विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने भारतीय शिक्षा के गिरते हुए स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनमें प्रत्येक संभव उपाय के द्वारा सुधार करने के संबंध में अपने सुझाव दिए। उच्च शिक्षा के स्तर में वृद्धि करने के उद्देश्य से आयोग ने विश्वविद्यालय शिक्षा के स्तर की ओर ध्यान दिया। उनका मानना था कि हमारे … पढ़ना जारी रखें विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग
श्रेणी: भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास
सार्जेण्ट रिपोर्ट 1944 कार्यक्षेत्र सिफारिशें गुण दोष प्रभाव
सार्जेण्ट रिपोर्ट 1944 भारतीय शिक्षा के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। इस रिपोर्ट को अनेक नामों से जाना जाता है। जैसे सार्जेण्ट रिपोर्ट, भारत में युद्धोत्तर शिक्षा विकास योजना एवं केंद्रीय शिक्षा सलाहकार योजना की रिपोर्ट आदि। दूसरे विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद भारत सरकार का ध्यान भारतीयों की दशा सुधारने के लिए … पढ़ना जारी रखें सार्जेण्ट रिपोर्ट 1944 कार्यक्षेत्र सिफारिशें गुण दोष प्रभाव
सार्जेण्ट रिपोर्ट 1944
सार्जेण्ट रिपोर्ट 1944 भारतीय शिक्षा के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। इस रिपोर्ट को अनेक नामों से जाना जाता है। जैसे सार्जेण्ट रिपोर्ट, भारत में युद्धोत्तर शिक्षा विकास योजना एवं केंद्रीय शिक्षा सलाहकार योजना की रिपोर्ट आदि। दूसरे विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद भारत सरकार का ध्यान भारतीयों की दशा सुधारने के लिए … पढ़ना जारी रखें सार्जेण्ट रिपोर्ट 1944
बेसिक शिक्षा 1937 सिद्धांत विशेषताएँ पाठ्यक्रम उद्देश्य
बेसिक शिक्षा मूल रूप से व्यावहारिक होती है तथा बालक एक साथ कई विषयों का ज्ञान प्राप्त कर लेता है। बेसिक शिक्षा क्रियाओं तथा अनुभवों पर आधारित है इसीलिए इसका ज्ञान थोड़े से समय में ही हो जाता है। बालकों की शिक्षण व्यवस्था निम्न प्रकार होती है- सबसे पहले बच्चों को कहानी तथा बातचीत के … पढ़ना जारी रखें बेसिक शिक्षा 1937 सिद्धांत विशेषताएँ पाठ्यक्रम उद्देश्य
बेसिक शिक्षा
बेसिक शिक्षा मूल रूप से व्यावहारिक होती है तथा बालक एक साथ कई विषयों का ज्ञान प्राप्त कर लेता है। बेसिक शिक्षा क्रियाओं तथा अनुभवों पर आधारित है इसीलिए इसका ज्ञान थोड़े से समय में ही हो जाता है। बालकों की शिक्षण व्यवस्था निम्न प्रकार होती है- सबसे पहले बच्चों को कहानी तथा बातचीत के … पढ़ना जारी रखें बेसिक शिक्षा
सैडलर आयोग 1917
सैडलर आयोग - सन् 1913 के "शिक्षा संबंधी सरकारी प्रस्ताव" में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा की उन्नति एवं विस्तार के लिए अनेक बहुमूल्य विचार व्यक्त किए गए थे। किंतु इन विचारों को व्यावहारिक रूप प्रदान करने के लिए शिक्षाविदों की सहमति की आवश्यकता थी। अतएव शिक्षा आयोग की नियुक्ति का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। … पढ़ना जारी रखें सैडलर आयोग 1917
सैडलर आयोग 1917 का प्रतिवेदन व 12 मुख्य विशेषताएँ
