श्रेणी: समाजशास्त्र

समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि के 3 प्रमुख आधार

समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि के 3 प्रमुख आधार

बीसवीं शताब्दी के विचारकों में सी. राइट मिल्स वह प्रमुख विचारक हैं जिन्होंने समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि के रूप में सामाजिक यथार्थ को समझने के लिए एक नए उपागम का उल्लेख किया। मिल्स ने 'Sociological Imagination' शब्द का प्रयोग जिस अर्थ में किया है, उसका सम्बन्ध सामाजिक तथ्यों या घटनाओं का उनके यथार्थ रूप में विश्लेषण करने … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्रीय अन्तर्दृष्टि के 3 प्रमुख आधार

मानविकी उन्मेष परिभाषा विशेषताएँ व Top 4 उपागम

मानविकी उन्मेष परिभाषा विशेषताएँ व Top 4 उपागम

समाजशास्त्रीय अध्ययन के मानविकी उन्मेष का तात्पर्य सामाजिक घटनाओं का इस तरह अध्ययन करना है जिससे जटिल और परिवर्तनशील मानवीय सम्बन्धों और विभिन्न प्रकार के व्यवहारों को उनकी पृष्ठभूमि एवं कुछ विशेष अर्थों के सन्दर्भ में समझा जा सके। ऐसे अध्ययन पूरी तरह वस्तुपरकता पर जोर न देकर अध्ययन की विषयपरकता (Subjectivity) को भी महत्वपूर्ण … पढ़ना जारी रखें मानविकी उन्मेष परिभाषा विशेषताएँ व Top 4 उपागम

समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति

समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति

समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति - समाजशास्त्रियों में इस बारे में मतभेद हैं कि समाजशास्त्र की प्रकृति वैज्ञानिक है या नहीं अथवा यह कि क्या इसे एक विज्ञान के रूप में विकसित किया जा सकता है? बहस का एक मुद्दा यह भी है कि क्या समाजशास्त्र में प्राकृतिक विज्ञानों की तरह सिद्धान्तों का निर्माण करना सम्भव … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति

समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य – 1. कॉम्ट 2. स्पेन्सर 3. मार्क्स

समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य – 1. कॉम्ट 2. स्पेन्सर 3. मार्क्स

समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य - समाजशास्त्र क्या है ? इसे समझने के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि हम इसके परिप्रेक्ष्य को समझें। शाब्दिक रूप से परिप्रेक्ष्य का अर्थ होता है— नजरिया या दृष्टिकोण। किसी भी घटना या वस्तु को देखने का हर व्यक्ति का अपना अपना एक विशेष नजरिया या दृष्टिकोण होता है। हमारा दृष्टिकोण … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य – 1. कॉम्ट 2. स्पेन्सर 3. मार्क्स

समाजशास्त्र अर्थ व समाजशास्त्र की परिभाषा व वैज्ञानिक पक्ष

समाजशास्त्र अर्थ व समाजशास्त्र की परिभाषा व वैज्ञानिक पक्ष

समाजशास्त्र समाज का व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन है। इसके बाद भी समाजशास्त्र में हम जिस समाज का अध्ययन करते हैं, उसके बारे में हमें ऐसा लगता है कि समाज हमारे लिए कोई नया तथ्य नहीं है, क्योंकि हम सभी समाज में रहते हैं और समाज के बारे में पहले से ही कुछ-न-कुछ जानते हैं। वास्तविकता … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र अर्थ व समाजशास्त्र की परिभाषा व वैज्ञानिक पक्ष

समाजशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र में संबंध - राजनीतिशास्त्र सामाजिक ज्ञान की वह शाखा है जो राज्य के स्वरूप, महत्व, संगठन, शासन सिद्धान्तों और नीतियों की व्याख्या करती है। इस प्रकार राजनीतिविज्ञान राज्य के जीवन अथवा सम्पूर्ण समूह के राजनीतिक भाग से भी सम्बन्धित है। समाजशास्त्र और राजनीतिशास्त्र को आरम्भ से ही एक-दूसरे से सम्बन्धित माना जाता … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में संबंध क्या है? अनेक अर्थशास्त्रियों ने समाजशास्त्र के सामान्य सिद्धान्तों को उपयोग में लाकर इस तथ्य को स्वीकार भी कर लिया है "अर्थशास्त्र जीवन की सामान्य दशाओं से सम्बन्धित उन आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन है जिनका उद्देश्य भौतिक सुख न होकर आर्थिक और सामाजिक कल्याण के लक्ष्य को प्राप्त करना है। … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा मनोविज्ञान में संबंध

