श्रेणी: हिंदी शिक्षण विधि

सस्वर वाचन व मौन वाचन के उद्देश्य विशेषताएँ

सस्वर वाचन व मौन वाचन के उद्देश्य विशेषताएँ

वाचन वह क्रिया है जिसमें प्रतीक ध्वनि और अर्थ साथ-साथ चलते हैं। एक विदेशी लेखक कैथरीन ओकानर का कहना है कि "वाचन वह जटिल अधिगम प्रक्रिया है जिसमें दृश्य-श्रव्य एवं गतिवाही सर्किटों का मस्तिष्क के अधिगम केन्द्र से सम्बन्ध निहित है। जीवन में वाचन का महत्त्व अधिक है। इसी कारण विद्यालयों में इसकी शिक्षा को … पढ़ना जारी रखें सस्वर वाचन व मौन वाचन के उद्देश्य विशेषताएँ

कहानी शिक्षण प्रकार कहानियों का चयन

कहानी शिक्षण प्रकार कहानियों का चयन

कहानी शिक्षण - कहानी सुनने और कहने की शिक्षा शिशु कक्षा से प्रारम्भ करने और कहानी लेखन की शिक्षा कक्षा 3 से प्रारम्भ करने की बात हम तत्सम्बन्धी अध्यायों में स्पष्ट कर चुके हैं। कहानियों में बच्चों की स्वाभाविक रुचि होती है इसलिए लिखित भाषा की शिक्षा का प्रारम्भ कहानी शिक्षण से ही करना चाहिए। … पढ़ना जारी रखें कहानी शिक्षण प्रकार कहानियों का चयन

कहानी के तत्व – कथावस्तु पात्र कथाकथन भाषा शैली उद्देश्य

कहानी के तत्व – कथावस्तु पात्र कथाकथन भाषा शैली उद्देश्य

कहानी के तत्व - कहानी किसी भी प्रकार की हो, उसका कुछ कथानक अवश्य होता है, उसमें कुछ पात्र अवश्य होते इन पात्रों का अपना स्वभाव और चरित्र अवश्य होता है और वे आपस में कुछ वार्तालाप भी करते हैं। यदि कहानी उचित भाषा-शैली में न लिखी जाए तो उसका प्रभावहीन होना निश्चित है। फिर … पढ़ना जारी रखें कहानी के तत्व – कथावस्तु पात्र कथाकथन भाषा शैली उद्देश्य

नाटक शिक्षण के लक्ष्य नाटक शिक्षण की 5 प्रणालियां

नाटक शिक्षण के लक्ष्य नाटक शिक्षण की 5 प्रणालियां

नाटक शिक्षण - अनुकरण (अभिनय) मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। प्रारम्भ से ही बच्चे दूसरों का अनुकरण करते हैं। लकड़ी की डण्डी, बेंत अथवा बाँस आदि को जब बच्चे दोनों पैरों के बीच रखकर उसे घोड़ा मानकर, तिक-तिक करते हैं तो कितने प्यारे लगते हैं। कभी-कभी वे अपने माता-पिता और भाई-बहन आदि की भूमिका भी … पढ़ना जारी रखें नाटक शिक्षण के लक्ष्य नाटक शिक्षण की 5 प्रणालियां

नाटक के तत्व – कथावस्तु पात्र संवाद भाषा शैली उद्देश्य अभिनय

नाटक के तत्व – कथावस्तु पात्र संवाद भाषा शैली उद्देश्य अभिनय

नाटक के तत्व - नाटक साहित्य की प्राचीनतम विधा है। नाटक का अभिनय रंगमंच पर होता है, उसे देखने से दर्शक के हृदय में यथा भाव जाग्रत होते हैं, इसलिए इसे संस्कृत में दृश्य काव्य की संज्ञा दी गई है। परन्तु यहाँ हमें नाटक को साहित्य की विधा के रूप में देखना है न कि … पढ़ना जारी रखें नाटक के तत्व – कथावस्तु पात्र संवाद भाषा शैली उद्देश्य अभिनय