सैडलर आयोग - सन् 1913 के "शिक्षा संबंधी सरकारी प्रस्ताव" में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा की उन्नति एवं विस्तार के लिए अनेक बहुमूल्य विचार व्यक्त किए गए थे। किंतु इन विचारों को व्यावहारिक रूप प्रदान करने के लिए शिक्षाविदों की सहमति की आवश्यकता थी। अतएव शिक्षा आयोग की नियुक्ति का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। … पढ़ना जारी रखें सैडलर आयोग 1917 का प्रतिवेदन व 12 मुख्य विशेषताएँ
हण्टर आयोग
हण्टर आयोग - लगभग सन् 1880 में ब्रिटिश प्रशासन को यह आवश्यकता अनुभव हुई की अब तक की शिक्षा की प्रगति का मूल्यांकन किया जाए तथा उत्पन्न हुए दोषों को किस प्रकार दूर किया जाए? इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए 1882 में हण्टर आयोग का गठन किया गया जो भारतीय शिक्षा आयोग के नाम … पढ़ना जारी रखें हण्टर आयोग
हण्टर आयोग 1882-83 के 5 उद्देश्य सुझाव व समीक्षा
हण्टर आयोग - लगभग सन् 1880 में ब्रिटिश प्रशासन को यह आवश्यकता अनुभव हुई की अब तक की शिक्षा की प्रगति का मूल्यांकन किया जाए तथा उत्पन्न हुए दोषों को किस प्रकार दूर किया जाए? इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए 1882 में हण्टर आयोग का गठन किया गया जो भारतीय शिक्षा आयोग के नाम … पढ़ना जारी रखें हण्टर आयोग 1882-83 के 5 उद्देश्य सुझाव व समीक्षा
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति को एक सरकारी प्रस्ताव के रूप में 11 मार्च 1904 को प्रकाशित कराया गया। प्रस्ताव में उस समय के भारतीय शिक्षा के विभिन्न 200 व कमियों का विश्लेषण किया गया उसके बाद सुधार हेतु सुझाव प्रस्तुत किए गए। प्रस्ताव में शिक्षा की नीति निम्न प्रकार से निर्धारित की गई। प्राथमिक … पढ़ना जारी रखें लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति 1904 – प्राथमिक शिक्षा सुझाव
लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति को एक सरकारी प्रस्ताव के रूप में 11 मार्च 1904 को प्रकाशित कराया गया। प्रस्ताव में उस समय के भारतीय शिक्षा के विभिन्न 200 व कमियों का विश्लेषण किया गया उसके बाद सुधार हेतु सुझाव प्रस्तुत किए गए। प्रस्ताव में शिक्षा की नीति निम्न प्रकार से निर्धारित की गई। प्राथमिक … पढ़ना जारी रखें लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति 1904 – प्राथमिक शिक्षा सुझाव
वुड का घोषणा पत्र
वुड का घोषणा पत्र - 19 जुलाई 1854 को ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से एक नया शिक्षा संबंधी घोषणा पत्र आया। इस घोषणा पत्र को वुड का घोषणा पत्र कहा गया। इस घोषणा पत्र का मुख्य कारण भारतियों की शिक्षा सम्बंधी मांग थी। 1853 में कंपनी को ब्रिटिश सरकार की ओर से एक आज्ञा … पढ़ना जारी रखें वुड का घोषणा पत्र
वुड का घोषणा पत्र 1854 – मुख्य बिंदु व प्रभाव
वुड का घोषणा पत्र - 19 जुलाई 1854 को ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से एक नया शिक्षा संबंधी घोषणा पत्र आया। इस घोषणा पत्र को वुड का घोषणा पत्र कहा गया। इस घोषणा पत्र का मुख्य कारण भारतियों की शिक्षा सम्बंधी मांग थी। 1853 में कंपनी को ब्रिटिश सरकार की ओर से एक आज्ञा … पढ़ना जारी रखें वुड का घोषणा पत्र 1854 – मुख्य बिंदु व प्रभाव
