शिक्षा शास्त्र

शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य

    शिक्षा के सामाजिक परिप्रेक्ष्य

      शिक्षा के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

        शैक्षिक नेतृत्व एवं प्रबंधन

          शैक्षिक निर्देशन एवं परामर्श

            पाठ्यक्रम विकास एवं आकलन

              भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

                सांस्कृतिक विरासत

                सांस्कृतिक विरासत

                सांस्कृतिक विरासत का तात्पर्य हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति सभ्यता तथा प्राचीन परंपराओं से जो आदर्श हमें प्राप्त हुए हैं। जिनको आज भी हम उन्हीं रूपों में थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ अपनाते चले आ रहे हैं। हमारी भारतीय संस्कृति विश्व की एकमात्र ऐसी संस्कृति रहिए जो कि लोक कल्याण व वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत को […]

                निरीक्षण विधि Observation Method

                निरीक्षण विधि का उपयोग छोटे बच्चों और शिशुओं की समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है। बाल मनोविज्ञान के समस्याओं के अध्ययन में इस विधि का सर्वप्रथम उपयोग जर्मनी में हुआ। अमेरिका में वाटसन ने इस विधि का उपयोग बालकों के प्राथमिक संवेगो के अध्ययन में किया। निरीक्षण नेत्रों द्वारा सावधानी से किए गए […]

                CSJMU BEd Semester Syllabus

                CSJMU BEd Semester II Syllabus

                CSJMU BEd Semester II Syllabus के 2 प्रश्न पत्र Pedagogy से संबंधित है। b.ed के द्वितीय सेमेस्टर का तृतीय प्रश्न पत्र शिक्षा में प्रौद्योगिकीय परिप्रेक्ष्य के संबंध में है। चतुर्थ प्रश्न पत्र ऑप्शनल होगा जिसमें विद्यार्थी Environmental Education या Human Right Education या Gender, School and Society तीनों में से किसी एक को चुन सकते हैं। […]

                पर्यावरण शिक्षा, भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण

                पाठ्यक्रम संगठन के उपागम

                पाठ्यक्रम संगठन के उपागम – पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धान्तों के उपरान्त यह जानना आवश्यक है कि उसका संगठन कैसे किया जाए? पाठ्यक्रम संगठन के लिए बालकों के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों के अतिरिक्त उनकी व्यक्तिगत भिन्नताओं के साथ ही पाठ्य सामग्री के विभिन्न स्वरूपों (पक्षों-ज्ञान, किया एवं भाव) आदि दृष्टिकोणों को ध्यान में रखना आवश्यक […]

                सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण तकनीकी

                शिक्षण कौशल परिभाषा विशेषताएं व 14 शिक्षण कौशल

                शिक्षण कौशल – शिक्षण की प्रक्रिया में शिक्षक एक मदारी की भाँति क्रियाकलाप कर अपने पाठ को अधिगम कराने का प्रयास करता है साथ ही अपनी कला के कलात्मक पक्ष के निरन्तर विकास हेतु विभिन्न क्रियाओं अर्थात् शिक्षण कौशलों में सुधार हेतु प्रयास करता है। प्रभावशाली शिक्षण का विकास तभी होता है जब शिक्षण के […]

                JNCU BEd Syllabus

                शैक्षिक तकनीकी के रूप – शिक्षण, व्यवहार, अनुदेशन तकनीकी

                शैक्षिक तकनीकी के रूप – शैक्षिक तकनीकी के चार रूप निम्न है। वैज्ञानिक आविष्कारों तथा तकनीकियों के विकास ने मानव जीवन के सभी पक्षों को प्रभावित किया है। उद्योग, वाणिज्य, सुरक्षा तथा प्रशासन आदि में यन्त्रीकरण बड़ी तेजी से हुआ है। शिक्षा प्रक्रिया भी इनसे अछूती नहीं रही है और इसने शिक्षा के सभी पक्षों […]

