गेस्टाल्ट मनोविज्ञान की स्थापना जर्मनी में मैक्स वरदाईमर द्वारा 1912 ई० में की गयी। इस स्कूल के विकास में दो अन्य मनोवैज्ञानिकों, कर्ट कौफ्का (1887-1941) तथा ओल्फगैंग कोहलर (1887-1967) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। इस स्कूल की स्थापना वुण्ट व टिचनर की आणुविक विचारधारा के विरोध में हुआ था। इस स्कूल का मुख्य बल व्यवहार … पढ़ना जारी रखें गेस्टाल्ट मनोविज्ञान का शिक्षा में Top 10 योगदान
श्रेणी: शिक्षा के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य
किशोरावस्था में सामाजिक विकास – 8 Top Best Qualities
किशोरावस्था में सामाजिक विकास - किशोरावस्था मनुष्य के जीवन का बसंतकाल माना गया है। उसमें सभी प्रकार के सौंदर्य की रुचि उत्पन्न होती है और बालक इसी समय नए नए और ऊँचे ऊँचे आदर्शों को अपनाता है। जो बालक किशोरावस्था में समाज सुधारक और नेतागिरी के स्वप्न देखते हैं, वे आगे चलकर इन बातों में … पढ़ना जारी रखें किशोरावस्था में सामाजिक विकास – 8 Top Best Qualities
अधिगम अर्थ परिभाषा प्रकृति अधिगम स्थानांतरण
अधिगम विकास का आधार है। ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति अनेक अनुभवों से परिचित होता है। इन अनुभवों के द्वारा उसके विचारों, संवेगो, कार्यों आदि में किसी न किसी प्रकार का परिवर्तन अवश्य होता है। यह परिवर्तन ही व्यक्ति के विकास की प्रक्रिया को संचालित करता है। व्यक्ति के विकास को दिशा एवं गति देने वाले … पढ़ना जारी रखें अधिगम अर्थ परिभाषा प्रकृति अधिगम स्थानांतरण
अधिगम
अधिगम विकास का आधार है। ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति अनेक अनुभवों से परिचित होता है। इन अनुभवों के द्वारा उसके विचारों, संवेगो, कार्यों आदि में किसी न किसी प्रकार का परिवर्तन अवश्य होता है। यह परिवर्तन ही व्यक्ति के विकास की प्रक्रिया को संचालित करता है। व्यक्ति के विकास को दिशा एवं गति देने वाले … पढ़ना जारी रखें अधिगम
किशोरावस्था
बाल्यावस्था के समापन अर्थात 13 वर्ष की आयु से किशोरावस्था आरंभ होती है। इस अवस्था को तूफान एवं संवेदी अवस्था कहा गया है। हैडो कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है 11 से 12 वर्ष की आयु में बालक की नस में ज्वार उठना आरंभ होता है इसे किशोरावस्था के नाम से पुकारा जाता है। … पढ़ना जारी रखें किशोरावस्था
किशोरावस्था Top 10 विशेषताएं शिक्षा का स्वरूप
बाल्यावस्था के समापन अर्थात 13 वर्ष की आयु से किशोरावस्था आरंभ होती है। इस अवस्था को तूफान एवं संवेदी अवस्था कहा गया है। हैडो कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है 11 से 12 वर्ष की आयु में बालक की नस में ज्वार उठना आरंभ होता है इसे किशोरावस्था के नाम से पुकारा जाता है। … पढ़ना जारी रखें किशोरावस्था Top 10 विशेषताएं शिक्षा का स्वरूप
बाल्यावस्था
बाल्यावस्था वास्तव में मानव जीवन का वह स्वर्णिम समय है जिसमें उसका सर्वांगीण विकास होता है। फ्रायड यद्यपि यह मानते हैं कि बालक का विकास 5 वर्ष की आयु तक हो जाता है। लेकिन बाल्यावस्था में विकास की यह संपूर्णता, गति प्राप्त करती है और एक और परिपक्व व्यक्ति के निर्माण की ओर अग्रसर होती … पढ़ना जारी रखें बाल्यावस्था
बाल्यावस्था Top 10 विशेषताए बाल्यावस्था में शिक्षा का स्वरूप