समाजशास्त्र तथा मनोविज्ञान में संबंध

समाजशास्त्र तथा मनोविज्ञान में संबंध - मनोविज्ञान मनुष्य की मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन है। यह उन मानसिक विशेषताओं से सम्बन्धित है, जो व्यक्ति को अनुभव करने, विचार करने और विभिन्न इच्छाओं तथा प्रेरणाओं के लिए क्षमता प्रदान करती है। साधारणतया ऐसा समझा जाता है कि समाज का निर्माण करने वाले पारस्परिक सम्बन्ध व्यक्ति की मानसिक … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा मनोविज्ञान में संबंध

समाजशास्त्र एवं समाजिक विज्ञान

समाजशास्त्र एवं समाजिक विज्ञान

समाजशास्त्र एवं समाजिक विज्ञान में क्या सम्बन्ध है? - समाजशास्त्र की प्रकृति को समझने के लिए यह जानना बहुत आवश्यक है कि दूसरे सामाजिक विज्ञानों की तुलना में समाजशास्त्र का स्थान क्या है? यह सच है कि समाजशास्त्र सम्पूर्ण समाज का एक सामान्य अध्ययन है, लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं है कि समाजशास्त्र को ही … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र एवं समाजिक विज्ञान

सामाजिक क्रिया क्या है? परिभाषा 6 विशेषताएं 10 उद्देश्य

सामाजिक क्रिया क्या है? परिभाषा 6 विशेषताएं 10 उद्देश्य

सामाजिक क्रिया की प्रकृति को बहुत व्यवस्थित रूप से स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा "सामाजिक क्रिया कोई भी वह मानवीय दृष्टिकोण अथवा कार्य है जिसका सम्बन्ध क्रिया करने वाले लोगों के अर्थपूर्ण व्यवहार से होता है, चाहे वह कार्य करने की असफलता को स्पष्ट करता हो या निष्क्रिय स्वीकारोक्ति को।" इस कथन के द्वारा उन्होंने … पढ़ना जारी रखें सामाजिक क्रिया क्या है? परिभाषा 6 विशेषताएं 10 उद्देश्य

समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र में संबंध क्या है? यह किस प्रकार सम्बंधित है? मानवशास्त्र यह विज्ञान है जो आदिकालीन मानव की शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और उद्विकास सम्बन्धी विशेषताओं का अध्ययन करता है। समाजशास्त्र और मानवशास्त्र एक-दूसरे से इतने घनिष्ठ रूप से सम्बद्ध है कि क्रोबर (Kroeber) ने इन्हें जुड़वां बहनें तक कह दिया है। ऐसा इसलिए … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा मानवशास्त्र में संबंध

समाजशास्त्र तथा इतिहास में संबंध

समाजशास्त्र तथा इतिहास में संबंध

समाजशास्त्र तथा इतिहास में संबंध - अतीत की घटनाओं का क्रमबद्ध अध्ययन ही इतिहास है। प्रसिद्ध विद्वान वुल्फ (Wolf) का विचार है कि इतिहास विशेष राष्ट्रों, संस्थाओं, खोजों और आविष्कारों से सम्बन्धित है इस विज्ञान में हम उन सभी घटनाओं का अध्ययन करते हैं जो अतीत के समाज की विशेषताओं को स्पष्ट करती हैं। समाजशास्त्र … पढ़ना जारी रखें समाजशास्त्र तथा इतिहास में संबंध

सामाजिक प्रक्रियाएं विशेषताएं परिभाषा आवश्यक तत्व प्रकार

सामाजिक प्रक्रियाएं विशेषताएं परिभाषा आवश्यक तत्व प्रकार

सामाजिक प्रक्रियाएं - एक व्यक्ति या समूह की दूसरे के साथ अन्तःक्रिया होती है और वह अन्तः क्रिया सहयोग, संघर्ष, प्रतिस्पर्धा, आदि किसी भी रूप में हो सकती है। अन्तःक्रिया के विभिन्न स्वरूपों को ही सामाजिक प्रक्रिया के नाम से पुकारा गया है। जब अन्तः क्रिया में निरन्तरता पायी जाती है और साथ ही जब … पढ़ना जारी रखें सामाजिक प्रक्रियाएं विशेषताएं परिभाषा आवश्यक तत्व प्रकार