एडम रिपोर्ट
एडम रिपोर्ट - एडम एक शिक्षाविद्, विद्वान एवं कर्तव्यनिष्ठ समाज सेवक थे। एडम का मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही किसी भी समाज का विकास किया जा सकता है। तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने एडम को बिहार तथा बंगाल में शिक्षा की स्थिति का सर्वेक्षण करने का कार्य दिया था। एडम रिपोर्ट … पढ़ना जारी रखें एडम रिपोर्ट
एडम रिपोर्ट – प्रथम, द्वितीय व तृतीय एडम रिपोर्ट
एडम रिपोर्ट - एडम एक शिक्षाविद्, विद्वान एवं कर्तव्यनिष्ठ समाज सेवक थे। एडम का मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही किसी भी समाज का विकास किया जा सकता है। तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने एडम को बिहार तथा बंगाल में शिक्षा की स्थिति का सर्वेक्षण करने का कार्य दिया था। एडम रिपोर्ट … पढ़ना जारी रखें एडम रिपोर्ट – प्रथम, द्वितीय व तृतीय एडम रिपोर्ट
लॉर्ड विलियम बैंटिक की शिक्षा नीति
बैंटिक की शिक्षा नीति - लॉर्ड विलियम बैंटिक ने मैकाले के विवरण पत्र में उल्लेखित किए गए उसके सभी विचारों का अनुमोदन किया। इस अनुमोदन के बाद 7 मार्च 1835 को एक नई विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें उसने संस्कार की शिक्षा नीति को निम्न शब्दों में व्यक्त किया। शिक्षा के लिए निर्धारित धन का … पढ़ना जारी रखें लॉर्ड विलियम बैंटिक की शिक्षा नीति
मैकाले का विवरण पत्र 1835
मैकाले का विवरण पत्र 1835 - 10 जून 1834 को लॉर्ड मैकाले ने गवर्नर जनरल की काउंसिल के कानूनी सदस्य के रूप में भारत में पदार्पण किया। उस समय तक प्राच्य पाश्चात्य विवाद उग्रतम रूप धारण कर चुका था। बैंटिक को विश्वास था कि मैंकॉले जैसा प्रकांड विद्वान ही इस विवाद को समाप्त कर सकता … पढ़ना जारी रखें मैकाले का विवरण पत्र 1835
मैकाले का विवरण पत्र 1835 – आलोचना व प्रभाव
मैकाले का विवरण पत्र 1835 - 10 जून 1834 को लॉर्ड मैकाले ने गवर्नर जनरल की काउंसिल के कानूनी सदस्य के रूप में भारत में पदार्पण किया। उस समय तक प्राच्य पाश्चात्य विवाद उग्रतम रूप धारण कर चुका था। बैंटिक को विश्वास था कि मैंकॉले जैसा प्रकांड विद्वान ही इस विवाद को समाप्त कर सकता … पढ़ना जारी रखें मैकाले का विवरण पत्र 1835 – आलोचना व प्रभाव
मुस्लिमकालीन शिक्षा
मुस्लिमकालीन शिक्षा, मध्यकालीन युग में अरब की सामाजिक तथा सांस्कृतिक नीतियों का प्रभाव भारत के समाज विशेषकर कला एवं संस्कृति पर पड़ा। इसी प्रभाव का असर हमारी तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा। इसके फलस्वरूप शिक्षा जगत भी प्रभावित हुए बिना न रह सका। 11वीं शताब्दी में मुस्लिम आक्रमणों की जो श्रंखला प्रारंभ हुई वह … पढ़ना जारी रखें मुस्लिमकालीन शिक्षा
मुस्लिमकालीन शिक्षा – 7 उद्देश्य विशेषताएं व स्त्री शिक्षा
मुस्लिमकालीन शिक्षा, मध्यकालीन युग में अरब की सामाजिक तथा सांस्कृतिक नीतियों का प्रभाव भारत के समाज विशेषकर कला एवं संस्कृति पर पड़ा। इसी प्रभाव का असर हमारी तत्कालीन शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा। इसके फलस्वरूप शिक्षा जगत भी प्रभावित हुए बिना न रह सका। 11वीं शताब्दी में मुस्लिम आक्रमणों की जो श्रंखला प्रारंभ हुई वह … पढ़ना जारी रखें मुस्लिमकालीन शिक्षा – 7 उद्देश्य विशेषताएं व स्त्री शिक्षा
