भारत माता मंदिर – वाराणसी हरिद्वार उज्जैन

भारत माता मंदिर – वाराणसी हरिद्वार उज्जैन

भारत में भारत माता मंदिर की संख्या गिनती में हैं तथा सभी अपेक्षाकृत नवीन हैं। किंतु भारतीय इतिहास एवं संस्कृति में उनकी जड़ें अत्यंत गहरी हैं। 'भारती' शब्द का आरंभिक संदर्भ ऋगवेद के आप्री सूक्त में प्राप्त होता है जहाँ उन्हें वाग्देवी अर्थात वाणी की देवी कहा गया है। साथ ही भारत वंश का भी … पढ़ना जारी रखें भारत माता मंदिर – वाराणसी हरिद्वार उज्जैन

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था 10 विशेषताए 8 लाभ 12 दोष

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था प्रतियोगिता के आधार पर संगठित व्यवस्था है। इस व्यवस्था पर कीमत संयन्त्र का सम्पूर्ण नियन्त्रण होता है। अर्थव्यवस्था में उत्पादन के सम्पूर्ण साधनों पर व्यक्तियों अथवा व्यक्तिगत संस्थाओं का स्वामित्व होता है। इन साधनों का उपयोग वे निजी लाभ को अधिकाधिक बढ़ाने के लिए स्वतन्त्रतापूर्वक करते हैं। इस व्यवस्था में वस्तुओं के उत्पादन, … पढ़ना जारी रखें पूंजीवादी अर्थव्यवस्था 10 विशेषताए 8 लाभ 12 दोष

समाजवादी अर्थव्यवस्था परिभाषाएं 8 विशेषताएं 9 लाभ 8 दोष

समाजवादी अर्थव्यवस्था का प्रारम्भ सामान्यतः पिछली शताब्दी के प्रथम चरण में रॉबर्ट ओवन द्वारा प्रतिपादित फैक्ट्री सुधारों के साथ-साथ माना जाता है किन्तु इसे व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक रूप सन् 1848 में कार्ल मार्क्स ने दिया। वर्तमान में समाजवाद अनेक भ्रान्तियों और विवादों के घेरे में है। विभिन्न विद्वानों ने इसे अपने-अपने दृष्टिकोण से अभिव्यक्ति दी … पढ़ना जारी रखें समाजवादी अर्थव्यवस्था परिभाषाएं 8 विशेषताएं 9 लाभ 8 दोष

जिला परिषद संरचना बैठक 11 कार्य

जिला परिषद पंचायती राज की सबसे ऊपरी संस्था है। जिला परिषद ग्राम पंचायतों एवं पंचायत समितियों का मूलतः नीति निर्धारण एवं मार्गदर्शन का काम करती है। जिला परिशद् की मुख्य धारा एवं उससे संबंधित प्रावधानों का विवरण इस प्रकार है- जिला परिषद की संरचना जिला परिषद् का भी ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति की तरह … पढ़ना जारी रखें जिला परिषद संरचना बैठक 11 कार्य

पंचायत समिति संरचना बैठक 32 कार्य बजट

पंचायत समिति ग्राम पंचायत और जिला परिषद् के बीच की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के अन्तर्गत पंचायत समिति मध्यवर्ती पंचायत के रूप में भूमिका निभाता है। जिस प्रकार केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के प्रशासनिक एवं विधायी सम्बन्धी सारे कार्य संविधान के नियमों के अनुकूल संचालित होता है, उसी प्रकार पंचायत … पढ़ना जारी रखें पंचायत समिति संरचना बैठक 32 कार्य बजट

मध्यकालीन भारत के वंश – गुप्त, हर्यक, शिशुंनाग, नंद वंश

मध्यकालीन भारत के वंश – गुप्त, हर्यक, शिशुंनाग, नंद वंश

भारत पर कई वंशों ने शासन किया। जिनमे से गुप्त वंश, हर्यक वंश, शिशुंनाग वंश, नंद वंश के बारे में संक्षेप में जानेंगे। किसी एक ही परिवार से एक के बाद एक शासन करने वाले व्यक्तियों को वंश कहते हैं। मध्यकालीन भारत में ऐसे ही अनेक वंशों ने भारत पर राज किया। गुप्त वंश गुप्त … पढ़ना जारी रखें मध्यकालीन भारत के वंश – गुप्त, हर्यक, शिशुंनाग, नंद वंश

