मिट्टी पर्यावरण की उपज है। मिट्टी को निर्मित करने में 4 संघटक व 4 मंडलों का योगदान है। जैसे स्थलमंडल से चट्टान चूर्ण, वायुमंडल से वायु या गैस, जलमंडल से जल तथा जीवमंडल से ह्यूमस प्राप्त होता है। इन सभी के मिश्रण से मिट्टी बनती है। जिसे मृदा मंडल कहते हैं। चीन में भौम्याकृति, जलवायु, … पढ़ना जारी रखें चीन की मिट्टियां मृदा संरक्षण मृदा अपरदन
लेखक: Mathpur
चीन के वन तथा वन विनाश
प्राकृतिक वनस्पति पर जलवायु और मिट्टी का प्रभाव सबसे अधिक पड़ता है। वर्तमान समय में केवल 14.3% भाग पर वन पाए जाते हैं। यहां की प्राकृतिक वनस्पति में वन, घास के मैदान तथा मरुस्थलीय झाड़ियों की प्रधानता है। यहां के उत्तरी पूर्वी भाग में सदाबहार वन, दक्षिणी पूर्वी भाग में मानसूनी पतझड़ वन, उत्तरी पश्चिमी … पढ़ना जारी रखें चीन के वन तथा वन विनाश
चीन के जलवायु प्रदेश
भौगोलिक विविधता व विस्तृत क्षेत्रफल के कारण चीन में अनेक प्रकार की जलवायु मिलती है। कोपेन जलवायु वर्गीकरण के आधार पर चीन में निम्न जलवायु प्रदेश मिलते हैं- शीतल स्टेपी शुष्क शीत प्रकारशीतल मरुस्थलीय प्रकारगर्म शुष्क शीतकाल प्रकारगर्म आद्र प्रकारशीतल शुष्क शीतकालीन प्रकारशीतल शुष्क शीत ऋतु प्रकारउच्च भाग का टुंड्रा प्रकार चीन के जलवायु प्रदेश … पढ़ना जारी रखें चीन के जलवायु प्रदेश
चीन का पठारी भाग
चीन के लगभग 34% भाग पर पठार विस्तृत है। इनमें से अधिकांश पठारी भाग पर्वत श्रेणियों से गिरे हुए हैं। कुछ विशेष पठार निम्न है- तिब्बत का पठार यूनान का पठार मंगोलिया का पठार लोयस का पठार चीन का पठारी भाग तिब्बत का पठार तिब्बत का पठार चीन का सबसे बड़ा पठार है। यह उबड़ … पढ़ना जारी रखें चीन का पठारी भाग
चीन पर एक भौगोलिक निबंध
चीन पर एक भौगोलिक निबंध - चीन भारत के उत्तर एवं उत्तर पूर्व में अवस्थित एक विशाल देश है। यह एशिया महाद्वीप के एक चौथाई भाग पर स्थित है। यह देश दक्षिण में हाई नांदुरी प्रश्न उत्तर में मंचूरिया के उत्तरांश तक लगभग 4000 किलोमीटर तक विस्तृत है। चीन 10° उत्तर से 54° उत्तरी अक्षांश … पढ़ना जारी रखें चीन पर एक भौगोलिक निबंध
चीन की प्रमुख स्थलाकृतियां
चीन की प्रमुख स्थलाकृतियां - चीन में अनेक प्रकार की स्थलाकृतियां स्थित हैं। भूमि है तो कहीं ऊंची पर्वत श्रेणियां, कहीं ऊंचे पठार हैं तो कहीं लोयस मिट्टी का प्रदेश है। यहां के अधिकांश समतल क्षेत्र यहां के पूर्वी क्षेत्र में है और अधिकांश पर्वती क्षेत्र दक्षिणी पश्चिमी भाग में है। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस … पढ़ना जारी रखें चीन की प्रमुख स्थलाकृतियां
चीन भूपृष्ठीय रचना उच्चावच
चीन भूपृष्ठीय रचना उच्चावच - भूपृष्ठीय रचना में चीन की विशालता एवं भू वैज्ञानिक संरचना उत्तरदाई है। मुख्य रूप से भूपृष्ठीय रचना में कई प्रकार की विविधताएं दिखाई देती है। इन विविधताओं को हम तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं। उत्तरी चीन मध्य चीन दक्षिणी चीन उत्तरी चीन इस क्षेत्र में नॉनशान एवं सिंगलिंग … पढ़ना जारी रखें चीन भूपृष्ठीय रचना उच्चावच
प्रसिद्ध गुफाएं स्तूप एवं चैत्य