तक्षशिला विश्वविद्यालय
तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिडी शहर से 35 कि•मी• उत्तर की ओर स्थित था। तक्षशिला नगर तत्कालीन राज्य की राजधानी था। वैदिक काल में यह वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य केंद्र था। बाद में यह बौद्धकालीन शिक्षा के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित हुआ। तक्षशिला विश्वविद्यालय यह विश्व का प्रथम विश्विद्यालय था जिसकी स्थापना … पढ़ना जारी रखें तक्षशिला विश्वविद्यालय
तक्षशिला विश्वविद्यालय की विशेषताएँ
तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान पाकिस्तान के रावलपिडी शहर से 35 कि•मी• उत्तर की ओर स्थित था। तक्षशिला नगर तत्कालीन राज्य की राजधानी था। वैदिक काल में यह वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य केंद्र था। बाद में यह बौद्धकालीन शिक्षा के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित हुआ। तक्षशिला विश्वविद्यालय यह विश्व का प्रथम विश्विद्यालय था जिसकी स्थापना … पढ़ना जारी रखें तक्षशिला विश्वविद्यालय की विशेषताएँ
बौद्धकालीन शिक्षा
बौद्धकालीन शिक्षा के दो प्रमुख स्तर निम्न थे- प्राथमिक स्तर - जातक कथाओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार बौद्ध काल की प्राथमिक शिक्षा सांसारिक शिक्षा के रूप में दी जाती थी। इस संबंध में फाह्यान ने भी सामान्य अथवा प्राथमिक शिक्षा की चर्चा अपने ग्रंथों में की है।उच्च स्तर - इस संबंध में प्रो• अल्तेकर … पढ़ना जारी रखें बौद्धकालीन शिक्षा
बौद्धकालीन शिक्षा 7 विशेषताएं 8 गुण व 6 दोष
बौद्धकालीन शिक्षा के दो प्रमुख स्तर निम्न थे- प्राथमिक स्तर - जातक कथाओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार बौद्ध काल की प्राथमिक शिक्षा सांसारिक शिक्षा के रूप में दी जाती थी। इस संबंध में फाह्यान ने भी सामान्य अथवा प्राथमिक शिक्षा की चर्चा अपने ग्रंथों में की है। उच्च स्तर - इस संबंध में प्रो• … पढ़ना जारी रखें बौद्धकालीन शिक्षा 7 विशेषताएं 8 गुण व 6 दोष
वैदिककालीन शिक्षा
वैदिककालीन शिक्षा - धर्म और धार्मिक मान्यताएं भारतीय शिक्षा के पीछे हजारों वर्षों की शैक्षिक तथा सांस्कृतिक परंपरा का आधार हैं। प्राचीन काल में शिक्षा का आधार क्रियाएं थी। वैदिक क्रिया ही शिक्षा का प्रमुख आधार थी। समस्त जीवन धर्म से चलायमान था। भारतीय शिक्षा का प्रमुख ऐतिहासिक साक्ष्य वेद है। वैदिक युग में शिक्षा … पढ़ना जारी रखें वैदिककालीन शिक्षा
वैदिककालीन शिक्षा विशेषताएं (Total 11) – 7th is Special
वैदिककालीन शिक्षा - धर्म और धार्मिक मान्यताएं भारतीय शिक्षा के पीछे हजारों वर्षों की शैक्षिक तथा सांस्कृतिक परंपरा का आधार हैं। प्राचीन काल में शिक्षा का आधार क्रियाएं थी। वैदिक क्रिया ही शिक्षा का प्रमुख आधार थी। समस्त जीवन धर्म से चलायमान था। भारतीय शिक्षा का प्रमुख ऐतिहासिक साक्ष्य वेद है। वैदिक युग में शिक्षा … पढ़ना जारी रखें वैदिककालीन शिक्षा विशेषताएं (Total 11) – 7th is Special