                श्यामपट

                श्यामपट परिभाषा उपयोग प्रकार व सावधानियाँ

                प्राध्यापक के लिए चॉक तथा श्यामपट उतने ही आवश्यक हैं जितने कि एक सैनिक के लिए शस्त्र। अच्छा प्राध्यापक सदैव इनका प्रयोग करता है। लेकिन किस प्रकार से इनका सही एवं उचित उपयोग किया जाये यह युक्ति बहुत कम अध्यापकों को ज्ञात है। भारतवर्ष जैसे निर्धन राष्ट्र में यह एक सामान्य – शिक्षण की सहायक […]

                शिक्षण नीतियाँ

                कक्षा प्रबन्धन के सिद्धांत व शिक्षक की भूमिका

                कक्षा प्रबन्धन के द्वारा शिक्षण प्रक्रिया को संगठित किया जाता है। कक्षा प्रबन्धन को क्रिया प्रवृत्ति के आधार पर परिभाषित किया गया है। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अध्यापक और विद्यार्थियों के सम्बन्धों और अन्तः सम्बन्धों के माध्यम से अधिगम की प्रक्रिया सम्पादित होती है तथा कक्षा में कार्य तथा क्रियाकलापों से अधिगम परिस्थितियाँ पैदा […]

                हिंदी विराम चिन्ह

                निदानात्मक परीक्षण के 12 उद्देश्य 9 विशेषताएँ

                निदानात्मक परीक्षण उपलब्धि परीक्षण का ही एक रूप है, जिसके अन्तर्गत विशिष्ट विषय-वस्तु अथवा अधिगम अनुभव के अर्जित ज्ञान की विशिष्टताओं एवं कमियों का मूल्यांकन किया जाता है। शिक्षार्थी किसी विषय को समझने में क्या कठिनाई अनुभव कर रहा है ? इस कठिनाई का क्या कारण हो सकता है ? इसे कैसे दूर किया जा […]

                विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग

                विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948 – Best उद्देश्य एवं सुझाव

                विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने भारतीय शिक्षा के गिरते हुए स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनमें प्रत्येक संभव उपाय के द्वारा सुधार करने के संबंध में अपने सुझाव दिए। उच्च शिक्षा के स्तर में वृद्धि करने के उद्देश्य से आयोग ने विश्वविद्यालय शिक्षा के स्तर की ओर ध्यान दिया। उनका मानना था कि हमारे […]

                प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

                प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम के 6 गुण व 5 दोष

                प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम को समझने से पहले यह आवश्यक है कि हम इस पाठ्यक्रम की कमियों को देखें। विदेशी शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम से इसकी तुलना करने पर हम पाते हैं कि हमारा प्राथमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम अत्यधिक संकुचित व पुराना है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यह पाठ्यक्रम लाभदायक कुशलताओं का विकास तथा […]

                प्रबन्धन,

                शैक्षिक प्रबंधन कार्य – शैक्षिक प्रबंधन आवश्यकता

                शैक्षिक प्रबंधन कार्य – विद्यालय का मुख्य उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। बालक सजग गतिशील तथा विशिष्ट जीव है। प्रत्येक बालक दूसरे बालक से क्षमताओं तथा विशेषताओं में भिन्न है। अतः आवश्यक है कि विद्यालय का वातावरण ऐसा हो कि सभी बालकों को विकास के पूर्ण अवसर प्राप्त हो सके। विद्यालय का प्रबंधन […]

                पाठ्यक्रम का आधार – 6 Basics of Syllabus

                पाठ्यक्रम का आधार – मानव जीवन में शिक्षा का अद्वितीय महत्व है। शिक्षा के अभाव में मानव को मानव कह पाना असंभव होगा। शिक्षा के अभाव में मनुष्य केवल प्राणी मात्र रह सकता है, मानव या इंसान नहीं। शिक्षा प्राप्त करके ही व्यक्ति एक सामाजिक प्राणी बनता है। शिक्षा एक जटिल एवं व्यापक प्रक्रिया है […]