आज प्राचीन काल महत्वपूर्ण गुफाएं, स्तूप, चैत्य गृह के बारे में और अधिक जनेगे। गुफाएं अजंता गुफाएंएलोरा गुफाएंअमरावतीएलिफेंटाबाघ की गुफा अजंता गुफाएं अजंता गुफाएं जलगांव से 64 किलोमीटर या औरंगाबाद से 104 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं किंतु इतना विदित है की गुफाओं का निर्माण ईसा से 2 शताब्दी पूर्व प्रारंभ हुआ यह तथ्य … पढ़ना जारी रखें प्रसिद्ध गुफाएं स्तूप एवं चैत्य
बल घर्षण
यदि आप किसी वस्तु को खींचते या ज्यादा धकेलते हैं तो आप उस पर बल आरोपित करते हैं। यदि वह वस्तु दृढ़ता पूर्वक नहीं बंधी है तो वह गति करेगी। सभी बल वस्तु की गति में परिवर्तन करते हैं। परंतु किसी वस्तु को गति में रखने के लिए बल आवश्यक नहीं होता है। जब तीर … पढ़ना जारी रखें बल घर्षण
अंतर्ज्ञान और तर्क
अंतर्ज्ञान और तर्क पूर्वानुमान तथा समस्या को हल करने की दो महत्वपूर्ण विधियां हैं। यह दोनों विधियां संबंधित समस्या को हल करने में सहायक होती हैं। परंतु अंतर्ज्ञान विधि का प्रयोग हम दैनिक आधार पर आधारित समस्याओं को हल करने में करते हैं। तारीख को करने के लिए तर्क विधि का प्रयोग हम सर्वाधिक करते … पढ़ना जारी रखें अंतर्ज्ञान और तर्क
सफलता
हमें अपना ध्यान उन चीजों पर लगाना चाहिए, जिन्हें हम चाहते हैं ना कि उन चीजों पर जिन्हें हम नहीं चाहते। सफलता इत्तेफाक की देन नहीं है। यह हमारे नजरिए का नतीजा होती है, और अपना नजरिया हम खुद ही चुनते हैं। इसलिए सफलता इत्तेफाक से नहीं मिलती बल्कि हम उसका चुनाव करते हैं। बड़ी … पढ़ना जारी रखें सफलता
असफलता के कारण
वैसे तो असफलता के कारण कई हो सकते हैं। जिनमे से 20 वजह ऐसी है जो हमें असफल बना सकती हैं। इन वजहों को दूर कर हम अपनी सफलता की राह में बांधा बनने वाले ब्रेको को हटा सकते हैं। सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं अगर आज खुशियां है तो आने वाले … पढ़ना जारी रखें असफलता के कारण
प्राचीन भारत का इतिहास
भारतीय इतिहास को हम लोग तीन भागों में पढ़ेंगे। प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत और आधुनिक भारत।, आज प्राचीन भारत का इतिहास की संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करेंगे। प्राचीन भारत का इतिहास प्राचीन भारत के अंतर्गत हम लोग भारतीय इतिहास के स्रोत, पाषाण काल, सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, धार्मिक आंदोलन, मगध साम्राज्य, मौर्य साम्राज्य, … पढ़ना जारी रखें प्राचीन भारत का इतिहास
मध्यकालीन भारत का इतिहास
इस आर्टिकल के अंतर्गत हम लोग मध्यकालीन भारत का इतिहास का अध्ययन करेंगे जिसमें हम लोग देखेंगे कैसे भारत पर मुस्लिम का आक्रमण होता है और फिर गुलाम वंश खिलजी वंश तुगलक वंश लोदी वंश भक्ति तथा सूफी आंदोलन और साथ में विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य का भी ऐतिहासिक अध्ययन करेंगे। उसके बाद मुगल … पढ़ना जारी रखें मध्यकालीन भारत का इतिहास
आधुनिक भारत का इतिहास
आधुनिक भारत का इतिहास के अंतर्गत हम लोग देखेंगे कैसे भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों का आगमन होता है फिर किस तरीके से अंग्रेज अपना आधिपत्य जमाते हैं और उसी बीच में 1857 का विद्रोह होता है जिस को दबा दिया जाता है फिर कुछ सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन होते हैं और उसके बाद … पढ़ना जारी रखें आधुनिक भारत का इतिहास
वायु