बाल्यावस्था वास्तव में मानव जीवन का वह स्वर्णिम समय है जिसमें उसका सर्वांगीण विकास होता है। फ्रायड यद्यपि यह मानते हैं कि बालक का विकास 5 वर्ष की आयु तक हो जाता है। लेकिन बाल्यावस्था में विकास की यह संपूर्णता, गति प्राप्त करती है और एक और परिपक्व व्यक्ति के निर्माण की ओर अग्रसर होती … पढ़ना जारी रखें बाल्यावस्था Top 10 विशेषताए बाल्यावस्था में शिक्षा का स्वरूप
सृजनात्मक बालक Creative Child
सृजनात्मक बालक - सृजनात्मकता शब्द बांग्ला भाषा के क्रिएटिविटी शब्द का पर्यायवाची है। विधायकता, उत्पादकता, खोज, मौलिकता आदि सभी शब्द इसी के समान माने जाते हैं। सृजनात्मक बालकों से तात्पर्य उन बालकों से होता है जो मौलिक चिंतन के धनी होते हैं और जिनमें मौलिक रचना करने तथा मौलिक उत्पादन करने की क्षमता होती है। … पढ़ना जारी रखें सृजनात्मक बालक Creative Child
सृजनात्मक बालक Creative Child की 8 विशेषताएँ
सृजनात्मक बालक - सृजनात्मकता शब्द बांग्ला भाषा के क्रिएटिविटी शब्द का पर्यायवाची है। विधायकता, उत्पादकता, खोज, मौलिकता आदि सभी शब्द इसी के समान माने जाते हैं। सृजनात्मक बालकों से तात्पर्य उन बालकों से होता है जो मौलिक चिंतन के धनी होते हैं और जिनमें मौलिक रचना करने तथा मौलिक उत्पादन करने की क्षमता होती है। … पढ़ना जारी रखें सृजनात्मक बालक Creative Child की 8 विशेषताएँ
समस्यात्मक बालक – 5 Top Qualities
समस्यात्मक बालक से हमारा तात्पर्य उन बालकों से है जो परिवार एवं कक्षा वह विद्यालय में भलीभांति से समस्याएं उत्पन्न करते हैं। ऐसे बालकों का व्यवहार सामान्य प्रकार के बालकों से भिन्न होता है। वह वातावरण के साथ अपने आप को समायोजित नहीं कर पाते हैं। ऐसे बच्चे अपने अध्यापकों के लिए समस्या बने रहते … पढ़ना जारी रखें समस्यात्मक बालक – 5 Top Qualities
श्रवण विकलांगता
किसी व्यक्ति द्वारा पूरी तरह से आवाज सुनने में अक्षम होना श्रवण विकलांगता कहलाता है। यहां श्रवण तंत्रिका के अपर्याप्त विकास के कारण, श्रवण संस्थान की बीमारी या चोट लगने की वजह से हो सकता है। सुनना सामान्य वाक्य एवं भाषा के विकास के लिए सुनना यह प्रथम आवश्यकता है। बच्चा परिवार या आसपास के … पढ़ना जारी रखें श्रवण विकलांगता
श्रवण विकलांगता के कारण एवं 5 प्रकार
किसी व्यक्ति द्वारा पूरी तरह से आवाज सुनने में अक्षम होना श्रवण विकलांगता कहलाता है। यहां श्रवण तंत्रिका के अपर्याप्त विकास के कारण, श्रवण संस्थान की बीमारी या चोट लगने की वजह से हो सकता है। सुनना सामान्य वाक्य एवं भाषा के विकास के लिए सुनना यह प्रथम आवश्यकता है। बच्चा परिवार या आसपास के … पढ़ना जारी रखें श्रवण विकलांगता के कारण एवं 5 प्रकार
प्रतिभाशाली बालक
प्रतिभाशाली बालक वह है जो बच्चे सामान्य बच्चों से किसी भी प्रकार से अलग होते हुए विशिष्ट बच्चों की श्रेणी में आते हैं विशिष्ट बच्चे आपस में भी कई उप श्रेणियों में विभक्त होते हैं जिनमें मानसिक मंदित, समस्यात्मक, पिछड़े, चलन बाधित, प्रतिभाशाली। प्रायः उच्च बुद्धिलब्धि को प्रतिभाशाली का संकेत माना जाता है। अतः प्रतिभाशाली … पढ़ना जारी रखें प्रतिभाशाली बालक
प्रतिभाशाली बालक की परिभाषा व पहचान कैसे करें?
प्रतिभाशाली बालक वह है जो बच्चे सामान्य बच्चों से किसी भी प्रकार से अलग होते हुए विशिष्ट बच्चों की श्रेणी में आते हैं विशिष्ट बच्चे आपस में भी कई उप श्रेणियों में विभक्त होते हैं जिनमें मानसिक मंदित, समस्यात्मक, पिछड़े, चलन बाधित, प्रतिभाशाली। प्रायः उच्च बुद्धिलब्धि को प्रतिभाशाली का संकेत माना जाता है। अतः प्रतिभाशाली … पढ़ना जारी रखें प्रतिभाशाली बालक की परिभाषा व पहचान कैसे करें?
