दसवीं पंचवर्षीय योजना 2002-07 में पहली बार एन. डी ए सरकार में एक दस्तावेज में यह आह्वान किया गया कि यदि राज्य विकसित हो तो देश भी विकसित होगा। हम विकेन्द्रित नियोजन की ओर एक परिवर्तन देखते हैं। योजना को लोक योजना कहकर पुकारा जाता था। इसी योजनावधि में आया था जिसमे राज्यों को नियोजित … पढ़ना जारी रखें नीति आयोग अर्थ आवश्यकता नीति आयोग के 14 कार्य
लेखक: rohitsharma991
जनांकिकी परिभाषाएं व जनांकिकी की 10 महत्वपूर्ण विशेषताएँ
जनसंख्या के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त करने की अभिलाषा मानव में उसके अस्तित्वकाल से ही रही है। जनांकिकी का अस्तित्व मानव समाज के प्रारम्भ से ही रहा है भले ही उसे विशिष्ट विज्ञान के रूप में डनांकिकी का स्वरूप प्राप्त न रहा हो। वर्तमान समय में विश्व के सभी राष्ट्र मानव संसाधनों के विकास पर … पढ़ना जारी रखें जनांकिकी परिभाषाएं व जनांकिकी की 10 महत्वपूर्ण विशेषताएँ
मिश्रित अर्थव्यवस्था परिभाषाएं तथा 8 विशेषताएं
मिश्रित अर्थव्यवस्था में सरकारी तथा निजी दोनों क्षेत्र एक साथ कार्य करते है। सरकारी क्षेत्र सरकार के संचालन व प्रबन्ध में ही रहता है तथा निजी क्षेत्र भी सरकार के द्वारा नियंत्रित होता है। निजी क्षेत्र सार्वजनिक हित के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकता। इस प्रकार मिश्रित अर्थव्यवस्था उत्पादन व अन्य आर्थिक गतिविधियों का समाजीकरण … पढ़ना जारी रखें मिश्रित अर्थव्यवस्था परिभाषाएं तथा 8 विशेषताएं
पूंजी निर्माण क्या है? पूंजी निर्माण अर्थ परिभाषा
पूंजी निर्माण भी किसी देश की आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण निर्धारक तत्व है। पूँजी मानव द्वारा निर्मित उत्पत्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है और यह बचत का परिणाम होती है। अतः मानवीय प्रयत्नों द्वारा पूँजी की पूर्ति में वृद्धि की जा सकती है। इस प्रकार किसी देश में एक निश्चित अवधि में पूंजी के … पढ़ना जारी रखें पूंजी निर्माण क्या है? पूंजी निर्माण अर्थ परिभाषा
समोत्पाद रेखा परिभाषाएँ मान्यताए व 10 विशेषताएँ
समोत्पाद रेखा को अंग्रेजी में Iso-quant कहते हैं जो कि Iso तथा quant से मिलकर बना है, जिनका सामूहिक अर्थ होता है समान मात्रा। समोत्पाद वक्र ठीक उसी प्रकार दो स्थानापन्न उत्पादन साधनों के विभिन्न मात्रात्मक संयोगों से प्राप्त समान भौतिक उत्पादन स्तर को प्रदर्शित करते हैं जिस प्रकार उपभोग क्षेत्र में उदासीनता वक्र दो … पढ़ना जारी रखें समोत्पाद रेखा परिभाषाएँ मान्यताए व 10 विशेषताएँ
उपयोगिता परिभाषा उपयोगिता के प्रकार व Top 3 विशेषताएँ
सामान्य बोलचाल की भाषा में उपयोगिता का अर्थ किसी वस्तु के उपयोग या प्रयोग से मिलने वाले लाभ से लगाया जाता है, परन्तु अर्थशास्त्र में इस शब्द का अर्थ सामान्य अर्थ से कुछ अलग तथा व्यापक होता है। अर्थशास्त्र में उपयोगिता किसी वस्तु की क्षमता अथवा वह गुण है जिससे मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति होती … पढ़ना जारी रखें उपयोगिता परिभाषा उपयोगिता के प्रकार व Top 3 विशेषताएँ