हमारे चारों ओर वायु है। वायु एक रंगहीन, गंदहीन तथा स्वादहीन पदार्थ है। इसमें बाहर होता है तथा यह दबाव भी डालती है। सभी सजीवों के लिए वायु एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा है। इस अध्याय में हम वायुमंडल की संरचना तथा वायु प्रदूषण के विषय में अध्ययन करेंगे। वायुमंडल हमारी पृथ्वी वायुमंडल से गिरी हुई … पढ़ना जारी रखें वायु
सुदूर पूर्व एशिया
एशिया महाद्वीप के पूर्णता पूर्व में स्थित देश सुदूर पूर्व देश कहलाते हैं। यह देश 21° उत्तरी से 54° उत्तरी अक्षांश तक और 74° पूर्व से 146° पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है। सुदूर पूर्व शब्दावली का प्रयोग सर्वप्रथम सपेट महोदय ने किया है। इसी भू-भाग का जिन्सबर्ग महोदय ने पूर्वी एशिया नामकरण किया है। … पढ़ना जारी रखें सुदूर पूर्व एशिया
कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय
कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय UP Board परीक्षा में 3-3 अंक का पूछा जाता है। किताब में कुल 7 गद्य के लेखक हैं। इन सात में से कोई 3 परीक्षा प्रश्न पत्र में लिखे होंगे जिनमें से किसी एक का जीवन परिचय आपको लिखना होगा। लेखक का जीवन परिचय केवल जीवन परिचय तक ही … पढ़ना जारी रखें कक्षा 10 लेखकों का जीवन परिचय
कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय
कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय बोर्ड परीक्षा में 3-3 अंक का पूछा जाता है। जीवन परिचय के साथ साथ लेखक की साहित्यिक योगदान एवं रचना भी लिखनी होती हैं। वैसे तो पाठ्यक्रम में कई लेखक निर्धारित हैं। यहां कक्षा 9 हिंदी में निर्धारित लेखकों का जीवन परिचय दिया जा रहा है। इसके साथ लेखकों … पढ़ना जारी रखें कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय
अधिगम
अधिगम विकास का आधार है। ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति अनेक अनुभवों से परिचित होता है। इन अनुभवों के द्वारा उसके विचारों, संवेगो, कार्यों आदि में किसी न किसी प्रकार का परिवर्तन अवश्य होता है। यह परिवर्तन ही व्यक्ति के विकास की प्रक्रिया को संचालित करता है। व्यक्ति के विकास को दिशा एवं गति देने वाले … पढ़ना जारी रखें अधिगम
किशोरावस्था
बाल्यावस्था के समापन अर्थात 13 वर्ष की आयु से किशोरावस्था आरंभ होती है। इस अवस्था को तूफान एवं संवेदी अवस्था कहा गया है। हैडो कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है 11 से 12 वर्ष की आयु में बालक की नस में ज्वार उठना आरंभ होता है इसे किशोरावस्था के नाम से पुकारा जाता है। … पढ़ना जारी रखें किशोरावस्था
बाल्यावस्था
बाल्यावस्था वास्तव में मानव जीवन का वह स्वर्णिम समय है जिसमें उसका सर्वांगीण विकास होता है। फ्रायड यद्यपि यह मानते हैं कि बालक का विकास 5 वर्ष की आयु तक हो जाता है। लेकिन बाल्यावस्था में विकास की यह संपूर्णता, गति प्राप्त करती है और एक और परिपक्व व्यक्ति के निर्माण की ओर अग्रसर होती … पढ़ना जारी रखें बाल्यावस्था
शैशवावस्था
शैशवावस्था मानव की सर्वप्रथम तथा सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस अवस्था की अवधि जन्म से 6 वर्ष तक निर्धारित की गई है। शैशवावस्था को भावी जीवन की आधारशिला के रूप में जाना जाता है। फ्रायड जैसे मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि व्यक्ति को भावी जीवन में जो कुछ भी बनना होता है … पढ़ना जारी रखें शैशवावस्था
