शिक्षा शास्त्र

शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य

    शिक्षा के सामाजिक परिप्रेक्ष्य

      शिक्षा के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

        शैक्षिक नेतृत्व एवं प्रबंधन

          शैक्षिक निर्देशन एवं परामर्श

            पाठ्यक्रम विकास एवं आकलन

              भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

                वैदिककालीन शिक्षा के गुण

                वैदिककालीन शिक्षा में गुरु शिष्य सम्बंध

                वैदिककालीन शिक्षा में गुरु शिष्य सम्बंध विशेष प्रकार के थे, जोकि अत्यंत मधुर, आत्मीय एवं अनुकरणीय थे। वैदिक काल में गुरु और शिष्य के मध्य भरोसे और जिम्मेदारी के संबंध हुआ करते थे। गुरु शिष्यों के साथ पुत्रवतभावना से व्यवहार करते थे। और शिष्य भी गुरु को पिता तुल्य मानकर उनकी सभी आज्ञाओ का पालन […]

                लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति, मुदालियर आयोग

                विद्यालय पुस्तकालय

                विद्यालय में पुस्तकालय का बड़ा महत्व है। वास्तव में प्रधानाचार्य विद्यालय का मस्तिष्क है, अध्यापक नाड़ी- संस्थान हैं और पुस्तकालय उनका हृदय है।पुस्तकालय बौद्धिक एवं साहित्यिक अभिवृद्धि का स्थान होता है। पुस्तकालय में ही बालक मानवीय ज्ञान तथा अनुभवों की निधि प्राप्त करता है या नवीन ज्ञान की खोज का केंद्र होता है। पुस्तक अनेक […]

                शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका

                शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका

                शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका – केंद्र सरकार माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। यह माध्यमिक शिक्षा से संबंधित मामलों में राज्य सरकारों को परामर्श एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है तथा उनका पथ प्रदर्शन एवं नेतृत्व भी करती है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार माध्यमिक शिक्षा में […]

                समूह निर्देशन

                एक अच्छे परामर्शदाता के गुण व कार्य

                एक अच्छे परामर्शदाता में किसी एक विशेषता का समावेश न होकर अनेक गुणों एवं विशेषताओं का समावेश होता है। एक परामर्शदाता के गुणों एवं विशेषताओं के बारे में हार्डी महोदय का कहना है- यदि कोई व्यक्ति उन विशेषताओं की सूची तैयार करें जिनका परामर्शदाता में होना आवश्यक है तो सूची सर्वोत्तम गुणों के संग्रह में […]

                गृहकार्य, सतत शिक्षा

                गृहकार्य की विशेषताएं

                गृहकार्य वह साधन है जो छात्रों को स्वयं अभ्यास करके सीखने के लिए अवसर प्रदान करता है। इसके द्वारा छात्रों को कक्षा से बाहर सीखने के अनुभव प्राप्त होते हैं जो शिक्षण के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होते हैं। इस प्रकार गृहकार्य प्रभावशाली शिक्षण का एक महत्वपूर्ण भाग है। गृहकार्य को निम्न ढंग से […]

                विद्यार्थी, विद्यार्थी जीवन

                मानवतावाद

                मानवतावाद को अंग्रेजी में Humanism शब्द से संबोधित किया जाता है जिसका अर्थ है मानव। मानवतावाद के चिंतन का केंद्र बिंदु मानव है। यह दर्शन मानव के सम्मान मानव की गरिमा और मानव की मात्रा में आस्था रखता है। मानव कल्याण मैं इसका विश्वास है। मानव कल्याण के लिए जो भी तत्व उपयोगी हैं उन […]

                मूल्यांकन के प्रकार, शिक्षण उद्देश्य

                शिक्षण उद्देश्य

                शिक्षण उद्देश्य – सामान्य उद्देश्य को संक्षेप में लक्ष्य कहा जाता है। लक्ष्य आदर्श होते हैं, जिनका क्षेत्र असीमित होता है तथा जिनको पूर्ण रूप से प्राप्त करना प्रायः असंभव होता है। इसकी प्राप्ति के लिए संपूर्ण स्कूल, समाज तथा राष्ट्र उत्तरदाई होता है। मानव जीवन संपूर्ण प्राणी जगत के मध्य ईश्वर की एक अनुपम […]