औपचारिक सामाजिक नियंत्रण विशेषताएं साधन व प्रविधियां

औपचारिक सामाजिक नियंत्रण विशेषताएं साधन व प्रविधियां

औपचारिक सामाजिक नियंत्रण से आशय ऐसे नियंत्रण से लगाया जाता है जो राज्य सरकार या किन्हीं औपचारिक संस्थाओं द्वारा अपने सदस्यों के व्यवहारों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट या परिभाषित नियमों के द्वारा लागू किया जाता है और यह नियम सदस्यों पर अनिवार्य रूप से लागू होते हैं। जो सदस्य इन नियमों का पालन … पढ़ना जारी रखें औपचारिक सामाजिक नियंत्रण विशेषताएं साधन व प्रविधियां

सहयोग अर्थ परिभाषा विशेषताएं 4 लाभ व महत्व

सहयोग अर्थ परिभाषा विशेषताएं 4 लाभ व महत्व

सहयोग के अर्थ को भली-भाँति समझने के लिए इसकी कुछ परिभाषाओं पर विचार करना आवश्यक है। सहयोग का अर्थ स्पष्ट करते हुए प्रो. ग्रीन ने लिखा है सहयोग दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी कार्य को करने या किसी समान इच्छित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया जाने वाला निरन्तर एवं सामूहिक … पढ़ना जारी रखें सहयोग अर्थ परिभाषा विशेषताएं 4 लाभ व महत्व

प्रचार अर्थ परिभाषा प्रचार के Top 5 साधन

प्रचार अर्थ परिभाषा प्रचार के Top 5 साधन

प्रचार एक मनोवैज्ञानिक ढंग है जिसके माध्यम से व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूह को एक पूर्व निर्धारित दिशा की ओर मोड़ने का प्रयास किया जाता है। आज चाहे कोई भी क्षेत्र हो। सर्वत्र प्रचार का महत्व है। प्रचार का कार्य क्षेत्र राजनीति ही नहीं रहा वरन् इसका प्रसार धार्मिक, आर्थिक सभी क्षेत्रों में हो गया … पढ़ना जारी रखें प्रचार अर्थ परिभाषा प्रचार के Top 5 साधन

जनमत अर्थ परिभाषा Top 7 विशेषताएं

जनमत अर्थ परिभाषा Top 7 विशेषताएं

आधुनिक युग में जनमत सामाजिक नियंत्रण का महत्वपूर्ण साधन है। आदिम समाजों में यह सामाजिक नियंत्रण का प्रमुख साधन है। ग्रामीण क्षेत्रों में जन मत ही सर्वोपरि होता है, इसकी अवहेलना करना प्रायः ग्रामीणों के लिए असंभव होता है। गांवों में इसका प्रतिनिधित्व ग्राम पंचायतें करती हैं। ग्रामीणों में पंच के प्रति अगाध श्रद्धा होती … पढ़ना जारी रखें जनमत अर्थ परिभाषा Top 7 विशेषताएं

व्यवस्थापन अर्थ परिभाषा पद्धतियां व्यवस्थापन के परिणाम

व्यवस्थापन अर्थ परिभाषा पद्धतियां व्यवस्थापन के परिणाम

व्यवस्थापन संघर्षकारी समूहों में सन्तुलन कायम करने की एक व्यवस्था भी है। इसमें दोनों पक्षों में सहिष्णुता पैदा हो जाती है और वे अपनी सच्ची और न्यायपूर्ण मांगों का प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यह संघर्षकारियों को सहयोग एवं निर्माण की ओर अग्रसर करता है तथा उन्हें पूर्ण विनाश से भी रोकता है। प्रजातंत्र में कई … पढ़ना जारी रखें व्यवस्थापन अर्थ परिभाषा पद्धतियां व्यवस्थापन के परिणाम

