शैक्षिक व व्यावसायिक निर्देशन में अंतर

शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य

प्राचीन समय में शिक्षा के व्यक्तिगत उद्देश्य को उस समय के विद्वानों का काफी समर्थन प्राप्त रहा है। आधुनिक युग में भी शिक्षा मनोविज्ञान की प्रगति के कारण इस उद्देश्य पर विशेष बल दिया जाने लगा है। आधुनिक समय में इस उद्देश्य के प्रमुख समर्थकों के नाम है रूसो, रावल, पेस्टोलॉजी, नन आदि। शिक्षा के […]

धर्म परिभाषा, धार्मिक असामंजस्यता, बौद्धकालीन शिक्षा

धार्मिक असामंजस्यता

धार्मिक असामंजस्यता – धर्म से समाज में नियंत्रण स्थापित होता है। धर्म से समाज में एकता संगठन व सामंजस्य की स्थापना होती है। एक से अधिक धर्म के अनुयाई साथ साथ रहने के कारण सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न होते हैं। बहुधर्मी वाले समाज में धार्मिक असामंजस्यता उत्पन्न होता है तथा समाज की एकता भंग होती है। […]

दलित समस्या समाधान

दलित समस्या समाधान

दलित समस्या समाधान – जिन वर्गों का प्रयोग हिंदू सामाजिक संरचना सोपान में निरंतर स्थान रखने के लिए समुदायों के लिए किया जाता है वह दलित व अनुसूचित जातियां कहलाती हैं। ‘निम्नतम’ स्थान का आधार इन जातियों के उस व्यवसाय से जुड़ा है, जिसे अपवित्र कहा गया है। यहां पर दलितों की विवेचना अनुसूचित जाति […]

शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य, उदारवादी व उपयोगितावादी शिक्षा

शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य

शिक्षा का सामाजिक उद्देश्य – सामाजिक उद्देश्य के अनुसार समाज या राज्य का स्थान व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है। बैगेल और डीवी ने सामाजिक उद्देश्य का तात्पर्य सामाजिक दक्षता से लगाया है लेकिन अपने अतिवादी स्वरूप में या उद्देश्य व्यक्ति को समाज की तुलना में निचली श्रेणी का मानता है तथा व्यक्ति के सारे अधिकारों […]

मुक्त विश्वविद्यालय

मुक्त विश्वविद्यालय

शिक्षा के क्षेत्र में मुक्त विश्वविद्यालय एक नवीन अवधारणा है। मुक्त विश्वविद्यालय का अर्थ उस विश्वविद्यालय से है जो विश्वविद्यालय परिसर से दूर रहने वाले छात्रों को शिक्षा प्रदान करता है। मुक्त विश्वविद्यालय के द्वार छात्रों के लिए सदैव खुले रहते हैं। इससे यह अभिप्राय है कि मुक्त विश्वविद्यालय के अंतर्गत शिक्षा प्राप्त करने के […]

मूल्यांकन, मूल्यांकन के प्रकार, अभिक्रमित शिक्षण

दर्शन शिक्षा संबंध

दर्शन शिक्षा संबंध – दर्शन शब्द का अंग्रेजी रूपांतरण Philosophy शब्द दो यूनानी शब्दों Philos और Sofia से मिलकर बना है। जिसमें Philos का अर्थ है Love तथा Sofia का अर्थ है of Wisdom। इसप्रकार Philosophy का शाब्दिक अर्थ है ‘Love of Wisdom‘ (ज्ञान से प्रेम)। इस प्रकार दर्शन का शाब्दिक अर्थ विद्यानुराग या ज्ञान […]

विद्या ददाति विनयं संस्कृत निबंध

विद्या ददाति विनयं संस्कृत निबंध

संस्कृत में यदि विद्या ददाति विनयं नाम के अतिरिक्त इन नामों से कोई निबन्ध पूछा जाए। (विद्या ददाति विनयं, विद्यायाः महत्वम्, विद्या धनम् सर्व धनं प्रधानम्, विद्या राजसु पूजिता न तुधनम् विद्याविहीनः पशुः।।) तो नीचे दिए गए निबंध को लिखना है। विद्या ददाति विनियम का शाब्दिक अर्थ “विद्या विनय प्रदान करती है”। विद्या का महत्व […]

मुक्त विश्वविद्यालय

मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य

मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य – मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा की एक ऐसी प्रणाली है जिसके द्वार सबके लिए खुले हैं। इसमें प्रवेश पाने के लिए आयु व आधारभूत शैक्षिक योग्यता आदि का कोई बंधन नहीं होता। इसमें सब युवक अथवा वृद्ध अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जो किसी कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह […]

हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

वेदान्त दर्शन

वेदान्त दर्शन- वेदान्त शब्द का तात्पर्य है – वेद का अंत। इन्हें वेदों का अंतिम भाग अथवा वेदों का सार भी का जाता है। वेद के मुख्यतः तीन भाग हैं – वैदिक मंत्र ब्राह्मण उपनिषद उपनिषद वेद का अंतिम भाग तथा वैदिक काल का अंतिम साहित्य है। वेदांत के तीन रूप बताए गए हैं – […]

भारतीय समाज में धर्म की भूमिका

धर्म संस्कृति का एक हिस्सा है। धर्म मानवीय जीवन से संबंधित अनेक अनेक कार्यों की पूर्ति करता है, इसी मानवीय लगाव के कारण आदि काल से लेकर वर्तमान काल तक सभी समाजों में धर्म ही दिखाई देता है। धर्म जीवन के मूल्यों का महत्वपूर्ण अर्थ स्पष्ट करता है। सदाचार की भावना से मनुष्य में आत्म […]