भारतीय संविधान 12 अनुसूचियां 11 कर्तव्य नागरिकता

भारतीय संविधान 12 अनुसूचियां 11 कर्तव्य नागरिकता

भारतीय संविधान, भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन (26 नवम्बर) भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भीमराव … पढ़ना जारी रखें भारतीय संविधान 12 अनुसूचियां 11 कर्तव्य नागरिकता

ग्राम पंचायत संरचना 34 कार्य 6 समितियां

तेहत्तरवें संविधान संशोधन के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायती राज में प्रारंभिक स्तर की संस्था ग्राम पंचायत सबसे महत्वपूर्ण संस्था है। ग्राम पंचायत निर्वाचित प्रतिनिधयों की एक ऐसी संस्था है जिसे जनता के आमने-सामने हो कर जवाब देना पड़ता है। साथ ही अधिकांश कार्यकलापों के लिए निर्णय लेने से पहले जनता से उनकी सहमति लेनी होती है। … पढ़ना जारी रखें ग्राम पंचायत संरचना 34 कार्य 6 समितियां

जैन धर्म और जैन धर्म की शिक्षाए – 5 महाव्रत + 3 व्रत

जैन धर्म और जैन धर्म की शिक्षाए – 5 महाव्रत + 3 व्रत

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी जी थे, इन्हें जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।महावीर स्वामी जी का जन्म 540 ईसा पूर्व वैशाली के निकट कुंड ग्राम में हुआ था।महावीर स्वामी जातिरिक कुल के थे।इनके बचपन का नाम वर्धमान था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ तथा इनकी माता का नाम त्रिशला था। … पढ़ना जारी रखें जैन धर्म और जैन धर्म की शिक्षाए – 5 महाव्रत + 3 व्रत

ग्राम सभा बैठक विषय 5 कार्य

ग्राम सभा बैठक विषय 5 कार्य

ग्राम सभा का क्षेत्र एक सम्पूर्ण ग्राम पंचायत होता है। यह पंचायती राज व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में रहने वाले सभी व्यक्ति जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज हो इस सभा के सदस्य होते हैं। इसमें 200 या उससे अधिक की जनसंख्या का होना जरूरी होता है। ग्राम सभा की बैठक … पढ़ना जारी रखें ग्राम सभा बैठक विषय 5 कार्य

भारत में पंचायती राज का इतिहास क्या है? 30 कार्य

भारत में पंचायती राज का इतिहास क्या है? 30 कार्य

पंचायती राज व्यवस्था का अस्तित्व में भारत में शुरुआती दौर से ही रहा है। अलग-अलग समय में यह व्यवस्था अलग-अलग नामों से जानी जाती रही है। पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम, तहसील, तालुका और ज़िला आते हैं। ब्रिटिश शासन काल में 1882 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रिपन ने स्थानीय स्वायत्त शासन की स्थापना की कोशिश … पढ़ना जारी रखें भारत में पंचायती राज का इतिहास क्या है? 30 कार्य

दीपावली क्यों मनाई जाती है?

दीपावली क्यों मनाई जाती है?

दिवाली या दीपावली, रोशनी का त्योहार, सभी भारतीय त्योहारों में से सबसे प्रसिद्ध है। यह हिंदू माह कार्तिक (अक्टूबर नवंबर) की अमावस्या को पड़ता है। दीपावली का शाब्दिक अर्थ है 'दीपकों की पंक्ति' और जैसा कि यह लोकप्रिय है, दिवाली का अर्थ है 'प्रकाश का त्योहार'! यह पूरे भारत में रोशनी, पटाखों, मिठाइयों और दावतों … पढ़ना जारी रखें दीपावली क्यों मनाई जाती है?