                मूल्यांकन के प्रकार, शिक्षण उद्देश्य

                मूल्यांकन के प्रकार

                मूल्यांकन के प्रकार – मूल्यांकन को छात्रों के द्वारा प्राप्त किए गए शिक्षा उद्देश्यों की सीमा को ज्ञात करने की क्रमबद्ध बता प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। मूल्यांकन के अंतर्गत छात्रों के व्यवहार के गुणात्मक और मात्रात्मक वर्णन के साथ साथ व्यवहार की सुनिश्चितता से संबंधित मूल्य निर्धारित भी रहते हैं। […]

                बाल्यावस्था

                बाल्यावस्था वास्तव में मानव जीवन का वह स्वर्णिम समय है जिसमें उसका सर्वांगीण विकास होता है। फ्रायड यद्यपि यह मानते हैं कि बालक का विकास 5 वर्ष की आयु तक हो जाता है। लेकिन बाल्यावस्था में विकास की यह संपूर्णता, गति प्राप्त करती है और एक और परिपक्व व्यक्ति के निर्माण की ओर अग्रसर होती […]

                भाषा के रूप, पाठ्यक्रम के उद्देश्य, मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

                पर्यवेक्षिक अध्ययन विधि के 5 गुण 6 दोष व सावधानियां

                पर्यवेक्षिक अध्ययन विधि – सन् 1971 में डेजी मारविल जॉन ने इस पद्धति का सुझाव प्रस्तुत किया था। पर्यवेक्षित अध्ययन अपने नाम के अनुरूप अध्ययन की एक ऐसी विधि है जिसमें छात्र अपने निर्धारित कार्य के दौरान अपने सामाजिक अध्ययन – शिक्षक के उचित निर्देशन प्राप्ति के साथ अपनी समस्याओं का निराकरण भी प्राप्त करते […]

                जीवन परिचय के प्रकार, लेखकों का जीवन परिचय, जीवन परिचय

                नाटक शिक्षण के लक्ष्य नाटक शिक्षण की 5 प्रणालियां

                नाटक शिक्षण – अनुकरण (अभिनय) मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। प्रारम्भ से ही बच्चे दूसरों का अनुकरण करते हैं। लकड़ी की डण्डी, बेंत अथवा बाँस आदि को जब बच्चे दोनों पैरों के बीच रखकर उसे घोड़ा मानकर, तिक-तिक करते हैं तो कितने प्यारे लगते हैं। कभी-कभी वे अपने माता-पिता और भाई-बहन आदि की भूमिका भी […]

                शिक्षण

                शिक्षण के सिद्धान्त व 13 शिक्षण के मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त

                शिक्षण के सिद्धान्त, शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिये अनेक दार्शनिकों, शिक्षा विशेषज्ञों तथा समाजशास्त्रियों ने अनेक शोध तथा प्रयोग एवं गहन चिन्तन किया है जिसके फलस्वरूप शिक्षण के क्षेत्र में अनेक शोध एवं प्रयोग सम्पन्न किये गये। शिक्षण के क्षेत्र में हुए इन शोध, प्रयोग तथा सामान्य परम्पराओं के फलस्वरूप शिक्षण के सामान्य सिद्धान्त […]

                five children smiling

                वंचित वर्ग की शिक्षा हेतु किए गए 21 प्रयास

                वंचित वर्ग की शिक्षा अवधारणा स्पष्ट करने की दृष्टि से सबसे पहले ‘ वंचित’ शब्द का अर्थ समझन ‘चाहिए। ‘वंचित’ शब्द का अर्थ है, ‘किसी चीज से रहित होना’ या ‘किसी अधिकार का छिन जाना अथवा ‘किसी वस्तु को प्राप्त करने से रोकना।’ इसका आशय है कि जब किसी व्यक्ति की किस आवश्यकता की पूर्ति […]