प्रतिस्पर्धा क्या है? प्रतिस्पर्धा के परिणाम एवं महत्व

प्रतिस्पर्धा क्या है? प्रतिस्पर्धा के परिणाम एवं महत्व

प्रतिस्पर्धा या प्रतियोगिता को एक असहगामी सामाजिक प्रक्रिया माना गया है। इसका कारण यह है कि प्रतिस्पर्द्धियों में कम या अधिक मात्रा में एक-दूसरे के प्रति कुछ ईर्ष्या-द्वेष के भाव पाये जाते हैं। प्रत्येक दूसरों को पीछे रखकर स्वयं आगे बढ़ना चाहता है। अपने उद्देश्य को प्राप्त करना चाहता है। अत्यधिक या अनियन्त्रित प्रतिस्पर्धा समाज … पढ़ना जारी रखें प्रतिस्पर्धा क्या है? प्रतिस्पर्धा के परिणाम एवं महत्व

औद्योगीकरण परिभाषा 7 विशेषताएं समाज पर प्रभाव

औद्योगीकरण परिभाषा 7 विशेषताएं समाज पर प्रभाव

औद्योगीकरण शब्द का प्रयोग प्रायः दो अर्थों में किया जाता है प्रथम संकुचित अर्थ में तथा दूसरा व्यापक अर्थ में संकुचित अर्थ में औद्योगीकरण का अर्थ है निर्माता उद्योगों की स्थापना एवं विकास। इस अर्थ में औद्योगीकरण को आर्थिक विकास की व्यापक प्रक्रिया का एक अंग माना जाता है जिसका उद्देश्य उत्पादन के साधनों की … पढ़ना जारी रखें औद्योगीकरण परिभाषा 7 विशेषताएं समाज पर प्रभाव

नगरीकरण परिभाषा 4 विशेषताएं नगरीकरण का समाज पर प्रभाव

नगरीकरण परिभाषा 4 विशेषताएं नगरीकरण का समाज पर प्रभाव

नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें गाँव नगरों में परिवर्तित होते हैं। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप किसी भी देश की जनसंख्या में वृद्धि होने लगती है। नगरीकरण नगरीय बनने की एक प्रक्रिया है। इसका तात्पर्य व्यक्तियों अथवा सामाजिक प्रक्रियाओं को नगरीय क्षेत्रों के अनुरूप बनाना है। नगरीकरण नगरीकरण का आशय नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या नगरीय प्रक्रियाओं … पढ़ना जारी रखें नगरीकरण परिभाषा 4 विशेषताएं नगरीकरण का समाज पर प्रभाव

आधुनिकीकरण अर्थ भारत में आधुनिकीकरण के कारण परिणाम व हानियाँ

आधुनिकीकरण अर्थ भारत में आधुनिकीकरण के कारण परिणाम व हानियाँ

आधुनिकीकरण की प्रक्रिया किसी एक ही दिशा या क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन को प्रकट नहीं करती वरन यह एक बहु-दिशा वाली प्रक्रिया है। साथ ही यह किसी भी प्रकार के मूल्यों से बंधी हुई नहीं है, परन्तु कभी-कभी इसका अर्थ अच्छाई और इच्छित परिवर्तन से लिया जाता है। पारम्परिक समाजों में होने वाले बदलावों … पढ़ना जारी रखें आधुनिकीकरण अर्थ भारत में आधुनिकीकरण के कारण परिणाम व हानियाँ

संस्कृतिकरण अर्थ 11 विशेषताएं संस्कृतिकरण के 7 स्रोत New

संस्कृतिकरण अर्थ 11 विशेषताएं संस्कृतिकरण के 7 स्रोत New

संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई निम्न हिन्दू जाति या कोई जनजाति अथवा कोई अन्य समूह किसी उच्च और प्रायः द्विज जाति की दिशा में अपने रीति-रिवाज कर्मकाण्ड, विचारधारा और पद्धति को बदलता है। सामान्यतः ऐसे परिवर्तनों के बाद निम्न जाति, जातीय संस्तरण की प्रणाली में स्थानीय समुदाय में उसे परम्परागत रूप से जो … पढ़ना जारी रखें संस्कृतिकरण अर्थ 11 विशेषताएं संस्कृतिकरण के 7 स्रोत New

