शिक्षा शास्त्र

शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य

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शिक्षा के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

शैक्षिक नेतृत्व एवं प्रबंधन

शैक्षिक निर्देशन एवं परामर्श

पाठ्यक्रम विकास एवं आकलन

भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

कलात्मक मूल्य

अंतर्ज्ञान और तर्क

अंतर्ज्ञान और तर्क पूर्वानुमान तथा समस्या को हल करने की दो महत्वपूर्ण विधियां हैं। यह दोनों विधियां संबंधित समस्या को हल करने में सहायक होती हैं। परंतु अंतर्ज्ञान विधि का प्रयोग हम दैनिक आधार पर आधारित समस्याओं को हल करने में करते हैं। तारीख को करने के लिए तर्क विधि का प्रयोग हम सर्वाधिक करते …

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असफलता के कारण

सफलता

हमें अपना ध्यान उन चीजों पर लगाना चाहिए, जिन्हें हम चाहते हैं ना कि उन चीजों पर जिन्हें हम नहीं चाहते। सफलता इत्तेफाक की देन नहीं है। यह हमारे नजरिए का नतीजा होती है, और अपना नजरिया हम खुद ही चुनते हैं। इसलिए सफलता इत्तेफाक से नहीं मिलती बल्कि हम उसका चुनाव करते हैं। बड़ी …

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Success

असफलता के कारण

वैसे तो असफलता के कारण कई हो सकते हैं। जिनमे से 20 वजह ऐसी है जो हमें असफल बना सकती हैं। इन वजहों को दूर कर हम अपनी सफलता की राह में बांधा बनने वाले ब्रेको को हटा सकते हैं। सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं अगर आज खुशियां है तो आने वाले …

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अधिगम

अधिगम विकास का आधार है। ज्ञान प्राप्त करके व्यक्ति अनेक अनुभवों से परिचित होता है। इन अनुभवों के द्वारा उसके विचारों, संवेगो, कार्यों आदि में किसी न किसी प्रकार का परिवर्तन अवश्य होता है। यह परिवर्तन ही व्यक्ति के विकास की प्रक्रिया को संचालित करता है। व्यक्ति के विकास को दिशा एवं गति देने वाले …

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किशोरावस्था

बाल्यावस्था के समापन अर्थात 13 वर्ष की आयु से किशोरावस्था आरंभ होती है। इस अवस्था को तूफान एवं संवेदी अवस्था कहा गया है। हैडो कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है 11 से 12 वर्ष की आयु में बालक की नस में ज्वार उठना आरंभ होता है इसे किशोरावस्था के नाम से पुकारा जाता है। …

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बाल्यावस्था

बाल्यावस्था वास्तव में मानव जीवन का वह स्वर्णिम समय है जिसमें उसका सर्वांगीण विकास होता है। फ्रायड यद्यपि यह मानते हैं कि बालक का विकास 5 वर्ष की आयु तक हो जाता है। लेकिन बाल्यावस्था में विकास की यह संपूर्णता, गति प्राप्त करती है और एक और परिपक्व व्यक्ति के निर्माण की ओर अग्रसर होती …

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शैशवावस्था

शैशवावस्था मानव की सर्वप्रथम तथा सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस अवस्था की अवधि जन्म से 6 वर्ष तक निर्धारित की गई है। शैशवावस्था को भावी जीवन की आधारशिला के रूप में जाना जाता है। फ्रायड जैसे मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि व्यक्ति को भावी जीवन में जो कुछ भी बनना होता है …

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शिक्षा दर्शन

शिक्षा दर्शन, दर्शन की वह शाखा है जिसमें हम शिक्षा संबंधी समस्याओं पर दार्शनिक दृष्टिकोण से विचार करते हैं। यह एक प्रयुक्त दर्शन है। जब हम विशुद्ध दर्शन के आधारभूत प्रत्ययो तथा सिद्धांतों का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में करते हैं। यह एक प्रयुक्त दर्शन है। जब हम विशुद्ध दर्शन के आधारभूत प्रत्ययों तथा सिद्धांतों …

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भारत में स्त्री शिक्षा का विकास

भारत में स्त्री शिक्षा का विकास – प्राचीन काल में नारी समाज की एक शब्द शिक्षित व सम्मानित अंग रही है। ऋग्वेद काल में स्त्रियों को पूर्ण स्वतंत्रता थी। वह पुरुषों के साथ यज्ञ करती थी। यहां तक कि वह यज्ञ पूर्ण नहीं माना जाता था। जो बिना अर्धांगिनी के संपादित किया जाता था। ऋग्वैदिक …

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विकलांग शिक्षा

विकलांग शिक्षा – विकलांग बच्चे विशिष्ट बच्चों की श्रेणी में आते हैं, जिनकी पहचान गुणों, लक्षणों, आदर्शों या किसी कमी के कारण अलग से प्रतीत होती है। विशिष्ट बालक वह है, जो सामान्य बालकों से शारीरिक, मानसिक, सांविधिक और सामाजिक विशेषताओं में इतने अधिक विषमता पूर्ण होते हैं कि अपनी उच्चतम योग्यताओं को विकसित करने …

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स्त्री शिक्षा

स्त्री शिक्षा आज के युग में समाज में सुधार की ओर तीव्र गति से बढ़ रही है। उनकी हर तरह की पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुष से पीछे नहीं है। स्त्रियों की स्थिति में परिवर्तन का श्रेय स्त्री शिक्षा के प्रसार …

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जनतंत्र और शिक्षा

जनतंत्र और शिक्षा – शिक्षा में जनतंत्रीय सिद्धांतों के प्रयोग का श्रेय जॉन डीवी को है। डीवी की पुस्तक जनतंत्र और शिक्षा, प्लेटो की रिपब्लिक और रूसो की एमिल की भांति ही एक उच्च श्रेणी की पुस्तक है। डीवी के विचारों का शिक्षा पर बड़ा प्रभाव पड़ा। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले व्यक्ति …

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जनतंत्र अर्थ परिभाषा विशेषताएं सिद्धांत

जनतंत्र को गणतंत्र भी कहा जाता है। गण का अर्थ होता है – झुंड, समूह या जत्था। जनतंत्र को राजतंत्र भी कहा जाता है इसलिए लोकतंत्र के लिए गणराज्य शब्द का भी प्रयोग किया जाता है। सभी शब्दों से एक ही मत या विचार स्पष्ट होता है कि किसी भी देश या राष्ट्र में राजनैतिक …

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CSJMU BEd Semester III Syllabus

CSJMU BEd Semester III Syllabus with study material is available here. प्रत्येक प्रश्न पत्र के महत्वपूर्ण टॉपिक के बारे में जानकारी दी गयी है। तृतीय समेस्टर के दो compulsary प्रश्न पत्र इस प्रकार है School Management and Leadership और दूसरा Educational Guidance and Counselling. Paper Paper Name I School Management and Leadership II Educational Guidance …

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CSJMU BEd Semester IV Syllabus

CSJMU BEd Semester IV Syllabus के तीन महत्वपूर्ण प्रश्न पत्र इस प्रकार हैं। जिनके नाम डेवलपमेंट ऑफ एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया, करंट प्रॉब्लम ऑफ एजुकेशन इन इंडिया, प्रोसेस ऑफ़ करिकुलम डेवलपमेंट है। प्रत्येक प्रश्न पत्र का विस्तार पूर्वक सिलेबस नीचे दिया गया है। साथ ही साथ प्रश्न पत्र से संबंधित महत्वपूर्ण टॉपिक भी डिस्कस किए …

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