                पदार्थ की संरचना व पदार्थ की 3 अवस्थाएँ

                ऐसा कुछ भी जिसमें भार होता है, जो स्थान घेरती है और जिसे हम एक या एक से अधिक इन्द्रियों द्वारा महसूस कर पाते हैं, वह पदार्थ कहलाता है। उदाहरण हवा और पानी, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन, चीनी और रेत, चीनी और स्टील लोहे और लकड़ी, दूध और तेल, CO, और भाप कार्बन और सल्फर, चट्टानों […]

                वुड का घोषणा पत्र

                मैकाले का विवरण पत्र 1835 – आलोचना व प्रभाव

                मैकाले का विवरण पत्र 1835 – 10 जून 1834 को लॉर्ड मैकाले ने गवर्नर जनरल की काउंसिल के कानूनी सदस्य के रूप में भारत में पदार्पण किया। उस समय तक प्राच्य पाश्चात्य विवाद उग्रतम रूप धारण कर चुका था। बैंटिक को विश्वास था कि मैंकॉले जैसा प्रकांड विद्वान ही इस विवाद को समाप्त कर सकता […]

                प्रौढ़ शिक्षा अर्थ – Adult Education Meaning in Hindi

                प्रौढ़ शिक्षा को भिन्न-भिन्न नामों से संबोधित किया जाता है। साक्षरता, समाज शिक्षा, जीवनपर्यंत शिक्षा, उद्देश्यपूर्ण शिक्षा, आधारभूत शिक्षा, द्वितीय अवसर की शिक्षा जैसे विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इन सभी नामों से प्रौढ़ शिक्षा नाम सर्वाधिक उपयुक्त प्रतीत होती है। भारत सरकार ने भी प्रौढ़ शिक्षा नाम को ही अपनाया है। अतः आगे […]

                संप्रेषण अर्थ आवश्यकता महत्व परिभाषा विधियाँ

                संप्रेषण प्रबंध प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है, यह वह माध्यम है जिसके द्वारा व्यक्ति से व्यक्ति, व्यक्तियों और समूहों को संभोग संप्रेषित किया जाते हैं। विचारों की अभिव्यक्ति या व्यक्तियों के प्रश्नों के उत्तर भी संप्रेषण या संचार माध्यम से दिए जाते हैं। संप्रेषण व्यवस्था का आशय सूचना या संदेश भेजने की व्यवस्था मात्र […]

                निर्देशन, पर्यवेक्षण

                परामर्श अर्थ विशेषताएं उद्देश्य सिद्धांत आवश्यकता महत्व

                निर्देशन तथा परामर्श एक सिक्के के दो पहलू हैं। एक दूसरे के अभाव में दोनों निष्प्राण रहते हैं। परामर्श शब्द दो व्यक्तियों के संपर्क को व्यक्त करता है। परामर्श प्रक्रिया में एक परामर्श देने वाला और दूसरा परामर्श चाहने वाला या परामर्श प्रार्थी होता है। परामर्श की प्रक्रिया के अंतर्गत उन सभी प्रकार की स्थितियों […]

                भारतीय शिक्षा की समस्याएं, उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षा

                भारतीय शिक्षा की समस्याएं – शैक्षिक समस्याओं के श्रोत

                भारतीय शिक्षा की समस्याएं – वैदिक काल से आज तक भारतीय शिक्षा में कई प्रकार के उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। चाहे वह वैदिक कालीन शिक्षा का समय रहा हो, उत्तर वैदिक कालीन शिक्षा हो, बौद्ध कालीन शिक्षा का समय रहा हो, मुस्लिम काल की शिक्षा का समय रहा हो या फिर ब्रिटेन कालीन या […]

                आर्थिक विकास, ह्यूरिस्टिक विधि

                आर्थिक विकास परिभाषा व शिक्षा में योगदान

                आर्थिक विकास का अर्थ शुद्ध राष्ट्रीय आय में दीर्घकालीन वृद्धि को सूचित करने वाली प्रक्रिया से है। दूसरे शब्दों में आर्थिक विकास हुआ प्रक्रिया है जिसके द्वारा अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय मैं दीर्घकालीन और सतत वृद्धि होती है। आर्थिक विकास को न्यू प्रकार परिभाषित किया जाता है। आर्थिक विकास एक प्रक्रिया […]

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