पिछड़ा बालक
जो छात्र निश्चित समय में निश्चित ज्ञान की प्राप्त करने में असफल रहते हैं। सामान्य छात्रों से पीछे रहते हैं। इन्हें पिछड़ा बालक के नाम से पुकारा जाता है। पिछड़े का शाब्दिक अर्थ है अपने कार्य में अपनी सामान्य साथियों से पीछे रह जाना। परंतु शिक्षा के संबंध में इसका अर्थ है कि छात्र जब … पढ़ना जारी रखें पिछड़ा बालक
पिछड़ा बालक की पहचान व 8 New विशेषताएँ
जो छात्र निश्चित समय में निश्चित ज्ञान की प्राप्त करने में असफल रहते हैं। सामान्य छात्रों से पीछे रहते हैं। इन्हें पिछड़ा बालक के नाम से पुकारा जाता है। पिछड़े का शाब्दिक अर्थ है अपने कार्य में अपनी सामान्य साथियों से पीछे रह जाना। परंतु शिक्षा के संबंध में इसका अर्थ है कि छात्र जब … पढ़ना जारी रखें पिछड़ा बालक की पहचान व 8 New विशेषताएँ
विशिष्ट बालकों के प्रकार
विशिष्ट बालकों के प्रकार - विशिष्ट बालक की अवधारणा यह है कि वह सामान्य होते हुए भी प्रायः असामान्य गुणों से युक्त होता है। व्यक्तिक भिन्नता ही विशिष्टता का आधार है। मनोवैज्ञानिकों ने यह अनुभव किया है कि कोई भी दो बालक एक दूसरे से भिन्न होते हैं। उनमें समानता के साथ-साथ कुछ बताएं होती … पढ़ना जारी रखें विशिष्ट बालकों के प्रकार
समावेशी बालक
समावेशी बालक - अधिकांश बाधित बालक विद्यालय तथा समाज में बिना पहचाने रह जाते हैं। चाहे वह स्कूल जाते हैं अथवा नहीं इसके परिणाम स्वरूप में अपनी कार्यक्षमता हों तथा प्रतिभाओं का पूर्ण रूप से विकास नहीं कर पाते हैं। अतः ऐसे बालकों के लिए ऐसे अध्यापकों की आवश्यकता होती है कि वह बाधित बालकों … पढ़ना जारी रखें समावेशी बालक
समावेशी बालक प्रकार पहचान व Top 5 विशेषताएँ
समावेशी बालक - अधिकांश बाधित बालक विद्यालय तथा समाज में बिना पहचाने रह जाते हैं। चाहे वह स्कूल जाते हैं अथवा नहीं इसके परिणाम स्वरूप में अपनी कार्यक्षमता हों तथा प्रतिभाओं का पूर्ण रूप से विकास नहीं कर पाते हैं। अतः ऐसे बालकों के लिए ऐसे अध्यापकों की आवश्यकता होती है कि वह बाधित बालकों … पढ़ना जारी रखें समावेशी बालक प्रकार पहचान व Top 5 विशेषताएँ
बाल विकास के क्षेत्र
बाल विकास के क्षेत्र - बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा है जो गर्भाधान से लेकर मृत्यु पर्यंत तक होने वाले मनुष्य के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करता है।बाल विकास के द्वारा हम बाल मन और बाल व्यवहारों तथा बालक के विकास के रहस्य को भलीभांति समझ सकते हैं। … पढ़ना जारी रखें बाल विकास के क्षेत्र
बाल विकास के क्षेत्र – Top 12 Area
बाल विकास के क्षेत्र - बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा है जो गर्भाधान से लेकर मृत्यु पर्यंत तक होने वाले मनुष्य के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करता है।बाल विकास के द्वारा हम बाल मन और बाल व्यवहारों तथा बालक के विकास के रहस्य को भलीभांति समझ सकते हैं। … पढ़ना जारी रखें बाल विकास के क्षेत्र – Top 12 Area
निरीक्षण विधि Observation Method
निरीक्षण विधि का उपयोग छोटे बच्चों और शिशुओं की समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है। बाल मनोविज्ञान के समस्याओं के अध्ययन में इस विधि का सर्वप्रथम उपयोग जर्मनी में हुआ। अमेरिका में वाटसन ने इस विधि का उपयोग बालकों के प्राथमिक संवेगो के अध्ययन में किया। निरीक्षण नेत्रों द्वारा सावधानी से किए गए … पढ़ना जारी रखें निरीक्षण विधि Observation Method
किशोरावस्था में सामाजिक विकास
