श्रेणी: हिंदी कथा साहित्य

पूस की रात कहानी सारांश

पूस की रात कहानी सारांश

पूस की रात मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित एक श्रेष्ठ कहानी है। हिन्दी कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द जी ने पूस की रात कहानी को सन् 1930 में माधुरी में प्रकाशित कराया था। तात्पर्य यह है कि तब तक प्रेमचन्द का यथार्थवादी दृष्टिकोण पूर्ण रूप में स्पष्ट हो गया था। इससे यथार्थवादिता की प्रेरणा तीव्रतम हुई है। यह … पढ़ना जारी रखें पूस की रात कहानी सारांश

पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा - ओम प्रकाश वाल्मीकि का हिंदी कहानी के दलित रचनाकारों में महत्वपूर्ण स्थान है। B.A. के हिंदी कथा साहित्य प्रश्नपत्र के अंतर्गत पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा पूछी जाती है। इन्होंने अपनी कहानियों में कच्चे दलित जीवन का भोगा हुआ यथार्थ पीड़ा, समाज द्वारा तोहफा स्वरूप कदम कदम … पढ़ना जारी रखें पच्चीस चौका डेढ़ सौ कहानी समीक्षा

राजा निरबंसिया समीक्षा

राजा निरबंसिया समीक्षा

राजा निरबंसिया कहानी कमलेश्वर द्वारा रचित है। राजा निरबंसिया समीक्षा नीचे दी गई है। इन्होंने अपनी कहानियों में मध्यम वर्गीय जीवन को चित्रित किया है। कमलेश्वर की कहानी राजा निरबंसिया का कथानक जगपति है। यह कहानी उस दौर के श्रेष्ठ कहानी कारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देती है। राजा निरबंसिया आकार की दृष्टि … पढ़ना जारी रखें राजा निरबंसिया समीक्षा

राजा निरबंसिया समीक्षा – कथावस्तु कथाकथन भाषा शैली उद्देश्य

राजा निरबंसिया समीक्षा – कथावस्तु कथाकथन भाषा शैली उद्देश्य

राजा निरबंसिया कहानी कमलेश्वर द्वारा रचित है। राजा निरबंसिया समीक्षा नीचे दी गई है। इन्होंने अपनी कहानियों में मध्यम वर्गीय जीवन को चित्रित किया है। कमलेश्वर की कहानी राजा निरबंसिया का कथानक जगपति है। यह कहानी उस दौर के श्रेष्ठ कहानी कारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देती है। राजा निरबंसिया आकार की दृष्टि … पढ़ना जारी रखें राजा निरबंसिया समीक्षा – कथावस्तु कथाकथन भाषा शैली उद्देश्य

तीसरी कसम कहानी सारांश

तीसरी कसम कहानी सारांश

फणीश्वरनाथ रेणु तीसरी कसम कहानी के लेखक हैं। इसमें उन्होंने बिहार प्रांत के ग्रामीण जीवन को उभारने का सफल प्रयास किया है। तीसरी कसम कहानी सारांश इस प्रकार है। यह कहानी हिंदी कथा साहित्य पाठ्यक्रम में पढ़ी जाती है। कहानी गांव के हीरामन गाड़ी वाले के जीवन को लक्ष्य करके लिखी गई है। हीरामन एक … पढ़ना जारी रखें तीसरी कसम कहानी सारांश

तीसरी कसम कहानी सारांश – फणीश्वरनाथ रेणु

तीसरी कसम कहानी सारांश – फणीश्वरनाथ रेणु

तीसरी कसम कहानी सारांश - फणीश्वरनाथ रेणु तीसरी कसम कहानी के लेखक हैं। इसमें उन्होंने बिहार प्रांत के ग्रामीण जीवन को उभारने का सफल प्रयास किया है। यह कहानी हिंदी कथा साहित्य पाठ्यक्रम में पढ़ी जाती है। तीसरी कसम कहानी सारांश इस प्रकार है- तीसरी कसम कहानी सारांश कहानी गांव के हीरामन गाड़ी वाले के … पढ़ना जारी रखें तीसरी कसम कहानी सारांश – फणीश्वरनाथ रेणु

चीफ की दावत समीक्षा

चीफ की दावत समीक्षा

भीष्म साहनी की प्रसिद्ध कहानी चीफ की दावत कहानी कला की दृष्टि से प्रसिद्ध कहानी है। चीफ की दावत समीक्षा चीफ की दावत समीक्षा इस प्रकार हैं- कथानक- कहानी के नायक सामनाथ अपने मध्यवर्गीय परिवार को आधुनिक बोध से जकड़े हुए है। नए पन का ढोंग उन्हें मां और पत्नी के मध्य चमकीले पर्दे की … पढ़ना जारी रखें चीफ की दावत समीक्षा

