श्रेणी: भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

विश्वविद्यालय के कार्य – शिक्षा अनुदान सम्बद्धता प्रसार

विश्वविद्यालय के कार्य – शिक्षा अनुदान सम्बद्धता प्रसार

विश्वविद्यालय के कार्य - विश्वविद्यालय (युनिवर्सिटी) वह संस्था है जिसमें सभी प्रकार की विद्याओं की उच्च कोटि की शिक्षा दी जाती हो, परीक्षा ली जाती हो तथा लोगों को विद्या संबंधी उपाधियाँ आदि प्रदान की जाती हों। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के मैदान, भवन, प्रभाग, तथा विद्यार्थियों का संगठन आदि भी सम्मिलित हैं। विश्वविद्यालय के कार्य … पढ़ना जारी रखें विश्वविद्यालय के कार्य – शिक्षा अनुदान सम्बद्धता प्रसार

विश्वविद्यालय के कार्य

विश्वविद्यालय के कार्य

विश्वविद्यालय के कार्य - विश्वविद्यालय (युनिवर्सिटी) वह संस्था है जिसमें सभी प्रकार की विद्याओं की उच्च कोटि की शिक्षा दी जाती हो, परीक्षा ली जाती हो तथा लोगों को विद्या संबंधी उपाधियाँ आदि प्रदान की जाती हों। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के मैदान, भवन, प्रभाग, तथा विद्यार्थियों का संगठन आदि भी सम्मिलित हैं। विश्वविद्यालय के कार्य … पढ़ना जारी रखें विश्वविद्यालय के कार्य

शिक्षक शिक्षा की समस्याएं

शिक्षक शिक्षा की समस्याएं

स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही भारतीय अध्यापक शिक्षा में बहुत अधिक सुधार हुए हैं, परंतु फिर भी सभी समस्याओं का हल खोजना संभव नहीं हो सका है। शिक्षक शिक्षा की समस्याएं शिक्षक शिक्षा की समस्याएं अति विचारणीय है जो कि इस प्रकार हैं - विविध स्तरीय प्रशिक्षण में संपर्क ना होना।बुनियादी एवं गैर बुनियादी … पढ़ना जारी रखें शिक्षक शिक्षा की समस्याएं

उच्च शिक्षा के उद्देश्य

उच्च शिक्षा के उद्देश्य

उच्च शिक्षा के उद्देश्य - भारत में विभिन्न स्तरों की शिक्षा के उद्देश्य निश्चित करने का कार्य सर्वप्रथम वुड के घोषणा पत्र में किया गया।इसके बाद भारत में जो भी शिक्षा आयोग गठित किए गए सभी ने विभिन्न स्तरों की शिक्षा के उद्देश्य स्पष्ट करने का कार्य जारी रखा। 15 अगस्त 1947 को देश की … पढ़ना जारी रखें उच्च शिक्षा के उद्देश्य

वैदिककालीन शिक्षा गुण व दोष

वैदिककालीन शिक्षा गुण व दोष

वैदिककालीन शिक्षा गुण व दोष – धर्म और धार्मिक मान्यताएं भारतीय शिक्षा के पीछे हजारों वर्षों की शैक्षिक तथा सांस्कृतिक परंपरा का आधार हैं। प्राचीन काल में शिक्षा का आधार क्रियाएं थी। वैदिक क्रिया ही शिक्षा का प्रमुख आधार थी।समस्त जीवन धर्म से चलायमान था। भारतीय शिक्षा का प्रमुख ऐतिहासिक साक्ष्य वेद है। वैदिक युग … पढ़ना जारी रखें वैदिककालीन शिक्षा गुण व दोष