                यथार्थवाद अर्थ परिभाषा सिद्धांत व विशेषताएँ

                यथार्थवाद का अंग्रेजी रूपांतरण Realism है। Real शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के realis से हुई है। जिसका अर्थ है वस्तु। इस प्रकार Realism का शाब्दिक अर्थ हुआ वस्तु वाद या वस्तु संबंधी विचारधारा। वस्तुतः यथार्थवाद वस्तु संबंधी विचारों के प्रति एक दृष्टिकोण है जिसके अनुसार संसार की वस्तुएं यथार्थ है। इस वाद के अनुसार […]

                हिंदी विराम चिन्ह

                आगमनात्मक विधि परिभाषा 5 गुण व 4 दोष

                आगमनात्मक विधि भौतिक विज्ञान ओके शिक्षण में प्रयोग होने वाली प्रमुख विधि है। इस विधि का प्रयोग भौतिकी एवं रसायन विज्ञान शिक्षण में विशेष रूप से होता है। आगमनात्मक विधि आगमनात्मक विधि एक सिद्धांत के अंतर्गत आने वाले निश्चित नियम एवं तथ्य पर पहुंचने में उसे समर्थ बनाने हेतु विशेष उदाहरणों की पर्याप्त मात्रा में […]

                शैशवावस्था विकास

                मानव का शारीरिक विकास – शैशवावस्था तथा बाल्यावस्था

                मानव का शारीरिक विकास मुख्य रूप से शैशवावस्था तथा बाल्यावस्था में ही हो जाता है। मानव विकास की मुख्य रूप से तीन अवस्थाएं हैं शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था। शारीरिक विकास की गति स्थिर नहीं होती, वरन् पृथक् आयु अंतराल में भिन्न होती है। मानव का शारीरिक विकास शारीरिक विकास से तात्पर्य, सामान्य शारीरिक रचना, शरीर की […]

                मूल्यांकन

                मूल्यांकन अर्थ प्रक्रिया अंग 6 विशेषताएं 6 उद्देश्य

                मूल्यांकन शिक्षा के क्षेत्र में चलने वाली एक सतत प्रक्रिया है। जो पूर्व निर्धारित उद्देश्यों की प्राप्त की सीमा को ज्ञात करके उसी के संबंध में उचित या अनुचित का निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है। शैक्षिक मूल्यांकन छात्रों के मूल्यां कन को व्यक्त करता है, जिससे बौद्धिक, सामाजिक और संवेगात्मक विकास के रूप […]

                असफलता के कारण

                सफलता परिभाषा सफलता प्राप्त करने के 6 Top उपाय

                हमें अपना ध्यान उन चीजों पर लगाना चाहिए, जिन्हें हम चाहते हैं ना कि उन चीजों पर जिन्हें हम नहीं चाहते। सफलता इत्तेफाक की देन नहीं है। यह हमारे नजरिए का नतीजा होती है, और अपना नजरिया हम खुद ही चुनते हैं। इसलिए सफलता इत्तेफाक से नहीं मिलती बल्कि हम उसका चुनाव करते हैं। बड़ी […]

                मुक्त विश्वविद्यालय

                मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य

                मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य – मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा की एक ऐसी प्रणाली है जिसके द्वार सबके लिए खुले हैं। इसमें प्रवेश पाने के लिए आयु व आधारभूत शैक्षिक योग्यता आदि का कोई बंधन नहीं होता। इसमें सब युवक अथवा वृद्ध अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जो किसी कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह […]

                शैक्षिक नेतृत्व

                प्रधानाचार्य शिक्षक संबंध

                प्रधानाचार्य शिक्षक संबंध द्विपक्षीय हैं। दोनों ही एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। शिक्षक जहां प्रशासन से शिक्षण की समुचित परिस्थितियों को जुटाने की अपेक्षा करते हैं, वहीं प्रशासन भी शिक्षक से उसकी क्षमता तथा योग्यता के अनुसार काम करने की अपेक्षा रखता है। यदि प्रधानाचार्य शिक्षकों से अच्छे कार्य की अपेक्षा रखता है तो […]

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