चीन पर एक भौगोलिक निबंध

चीन पर एक भौगोलिक निबंध – चीन भारत के उत्तर एवं उत्तर पूर्व में अवस्थित एक विशाल देश है। यह एशिया महाद्वीप के एक चौथाई भाग पर स्थित है। यह देश दक्षिण में हाई नांदुरी प्रश्न उत्तर में मंचूरिया के उत्तरांश तक लगभग 4000 किलोमीटर तक विस्तृत है। चीन 10° उत्तर से 54° उत्तरी अक्षांश तक तथा 74° पूर्वी से 135° पूर्वी देशांतर तक फैला हुआ है। चीन की स्थलीय सीमा 11 देशों उत्तरी कोरिया, सोवियत संघ, मंगोलिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, म्यांमार, लाओस तथा वियतनाम से मिलती है। जोकि लगभग 22800 किलोमीटर लंबी है।

चीन पर एक भौगोलिक निबंध

चीन की जलीय सीमा 18000 किलोमीटर से अधिक है तथा इसकी छेत्री जल सीमा में 5000 से भी अधिक दूरी पर स्थित है। चीन का भौगोलिक अध्ययन वर्तमान स्वरूप को समझने हेतु ही नहीं अपितु भविष्य की प्रगति एवं नियोजन हेतु भी आवश्यक है। वर्तमान समय में चीन एक साम्यवादी गणतंत्र देश है। वर्तमान चीन में 22 प्रदेश, 5 स्वायत्तशासी प्रदेश एवं 3 केंद्र शासित नगर हैं। चीन को सोपाननुमा स्थलाकृति का देश भी कहा जाता है।

भौगोलिक स्वरूप

विशाल भूभाग होने के कारण चीन में विभिन्न प्रकार के क्षेत्र पाए जाते हैं, पूर्व में पीला सागर और पूर्वी चीन सागर से लगे हुए जलोढ़ मैदान हैं। दक्षिणी चीन सागर से लगा हुआ तटीय क्षेत्र पर्वतीय भू-भाग युक्त है और दक्षिणी चीन क्षेत्र में संघन पहाड़ियां स्थित है। मध्य पूर्व में नदी मुख्य क्षेत्र पीली नदी और यांग्टिसीक्यांग नदी से मिलकर बना डेल्टा है।

धरातल

चीन पर्वत पठार पहाड़ी तथा मैदान वाला एक स्थलाकृति देश है। चीन का 68% क्षेत्र 1000 मीटर से अधिक ऊंचाई तथा केवल 14% क्षेत्र की 500 मीटर से नीचे है। चीन के 40% भूमि पर पर्वत, 33% भूमि पर पठार तथा 27% भूमि पर समतल मैदान तथा नदी बेसिन है।

पर्वत श्रेणियां

अल्टाई, तियेनशान, क्यूनलन, नानशान, स्विंगन, हिमालय, जेचवान की श्रेणियां सम्मिलित हैं। हिमालय श्रेणी पामीर की गांठ से दक्षिण पूर्व की ओर फैली हुई है। यह श्रेणी भारत को तिब्बत एवं चीन से अलग करती है।

पठार

विश्व का सर्वोच्च पठार तिब्बत का पठार चीन के दक्षिणी पश्चिमी भाग में स्थित है। जिसकी ऊंचाई 3500 मीटर है।

मैदान

उत्तर से दक्षिण की ओर चीन के विस्तृत मैदान, मंचूरिया का मैदान, ह्वांगहो मैदान और यांग्टिसीक्यांग का मैदान स्थित है।

अपवाह

चीन की प्रत्येक नदी उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण है। नदिया सामान्य ढाल का अनुसरण करती हुई पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाहित होकर पीत सागर, पूर्वी चीन सागर तथा दक्षिणी चीन सागर में गिरती है। चीन में नदियों की संख्या 5,000 से अधिक है। प्रत्येक नदी का प्रवाह क्षेत्र 100 वर्ग किलोमीटर से अधिक है। यांग्टिसीक्यांग एशिया की सबसे लंबी नदी है।

चीन में नदियों की कुल लंबाई 4,30,000 किलोमीटर है। जो भूमध्य रेखा की कुल लंबाई का 10.5 गुना अधिक है। चीन की कुल नदियों में से 56.7% नदियां प्रशांत महासागर में गिरती हैं। जबकि 6.5% नदियां हिंद महासागर में तथा 0.5% आर्कटिक सागर में गिरती है। ह्वांगहो नदी क्यूनलन पर्वत श्रेणियों से निकलकर 4,850 किलोमीटर की दूरी तय करके प्रशांत महासागर में गिरती हैं।