मौखिक पठन प्रकार महत्त्व तत्व तथा गद्य व पद्य में मौखिक पठन

मौखिक पठन प्रकार महत्त्व तत्व तथा गद्य व पद्य में मौखिक पठन

लिखित भाषा का मुख से उच्चारण करते हुए पढ़ने और पढ़कर उसका अर्थ समझने की क्रिया को मौखिक पठन कहते हैं। अर्थ बोध एवं भावानुभूति मौखिक पठन के आवश्यक तत्त्व हैं, यह बात दूसरी है कि पाठक को यह अर्थ बोध एवं भावानुभूति किस सीमा तक होते हैं। यह तो पठनकर्ता के ज्ञान एवं कौशल … पढ़ना जारी रखें मौखिक पठन प्रकार महत्त्व तत्व तथा गद्य व पद्य में मौखिक पठन

शिक्षण तकनीकी परिभाषाएं 7 विशेषताएं 7 अवधारणाएं

शिक्षण तकनीकी परिभाषाएं 7 विशेषताएं 7 अवधारणाएं

शिक्षण तकनीकी - शिक्षण विकास की एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है जो शिक्षक-छात्र की अन्तःप्रक्रिया द्वारा सम्पन्न होती है। वस्तुतः शिक्षण एक सोद्देश्य प्रक्रिया है, जिसका अन्तिम लक्ष्य बालक का पूर्ण विकास करना है। शिक्षण के दो प्रमुख तत्व माने गये हैं- (i) पाठ्यवस्तु तथा (ii) कक्षागत व्यवहार अथवा सम्प्रेषण शिक्षण तकनीकी में ये दोनों ही … पढ़ना जारी रखें शिक्षण तकनीकी परिभाषाएं 7 विशेषताएं 7 अवधारणाएं

शिक्षण कौशल परिभाषा विशेषताएं व 14 शिक्षण कौशल

शिक्षण कौशल परिभाषा विशेषताएं व 14 शिक्षण कौशल

शिक्षण कौशल - शिक्षण की प्रक्रिया में शिक्षक एक मदारी की भाँति क्रियाकलाप कर अपने पाठ को अधिगम कराने का प्रयास करता है साथ ही अपनी कला के कलात्मक पक्ष के निरन्तर विकास हेतु विभिन्न क्रियाओं अर्थात् शिक्षण कौशलों में सुधार हेतु प्रयास करता है। प्रभावशाली शिक्षण का विकास तभी होता है जब शिक्षण के … पढ़ना जारी रखें शिक्षण कौशल परिभाषा विशेषताएं व 14 शिक्षण कौशल

भाषा प्रयोगशाला के 8 लाभ और शिक्षण

भाषा प्रयोगशाला के 8 लाभ और शिक्षण

भाषा प्रयोगशाला व्यष्टि शिक्षण और समूह शिक्षण में समन्वय करने और भाषा सीखने में बच्चों को सक्रिय रखने का एक आधुनिक प्रयास है। 1966 में अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने शैक्षिक तकनीकी की राष्ट्रीय परिषद् (National Council of Educational Technology, NCET) की स्थापना की। इस परिषद ने शिक्षा के क्षेत्र में वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग की उपयोगिता … पढ़ना जारी रखें भाषा प्रयोगशाला के 8 लाभ और शिक्षण

लेखन अर्थ लेखन के Top 7 आधार लेखन कौशल का विकास

लेखन अर्थ लेखन के Top 7 आधार लेखन कौशल का विकास

लेखन अर्थ - भाषा के माध्यम से कुछ भी लिखना लेखन कहलाता है। परन्तु भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में लेखन का अर्थ है- अर्थपूर्ण लेखन, भाव एवं विचारों की लिखित रूप में अभिव्यक्ति भाव एवं विचार लेखन के मूल तत्त्व होते है। इस प्रकार अपने भाव एवं विचारों को लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त … पढ़ना जारी रखें लेखन अर्थ लेखन के Top 7 आधार लेखन कौशल का विकास

सूक्ष्म शिक्षण परिभाषाएं सिद्धांत 5 विशेषताएं कमियां सीमाएं

सूक्ष्म शिक्षण परिभाषाएं सिद्धांत 5 विशेषताएं कमियां सीमाएं

सूक्ष्म शिक्षण - शिक्षण के द्वारा ही शिक्षक, छात्रों में पाठ्य उद्देश्यों की प्राप्ति कर उसमें वांछित दक्षताओं का विकास करता है। शिक्षण कार्य की कुशलता शिक्षक के स्वःज्ञान पर निर्भर है, साथ ही शिक्षण कला कुशलता हेतु शिक्षक की दक्षता भी आवश्यक है। शिक्षा तकनीकी की यह धारणा है कि शिक्षक जन्मजात नहीं होते … पढ़ना जारी रखें सूक्ष्म शिक्षण परिभाषाएं सिद्धांत 5 विशेषताएं कमियां सीमाएं

