समाज के प्रकार - समाज के गत संपूर्ण विवेचन से स्पष्ट हो जाता है। कि सामाजिक संबंध ही समाज के निर्माण का वास्तविक आधार है। इसका तात्पर्य है कि सामाजिक संबंधों की प्रकृति के अनुसार ही समाज को भी एक विशेष स्वरूप प्राप्त हो जाता है। इस संबंध में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि … पढ़ना जारी रखें समाज के प्रकार 1 जनजातीय 2 कृषक 3 औद्योगिक 4 उत्तर औद्योगिक
समाज अर्थ परिभाषा विशेषताएँ तथा समाज तथा समुदाय में 9 अंतर
समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है। इसके बाद भी सभी सामाजिक विज्ञानों में 'समाज' शब्द का उपयोग एक-दूसरे से बहुत भिन्न अर्थ में किया जाता रहा है। बोलचाल की सामान्य भाषा में हम 'समाज' शब्द का उपयोग जिस अर्थ में करते हैं, समाज का समाजशास्त्रीय अर्थ उससे बहुत भिन्न है। साधारणतया हम यह समझते हैं … पढ़ना जारी रखें समाज अर्थ परिभाषा विशेषताएँ तथा समाज तथा समुदाय में 9 अंतर
समुदाय तथा समिति में अन्तर
समुदाय तथा समिति में अन्तर - समिति तथा समुदाय एक-दूसरे के पूरक हैं। मैकाइवर का कथन है कि "समिति एक समुदाय नहीं है बल्कि समुदाय के अन्तर्गत ही एक संगठन है।” यह कथन जहां एक ओर समिति और समुदाय के अन्तर को स्पष्ट करता है, वहीं इनकी पारस्परिक निर्भरता पर भी प्रकार डालता है। इसका … पढ़ना जारी रखें समुदाय तथा समिति में अन्तर
समिति अर्थ परिभाषाएँ 9 विशेषताएँ उदाहरण तथा महत्व
जब कुछ व्यक्ति अपनी एक या अधिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सहयोग के आधार पर किसी संगठन का निर्माण करते हैं, तब इसी संगठन को हम समिति कहते हैं। इसका तात्पर्य यह है कि समितियां हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने का महत्वूर्ण साधन हैं। मैकाइवर ने लिखा है कि व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की … पढ़ना जारी रखें समिति अर्थ परिभाषाएँ 9 विशेषताएँ उदाहरण तथा महत्व
समुदाय का अर्थ परिभाषाएँ व 9 विशेषताएँ
समाजशास्त्र की प्राथमिक अवधारणाओं में समुदाय एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह इस दृष्टिकोण से प्राथमिक है कि एक ओर इसकी सहायता से एक विशेष मानव समूह की प्रकृति को समझा जा सकता है तथा दूसरी ओर, इसी के सन्दर्भ में समाज की अवधारणा को तुलनात्मक आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है। समुदाय की अवधारणा … पढ़ना जारी रखें समुदाय का अर्थ परिभाषाएँ व 9 विशेषताएँ
द्वितीयक समूह अर्थ परिभाषा व 7 विशेषताएँ
द्वितीयक समूह वे हैं, जिनमें प्राथमिक समूह की विशेषताएं नहीं पाई जातीं। ये समूह प्राथमिक समूहों की तुलना में कहीं अधिक बड़े होते हैं और इनके सदस्य एक-दूसरे से सैकड़ों मील दूर रहकर भी अपने बीच सम्बन्धों को बनाए रख सकते हैं। फलस्वरूप द्वितीयक समूह के सदस्यों के बीच प्रत्यक्ष सम्बन्धों का होना आवश्यक नहीं … पढ़ना जारी रखें द्वितीयक समूह अर्थ परिभाषा व 7 विशेषताएँ
प्राथमिक समूह अर्थ परिभाषा विशेषताएँ व 8 महत्व
चार्ल्स कूले ने प्राथमिक समूह को 'मानव स्वभाव की पोषिका' कहा है। कूले ने कुछ समूहों को 'प्राथमिक' इसलिए कहा है, क्योंकि महत्व के दृष्टिकोण से इनका स्थान प्रथम और प्रभाव प्राथमिक है। परिवार ही समाजीकरण का केन्द्र है, जहां बच्चा प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करता है। परिवार के पश्चात् दूसरा स्थान क्रीड़ा-समूह (play-group) का है। … पढ़ना जारी रखें प्राथमिक समूह अर्थ परिभाषा विशेषताएँ व 8 महत्व
सामाजिक समूह की विशेषताएं
सामाजिक समूह की विशेषताएं अनेक हैं, जोकि यहाँ विस्तारपूर्वक बतायी गयी है। सामाजिक समूह ऐसे व्यक्तियों का एकत्रीकरण है, जो एक-दूसरे के साथ क्रिया करते हैं और इस पारस्परिक क्रिया की एक इकाई के रूप में ही अन्य सदस्यों द्वारा पहचाने जाते हैं। समूह का अर्थ अधिक या कम ऐसे व्यक्तियों से है, जिनके बीच … पढ़ना जारी रखें सामाजिक समूह की विशेषताएं