मांग की लोच क्या है? 13 मांग की लोच के निर्धारक तत्व
मांग की लोच व मांग की लोच के निर्धारक तत्व के बारे में चर्चा यहाँ की गयी है। मूल्य में परिवर्तन के परिणामस्वरूप माँग में जिस गति से परिवर्तन होता है उसे मांग की लोच कहते हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि मूल्य में परिवर्तन के फलस्वरूप मांग में परिवर्तन की … पढ़ना जारी रखें मांग की लोच क्या है? 13 मांग की लोच के निर्धारक तत्व
मांग का नियम मांग के प्रकार मांग के नियम की मान्यता
अर्थशास्त्र के अन्दर माँग शब्द की व्याख्या विभिन्न रूपों में की गई है। एक ओर मांग को मनोवैज्ञानिक ढंग से परिभाषित करते हुए आवश्यकता का पर्यायवाची बताया गया है तथा दूसरी ओर भौतिक दृष्टि किसी वस्तु की उस मात्रा की ओर संकेत किया गया है जो बाजार में किसी निश्चित मूल्य पर बिकने के लिए … पढ़ना जारी रखें मांग का नियम मांग के प्रकार मांग के नियम की मान्यता
उत्पादन फलन Top 3 विशेषताएं मान्यताएं उत्पादन फलन के प्रकार
उत्पादन फलन - एक दी हुई तकनीक के अंतर्गत उपादानों के विभिन्न संयोग एवं उनसे प्राप्त होने वाले उत्पादनों के भौतिक सम्बन्ध को उत्पादन फलन कहा जाता है। उत्पादन फलन से यह पता चलता है कि एक निश्चित अवधि में उपादानों के परिवर्तन से उत्पादन आकार में किस तरह और कितनी मात्रा में परिवर्तन होता … पढ़ना जारी रखें उत्पादन फलन Top 3 विशेषताएं मान्यताएं उत्पादन फलन के प्रकार
चुनाव की समस्या के आधार – एक आर्थिक समस्या
चुनाव की समस्या एक बड़ी समस्या है। अर्थशास्त्र का भलीभाँति अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि व्यक्ति की आवश्यकताएँ अनन्त होती है जबकि इन आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन सीमित होते हैं। इस बात को स्पष्ट करते हुए प्रमुख अर्थशास्त्री प्रो. रॉबिन्स ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक "An Essay on the Nature and Significance … पढ़ना जारी रखें चुनाव की समस्या के आधार – एक आर्थिक समस्या
बचत के Top 3 स्रोत व वृद्धि हेतु सुझाव व बचत दर
कोई भी आय जो व्यय नहीं की जाती या व्यय नहीं हो पाती वह शेष रह जाती है। इसे बचत कहा जाता है। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है आय का वह भाग जो व्यय न किया जाय 'बचत' कहलायेगा। बचत बचत का अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय के संदर्भ में विशिष्ट महत्व है। … पढ़ना जारी रखें बचत के Top 3 स्रोत व वृद्धि हेतु सुझाव व बचत दर
समानता अर्थ परिभाषा लक्षण समानता के 4 प्रकार
समानता के संबंध में विभिन्न अर्थ प्रचलित हुए। बहुत सी धारणायें भ्रमपूर्ण भी रहीं। प्राकृतिक समानता पर बल देने वाले मानते हैं कि चूँकि ईश्वर ने सभी को समान बनाया अतः सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए सभी को बराबर साधन मिलने चाहिए कुछ विचारक मानते हैं कि प्रकृति के मूल में असमानता है। … पढ़ना जारी रखें समानता अर्थ परिभाषा लक्षण समानता के 4 प्रकार
स्वतंत्रता अर्थ परिभाषा प्रकार संरक्षण की दशाएं