किशोरावस्था में सामाजिक विकास - किशोरावस्था मनुष्य के जीवन का बसंतकाल माना गया है। उसमें सभी प्रकार के सौंदर्य की रुचि उत्पन्न होती है और बालक इसी समय नए नए और ऊँचे ऊँचे आदर्शों को अपनाता है। जो बालक किशोरावस्था में समाज सुधारक और नेतागिरी के स्वप्न देखते हैं, वे आगे चलकर इन बातों में … पढ़ना जारी रखें किशोरावस्था में सामाजिक विकास
सामाजिक विकास
सामाजिक विकास - मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करता है और उसके व्यवहार से प्रभावित होता है। इस परस्पर व्यवहार के व्यवस्थापन पर ही सामाजिक संबंध निर्भर होते हैं। इस परस्पर व्यवहार में रुचियों, अभिवश्त्तियों, आदतों आदि का बड़ा महत्व है। सामाजिक विकास में इन सभी का विकास सम्मिलित … पढ़ना जारी रखें सामाजिक विकास
सामाजिक विकास विशेषताएं व प्रभावित करने वाले कारक
सामाजिक विकास - मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह दूसरों के व्यवहार को प्रभावित करता है और उसके व्यवहार से प्रभावित होता है। इस परस्पर व्यवहार के व्यवस्थापन पर ही सामाजिक संबंध निर्भर होते हैं। इस परस्पर व्यवहार में रुचियों, अभिवश्त्तियों, आदतों आदि का बड़ा महत्व है। सामाजिक विकास में इन सभी का विकास सम्मिलित … पढ़ना जारी रखें सामाजिक विकास विशेषताएं व प्रभावित करने वाले कारक
प्रगतिशील शिक्षा – 4 Top Objective
जॉन डीवी का प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा के विकास में विशेष योगदान रहा है। जॉन डीवी संयुक्त राज्य अमेरिका के एक मनोवैज्ञानिक थे। इस शिक्षा की अवधारणा इस प्रकार है - शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य बालक की शक्तियों का विकास है। बालक को प्रत्यक्ष रूप से उपदेश ना देकर उसे सामाजिक परिवेश दिया जाना चाहिए … पढ़ना जारी रखें प्रगतिशील शिक्षा – 4 Top Objective
बाल केन्द्रित शिक्षा
बाल केन्द्रित शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न शिक्षण विधियों को प्रयोग में लाया जाता है जो बालकों के सीखने की प्रक्रिया, महत्वपूर्ण कारक, लाभदायक या हानिकारक दशाएं, रुकावट, सीखने के वक्र तथा प्रशिक्षण इत्यादि तत्वों को सम्मिलित करती हैं तथा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित होती है। बाल केंद्रित शिक्षा का शिक्षा मनोविज्ञान को दिया जाता है। … पढ़ना जारी रखें बाल केन्द्रित शिक्षा
बाल केन्द्रित शिक्षा के अंतर्गत पाठ्यक्रम का स्वरूप
बाल केन्द्रित शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न शिक्षण विधियों को प्रयोग में लाया जाता है जो बालकों के सीखने की प्रक्रिया, महत्वपूर्ण कारक, लाभदायक या हानिकारक दशाएं, रुकावट, सीखने के वक्र तथा प्रशिक्षण इत्यादि तत्वों को सम्मिलित करती हैं तथा मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित होती है। बाल केंद्रित शिक्षा का शिक्षा मनोविज्ञान को दिया जाता है। … पढ़ना जारी रखें बाल केन्द्रित शिक्षा के अंतर्गत पाठ्यक्रम का स्वरूप
विकास परिभाषा विकास के 4 रूप व 3 नियम
विकास एक सार्वभौमिक प्रक्रिया है जो जन्म से लेकर जीवनपर्यन्त तक अविराम होता रहता है। विकास केवल शारीरिक वृद्धि की ओर ही संकेत नहीं करता बल्कि इसके अंतर्गत वह सभी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक परिवर्तन सम्मिलित रहते हैं, जो गर्भावस्था से लेकर मृत्युपर्यन्त तक निरंतर प्राणी में प्रकट होते रहते हैं। विकास केवल अभिवृद्धि … पढ़ना जारी रखें विकास परिभाषा विकास के 4 रूप व 3 नियम



