पठन अर्थ पठन के 6 आधार व पठन कौशल विकास

पठन अर्थ पठन के 6 आधार व पठन कौशल विकास

पठन अर्थ - लिखित भाषा को बाँचने की क्रिया को पढ़ना अथवा पठन कहा जाता है; जैसे-पम्फलेट पढ़ना, समाचार पत्र पढ़ना और पुस्तकें पढ़ना। परन्तु भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में पढ़ने का अर्थ होता है। पठन अर्थ किसी के द्वारा लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त भाव एवं विचारों को पढ़कर समझना। अर्थ बोध एवं … पढ़ना जारी रखें पठन अर्थ पठन के 6 आधार व पठन कौशल विकास

मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों? - जहाँ तक शिक्षा के माध्यम की बात है लगभग सभी स्वतन्त्र देशों में शिक्षा का माध्यम वहाँ की मातृभाषाएँ ही हैं। जिन देशों में एक से अधिक मातृभाषाएँ हैं उन देशों में वहाँ की राष्ट्रभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया गया है। कुछ देश इसके अपवाद भी हैं। … पढ़ना जारी रखें मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

देवनागरी लिपि 7 विशेषताएं व न्यूनताएं

देवनागरी लिपि 7 विशेषताएं व न्यूनताएं

देवनागरी लिपि एक ऐसी लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कुछ विदेशी भाषाएँ लिखीं जाती हैं। देवनागरी लिपि में 14 स्वर और 33 व्यंजन सहित 47 प्राथमिक वर्ण हैं। आज देवनागरी लिपि का उपयोग 120 से अधिक भाषाओं के लिए किया जा रहा है। अधिकतर भाषाओं की तरह देवनागरी भी बायें से दायें लिखी … पढ़ना जारी रखें देवनागरी लिपि 7 विशेषताएं व न्यूनताएं

मातृभाषा का क्या महत्त्व है? 4 Top Importance

मातृभाषा का क्या महत्त्व है? 4 Top Importance

सामान्यतः जिस भाषा को व्यक्ति अपने शिशु काल में अपनी माता एवं सम्पर्क में आने वाले अन्य व्यक्तियों का अनुकरण करके सीखता है, उसे उस व्यक्ति की मातृभाषा कहते हैं। परन्तु भाषा विज्ञान में इसे बोली कहा जाता है। भाषा वैज्ञानिक कई समान बोलियों की प्रतिनिधि बोली को विभाषा और कई समान विभाषाओं की प्रतिनिधि … पढ़ना जारी रखें मातृभाषा का क्या महत्त्व है? 4 Top Importance

भाषा के रूप कितने होते हैं? भाषा के 7 प्रकार

भाषा के रूप कितने होते हैं? भाषा के 7 प्रकार

भाषा के रूप - संसार के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न भाषाओं का विकास हुआ है। ये भाषाएँ हजारों की संख्या में हैं। हमारे अपने देश भारत में ही सैकड़ों भाषाओं का प्रयोग होता है। किसी भी मनुष्य के लिए इन सबका सीखना सम्भव नहीं। अतः किसी मनुष्य को किन भाषाओं को सीखना चाहिए और किस … पढ़ना जारी रखें भाषा के रूप कितने होते हैं? भाषा के 7 प्रकार

भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व व भाषा के 2 मूल आधार

भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व व भाषा के 2 मूल आधार

भाषा भावाभिव्यक्ति एवं विचार-विनिमय का सांकेतिक साधन है। संसार के विभिन्न प्राणियों द्वारा प्रयुक्त भावाभिव्यक्ति के इन साधनों- अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और ध्वनि संकेतों को भाषा कहते हैं। इस अर्थ में संसार के सभी प्राणियों की अपनी-अपनी भाषाएँ हैं। अपने आदि काल में तो मनुष्य कार्य प्रायः अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और विभिन्न प्रकार … पढ़ना जारी रखें भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व व भाषा के 2 मूल आधार