मानवाधिकार

मानवाधिकार आयोग

भारत में राष्ट्रीय स्तर व राज्य स्तर दोनों पर मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई है। जिसका मुख्य उद्देश्य मानव के अधिकार का संरक्षण करना, जागरूकता फैलाना व शोध कार्य करना है। राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय मानवाधिकार आयोगों का अध्ययन हम लोग करने वाले हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 3 […]

जैन दर्शन

जैन दर्शन एकमात्र ऐसा भारतीय दर्शन है जो वेदों के प्रमाण को स्वीकार नहीं करता है। जैन शब्द की उत्पत्ति जिन शब्द से हुई है जिसका तात्पर्य है जितना अर्थात जिसने सांसारिक रागद्वेषों मोह माया पर विजय प्राप्त कर ली हो। जैन दर्शन का प्रमुख उद्देश्य मनुष्य को संसार के कष्टों से मुक्ति दिलाकर आध्यात्मिक […]

दहेज प्रथा

दहेज उस धन या संपत्ति को कहते हैं जो विवाह के समय कन्या पक्ष द्वारा वर पक्ष को दिया जाता है। हिंदू विवाह से संबंधित विभिन्न समस्याओं में से दहेज समस्या एक भीषण समस्या है। दहेज वह संपत्ति है जो विवाह के अवसर पर लड़की के माता-पिता या अन्य निकट संबंधियों द्वारा दी जाती है। […]

वैदिककालीन शिक्षा

वैदिककालीन शिक्षा – धर्म और धार्मिक मान्यताएं भारतीय शिक्षा के पीछे हजारों वर्षों की शैक्षिक तथा सांस्कृतिक परंपरा का आधार हैं। प्राचीन काल में शिक्षा का आधार क्रियाएं थी। वैदिक क्रिया ही शिक्षा का प्रमुख आधार थी। समस्त जीवन धर्म से चलायमान था। भारतीय शिक्षा का प्रमुख ऐतिहासिक साक्ष्य वेद है। वैदिक युग में शिक्षा […]

मुक्त विश्वविद्यालय

दूरस्थ शिक्षा लक्षण

दूरस्थ शिक्षा लक्षण – प्राचीन काल से ही हमारे देश में दूरस्थ शिक्षा की व्यवस्था रही है। समय के साथ-साथ इसका भी स्वरूप बदलता रहा है। वर्तमान में यह पद्धति अत्यधिक विकसित हो चुकी है। काल में जहां ऋषि मुनि ज्ञान देने के लिए गांव गांव जाते थे या अपनी कुटिया में रहकर ज्ञान देते […]

पाठ्यक्रम अर्थ परिभाषा आवश्यकता महत्व

पाठ्यक्रम – शिक्षा एक व्यापक एवं गतिशील प्रक्रिया है। यह मानव विकास की आधारशिला है। यह एक जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके द्वारा व्यक्ति के व्यवहार में लगातार परिवर्तन होता रहता है। शिक्षा प्रकाश का वह स्रोत है जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारा सच्चा पथ प्रदर्शन होता रहता है। इसे मनुष्य […]

शिक्षा का व्यवसायीकरण

भारत में शिक्षा के निजीकरण के कारण

भारत में शिक्षा के निजीकरण के कारण – भारत में स्वतंत्रता से पूर्व निजी क्षेत्र की प्रधानता की, परंतु योजना काल में सार्वजनिक क्षेत्र का महत्व बढ़ा है तथा निजी क्षेत्र के महत्त्व में सापेक्षिक रूप से कमी आई है। सन 1991 में नई आर्थिक नीति की घोषणा की गई। इस नीति के अंतर्गत निजी […]

सर्व शिक्षा अभियान

सर्व शिक्षा अभियान

सर्व शिक्षा अभियान केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना का उद्देश्य भारत भर में सभी को जहां तक संभव हो शिक्षित करना है। अक्टूबर 1998 में राज्य सरकारों को शिक्षा मंत्रियों की एक कॉन्फ्रेंस यह तय करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने दिल्ली में बुलाई थी कि […]

घरेलू हिंसा

घरेलू हिंसा, भारतीय समाज में अनेक प्रकार की समस्याएं पाई जाती हैं, जिनका समाधान करने के लिए परिवार का प्रत्येक सदस्य प्रयत्नशील रहता है। कभी-कभी पारिवारिक समस्याएं इतना विकराल रूप धारण कर लेती हैं कि परिवार के सदस्यों द्वारा उनका समाधान कर पाना असंभव हो जाता है। इस स्थिति में परिवार के सदस्य हिंसा का […]

विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध

विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध

विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध परीक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण निबंध है। विद्यालय वार्षिकोत्सवः संस्कृत निबंध वार्षिकोत्सवस्य महिमा उत्सवस्य प्रारंभ: शारीरिक प्रदर्शनम् सांस्कृतिक-कार्यक्रम: पुरस्कार वितरणाम् प्रतिवेदनम् च वार्षिकोत्सवस्य महिमा प्रायः सर्व विद्यालयेषु वार्षिकोत्सव: प्रतिवर्ष मान्यते। वार्षिकोत्सवे विद्यालयस्य गौरवं सर्वजनेभ्य: सम्मुख प्रतिवेदनं माध्यमेन प्रकटं भवति। कार्यक्रम द्वारा अपि विद्यालयस्य प्रभाव: वर्धते। पुरस्कारेण छात्रोंत्साहे वृद्धि: भवति। उत्सवस्य […]

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