शिक्षा शास्त्र

शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य

    शिक्षा के सामाजिक परिप्रेक्ष्य

      शिक्षा के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

        शैक्षिक नेतृत्व एवं प्रबंधन

          शैक्षिक निर्देशन एवं परामर्श

            पाठ्यक्रम विकास एवं आकलन

              भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

                बाल मनोविज्ञान

                बाल मनोविज्ञान क्या है? – Child Psychology Means in Hindi

                बाल मनोविज्ञान का जन्मदाता दर्शनशास्त्र philosophy ही है। आज से कुछ वर्ष पूर्व मनोविज्ञान अलग विषय के रूप में विकसित नहीं था बल्कि यह दर्शनशास्त्र की ही एक शाखा के रूप में था। मनोविज्ञान अंग्रेजी भाषा के शब्द साइकोलॉजि psychology का हिंदी रूपांतरण है। साइकोलॉजी शब्द दो शब्दों के जोड़ से बना है अर्थात साइक […]

                पिछड़ा बालक

                पिछड़ा बालक की पहचान व 8 New विशेषताएँ

                जो छात्र निश्चित समय में निश्चित ज्ञान की प्राप्त करने में असफल रहते हैं। सामान्य छात्रों से पीछे रहते हैं। इन्हें पिछड़ा बालक के नाम से पुकारा जाता है। पिछड़े का शाब्दिक अर्थ है अपने कार्य में अपनी सामान्य साथियों से पीछे रह जाना। परंतु शिक्षा के संबंध में इसका अर्थ है कि छात्र जब […]

                बाल्यावस्था

                बाल्यावस्था Top 10 विशेषताए बाल्यावस्था में शिक्षा का स्वरूप

                बाल्यावस्था वास्तव में मानव जीवन का वह स्वर्णिम समय है जिसमें उसका सर्वांगीण विकास होता है। फ्रायड यद्यपि यह मानते हैं कि बालक का विकास 5 वर्ष की आयु तक हो जाता है। लेकिन बाल्यावस्था में विकास की यह संपूर्णता, गति प्राप्त करती है और एक और परिपक्व व्यक्ति के निर्माण की ओर अग्रसर होती […]

                ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड

                ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड से तात्पर्य प्राथमिक स्कूलों को न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। स्कूल सुधार योजना के एक आंशिक हिस्से के रूप में यह कार्यक्रम संपूर्ण देश में लागू किया गया है। ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड स्कूलों में आवश्यक न्यूनतम शिक्षण सहायक सामग्री को उपलब्ध कराना मात्र नहीं है अपितु यह एक मानसिकता और आचरण […]

                Social Problems Approaches

                नेता के सामान्य गुण

                एक प्रभावी नेता में कौन-कौन से गुण होने चाहिए, किस संबंध में भी विद्वानों ने गुणों की अलग-अलग संख्या बताई है। जैसे ऑलपोर्ट ने 18 तथा बर्नार्ड ने 28 गुणों की सूची दी है। इसी प्रकार और भी अनेक विद्वानों ने इनकी संख्या प्रथक प्रथक बताई है। नेता के सामान्य गुण इन सभी का यदि […]

                हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

                शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं

                शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं निम्न हैं- कागजी प्रक्रिया वित्तीय प्रबंधन मूलभूत सुविधाओं का अभाव पाठ्यक्रम निर्माण की समस्या शैक्षिक नीति निर्माण की समस्या नियोजन की समस्या 1. कागजी प्रक्रिया शैक्षणिक संस्थानों पर बोझिल कागजी प्रक्रिया और मानवीय प्रक्रियाओं का भार होता है और उन्हें उपस्थिति, शुल्क, प्रवेश, परिवहन आदि पर रिकॉर्ड बनाए रखना मुश्किल होता है। […]

                रुचि

                प्रत्येक व्यक्ति वातावरण की किसी न किसी वस्तु में रुचि रखता है। रुचि से तात्पर्य व्यक्ति के किसी वस्तु या विशेष के प्रति चाहत या लगाव से हैं। जैसे किसी व्यक्ति की क्रिकेट खेलने में, किसी की कविता लिखने में, तो किसी की चित्रकारी में रुचि होती है। रुचि किसी व्यवसाय या पाठ्यक्रम या पाठ्य […]