सामाजिक समूह अर्थ परिभाषा प्रकार तथा 8 महत्व
सामाजिक समूह को समाजशास्त्रीय अध्ययन में एक 'प्राथमिक अवधारणा' के रूप में देखा जाता है। सच तो यह है कि विभिन्न प्रकार के सामाजिक समूह ही व्यक्ति को एक सामाजिक प्राणी बनाते हैं तथा उसकी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। अपने जीवन में व्यक्ति जिन सामाजिक समूहों का सदस्य होता है, विभिन्न आधारों पर … पढ़ना जारी रखें सामाजिक समूह अर्थ परिभाषा प्रकार तथा 8 महत्व
समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि के 3 प्रमुख आधार
बीसवीं शताब्दी के विचारकों में सी. राइट मिल्स वह प्रमुख विचारक हैं जिन्होंने समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि के रूप में सामाजिक यथार्थ को समझने के लिए एक नए उपागम का उल्लेख किया। मिल्स ने 'Sociological Imagination' शब्द का प्रयोग जिस अर्थ में किया है, उसका सम्बन्ध सामाजिक तथ्यों या घटनाओं का उनके यथार्थ रूप में विश्लेषण करने … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि के 3 प्रमुख आधार
मानविकी उन्मेष परिभाषा विशेषताएँ व Top 4 उपागम
समाजशास्त्रीय अध्ययन के मानविकी उन्मेष का तात्पर्य सामाजिक घटनाओं का इस तरह अध्ययन करना है जिससे जटिल और परिवर्तनशील मानवीय सम्बन्धों और विभिन्न प्रकार के व्यवहारों को उनकी पृष्ठभूमि एवं कुछ विशेष अर्थों के सन्दर्भ में समझा जा सके। ऐसे अध्ययन पूरी तरह वस्तुपरकता पर जोर न देकर अध्ययन की विषयपरकता (Subjectivity) को भी महत्वपूर्ण … पढ़ना जारी रखें मानविकी उन्मेष परिभाषा विशेषताएँ व Top 4 उपागम
समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति
समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति - समाजशास्त्रियों में इस बारे में मतभेद हैं कि समाजशास्त्र की प्रकृति वैज्ञानिक है या नहीं अथवा यह कि क्या इसे एक विज्ञान के रूप में विकसित किया जा सकता है? बहस का एक मुद्दा यह भी है कि क्या समाजशास्त्र में प्राकृतिक विज्ञानों की तरह सिद्धान्तों का निर्माण करना सम्भव … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति
समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य – 1. कॉम्ट 2. स्पेन्सर 3. मार्क्स
समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य - समाजशास्त्र क्या है ? इसे समझने के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि हम इसके परिप्रेक्ष्य को समझें। शाब्दिक रूप से परिप्रेक्ष्य का अर्थ होता है— नजरिया या दृष्टिकोण। किसी भी घटना या वस्तु को देखने का हर व्यक्ति का अपना अपना एक विशेष नजरिया या दृष्टिकोण होता है। हमारा दृष्टिकोण … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य – 1. कॉम्ट 2. स्पेन्सर 3. मार्क्स
समाजशास्त्र अर्थ व समाजशास्त्र की परिभाषा व वैज्ञानिक पक्ष
समाजशास्त्र समाज का व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन है। इसके बाद भी समाजशास्त्र में हम जिस समाज का अध्ययन करते हैं, उसके बारे में हमें ऐसा लगता है कि समाज हमारे लिए कोई नया तथ्य नहीं है, क्योंकि हम सभी समाज में रहते हैं और समाज के बारे में पहले से ही कुछ-न-कुछ जानते हैं। वास्तविकता … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र अर्थ व समाजशास्त्र की परिभाषा व वैज्ञानिक पक्ष
समाजशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र में संबंध
समाजशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र में संबंध - राजनीतिशास्त्र सामाजिक ज्ञान की वह शाखा है जो राज्य के स्वरूप, महत्व, संगठन, शासन सिद्धान्तों और नीतियों की व्याख्या करती है। इस प्रकार राजनीतिविज्ञान राज्य के जीवन अथवा सम्पूर्ण समूह के राजनीतिक भाग से भी सम्बन्धित है। समाजशास्त्र और राजनीतिशास्त्र को आरम्भ से ही एक-दूसरे से सम्बन्धित माना जाता … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र में संबंध
समाजशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में संबंध
समाजशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में संबंध क्या है? अनेक अर्थशास्त्रियों ने समाजशास्त्र के सामान्य सिद्धान्तों को उपयोग में लाकर इस तथ्य को स्वीकार भी कर लिया है "अर्थशास्त्र जीवन की सामान्य दशाओं से सम्बन्धित उन आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन है जिनका उद्देश्य भौतिक सुख न होकर आर्थिक और सामाजिक कल्याण के लक्ष्य को प्राप्त करना है। … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में संबंध
समाजशास्त्र तथा मनोविज्ञान में संबंध
समाजशास्त्र तथा मनोविज्ञान में संबंध - मनोविज्ञान मनुष्य की मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन है। यह उन मानसिक विशेषताओं से सम्बन्धित है, जो व्यक्ति को अनुभव करने, विचार करने और विभिन्न इच्छाओं तथा प्रेरणाओं के लिए क्षमता प्रदान करती है। साधारणतया ऐसा समझा जाता है कि समाज का निर्माण करने वाले पारस्परिक सम्बन्ध व्यक्ति की मानसिक … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा मनोविज्ञान में संबंध
समाजशास्त्र एवं समाजिक विज्ञान
समाजशास्त्र एवं समाजिक विज्ञान में क्या सम्बन्ध है? - समाजशास्त्र की प्रकृति को समझने के लिए यह जानना बहुत आवश्यक है कि दूसरे सामाजिक विज्ञानों की तुलना में समाजशास्त्र का स्थान क्या है? यह सच है कि समाजशास्त्र सम्पूर्ण समाज का एक सामान्य अध्ययन है, लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं है कि समाजशास्त्र को ही … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र एवं समाजिक विज्ञान
सामाजिक क्रिया क्या है? परिभाषा 6 विशेषताएं 10 उद्देश्य
सामाजिक क्रिया की प्रकृति को बहुत व्यवस्थित रूप से स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा "सामाजिक क्रिया कोई भी वह मानवीय दृष्टिकोण अथवा कार्य है जिसका सम्बन्ध क्रिया करने वाले लोगों के अर्थपूर्ण व्यवहार से होता है, चाहे वह कार्य करने की असफलता को स्पष्ट करता हो या निष्क्रिय स्वीकारोक्ति को।" इस कथन के द्वारा उन्होंने … पढ़ना जारी रखें सामाजिक क्रिया क्या है? परिभाषा 6 विशेषताएं 10 उद्देश्य
समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र में संबंध
समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र में संबंध क्या है? यह किस प्रकार सम्बंधित है? मानवशास्त्र यह विज्ञान है जो आदिकालीन मानव की शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और उद्विकास सम्बन्धी विशेषताओं का अध्ययन करता है। समाजशास्त्र और मानवशास्त्र एक-दूसरे से इतने घनिष्ठ रूप से सम्बद्ध है कि क्रोबर (Kroeber) ने इन्हें जुड़वां बहनें तक कह दिया है। ऐसा इसलिए … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र में संबंध
समाजशास्त्र तथा इतिहास में संबंध
समाजशास्त्र तथा इतिहास में संबंध - अतीत की घटनाओं का क्रमबद्ध अध्ययन ही इतिहास है। प्रसिद्ध विद्वान वुल्फ (Wolf) का विचार है कि इतिहास विशेष राष्ट्रों, संस्थाओं, खोजों और आविष्कारों से सम्बन्धित है इस विज्ञान में हम उन सभी घटनाओं का अध्ययन करते हैं जो अतीत के समाज की विशेषताओं को स्पष्ट करती हैं। समाजशास्त्र … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा इतिहास में संबंध
CCSU BEd Marking System
CCSU BEd Marking System - मेरठ विश्वविद्यालय के बीएड पाठ्यक्रम के आंतरिक मूल्यांकन में Presentation, assignment, internal test, viva से अंक निर्धारित किए जाते हैं। शेष बाह्य मूल्यांकन के लिए प्रश्न पत्रों का लिखित एग्जाम होता है। b.ed फर्स्ट ईयर में सभी प्रश्न पत्र 80 अंक के तथा सेकंड ईयर में 40 अंक के होते … पढ़ना जारी रखें CCSU BEd Marking System
CCSU BEd 2nd Year Syllabus