चीफ की दावत समीक्षा – कथानक कथोपकथन पात्र चरित्र उद्देश्य

चीफ की दावत समीक्षा – कथानक कथोपकथन पात्र चरित्र उद्देश्य

चीफ की दावत समीक्षा - चीफ की दावत कला की दृष्टि से भीष्म साहनी की प्रसिद्ध कहानी है। ‘चीफ की दावत’ एक ऐसी ही कहानी है, जिसमें स्वार्थी बेटे शामनाथ को अपनी विधवा बूढ़ी माँ का बलिदान फर्ज ही नजर आता है। भीष्म साहनी ने शामनाथ के माध्यम से शिक्षित युवा पीढ़ी पर करारा व्यंग्य … पढ़ना जारी रखें चीफ की दावत समीक्षा – कथानक कथोपकथन पात्र चरित्र उद्देश्य

हिंदी में प्रथम

हिंदी में प्रथम

आजकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ प्रश्न इस प्रकार से भी पूछे जाते हैं। जैसे हिंदी में प्रथम कवि, उपन्यास, रचना, कहानी व नाटक। हिंदी में क्या प्रथम है? उसको याद करना ही पड़ेगा। साथ मैं आजकल कुछ प्रश्न हिंदी की प्रमुख संस्थाओं से भी पूछे जाने लगे हैं। जिनकी जानकारी भी नीचे दी गई … पढ़ना जारी रखें हिंदी में प्रथम

हिंदी में प्रथम रचना व रचनाकार – हिंदी की प्रमुख संस्थाएं

हिंदी में प्रथम रचना व रचनाकार – हिंदी की प्रमुख संस्थाएं

हिंदी में प्रथम - आजकल की प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ प्रश्न इस प्रकार से भी पूछे जाते हैं। जैसे हिंदी में प्रथम कवि, उपन्यास, रचना, कहानी व नाटक। हिंदी में क्या प्रथम है? उसको याद करना ही पड़ेगा। साथ मैं आजकल कुछ प्रश्न हिंदी की प्रमुख संस्थाओं से भी पूछे जाने लगे हैं। जिनकी जानकारी … पढ़ना जारी रखें हिंदी में प्रथम रचना व रचनाकार – हिंदी की प्रमुख संस्थाएं

यही सच है कहानी

यही सच है कहानी मन्नू भंडारी की रचना है। जो पुरुष व स्त्री के संबंधों में प्रेम ग्रहण अनैतिक व अनैतिक सच झूठ, शुभ अशुभ, आज की जो परंपरागत धारणाएं रही हैं। उससे अलग हटकर या कहानी लिखी गई है। यही सच है कहानी जो 2 या 3 वर्ष पहले निशीथ की अभिन्न थी, एक … पढ़ना जारी रखें यही सच है कहानी

यही सच है कहानी सारांश मन्नू भण्डारी

यही सच है कहानी सारांश मन्नू भण्डारी

यही सच है कहानी मन्नू भंडारी की रचना है। जो पुरुष व स्त्री के संबंधों में प्रेम ग्रहण अनैतिक व अनैतिक सच झूठ, शुभ अशुभ, आज की जो परंपरागत धारणाएं रही हैं। उससे अलग हटकर या कहानी लिखी गई है। यही सच है कहानी जो 2 या 3 वर्ष पहले निशीथ की अभिन्न थी, एक … पढ़ना जारी रखें यही सच है कहानी सारांश मन्नू भण्डारी

गुण्डा कहानी समीक्षा

गुण्डा कहानी समीक्षा

गुण्डा कहानी समीक्षा - गुण्डा कहानी भाव प्रधान आदर्शवादी कहानी है। इस कहानी में प्रेम करुणा और आनंद के पूर्व संयोजन पर सामाजिक मर्यादाओं तथा मान्यताओं के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया गया है। गुण्डा कहानी समीक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार है। गुण्डा कहानी समीक्षा गुण्डा कहानी समीक्षा जयशंकर प्रसाद जी एक समूचे योग तथा … पढ़ना जारी रखें गुण्डा कहानी समीक्षा

गुण्डा कहानी समीक्षा सारांश उद्देश्य

गुण्डा कहानी समीक्षा सारांश उद्देश्य

गुण्डा कहानी समीक्षा - गुण्डा कहानी भाव प्रधान आदर्शवादी कहानी है। इस कहानी में प्रेम करुणा और आनंद के पूर्व संयोजन पर सामाजिक मर्यादाओं तथा मान्यताओं के प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया गया है। गुण्डा कहानी समीक्षा के मुख्य बिंदु इस प्रकार है। गुण्डा कहानी समीक्षा गुण्डा कहानी समीक्षा जयशंकर प्रसाद जी एक समूचे योग तथा … पढ़ना जारी रखें गुण्डा कहानी समीक्षा सारांश उद्देश्य