                शैक्षिक व व्यावसायिक निर्देशन में अंतर

                शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य

                प्राचीन समय में शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य को उस समय के विद्वानों का काफी समर्थन प्राप्त रहा है। आधुनिक युग में भी शिक्षा मनोविज्ञान की प्रगति के कारण इस उद्देश्य पर विशेष बल दिया जाने लगा है। आधुनिक समय में इस उद्देश्य के प्रमुख समर्थकों के नाम है रूसो, रावल, पेस्टोलॉजी, नन आदि। शिक्षा के […]

                सामाजिक परिवर्तन के कारक, सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक

                सामाजिक परिवर्तन परिभाषा प्रक्रिया रूप

                सामाजिक परिवर्तन- परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन का आशय पूर्व की स्थिति या रहन सहन के ढंग में भिन्नता से है। प्रकृति के समान ही प्रत्येक समाज और सामाजिक व्यवस्था में भी परिवर्तन होता रहता है। सामाजिक व्यवस्था के निर्णायक तत्व मनुष्य है जिसमें आए दिन परिवर्तन होता है। सामाजिक परिवर्तन दो शब्दों से […]

                शिक्षा

                शिक्षा मनोविज्ञान

                शिक्षा मनोविज्ञान मनोविज्ञान की एक प्रयुक्त शाखा है। अर्थात मनोविज्ञान नियमों सिद्धांतों तथा तत्वों का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में करके बाल को एवं वयस्कों के सर्वांगीण विकास में मदद करता है। शिक्षा मनोविज्ञान बालकों के मानसिक शारीरिक एवं नैतिक क्षमताओं को निर्धारित करके तदनुसार उचित शिक्षा की व्यवस्था करने में सहायता पहुंचाता है। साथ […]

                CSJMU BED SEMESTER SYLLABUS

                CSJMU BEd Semester Syllabus

                CSJMU BEd Semester Syllabus is available here. बी॰एड॰ First व Second Semester में कुल चार प्रश्न पत्र 80-80 अंक के निर्धारित हैं। शेष 20-20 अंक की internal exam द्वारा मार्किंग होनी निर्धारित है। दोनो ही समेस्टर में चतुर्थ प्रश्न पत्र optional है अर्थात् चतुर्थ प्रश्न पत्र विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार चुन सकता है। ठीक […]

                भाषा, कफन कहानी के उद्देश्य, पठन

                भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व व भाषा के 2 मूल आधार

                भाषा भावाभिव्यक्ति एवं विचार-विनिमय का सांकेतिक साधन है। संसार के विभिन्न प्राणियों द्वारा प्रयुक्त भावाभिव्यक्ति के इन साधनों- अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और ध्वनि संकेतों को भाषा कहते हैं। इस अर्थ में संसार के सभी प्राणियों की अपनी-अपनी भाषाएँ हैं। अपने आदि काल में तो मनुष्य कार्य प्रायः अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और विभिन्न प्रकार […]

                पर्यावरण अज्ञानता

                विश्वविद्यालय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा – Top 20 उद्देश्य

                विश्वविद्यालय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा – विश्वविद्यालयों में शिक्षा स्नातक कक्षाओं से आरम्भ होकर उच्च स्तर तक जाती है। विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की आयु प्रायः 18 से लेकर 25 वर्ष के मध्य रहती है। इस आयु के छात्र पूरी तरह से विचरणीय अर्थात् परिपक्व हो जाते हैं, क्योंकि वे किसी भी समस्या […]

                बाल मनोविज्ञान परिभाषा, व्यवहार तकनीकी

                व्यवहार तकनीकी परिभाषाएं मान्यताएं 9 विशेषताएं विषय वस्तु

                व्यवहार तकनीकी दो शब्दों से मिलकर बना है व्यवहार और तकनीकी। व्यवहार व्यक्ति की गति को कहा जाता है स्किनर के अनुसार, व्यवहार मानव की गति या किसी सन्दर्भ संरचना में उसका अंश है जिसे व्यक्ति बाह्य उद्देश्यों या शक्ति क्षेत्रों से प्राप्त करता है। व्यवहार तकनीकी व्यवहार तकनीकी वह विज्ञान है जो शिक्षा के […]