CCSU BEd 2nd Year Syllabus यहां पर उपलब्ध है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से संबद्ध कालेजों से b.ed कर रहे छात्रों के लिए द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में कुल 6 प्रश्न पत्र निर्धारित है। CCSU BEd 2nd Year का प्रत्येक प्रश्न 40 अंक का होता है। पेपर 6 ऑप्शनल है, आपके महाविद्यालय में इस … पढ़ना जारी रखें CCSU BEd 2nd Year Syllabus
CCSU BEd 1st Year Syllabus
CCSU BEd 1st Year Syllabus की जानकारी यहां विस्तार पूर्वक दी गई है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से संबद्ध कॉलेजों से b.ed कर रहे छात्रों के लिए b.ed प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में कुल 6 प्रश्नपत्र निर्धारित है। CCSU BEd 1st Year का प्रत्येक प्रश्नपत्र 80 अंक का आने वाला है। प्रत्येक प्रश्न पत्र … पढ़ना जारी रखें CCSU BEd 1st Year Syllabus
CCSU BEd Syllabus Download Now Free
CCSU BEd Syllabus 2022-23 यहाँ विस्तारपूर्वक दिया गया है। बी॰एड॰ प्रथम वर्ष 800 अंक तथा द्वितीय वर्ष में कुल 600 अंक निर्धारित हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के BEd 2 वर्ष के प्रोग्राम में NCTE, NCERT, UGC and MHRD आदि के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जो Syllabus निर्धारित किया गया है वह … पढ़ना जारी रखें CCSU BEd Syllabus Download Now Free
Women Empowerment
Women Empowerment - Empowerment is the process which confers power on individuals over their own lives, in their society, and in their communities. It signifies promotion in the social, economic, spiritual or political status of an individual. In the context of women, it is an exercise in enhancing their educational, economic, social, political, and health … पढ़ना जारी रखें Women Empowerment
Digital Literacy in India
Digital Literacy - With the modern-day technical advancement and large-scale consumption of mobile phones as the consumer market, India is a country where awareness and literacy regarding the digital aspect of communication are of utmost necessity. Computers, the internet, and mobile phones have become a seminal part of our existence. Thus, the degree of familiarity … पढ़ना जारी रखें Digital Literacy in India
Welfare of Tribal Women
Welfare of Tribal Women - The government has adopted the Tribal Sub GPlan (now called Scheduled Tribe Component') strategy for ensuring the overall development of tribal areas across the country while ensuring inclusive growth of STS including tribal women. While the major schemes/programmes for providing infrastructural facilities and other amenities like roads, electricity, water, education, … पढ़ना जारी रखें Welfare of Tribal Women
Telemedicine for Rural India
Telemedicine for Rural India - Health is not everything but everything else is nothing without health. One of the first pieces of literature known to humans, Rig Veda also says "In the beginning, there was a desire which was the first seed of mind". In a nation with 1.3 billion people, out of them 700 … पढ़ना जारी रखें Telemedicine for Rural India
Financial Literacy in India
Financial Literacy is the ability to understand different areas and concepts of finance like financial planning budgeting, investment, savings, and much more. Digital literacy is the understanding and navigation of several digital platforms and analyzing their potential as a medium of communication. Digital literacy brings within its ambit, an array of new technological advancements to … पढ़ना जारी रखें Financial Literacy in India