धनतेरस पूजा 2023 मुहूर्त महत्व कैसे करें पूजा क्या ना खरीदे

धनतेरस पूजा साल के सबसे शुभ दिनों में से एक है। धनतेरस पांच दिवसीय दिवाली त्योहार की शुरुआत का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो कुछ भी खरीदा जाता है, उसे भरपूर लाभ मिलता है। धनतेरस शब्द दो शब्दों से बना है - 'धन', जिसका अर्थ है धन और 'तेरस', जो … पढ़ना जारी रखें धनतेरस पूजा 2023 मुहूर्त महत्व कैसे करें पूजा क्या ना खरीदे

धरोहर के 6 प्रमुख रूप

धरोहर के 6 प्रमुख रूप

“धरोहर” अपने आप में बहुत ही व्यापक भाव को आत्मसात किया हुआ महत्वपूर्ण शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है थाती। अर्थात् एक निश्चित समय तक संभाल कर या सहेज कर रखा गया, धन, जेवरात, जायदाद, दस्तावेज, भवन, स्मारक, ग्रंथ, संस्कार, रीति रिवाज आदि, जो आगामी पीढ़ी को “धरोहर” के रूप में प्राप्त होते हैं। किसी … पढ़ना जारी रखें धरोहर के 6 प्रमुख रूप

करवा चौथ व्रत पूजन विधि महत्व

करवा चौथ व्रत पूजन विधि महत्व

करवा चौथ व्रत - भारतीय संस्कृति में जप, तप, व्रत का बहुत महत्त्व है। भारतीय संस्कृति में पुराण तथा धार्मिक ग्रंथ व्रतों के प्रसंग से भरे पड़े हैं। भारत में शायद ही कोई महीना व्रत और त्योहार के बिना बीतता हो, बल्कि यहाँ तो हर दिन यानी सोमवार, मंगलवार, वीरवार, शुक्रवार आदि को भी व्रत … पढ़ना जारी रखें करवा चौथ व्रत पूजन विधि महत्व

छठ पूजा पूजन विधि वैज्ञानिक महत्व

छठ पूजा पूजन विधि वैज्ञानिक महत्व

छठ पूजा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि इसे महापर्व का दर्जा प्राप्त है। इस पर्व के साथ करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है और हो भी क्यों न, भगवान् सूर्य की उपासना से जुड़े इस महापर्व की महिमा ही ऐसी है। दीपावली के ठीक छह दिन बाद मनाए जानेवाले पर्व छठ का भारतीय … पढ़ना जारी रखें छठ पूजा पूजन विधि वैज्ञानिक महत्व

रोजा रमजान के नियम 9 सावधानियां

रोजा रमजान के नियम 9 सावधानियां

इसलामी कैलेंडर का नौवाँ महीना रोजा रमजान का महीना होता है। यह एक पवित्र महीना होता है, जिसमें तीसों दिन मुसलमान धर्मावलंबी व्रत रखते हैं, जिन्हें रोजे के नाम से जाना जाता है। इसलाम धर्म के आरंभ से ही मुसलमानों के लिए रोजे आध्यात्मिक, मानसिक व आत्मिक शोधन के आवश्यक कर्तव्य के रूप में तय … पढ़ना जारी रखें रोजा रमजान के नियम 9 सावधानियां

निर्जला एकादशी व्रत नियम संदेश महत्व

निर्जला एकादशी व्रत - ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी कहलाती है। अन्य माह की एकादशियों में फलाहार किया जाता है, परंतु इसमें जल तक ग्रहण नहीं किया जाता। एक ओर ज्येष्ठ की भीषण गरमी और दूसरी ओर साधक द्वारा निर्जल व्रत रखना। पूरा एक दिन बिना पानी के रहना भारतीय उपासना … पढ़ना जारी रखें निर्जला एकादशी व्रत नियम संदेश महत्व