स्वतंत्रता अंग्रेजी के लिबर्टी शब्द का हिन्दी अनुवाद है जो लैटिन भाषा के लाइबर शब्द से बना है, जिसका तात्पर्य है बन्धनों का न होना। अतः शाब्दिक व्युत्पत्ति के अनुसार स्वतन्त्रता का अर्थ हुआ बंधनों का अभाव, लाक ने इस भाव का समर्थन किया परन्तु वर्तमान समय में स्वतंत्रता का अर्थ प्रत्येक व्यक्ति की इच्छानुसार … पढ़ना जारी रखें स्वतंत्रता अर्थ परिभाषा प्रकार संरक्षण की दशाएं
न्याय अर्थ परिभाषा विशेषताएं न्याय के 6 प्रकार
न्याय अंग्रेजी भाषा के जस्टिस (Justice) शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। जस्टिस शब्द लेटिन भाषा के 'जस' (Jus) शब्द से बना है जिसका तात्पर्य होता है जोड़ना अथवा संयोजित करना। शाब्दिक व्युत्पत्ति के आधार पर न्याय का विचार समाज में व्यक्तियों के पारस्परिक सम्बन्धों की उचित व्यवस्था इस उद्देश्य से करता है जिससे कि संगठित … पढ़ना जारी रखें न्याय अर्थ परिभाषा विशेषताएं न्याय के 6 प्रकार
कानून अर्थ परिभाषा आवश्यक तत्व प्रकार स्रोत
कानून राज्य का लक्ष्य मानव कल्याण की उचित व्यवस्था करना है, लेकिन इस लक्ष्य की प्राप्ति की आशा तभी की जा सकती है जबकि राज्य के नागरिक अपने जीवन में आचरण के कुछ सामान्य नियमों का पालन करते हों। अतः राज्य अपने नागरिकों के जीवन के संचालन हेतु नियमों का निर्माण करता है, जिनका पालन … पढ़ना जारी रखें कानून अर्थ परिभाषा आवश्यक तत्व प्रकार स्रोत
मार्क्सवादी सिद्धांत – राज्य की प्रकृति सिद्धांत की आलोचना
मार्क्सवादी सिद्धांत के अनुसार पूँजीपति वर्ग और श्रमिक वर्ग में वर्ग संघर्ष तभी समाप्त होगा जब श्रमिक वर्ग का राजनीतिक दल क्रान्ति द्वारा राज्य सत्ता पर कब्जा करके पूँजीपति वर्ग के अस्तित्व को समाप्त कर दे। उत्पादन के साधन पूँजीपति वर्ग के हाथ से निकलकर सार्वजनिक स्वामित्व के अन्तर्गत आ जाते हैं। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था जैसे-जैसे … पढ़ना जारी रखें मार्क्सवादी सिद्धांत – राज्य की प्रकृति सिद्धांत की आलोचना
विकासवादी सिद्धांत क्या है? इसके तत्व लिखिए।
विकासवादी सिद्धांत - राज्य एक जटिल संस्था है जिसकी उत्पत्ति इतने सरल तरीके से हो गयी होगी, इसे नहीं माना जा सकता है। राज्य की उत्पत्ति में बहुत से तत्वों ने योगदान दिया है। आधुनिक युग में विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र तथा अन्य शास्त्रों के अध्ययन ने यह सिद्ध कर दिया है कि राज्य की … पढ़ना जारी रखें विकासवादी सिद्धांत क्या है? इसके तत्व लिखिए।
कल्याणकारी राज्य परिभाषा 5 विशेषताएं 11 कार्य
सम्पूर्ण जनता के हित के कार्य करने वाला राज्य परन्तु मानव हित के साधन के रूप में राज्य का विचार कोई नवीन विचार नहीं है। इस रूप में कल्याणकारी राज्य का ही प्रतीक है। महाभारत, पाराशर की स्मृतियाँ तथा मार्कण्डेय, मनु और याज्ञवल्क्य आदि के विचार में कल्याणकारी राज्य की अवधारणा स्पष्ट दिखाई देती है। … पढ़ना जारी रखें कल्याणकारी राज्य परिभाषा 5 विशेषताएं 11 कार्य
राज्य अर्थ परिभाषा 4 उद्देश्य तत्व 11 कार्य