वैदिककालीन शिक्षा में गुरु शिष्य सम्बंध

वैदिककालीन शिक्षा में गुरु शिष्य सम्बंध

वैदिककालीन शिक्षा में गुरु शिष्य सम्बंध विशेष प्रकार के थे, जोकि अत्यंत मधुर, आत्मीय एवं अनुकरणीय थे। वैदिक काल में गुरु और शिष्य के मध्य भरोसे और जिम्मेदारी के संबंध हुआ करते थे। गुरु शिष्यों के साथ पुत्रवतभावना से व्यवहार करते थे। और शिष्य भी गुरु को पिता तुल्य मानकर उनकी सभी आज्ञाओ का पालन … पढ़ना जारी रखें वैदिककालीन शिक्षा में गुरु शिष्य सम्बंध

वैदिककालीन शिक्षा के उद्देश्य

वैदिककालीन शिक्षा के उद्देश्य शिक्षा स्वरूप तथा उसकी गंभीरता से यह स्पष्ट होता है कि तत्कालीन शिक्षा के उक्त उद्देश्यों के साथ-साथ एक अति महत्वपूर्ण उद्देश्य तथा आदर्श ज्ञान का विकास था। ईश्वर भक्ति तथा धार्मिकता की भावना चरित्र निर्माण व्यक्तित्व का विकास नागरिक तथा सामाजिक कर्तव्यों का पालन सामाजिक कुशलता की उन्नति और राष्ट्रीय संस्कृति का … पढ़ना जारी रखें वैदिककालीन शिक्षा के उद्देश्य

वैदिककालीन शिक्षा के उद्देश्य – Top 5 Education Objectives

वैदिककालीन शिक्षा के उद्देश्य – Top 5 Education Objectives

वैदिककालीन शिक्षा के उद्देश्य शिक्षा स्वरूप तथा उसकी गंभीरता से यह स्पष्ट होता है कि तत्कालीन शिक्षा के उक्त उद्देश्यों के साथ-साथ एक अति महत्वपूर्ण उद्देश्य तथा आदर्श ज्ञान का विकास था। ईश्वर भक्ति तथा धार्मिकता की भावना चरित्र निर्माण व्यक्तित्व का विकास नागरिक तथा सामाजिक कर्तव्यों का पालन सामाजिक कुशलता की उन्नति और राष्ट्रीय संस्कृति का … पढ़ना जारी रखें वैदिककालीन शिक्षा के उद्देश्य – Top 5 Education Objectives

प्रशिक्षित अप्रशिक्षित शिक्षक में अंतर

प्रशिक्षित अप्रशिक्षित शिक्षक में अंतर

प्रशिक्षित अप्रशिक्षित शिक्षक - शिक्षक ही विद्यालय तथा शिक्षा पद्धति की प्रमुख गत्यात्मक सकती है परंतु यह भी सत्य है कि विद्यालय भवन, पाठ्यक्रम, पाठ्य सहगामी क्रियाएं, निर्देशन आदि सभी वस्तुएं शैक्षिक कार्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इन सबसे भी अधिक महत्वपूर्ण एक विषय है, शिक्षक का प्रशिक्षित होना क्योंकि शिक्षक ही आने वाली … पढ़ना जारी रखें प्रशिक्षित अप्रशिक्षित शिक्षक में अंतर

प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं

प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं - प्रौढ़ शिक्षा निर्विवाद रूप से एक राष्ट्रीय आवश्यकता है। विकास का संबंध केवल कल कारखानों, बांधों और सड़कों से नहीं, इसका संबंध बुनियादी तौर पर लोगों के जीवन से है। इसका लक्ष्य है कि लोगों की भौतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नति। मानवीय पक्ष तथा उससे जुड़ी हुई बातें सबसे महत्वपूर्ण … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं

प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं – 3 Problems of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं – 3 Problems of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं - प्रौढ़ शिक्षा निर्विवाद रूप से एक राष्ट्रीय आवश्यकता है। विकास का संबंध केवल कल कारखानों, बांधों और सड़कों से नहीं, इसका संबंध बुनियादी तौर पर लोगों के जीवन से है। इसका लक्ष्य है कि लोगों की भौतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नति। मानवीय पक्ष तथा उससे जुड़ी हुई बातें सबसे महत्वपूर्ण … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा की समस्याएं – 3 Problems of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता – Requirement of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता – Requirement of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता - अशिक्षित मानव पशु के समान ही है, वर्तमान समय के सामाजिक आर्थिक राजनैतिक व्यवसाय तथा तकनीकी वातावरण में अपने को समायोजित करने के लिए तथा प्राकृतिक संपदा व वैज्ञानिक उपलब्धियों का अधिकतम सदुपयोग करने के लिए मानव का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न परिस्थितियों के कारण शिक्षा प्राप्त करने … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता – Requirement of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता - अशिक्षित मानव पशु के समान ही है, वर्तमान समय के सामाजिक आर्थिक राजनैतिक व्यवसाय तथा तकनीकी वातावरण में अपने को समायोजित करने के लिए तथा प्राकृतिक संपदा व वैज्ञानिक उपलब्धियों का अधिकतम सदुपयोग करने के लिए मानव का शिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न परिस्थितियों के कारण शिक्षा प्राप्त करने … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा की आवश्यकता

प्रौढ़ शिक्षा अर्थ – Adult Education Meaning in Hindi

प्रौढ़ शिक्षा अर्थ – Adult Education Meaning in Hindi

प्रौढ़ शिक्षा को भिन्न-भिन्न नामों से संबोधित किया जाता है। साक्षरता, समाज शिक्षा, जीवनपर्यंत शिक्षा, उद्देश्यपूर्ण शिक्षा, आधारभूत शिक्षा, द्वितीय अवसर की शिक्षा जैसे विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इन सभी नामों से प्रौढ़ शिक्षा नाम सर्वाधिक उपयुक्त प्रतीत होती है। भारत सरकार ने भी प्रौढ़ शिक्षा नाम को ही अपनाया है। अतः आगे … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा अर्थ – Adult Education Meaning in Hindi

प्रौढ़ शिक्षा अर्थ

प्रौढ़ शिक्षा को भिन्न-भिन्न नामों से संबोधित किया जाता है। साक्षरता, समाज शिक्षा, जीवनपर्यंत शिक्षा, उद्देश्यपूर्ण शिक्षा, आधारभूत शिक्षा, द्वितीय अवसर की शिक्षा जैसे विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इन सभी नामों से प्रौढ़ शिक्षा नाम सर्वाधिक उपयुक्त प्रतीत होती है। भारत सरकार ने भी प्रौढ़ शिक्षा नाम को ही अपनाया है। अतः आगे … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा अर्थ

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन परिस्थितियां महत्व व सफलता

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन परिस्थितियां महत्व व सफलता

पिछले कुछ वर्षों में प्रौढ़ शिक्षा तथा प्राथमिक शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिए जाने के बावजूद निरीक्षरो की संख्या में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि साक्षरता के प्रसिद्ध में सुधार हुआ है, परंतु निरक्षरो की संख्या विगत 30 वर्षों में डेढ़ गुनी से अधिक हो … पढ़ना जारी रखें राष्ट्रीय साक्षरता मिशन परिस्थितियां महत्व व सफलता

राष्ट्रीय साक्षरता मिशन

पिछले कुछ वर्षों में प्रौढ़ शिक्षा तथा प्राथमिक शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिए जाने के बावजूद निरीक्षरो की संख्या में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि साक्षरता के प्रसिद्ध में सुधार हुआ है, परंतु निरक्षरो की संख्या विगत 30 वर्षों में डेढ़ गुनी से अधिक हो … पढ़ना जारी रखें राष्ट्रीय साक्षरता मिशन

प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य – 1. व्यक्तिगत 2. सामाजिक

प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य – 1. व्यक्तिगत 2. सामाजिक