सत्यनारायण व्रत कथा पूजन विधि

सत्यनारायण व्रत कथा पूजन विधि

सत्यनारायण व्रत की कथा में ऐसे उन सभी व्यक्तियों की कथाएँ संगृहीत की गई हैं, जिन्होंने अपने कार्य-व्यवहार में सत्य को समाविष्ट करने का व्रत धारण किया था। फिर चाहे वे समाज के किसी भी वर्ग से थे। यहाँ काशीपुर में रहनेवाला दरिद्र ब्रण है तो उल्कामुख एवं तुंगध्वज जैसे राजा भी हैं। इसी प्रकार … पढ़ना जारी रखें सत्यनारायण व्रत कथा पूजन विधि

साईं बाबा व्रत कथा उद्यापन विधि आरती

साईं बाबा व्रत कथा उद्यापन विधि आरती

साईं बाबा व्रत कोई भी व्यक्ति कर सकता है। इस व्रत को करने के नियम भी अत्यंत साधारण हैं। साईं बाबा अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करते हैं। उनकी कृपा से सभी की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। माँगने से पहले ही वे सबकुछ देते हैं। उनके स्मरण मात्र से जीवन में आ रही बाधाओं … पढ़ना जारी रखें साईं बाबा व्रत कथा उद्यापन विधि आरती

रामनवमी व्रत पूजन विधि महत्व

रामनवमी व्रत पूजन विधि महत्व

चेत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी व्रत होता है। यह व्रत मध्याह्न व्यापिनी दशमी विधि को करना चाहिए। 'अगस्त्य संहिता' में कहा गया है कि चैत्र शुक्ल नवमी पुनर्वसु नक्षत्र से संयुक्त हो तो महान् पुण्यदायी होती है। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान् श्रीराम का अवतार हुआ। अतः जो व्यक्ति रामनवमी का व्रत … पढ़ना जारी रखें रामनवमी व्रत पूजन विधि महत्व

गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि

गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि

गणेश चतुर्थी व्रत - वैसे तो साल भर में पड़नेवाली किसी भी चतुर्थी को गणपतिजी का पूजन और उपासना करने से घर में संपन्नता, समृद्धि, सौभाग्य और धन का समावेश होता है। मगर शास्त्रों में भादों माह की चतुर्थी का विशेष महत्त्व बताया गया है; क्योंकि इसी दिन भगवान् गणेश का जन्म हुआ था। गणेश … पढ़ना जारी रखें गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि

जन्माष्टमी व्रत महत्व विधि क्या करें क्या ना करें?

जन्माष्टमी व्रत महत्व विधि क्या करें क्या ना करें?

जन्माष्टमी व्रत - जन्माष्टमी का पर्व हिंदुओं में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भले ही इस पर्व को मनाने के तरीके हर संप्रदाय में थोड़े-थोड़े भिन्न हैं, पर भाव बिल्कुल एक ही है कि अपने बालरूप प्रभु का अंतर्मन से खूब लाड़ लड़ाना और आनंदित होना। बड़े मंदिरों में और जिनके घरों … पढ़ना जारी रखें जन्माष्टमी व्रत महत्व विधि क्या करें क्या ना करें?

शिवरात्रि व्रत पूजन विधि क्या है? क्या न करें उस दिन?

शिवरात्रि व्रत पूजन विधि क्या है? क्या न करें उस दिन?

शिवरात्रि का अर्थ वह रात्रि है, जिसका शिवतत्त्व के साथ घनिष्ठ संबंध है । भगवान् शिवजी की अतिप्रिय रात्रि को 'शिवरात्रि' कहा गया है। शिवार्चन एवं जागरण ही इस व्रत की विशेषता है। इसमें रात्रि भर जागरण एवं शिवाभिषेक का विधान है। श्री पार्वतीजी की जिज्ञासा पर भगवान् शिवजी ने बताया कि फाल्गुन कृष्णपक्ष की … पढ़ना जारी रखें शिवरात्रि व्रत पूजन विधि क्या है? क्या न करें उस दिन?