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहने के लिए राज्य की आवश्यकता होती है। राज्य शब्द को अंग्रेजी भाषा में State कहा जाता है। अंग्रेजी शब्द State लैटिन भाषा के Status से निकला है 'Status' का प्रयोग किसी व्यक्ति या व्यक्ति समूह के सामाजिक स्तर का बोध कराने के लिए होता होगा परन्तु … पढ़ना जारी रखें राज्य अर्थ परिभाषा 4 उद्देश्य तत्व 11 कार्य
उत्तर व्यवहारवाद के Top 8 आधारभूत लक्षण
व्यवहारवाद का आशय एक ऐसी क्रान्ति से है जो उस 'व्यवहारवाद' के विरुद्ध है, जिसके द्वारा राजनीतिक विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञान की वैज्ञानिक शोध पद्धति का प्रयोग करके विज्ञान का रूप देने का प्रयास किया है। “व्यवहारवादी क्रान्ती से हम अपने विश्लेषण को सार्थकता नहीं दे सकते, अतः हमें उत्तर व्यवहारवादी बनना होगा।' - डेविड … पढ़ना जारी रखें उत्तर व्यवहारवाद के Top 8 आधारभूत लक्षण
व्यवहारवाद परिभाषा व्यवहारवाद की आलोचना
व्यवहारवाद - द्वितीय महायुद्ध के बाद परम्परागत राजनीति विज्ञान के विरुद्ध एक विस्तृत क्रान्ति प्रारम्भ हुई, जिसके फलस्वरूप सभी विज्ञान प्रभावित हुए इसी क्रान्ति को व्यवहारवाद के नाम से जाना जाता है। व्यवहारवाद राजनीतिक तथ्यों की व्यवस्था तथा विश्लेषण की एक विशिष्ट विधि है जिसे द्वितीय महायुद्ध के बाद अमेरिका के राजवैज्ञानिकों द्वारा इसका विकास … पढ़ना जारी रखें व्यवहारवाद परिभाषा व्यवहारवाद की आलोचना
राजनीतिशास्त्र अर्थ परिभाषाएं राजनीति शास्त्र का क्षेत्र
राजनीति को राज्य का विज्ञान माना जाता है तथा अध्ययन के विषय के रूप में इसे राजनीतिशास्त्र कहा जाता है। राजनीतिशास्त्र में राज्य की उत्पत्ति, कार्यों, संगठन, सरकार, व्यक्ति के साथ राज्य के सम्बन्धों की व्याख्या करने वाली धारणाओं का अध्ययन शामिल किया जाता है। यह माना जाता है कि राजनीतिशास्त्र का आरम्भ तथा अन्त … पढ़ना जारी रखें राजनीतिशास्त्र अर्थ परिभाषाएं राजनीति शास्त्र का क्षेत्र
राजनीति विज्ञान भूगोल संबंध अंतर
राजनीति विज्ञान भूगोल संबंध - अन्य मानविकी विज्ञानों की भाँति राजनीति विज्ञान का संबंध भूगोल के साथ भी है। भौगोलिक अवस्थिति एवं परिस्थितियाँ दोनों ही राज्य के निर्माणकारी तत्वों में शामिल होती हैं बिल्कुल उसी प्रकार जिस प्रकार अन्य कारक शामिल होते हैं। अनेक विद्वानों ने यह विचार व्यक्त किया है कि भौगोलिक और भौतिक … पढ़ना जारी रखें राजनीति विज्ञान भूगोल संबंध अंतर
राजनीति विज्ञान इतिहास संबंध अंतर
राजनीति विज्ञान इतिहास संबंध - इतिहास तथा राजनीति विज्ञान में अटूट और घनिष्ठ संबंध है। इस संबंध के विषय में अपने ही विचार व्यक्त करते हुए लार्ड ब्राइस ने लिखा है कि “राजनीति विज्ञान, अतीत तथा वर्तमान तथा इतिहास और राजनीति के मध्य में विद्यमान है। इसने अपनी विषय सामग्री एक से प्राप्त की है … पढ़ना जारी रखें राजनीति विज्ञान इतिहास संबंध अंतर
राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध व अंतर
राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध - राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र में अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। 18वीं शताब्दी तक तो दोनों का अध्ययन एक शास्त्र के अंतर्गत किया जाता था जिसे राजनीतिक अर्थशास्त्र कहा जाता था। इसका उदाहरण हमें प्राचीन काल की रचनाओं से भी मिलता है। प्राचीन काल में कौटिल्य ने व्यावहारिक राजनीति पर लिखी गयी … पढ़ना जारी रखें राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध व अंतर
राजनीति विज्ञान परिभाषाएं प्रकृति 7 विषय क्षेत्र
राजनीति शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम यूनानी विचारक अरस्तू ने किया था। अपनी पुस्तक के रूप में अरस्तू ने इस शब्दावली को अपनाया। उनकी पुस्तक का विषय 'पोलिस' या नगर- राज्य था। अतः उन्होंने नगर-राज्य से सम्बन्धित अध्ययन को यूनानियों के लिए राजनीति शब्द के साथ राज्य का अध्ययन तथा वह सब कुछ जुड़ा हुआ था, … पढ़ना जारी रखें राजनीति विज्ञान परिभाषाएं प्रकृति 7 विषय क्षेत्र
शिक्षण तकनीकी परिभाषाएं 7 विशेषताएं 7 अवधारणाएं
शिक्षण तकनीकी - शिक्षण विकास की एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है जो शिक्षक-छात्र की अन्तःप्रक्रिया द्वारा सम्पन्न होती है। वस्तुतः शिक्षण एक सोद्देश्य प्रक्रिया है, जिसका अन्तिम लक्ष्य बालक का पूर्ण विकास करना है। शिक्षण के दो प्रमुख तत्व माने गये हैं- (i) पाठ्यवस्तु तथा (ii) कक्षागत व्यवहार अथवा सम्प्रेषण शिक्षण तकनीकी में ये दोनों ही … पढ़ना जारी रखें शिक्षण तकनीकी परिभाषाएं 7 विशेषताएं 7 अवधारणाएं
शिक्षण कौशल परिभाषा विशेषताएं व 14 शिक्षण कौशल
शिक्षण कौशल - शिक्षण की प्रक्रिया में शिक्षक एक मदारी की भाँति क्रियाकलाप कर अपने पाठ को अधिगम कराने का प्रयास करता है साथ ही अपनी कला के कलात्मक पक्ष के निरन्तर विकास हेतु विभिन्न क्रियाओं अर्थात् शिक्षण कौशलों में सुधार हेतु प्रयास करता है। प्रभावशाली शिक्षण का विकास तभी होता है जब शिक्षण के … पढ़ना जारी रखें शिक्षण कौशल परिभाषा विशेषताएं व 14 शिक्षण कौशल
अल्पविकसित देश परिभाषाएं विशेषताएं व अर्थव्यवस्था के 6 लक्षण
अल्पविकसित देश - मोटे तौर पर विश्व के देशों को दो भागों में बाँटा जाता है विकसित तथा अल्पविकसित अथवा घनी तथा निर्धन राष्ट्र निर्धन देशों को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे निर्धन, पिछडे अल्पविकसित, अविकसित और विकासशील देश। ये सभी शब्द पर्यायवाची शब्द है, परन्तु इनके प्रयोग में मतभेद रहा है। इसी … पढ़ना जारी रखें अल्पविकसित देश परिभाषाएं विशेषताएं व अर्थव्यवस्था के 6 लक्षण
भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास
भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास - यदि 100 वर्षों के भारत के आर्थिक इतिहास का अवलोकन किया जाये तो भारतीय अर्थव्यवस्था की समृद्धि पुनः नितांत गरीबी व पिछड़ापन तथा पुनः आर्थिक प्रगति के दृष्टांत दिखाई पड़ते हैं। यहाँ भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास को अतीत एवं वर्तमान की आर्थिक दशाओं में विश्लेषित किया गया है। ब्रिटिश शासन … पढ़ना जारी रखें भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास






