लेखकों का जीवन परिचय
लेखकों का जीवन परिचय व साहित्यिक परिचय यूपी बोर्ड तथा बिहार बोर्ड के हिंदी विषय की परीक्षा में पूछा जाता है। साथ ही साथ लेखकों के जीवन परिचय से संबंधित प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पूछे जाते हैं। किसी व्यक्ति विशेष के जीवन वृतांत को जीवन परिचय कहा जाता है। जीवन परिचय को अंग्रेजी में … पढ़ना जारी रखें लेखकों का जीवन परिचय
प्राचीन धर्म ग्रंथ
भारत के सबसे प्राचीन धर्म ग्रंथ में वेदों का नाम आता है वेदो कि रचना महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने कि थी। वेदों में श्लोकों को रचनाएं कहते थे। इनकी संख्या चार है- ऋग्वेदयजुर्वेदसामवेदअथर्ववेद ऋग्वेद यह सबसे प्राचीन वेद है ।इसमें मंडलों की संख्या 10 है। 2 से 7 मंडल सबसे प्राचीन है ।जिन्हें वंश कहकर … पढ़ना जारी रखें प्राचीन धर्म ग्रंथ
हड़प्पा सभ्यता
हड़प्पा सभ्यता आद्य ऐतिहासिक काल की सभ्यता मानी जाती है। यह इस काल की सबसे प्राचीन सभ्यता मानी जाती थी। हड़प्पा के लोगों तांबा, टिन को आपस में मिलाकर कांसा बनाने की विधि प्राप्त कर ली थी। कांसा के सबसे अधिक अवशेष लोटा और थाली प्राप्त हुए हैं। हड़प्पा सभ्यता का सर्वप्रथम उल्लेख 1826 ईसवी … पढ़ना जारी रखें हड़प्पा सभ्यता
खेल और खेलो का महत्व
खेल का मुख्य उद्देश्य, शारीरिक व्यायाम है। यह एक प्रसिद्ध उद्धरण है, "एक ध्वनि शरीर में एक ध्वनि दिमाग होता है"। जीवन में सफलता के लिए शरीर का स्वास्थ्य आवश्यक है। अस्वस्थ व्यक्ति हमेशा कमजोरी महसूस करता है, इस प्रकार आत्मविश्वास खो देता है और इसलिए बहुत सुस्त और सक्रिय हो जाता है। स्वस्थ रहने … पढ़ना जारी रखें खेल और खेलो का महत्व
भारतीय कृषि
भारतीय कृषि हमारे देश के आर्थिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण है। कृषि से तात्पर्य केवल खेतिया फसलें उत्पन्न करना ही नहीं होता है। कृषि के अंतर्गत पशु पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, झींगा पालन बागवानी और मत्स्य पालन भी आता। मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जिन पौधों को उगाता है … पढ़ना जारी रखें भारतीय कृषि
विश्व के महाद्वीप
महाद्वीप सागर तल से एक औसत ऊँचाई तक ऊपर उठे हुए पृथ्वी के क्रमबद्ध विस्तृत भू-भागों को कहते हैं। विश्व में सात महाद्वीप हैं- एशियाअफ्रीकाउत्तरी अमेरिकादक्षिणी अमेरिकायूरोपऑस्ट्रेलियाअंटार्कटिक एशिया महाद्वीप एशिया महाद्वीप विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है जिसके अंतर्गत विश्व की 60% जनसंख्या आती है। इसमें चीन की जनसंख्या सर्वाधिक है एवं द्वितीय स्थान पर … पढ़ना जारी रखें विश्व के महाद्वीप
भारत में कंपनी राज का प्रभाव
भारत में कंपनी राज का प्रभाव - अंग्रेजों ने भारत के विशाल साम्राज्य पर कब्जा जमाने के बाद उस पर नियंत्रण रखने और शासन चलाने के तरीके तैयार किए। प्लासी के युद्ध 1757 ईस्वी से प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 ईस्वी की 100 वर्षों की लंबी अवधि के दौरान भारत पर कंपनी की पकड़ को बनाए … पढ़ना जारी रखें भारत में कंपनी राज का प्रभाव