नवरात्र व्रत कथा महत्व 5 लाभ

नवरात्र व्रत कथा महत्व 5 लाभ

नवरात्र व्रत - किसी भी प्रकार की साधना के लिए शक्ति का होना जरूरी है और शक्ति की साधना का पथ अत्यंत गूढ़ और रहस्यपूर्ण है और नवरात्र कुछ और नहीं, शक्ति व साधना का ही पर्व है। हम नवरात्र में व्रत इसलिए करते हैं, ताकि अपने भीतर की शक्ति, संयम तथा नियम से सुरक्षित … पढ़ना जारी रखें नवरात्र व्रत कथा महत्व 5 लाभ

नवरात्र व्रत पूजन विधि 14 नियम

नवरात्र व्रत पूजन विधि 14 नियम

नवरात्र व्रत - यों तो अगर भक्त अपने भगवान् को किसी भी रूप में याद करता है या पूजता है तो भगवान् उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं, बस भक्त के दिल में श्रद्धा का होना आवश्यक होता है; लेकिन जहाँ बात पूजा करने की आती है तो उसमें श्रद्धा और पवित्रता के साथ-साथ पूजा सही … पढ़ना जारी रखें नवरात्र व्रत पूजन विधि 14 नियम

किस देवता के व्रत से क्या लाभ है?

किस देवता के व्रत से क्या लाभ है?

व्रत एक साधना पथ है, इस पथ में कई प्रकार की बाधाएँ आती हैं, जैसे-अगर आप किसी व्रत का आरंभ करते हैं तो उस दिन आपको भूख-प्यास ज्यादा लगती है। किसी-न-किसी व्यक्ति से लड़ाई-झगड़ा हो जाता है, कभी आपका व्रत खंडित हो जाता है तो कभी कोई गलती हो जाती है। यह सब व्रत से … पढ़ना जारी रखें किस देवता के व्रत से क्या लाभ है?

कुंडली के अनुसार किस दिन कौन सा व्रत करें?

कुंडली के अनुसार किस दिन कौन सा व्रत करें?

आत्मा को दुर्गुणों और अनेक प्रकार के दोषों से बचाना व गुणों का शरीर में वास अर्थात् निवास, उपवास होता है। उपवास को ही व्रत कहा जाता है, जैसे-शराब आदि नशीली चीजों का सेवन करने से मनुष्य का शरीर उसके वश से बाहर हो जाता है, यानी वह नशे का गुलाम हो जाता है, उसी … पढ़ना जारी रखें कुंडली के अनुसार किस दिन कौन सा व्रत करें?

उपवास के उद्देश्य – क्या उपवास रखना चाहिए?

उपवास के उद्देश्य – क्या उपवास रखना चाहिए?

उपवास आध्यात्मिक व मानसिक आरोग्य प्रदान करता है। क्या हैं उपवास के फायदे तथा इसको करने का सही तरीका आदि को जानने के लिए पढ़ें यह लेख। 'उपवास' शब्द हर धर्म, हर जाति के लिए जाना-पहचाना है। स्वास्थ्य पर पड़नेवाले इसके जादुई प्रभाव ने इसे इक्कीसवीं सदी में भी उपयोगी बनाया हुआ है। न सिर्फ … पढ़ना जारी रखें उपवास के उद्देश्य – क्या उपवास रखना चाहिए?

उपवास अर्थ महत्व प्रकार लाभ

उपवास अर्थ महत्व प्रकार लाभ

उपवास शरीर शुद्धि का एकमात्र उपाय है। स्वास्थ्य और धर्म दोनों ही दृष्टि से उपवास का एक खास महत्त्व है। शरीर को स्वस्थ रखना भी एक बड़ा धर्म है। उपवास विषय-वासना से निवृत्ति का अचूक हथियार है। आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ 'चरक संहिता' से लेकर आज के विभिन्न चिकित्सकीय शोधों ने भी उपवास के अनेक … पढ़ना जारी रखें उपवास अर्थ महत्व प्रकार लाभ