                मस्तिष्क उद्वेलन व्यूह रचना

                मस्तिष्क उद्वेलन व्यूह रचना की विशेषताएँ व लाभ

                मस्तिष्क उद्वेलन व्यूह रचना – मस्तिष्क उद्वेलन का शब्दकोशीय अर्थ होता है मस्तिष्क को उद्वेलन करना, उसमें उथल-पुथल मचाना यानी कि ऐसी आँधी लाना जिसमें किसी वस्तु व्यक्ति प्रक्रिया या सम्प्रत्यय के बारे में अनगिनत विचार तथा सोच एक साथ अनायास ही उनकी अच्छाई-बुराई औचित्य अनौचित्य की परवाह किए बिना मस्तिष्क पटल पर उभर जाएँ। […]

                प्रतिभाशाली बालक

                प्रतिभाशाली बालक की विशेषताएँ पहचान व शिक्षा के 11 सिद्धांत

                प्रतिभाशाली बालक की विशेषताएँ हमें सामान्य बालकों से तुलना करने में मदद करती है। ये बालक सम्पूर्ण राष्ट्र हेतु अमूल्य विधि हैं। ये बालक उच्च बुद्धिलब्धि के होते हैं। इनकी बुद्धिलब्धि सामान्यतः 130-140 से उच्च होती है। ये बालक साधारण बालकों से बहुत योग्य होते हैं, जो कार्य इन्हें प्रदान किया जाता है। ये उन्हें […]

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                निबन्धात्मक परीक्षा के 12 गुण दोष सीमाएँ व सुझाव

                निबन्धात्मक परीक्षा प्रणाली परम्परागत है तथा यह विषयनिष्ठ होती है। साथ ही इसमें आत्मगत तत्व की प्रमुखता होती है। निबन्धात्मक परीक्षाओं से तात्पर्य ऐसी परीक्षण प्रणाली से है जिसके अन्तर्गत सभी शिक्षार्थी पाठ्यक्रम के कई प्रश्नों के उत्तर निश्चित समय के अन्दर निबन्ध के रूप में देते हैं। इन परीक्षाओं में प्रश्नों के उत्तर इतने […]

                हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

                सैडलर आयोग 1917 का प्रतिवेदन व 12 मुख्य विशेषताएँ

                सैडलर आयोग – सन् 1913 के “शिक्षा संबंधी सरकारी प्रस्ताव” में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा की उन्नति एवं विस्तार के लिए अनेक बहुमूल्य विचार व्यक्त किए गए थे। किंतु इन विचारों को व्यावहारिक रूप प्रदान करने के लिए शिक्षाविदों की सहमति की आवश्यकता थी। अतएव शिक्षा आयोग की नियुक्ति का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। […]

                वैदिककालीन शिक्षा, उच्च शिक्षा के उद्देश्य,

                विश्वविद्यालय संप्रभुता – University Sovereignty in Hindi

                विश्वविद्यालय संप्रभुता से अभिप्राय विश्वविद्यालयों को कार्य प्रवेश अनुसंधान तथा प्रशासन संबंधी स्वाधीनता से है। वर्तमान समय में विश्वविद्यालयों की प्रभुसत्ता पर अनेक राजनीतिक नियंत्रण है। आयोग ने विश्वविद्यालय की प्रभुसत्ता के तीन क्षेत्र बताए हैं- विश्वविद्यालय संप्रभुता वर्तमान समय में भारत में विश्वविद्यालयों की प्रभुसत्ता पर राजनीति छा गई है। इसके परिणाम स्वरूप विद्यालय […]

                नेतृत्व, अच्छा शैक्षिक प्रशासक

                आदर्श शैक्षिक प्रशासक के 6 गुण

                एक आदर्श शैक्षिक प्रशासक के लिए विद्यालय प्रबंधन एवं विद्यालय के कर्मचारियों में उचित समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है। विद्यालय हो या अन्य कोई संस्थान बिना उचित समन्वय एवं सहयोग के विकास नहीं कर सकता है। आदर्श शैक्षिक प्रशासक के गुण विद्यालय में तो विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्र तथा शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी वर्ग आते […]

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