस प्रकार से हैं- […]

                राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

                राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की विशेषताएँ व विवरण

                राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अन्तर्गत स्कूलों तथा कॉलेजों में होने वाली शिक्षा की नीति तैयार की जात है। भारत सरकार ने नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 आरम्भ की है। जिसके अन्तर्गत सरकार: एजुकेशन पॉलिसी में काफी सारे मुख्य बदलाव किए हैं। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। […]

                विज्ञान शिक्षण के उद्देश्य Top 12 Objective

                विज्ञान शिक्षण के उद्देश्य- वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास करने का प्रयास करना है। किसी भी कार्य को करने से पूर्व कोई लक्ष्य या उद्देश्य निर्धारित करना पड़ता है। उद्देश्य के बिना उस कार्य को कोई दिशा नहीं मिलती। उद्देश्यों के अभाव में कार्य सुचारु रूप से संचालित नहीं […]

                वैदिककालीन शिक्षा के गुण

                तक्षशिला विश्वविद्यालय की विशेषताएँ

                तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिडी शहर से 35 कि•मी• उत्तर की ओर स्थित था। तक्षशिला नगर तत्कालीन राज्य की राजधानी था। वैदिक काल में यह वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य केंद्र था। बाद में यह बौद्धकालीन शिक्षा के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित हुआ। तक्षशिला विश्वविद्यालय यह विश्व का प्रथम विश्विद्यालय था जिसकी स्थापना […]

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