जलवायु

जलवायु की विविधताओं ने यहां कृषि एवं मानव अधिवास को न केवल नियंत्रित अपितु निर्धारित भी किया है। मूल रूप से यहां की जलवायु मानसूनी है जो ऋतु के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। मुख्य रूप से ताप और वायुदाब बेटियों के स्थानांतरण के कारण यहां ग्रीष्म और शीत दो मुख्य ऋतुएं हैं। यहां जलवायु की दशाएं इस प्रकार हैं।

  1. ग्रीष्मकालीन मानसून
  2. शीतकालीन मानसून

प्राकृतिक वनस्पति

चीन 46,000 प्रकार की वनस्पतियों का घर है। चीन में प्राकृतिक वनस्पति का वितरण जलवायु एवं उच्चावच द्वारा नियंत्रित होता है। यहां एक ओर मरुस्थलीय वनस्पति पाई जाती है तो दूसरी ओर उपोष्ण एवं कोणधारी वनस्पति पाई जाती है। यहां दक्षिणी चीन में चौड़ी पत्ती वाले सदाबहार वन नारियल, बांस, रबर आदि मिलते हैं। चीन के दक्षिणी पूर्वी मानसून प्रदेश में पतझड़ वन मिलते हैं। उत्तरी पूर्वी चीन में शीतोष्ण, सदाबहार एवं उच्च पर्वतीय प्रदेश व आमूर नदी की घाटी में कोणधारी वनों का विस्तार है।

मिट्टी

मिट्टी पर्यावरण की उपज है। जलवायु, धरातल तथा प्राकृतिक वनस्पति की भिन्नता के कारण चीन में विविध प्रकार की मिट्टियां पाई जाती हैं। नदियों की घाटियों में जलोढ़ मिट्टियां पाई जाती है।

जलविद्युत

चीन में कुल ऊर्जा का उत्पादन 28% जल विद्युत से ही प्राप्त होता है। यह विश्व का दूसरा बड़ा जल विद्युत उत्पादक देश है।

मत्स्यपालन

विश्व के कुल मत्स्य उत्पादन का लगभग 30% भाग चीन से प्राप्त होता है। चीन के समुद्री तट रेखा कटी फटी होने, विस्तृत निमग्न तटों की स्थिति और शीतोष्ण जलवायु के कारण यहां पर मत्स्योत्पादन के लिए अनुकूल दशाएं है। चीन में लिखो 40% मछलियां स्थानीय जलाशयों से पकड़ी जाती है।

खनिज शक्ति संसाधन

7 शताब्दी पूर्व मार्कोपोलो ने लिखा था चीन खनिजों के उपयोग में मध्यकालीन यूरोप से अग्रणी था। चीन में कोयला बहुतायत में उपलब्ध है तथा एंटी मनी टंगस्टन तीन और लोहा सामान्य मात्रा में उपलब्ध है तथा अनेक प्रकार के खनिज कमर्शियल पर पेट्रोलियम आदि सीमित मात्रा में स्थित है। चीन में भारत की तुलना में 4 गुना से अधिक कोयले का उत्पादन हो रहा है।

वर्तमान युग का प्रमुख खनिज एवं शक्ति का स्रोत पेट्रोलियम उत्पादन में चीन विश्व का सातवां तेल उत्पादक देश है। सरकारी घोषणा के अनुसार चीन पेट्रोलियम उत्पादन में आत्मनिर्भर है।

जनसंख्या

जनसंख्या की दृष्टि से चीन में विश्व की 20% जनसंख्या निवास करती है। चीन के दक्षिणी पूर्वी भाग में जनसंख्या का घनत्व 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से अधिक है। इस प्रकार चीन विश्व स्तर पर विशाल संसाधन और जनरल के कारण एक महान देश है। यह प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों की दृष्टि से संपन्न राष्ट्रीय अपनी विशाल जनसंख्या के लिए न्यूनतम इस देश की सबसे बड़ी समस्या है।

व्यवस्था लागू होने के कारण इस देश के विकास को नई दिशा और प्रगति प्राप्त हुई है। विकास की कुछ विधाओं में या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। अपार भौतिक संसाधनों के उपयोग और सही व्यवस्था के कारण इस देश की गिनती विश्व के महान देशों में होने लगी है। इसके संसाधनों का सही सदुपयोग इस देश की प्रगति का सूचक है।

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