गुण्डा कहानी

गुण्डा कहानी

हिंदी कहानी के विकास में जयशंकर प्रसाद का विशेष योगदान रहा है। उनकी कहानियों में प्रेम का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है। गुण्डा कहानी में औदात्य प्रेम के ही दर्शन होते हैं। यह कहानी तीन खंडों में विभक्त है। कहानी की कालावधी लगभग 30 वर्ष में समाई हुई है। कहानी कभी वर्तमान की घटनाओं से आगे … पढ़ना जारी रखें गुण्डा कहानी

जयशंकर प्रसाद गुण्डा कहानी सारांश

जयशंकर प्रसाद गुण्डा कहानी सारांश

हिंदी कहानी के विकास में जयशंकर प्रसाद का विशेष योगदान रहा है। उनकी कहानियों में प्रेम का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है। गुण्डा कहानी में औदात्य प्रेम के ही दर्शन होते हैं। यह कहानी तीन खंडों में विभक्त है। कहानी की कालावधी लगभग 30 वर्ष में समाई हुई है। कहानी कभी वर्तमान की घटनाओं से आगे … पढ़ना जारी रखें जयशंकर प्रसाद गुण्डा कहानी सारांश

कफन कहानी के उद्देश्य

कफन कहानी के उद्देश्य

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। अन्य कहानियों की तरह कफन कहानी के उद्देश्य कुछ अलग ही हैं। वे उद्देश्य क्या है आइए जानते हैं। सर्वप्रथम हम लोग कहानी के सारांश को कुछ पंक्तियों में जानेंगे। फिर इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क्या था वह जानेंगे। इस कहानी के तीन पात्र घीसू … पढ़ना जारी रखें कफन कहानी के उद्देश्य

कफन कहानी के उद्देश्य || 3rd is best

कफन कहानी के उद्देश्य || 3rd is best

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। अन्य कहानियों की तरह कफन कहानी के उद्देश्य कुछ अलग ही हैं। वे उद्देश्य क्या है आइए जानते हैं। सर्वप्रथम हम लोग कहानी के सारांश को कुछ पंक्तियों में जानेंगे। फिर इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क्या था वह जानेंगे। इस कहानी के तीन पात्र घीसू … पढ़ना जारी रखें कफन कहानी के उद्देश्य || 3rd is best

प्रेमचंद कहानियां समीक्षा

प्रेमचंद कहानियां समीक्षा

प्रेमचंद कहानियां समीक्षा - उपन्यास सम्राट एवं महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद मूलतः सामाजिक कहानीकार थे। कहानी विधा के क्षेत्र में प्रेमचंद ने एक क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरुआत की। प्रेमचंद्र से पूर्व जो कहानी लिखी जाती थी उनमें मनोरंजन के तत्व होते थे किंतु मुंशी प्रेमचंद ने सामाजिक समस्याओं को लेकर कहानियां लिखी। मुंशी प्रेमचंद कहानियां … पढ़ना जारी रखें प्रेमचंद कहानियां समीक्षा

प्रेमचंद कहानियां समीक्षा – प्रेमचंद कहानियों की 6 विशेषताएं

प्रेमचंद कहानियां समीक्षा – प्रेमचंद कहानियों की 6 विशेषताएं

प्रेमचंद कहानियां समीक्षा - उपन्यास सम्राट एवं महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद मूलतः सामाजिक कहानीकार थे। कहानी विधा के क्षेत्र में प्रेमचंद ने एक क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरुआत की। प्रेमचंद से पूर्व जो कहानी लिखी जाती थी उनमें मनोरंजन के तत्व होते थे किंतु मुंशी प्रेमचंद ने सामाजिक समस्याओं को लेकर कहानियां लिखी। मुंशी प्रेमचंद कहानियां … पढ़ना जारी रखें प्रेमचंद कहानियां समीक्षा – प्रेमचंद कहानियों की 6 विशेषताएं

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण

मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में यथार्थवादिता पाई जाती है। उनकी कफन कहानी भी यथार्थवाद पर आधारित है। इस कहानी में घीसू एक प्रमुख पात्र है जो कि पारिवारिक मुखिया है। उसके परिवार में कुल 3 सदस्य हैं। उनका पुत्र माधव तथा बहु बुधियाा, घीसू के चरित्र की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं। घीसू का चरित्र … पढ़ना जारी रखें कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण – 5th is Special

कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण – 5th is Special

मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में यथार्थवादिता पाई जाती है। उनकी कफन कहानी भी यथार्थवाद पर आधारित है। इस कहानी में घीसू एक प्रमुख पात्र है जो कि पारिवारिक मुखिया है। उसके परिवार में कुल 3 सदस्य हैं। उनका पुत्र माधव तथा बहु बुधियाा, घीसू के चरित्र की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं। घीसू का चरित्र … पढ़ना जारी रखें कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण – 5th is Special