प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य उन प्रौढ व्‍यक्तियों को शैक्षिक विकल्‍प देना है। जिन्‍होंने यह अवसर गंवा दिया है और औपचारिक शिक्षा आयु को पार कर चुके हैं। लेकिन अब वे साक्षरता, आधारभूत शिक्षा, व्‍यावसायिक शिक्षा और इसी तरह की अन्‍य शिक्षा सहित किसी तरह के ज्ञान की आवश्‍यकता का अनुभव करते हैं। 2001 की जनगणना … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य – 1. व्यक्तिगत 2. सामाजिक

प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य

प्रौढ़ शिक्षा की उपयोगिता व्यक्ति व समाज दोनों के लिए है। इसलिए प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्यों को दो भागों व्यक्तिगत उद्देश्य तथा सामाजिक उद्देश्यों में बांटा जा सकता है। प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य प्रौढ़ शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य व्यक्ति की व्यक्तिगत आवश्यकताओं का कर्तव्य पालन की दृष्टि से प्रौढ़ शिक्षा अत्यंत … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा के उद्देश्य

प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र

प्रौढ़ शिक्षा केवल साक्षर बनाने तथा साधारण गणित का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र व्यापक है। प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र प्रौढ़ शिक्षा के अंतर्गत कम से कम निम्न पांच कार्य सम्मिलित किए जाते हैं प्रौढ़ को आत्म अभिव्यक्ति में निपुण बनाने के लिए साक्षरता प्रसार।व्यक्ति को अपना स्वास्थ्य ठीक रखने … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र

प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र – 5 Areas of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र – 5 Areas of Adult Education

प्रौढ़ शिक्षा केवल साक्षर बनाने तथा साधारण गणित का ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र व्यापक है। महात्मा गांधी जी के अनुसार, करोड़ों लोगों का निरीक्षण होना भारत के लिए अभिशाप है इससे मुक्ति पानी ही होगी। गांधीजी के जन्मदिन के 2 अक्टूबर 1978 को 'राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम' का शुभारम्भ … पढ़ना जारी रखें प्रौढ़ शिक्षा का क्षेत्र – 5 Areas of Adult Education

शिक्षा का राष्ट्रीयकरण

शिक्षा का राष्ट्रीयकरण - शिक्षा के संदर्भ में राष्ट्रीयकरण का अर्थ है 'शिक्षा पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण'। कुछ लोग शिक्षा के राष्ट्रीयकरण का अर्थ सरकारीकरण से लगाते हैं। दूसरे शब्दों में शिक्षा के राष्ट्रीयकरण का अभिप्राय शिक्षा के विभिन्न पहलुओं, पक्षों जैसे शिक्षा के स्वरूप एवं उद्देश्यों का निर्धारण, पाठ्यक्रम निर्माण, पाठ्य पुस्तकों का … पढ़ना जारी रखें शिक्षा का राष्ट्रीयकरण

शिक्षा का राष्ट्रीयकरण आवश्यकता और महत्व

शिक्षा का राष्ट्रीयकरण आवश्यकता और महत्व

शिक्षा का राष्ट्रीयकरण - शिक्षा के संदर्भ में राष्ट्रीयकरण का अर्थ है 'शिक्षा पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण'। कुछ लोग शिक्षा के राष्ट्रीयकरण का अर्थ सरकारीकरण से लगाते हैं। दूसरे शब्दों में शिक्षा के राष्ट्रीयकरण का अभिप्राय शिक्षा के विभिन्न पहलुओं, पक्षों जैसे शिक्षा के स्वरूप एवं उद्देश्यों का निर्धारण, पाठ्यक्रम निर्माण, पाठ्य पुस्तकों का … पढ़ना जारी रखें शिक्षा का राष्ट्रीयकरण आवश्यकता और महत्व

कोठारी आयोग 1964

कोठारी आयोग - शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए हमारे देश में जब भी किसी कमेटी अथवा आयोग का गठन किया जाता है तो इसका अभिप्राय यह ही लगाया जाता है कि इस क्षेत्र की लचर व्यवस्था के पुनर्गठन तथा मूल्यांकन के लिए ही इस प्रक्रिया को प्रारंभ किया गया है। स्वतंत्रता प्राप्ति … पढ़ना जारी रखें कोठारी आयोग 1964