सामाजिक नियंत्रण परिभाषा विशेषताएं उद्देश्य धर्म में भूमिका

सामाजिक नियंत्रण परिभाषा विशेषताएं उद्देश्य धर्म में भूमिका

सामाजिक नियंत्रण का अर्थ उस ढंग से है जिससे सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था में एकता व स्थायित्व बना रहता है। अर्थात् वह किस प्रकार परिवर्तनशील संतुलन के रूप में क्रियाशील होती है। प्लेटो व अरस्तू से लेकर आधुनिक समय तक के सामाजिक विचारकों ने यह स्वीकार किया है कि समाज के अस्तित्व के लिये थोड़ी बहुत … पढ़ना जारी रखें सामाजिक नियंत्रण परिभाषा विशेषताएं उद्देश्य धर्म में भूमिका

सामाजिक परिवर्तन के प्राकृतिक कारक

सामाजिक परिवर्तन के प्राकृतिक कारक

सामाजिक परिवर्तन के प्राकृतिक कारक - परिवर्तन प्रकृति का नियम है प्रकृति आवश्यकतानुसार स्वयं परिवर्तन करती रहती है। प्राचीन ग्रीक दार्शनिक हेराक्लीट्स के अनुसार, एक व्यक्ति के लिए एक ही नदी में दो बार पैर रखना असम्भव है इसके दो कारण है। पहला दूसरी बार में नदी पहले जैसे नहीं रहेगी नदी के साथ-साथ वह … पढ़ना जारी रखें सामाजिक परिवर्तन के प्राकृतिक कारक

सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक

सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक

सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक - सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में जनसंख्यात्मक कारकों का भी अत्यधिक महत्व है। जनसंख्यात्मक कारक भी सामाजिक परिवर्तन के कारण होते हैं। अन्य शब्दों में जनसंख्या का आकार और घनत्व में परिवर्तन जन्म दर और मृत्यु दर के घटने-बढ़ने से कई परिवर्तन होते हैं। उदाहरण के लिए भारत में 1901 … पढ़ना जारी रखें सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक

सामाजिक परिवर्तन के कारक

सामाजिक परिवर्तन के कारक

सामाजिक परिवर्तन के कारक - सामाजिक जीवन के सम्बन्धों में परिवर्तन अनेक कारणों से हो सकता है और होता भी है। ये कारण प्राकृतिक या भौगोलिक हो सकता है, जनसंख्यात्मक हो सकते हैं, प्राणिशास्त्रीय भी हो सकते हैं या आर्थिक प्रौद्योगिकीय या सांस्कृतिक भी हो सकते हैं। परन्तु इस सम्बन्ध में स्मरणीय है कि सामाजिक … पढ़ना जारी रखें सामाजिक परिवर्तन के कारक

संचार के 7 साधनों की उपयोगिता

संचार के 7 साधनों की उपयोगिता

संचार से आशय शब्दों, पत्रों, सूचनाओं अथवा संदेशों द्वारा विचारों एवं सम्मतियों के विनिमय से होता हैं। संचार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हैं। संचार में सभी चीजें शामिल हैं जिनके माध्यम से व्यक्ति अपनी बात दूसरे व्यक्ति के मस्तिष्क में डालता है यह अर्थ का पुल है, इसके अंतर्गत कहने, सुनने और समझने की … पढ़ना जारी रखें संचार के 7 साधनों की उपयोगिता

संचार

संचार

संचार से आशय शब्दों, पत्रों, सूचनाओं अथवा संदेशों द्वारा विचारों एवं सम्मतियों के विनिमय से होता हैं। संचार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हैं। संचार में सभी चीजें शामिल हैं जिनके माध्यम से व्यक्ति अपनी बात दूसरे व्यक्ति के मस्तिष्क में डालता है यह अर्थ का पुल है, इसके अंतर्गत कहने, सुनने और समझने की … पढ़ना जारी रखें संचार

दहेज प्रथा निबंध वर्तमान स्वरूप दुष्प्रभाव व समाधान

दहेज प्रथा निबंध वर्तमान स्वरूप दुष्प्रभाव व समाधान

दहेज प्रथा निबंध - आज भारत में अनेक समस्याएँ विद्यमान हैं उनमें दहेज प्रथा भी एक ऐसी बुराई है जो वर्तमान समाज के लिए कलंक बन गई है। यह एक ऐसी अमानवीय तथा घृणित समस्या है, जो भारतीय समाज की जड़ों को खोखला कर रही है तथा समाज की नैतिक व्यवस्था को ध्वस्त कर रही … पढ़ना जारी रखें दहेज प्रथा निबंध वर्तमान स्वरूप दुष्प्रभाव व समाधान