कफन कहानी

कफन कहानी

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद्र जी हैं। कफन कहानी के मुख्य पात्र घीसू हैं। मुंशी जी की अन्य कहानियों की तरह इस कहानी का एक विशेष उद्देश्य है। इस कहानी के विभिन्न अंगों को हम लोग इस प्रकार पढ़ेंगे। कफन कहानी सारांश कफन कहानी के उद्देश्य कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण … पढ़ना जारी रखें कफन कहानी

कफन कहानी सारांश उद्देश्य

कफन कहानी सारांश उद्देश्य

कफन कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद जी हैं। कफन कहानी के मुख्य पात्र घीसू हैं। मुंशी जी की अन्य कहानियों की तरह इस कहानी का एक विशेष उद्देश्य है। इस कहानी के विभिन्न अंगों को हम लोग इस प्रकार पढ़ेंगे। कफन कहानी सारांश कफन कहानी के उद्देश्य कफन कहानी के नायक घीसू का चरित्र चित्रण … पढ़ना जारी रखें कफन कहानी सारांश उद्देश्य

रागदरबारी उपन्यास

रागदरबारी उपन्यास

रागदरबारी उपन्यास श्रीलाल शुक्ल द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। जिसके लिए उन्हें सन 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  यह ऐसा उपन्यास है, जो गांव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्य हीनता को सहजता और निर्मलता से अनावृत करता है। 1986 में एक दूरदर्शन-धारावाहिक के रूप में इसे … पढ़ना जारी रखें रागदरबारी उपन्यास

रागदरबारी उपन्यास सारांश व्याख्याएं Top 11 आलोचनात्मक प्रश्न

रागदरबारी उपन्यास सारांश व्याख्याएं Top 11 आलोचनात्मक प्रश्न

रागदरबारी उपन्यास श्रीलाल शुक्ल द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। जिसके लिए उन्हें सन 1969 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  यह ऐसा उपन्यास है, जो गांव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्य हीनता को सहजता और निर्मलता से अनावृत करता है। 1986 में एक दूरदर्शन-धारावाहिक के रूप में इसे … पढ़ना जारी रखें रागदरबारी उपन्यास सारांश व्याख्याएं Top 11 आलोचनात्मक प्रश्न

राग दरबारी उपन्यास व्याख्या

राग दरबारी उपन्यास व्याख्या

राग दरबारी उपन्यास के रचइता श्रीलाल शुक्ल जी है। विश्वविद्यालय में होने वाली परीक्षाओं में इस उपन्यास से 2 तरीके के प्रश्न पूछे जा सकते हैं एक तो व्याख्या और दूसरा उपन्यास से संबंधित आलोचनात्मक प्रशन। यह लेख राग दरबारी उपन्यास व्याख्या से संबंधित है। हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र में इस उपन्यास से प्रश्न … पढ़ना जारी रखें राग दरबारी उपन्यास व्याख्या

राग दरबारी उपन्यास व्याख्या – B.A. 2nd Hindi Literature

राग दरबारी उपन्यास व्याख्या – B.A. 2nd Hindi Literature

राग दरबारी उपन्यास व्याख्या - राग दरबारी उपन्यास के रचइता श्रीलाल शुक्ल जी है। विश्वविद्यालय में होने वाली परीक्षाओं में इस उपन्यास से 2 तरीके के प्रश्न पूछे जा सकते हैं एक तो व्याख्या और दूसरा उपन्यास से संबंधित आलोचनात्मक प्रशन। यह लेख राग दरबारी उपन्यास व्याख्या से संबंधित है। हिंदी कथा साहित्य प्रश्न पत्र … पढ़ना जारी रखें राग दरबारी उपन्यास व्याख्या – B.A. 2nd Hindi Literature

चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या

चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या

चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या - चित्रलेखा उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। इस उपन्यास के गद्यांशो की व्याख्याएँ परीक्षा में पूछी जाती है। यहां चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या कुछ महत्वपूर्ण खंडों की गई हैं- चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या 1. पर एक बात याद रखना। जो बात अध्ययन से नहीं जानी जा सकती … पढ़ना जारी रखें चित्रलेखा उपन्यास व्याख्या

चित्रलेखा उपन्यास

चित्रलेखा उपन्यास

चित्रलेखा उपन्यास भगवती चरण वर्मा द्वारा रचित हिंदी उपन्यास है। यह ना केवल भगवती चरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने वाला उपन्यास है बल्कि हिंदी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है जिनकी लोकप्रियता काल की सीमा को लांगती रही है। 1934 में प्रकाशित चित्रलेखा उपन्यास ने लोकप्रियता के कई … पढ़ना जारी रखें चित्रलेखा उपन्यास