कोठारी आयोग 1964 विशेषताएं मूल्यांकन दोष

कोठारी आयोग 1964 विशेषताएं मूल्यांकन दोष

कोठारी आयोग - शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए हमारे देश में जब भी किसी कमेटी अथवा आयोग का गठन किया जाता है तो इसका अभिप्राय यह ही लगाया जाता है कि इस क्षेत्र की लचर व्यवस्था के पुनर्गठन तथा मूल्यांकन के लिए ही इस प्रक्रिया को प्रारंभ किया गया है। स्वतंत्रता प्राप्ति … पढ़ना जारी रखें कोठारी आयोग 1964 विशेषताएं मूल्यांकन दोष

त्रिभाषा सूत्र

त्रिभाषा सूत्र - मुदालियर आयोग ने भाषा के संबंध में जो द्विभाषा सूत्र का सुझाव दिया था। जिसमें अंग्रेजी भाषा की उपेक्षा की गई थीी। जिसका अंग्रेजी समर्थकों ने विरोध किया था और 15 वर्षों तक अंग्रेजी भाषा चलती रहने की बात को लेकर हिंदी समर्थकों ने अंग्रेजी का विरोध किया। इन परिस्थितियों में भाषा … पढ़ना जारी रखें त्रिभाषा सूत्र

त्रिभाषा सूत्र के दोष, संशोधन व मूल्यांकन

त्रिभाषा सूत्र के दोष, संशोधन व मूल्यांकन

त्रिभाषा सूत्र - मुदालियर आयोग ने भाषा के संबंध में जो द्विभाषा सूत्र का सुझाव दिया था। जिसमें अंग्रेजी भाषा की उपेक्षा की गई थीी। जिसका अंग्रेजी समर्थकों ने विरोध किया था और 15 वर्षों तक अंग्रेजी भाषा चलती रहने की बात को लेकर हिंदी समर्थकों ने अंग्रेजी का विरोध किया। इन परिस्थितियों में भाषा … पढ़ना जारी रखें त्रिभाषा सूत्र के दोष, संशोधन व मूल्यांकन

मुदालियर आयोग 1952

मुदालियर आयोग 1952 - स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात यह आवश्यकता अनुभव की गई कि देश की माध्यमिक शिक्षा का अवश्य ही पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए। इसलिए सन 1952 में एक आयोग की नियुक्ति हुई। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट सन् 1953 में प्रस्तुत की। इस आयोग के चेयरमैन डा• ए लक्ष्मणस्वामी मुदालियर थे। मुदालियर आयोग … पढ़ना जारी रखें मुदालियर आयोग 1952

मुदालियर आयोग 1952 – कार्य उद्देश्य व सुझाव माध्यमिक शिक्षा

मुदालियर आयोग 1952 – कार्य उद्देश्य व सुझाव माध्यमिक शिक्षा

मुदालियर आयोग 1952 - स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात यह आवश्यकता अनुभव की गई कि देश की माध्यमिक शिक्षा का अवश्य ही पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए। इसलिए सन 1952 में एक आयोग की नियुक्ति हुई। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट सन् 1953 में प्रस्तुत की। इस आयोग के चेयरमैन डा• ए लक्ष्मणस्वामी मुदालियर थे। मुदालियर आयोग … पढ़ना जारी रखें मुदालियर आयोग 1952 – कार्य उद्देश्य व सुझाव माध्यमिक शिक्षा

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने भारतीय शिक्षा के गिरते हुए स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनमें प्रत्येक संभव उपाय के द्वारा सुधार करने के संबंध में अपने सुझाव दिए। उच्च शिक्षा के स्तर में वृद्धि करने के उद्देश्य से आयोग ने विश्वविद्यालय शिक्षा के स्तर की ओर ध्यान दिया। उनका मानना था कि हमारे … पढ़ना जारी रखें विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग