भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं - प्रथम पंचवर्षीय योजना के अनुसार, "एक अल्पविकसित अर्थव्यवस्था, एक ओर श्रम शक्ति दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों कामोवेश कम अनुपात में उपयोग द्वारा जानी जाती है।" ऐसी परिस्थितिकनीकों में विकास के अभाव तथा कुछ अवरोधक सामाजिक आर्थिक तत्वों के कारण होती है। जो अर्थव्यवस्था में स्फूर्ति शक्तियों को उभारने में रुकावट … पढ़ना जारी रखें भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं 10 परंपरागत तथा 8 नवीनतम
लेखक: rohitsharma991
आर्थिक विकास विशेषताएं – Top 10 आर्थिक विकास का महत्व
आर्थिक विकास विशेषताएं - आर्थिक विकास शब्द का उपयोग एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के मात्रात्मक मापों की व्याख्या करने के लिये नहीं बल्कि उन आर्थिक, सामाजिक तथा अन्य परिवर्तनों को व्यक्त करने के लिये किया जाता है, जो संवृद्धि उत्पन्न करते हैं। इसके लिये उत्पादन की तकनीकी में सामाजिक दृष्टिकोण में तथा संस्थाओं में परिवर्तन … पढ़ना जारी रखें आर्थिक विकास विशेषताएं – Top 10 आर्थिक विकास का महत्व
भाषा प्रयोगशाला के 8 लाभ और शिक्षण
भाषा प्रयोगशाला व्यष्टि शिक्षण और समूह शिक्षण में समन्वय करने और भाषा सीखने में बच्चों को सक्रिय रखने का एक आधुनिक प्रयास है। 1966 में अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने शैक्षिक तकनीकी की राष्ट्रीय परिषद् (National Council of Educational Technology, NCET) की स्थापना की। इस परिषद ने शिक्षा के क्षेत्र में वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग की उपयोगिता … पढ़ना जारी रखें भाषा प्रयोगशाला के 8 लाभ और शिक्षण
लेखन अर्थ लेखन के Top 7 आधार लेखन कौशल का विकास
लेखन अर्थ - भाषा के माध्यम से कुछ भी लिखना लेखन कहलाता है। परन्तु भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में लेखन का अर्थ है- अर्थपूर्ण लेखन, भाव एवं विचारों की लिखित रूप में अभिव्यक्ति भाव एवं विचार लेखन के मूल तत्त्व होते है। इस प्रकार अपने भाव एवं विचारों को लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त … पढ़ना जारी रखें लेखन अर्थ लेखन के Top 7 आधार लेखन कौशल का विकास
सूक्ष्म शिक्षण परिभाषाएं सिद्धांत 5 विशेषताएं कमियां सीमाएं
सूक्ष्म शिक्षण - शिक्षण के द्वारा ही शिक्षक, छात्रों में पाठ्य उद्देश्यों की प्राप्ति कर उसमें वांछित दक्षताओं का विकास करता है। शिक्षण कार्य की कुशलता शिक्षक के स्वःज्ञान पर निर्भर है, साथ ही शिक्षण कला कुशलता हेतु शिक्षक की दक्षता भी आवश्यक है। शिक्षा तकनीकी की यह धारणा है कि शिक्षक जन्मजात नहीं होते … पढ़ना जारी रखें सूक्ष्म शिक्षण परिभाषाएं सिद्धांत 5 विशेषताएं कमियां सीमाएं
पर्यावरण संबंधी कानून
पर्यावरण संबंधी कानून पर्यावरण प्रबन्धन का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष है। कानून के माध्यम से पर्यावरण की रक्षा करना अथवा पर्यावरण को हानि पहुँचाने पर सजा का प्रावधान करना। पर्यावरण संबंधी कानून की आवश्यकता इसलिए अधिक होती है कि जब व्यावसायिकता के आधार पर संसाधनों का शोषण होता है, अथवा अधिकतम लाभ प्राप्ति हेतु उद्योगों की … पढ़ना जारी रखें पर्यावरण संबंधी कानून
पठन अर्थ पठन के 6 आधार व पठन कौशल विकास
पठन अर्थ - लिखित भाषा को बाँचने की क्रिया को पढ़ना अथवा पठन कहा जाता है; जैसे-पम्फलेट पढ़ना, समाचार पत्र पढ़ना और पुस्तकें पढ़ना। परन्तु भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में पढ़ने का अर्थ होता है। पठन अर्थ किसी के द्वारा लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त भाव एवं विचारों को पढ़कर समझना। अर्थ बोध एवं … पढ़ना जारी रखें पठन अर्थ पठन के 6 आधार व पठन कौशल विकास
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 – उद्देश्य महत्व दोष
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 - यह अधिनियम पर्यावरण संरक्षण तथा उन्नयन एवं इससे सम्बन्धित तथ्यों का संरक्षण करता है। जून, 1972 में स्टाकहोम में मानवीय पर्यावरण को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने जो निर्णय लिये थे, उनमें भारत ने भी हिस्सा लिया एवं आश्वस्त किया कि मानवीय पर्यावरण के संरक्षण एवं सुधार के लिए यथासम्भव … पढ़ना जारी रखें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 – उद्देश्य महत्व दोष
विश्वविद्यालय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा – Top 20 उद्देश्य
विश्वविद्यालय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा - विश्वविद्यालयों में शिक्षा स्नातक कक्षाओं से आरम्भ होकर उच्च स्तर तक जाती है। विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की आयु प्रायः 18 से लेकर 25 वर्ष के मध्य रहती है। इस आयु के छात्र पूरी तरह से विचरणीय अर्थात् परिपक्व हो जाते हैं, क्योंकि वे किसी भी समस्या … पढ़ना जारी रखें विश्वविद्यालय स्तर पर पर्यावरण शिक्षा – Top 20 उद्देश्य
माध्यमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा के 16 उद्देश्य
माध्यमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा कक्षा नवमीं से लेकर कक्षा बारहवीं तक के छात्रों को प्रदान की जाती है। इन कक्षाओं के छात्रों की उम्र 15 वर्ष से लेकर 18 वर्ष के मध्य होती है। इस आयु के छात्रों का मानसिक स्तर ऐसा होता है कि वे किसी भी कार्य को ठीक प्रकार कार्यान्वित कर … पढ़ना जारी रखें माध्यमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा के 16 उद्देश्य
प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा के Top 10 उद्देश्य
प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य देश के पाँच से लेकर चौदह वर्ष तक के बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता पैदा करना है। बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। यदि बच्चों में अच्छी आदतों एवं विचारों को प्रारम्भ से ही समझाकर बताया जाये तो निश्चित ही उस देश का भविष्य … पढ़ना जारी रखें प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा के Top 10 उद्देश्य
जलवायु परिवर्तन के कारण
जलवायु परिवर्तन - अनियन्त्रित औद्योगिक विकास ने पृथ्वी, जल, वायु और आकश का जो हाल कर दिया है वह विश्व भर में वैज्ञानिकों की गम्भीर चिन्ता का विषय बन गया है। यही हाल रहा तो ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जल्द ही दुनिया रहने लायक नहीं बचेगी प्रदूषित पर्यावरण ऐसी दीर्घकालीन समस्याएँ पैदा करेगा, … पढ़ना जारी रखें जलवायु परिवर्तन के कारण
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण 11 Top Reasons
भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण - भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या एक कठिन समस्या है। जनसंख्या वृद्धि अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डालती है। जनसंख्या की तीव्र एवं नियंत्रित वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट कहा जाता है। भारत में बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी। यहां बढ़ती हुई जनसंख्या एक चिंताजनक स्थिति … पढ़ना जारी रखें भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण 11 Top Reasons
जैव विविधता ह्रास के कारण – 11 Top Reasons
जैव विविधता ह्रास के कारण - वर्तमान समय में जैव-विविधता का विलोपन बहुत तीव्रता से हो रहा है। इसके लिए प्राकृतिक - तथा मानवीय दोनों कारक उत्तरदायी हैं। प्राकृतिक कारक जैसे जलवायु परिवर्तन, ज्वालामुखी विस्फोट, भूकम्प, भू-स्खलन, अतिवृष्टि, शीतलहरी, हिमावरण, हिमद्रवण, मृदा अपरदन, आँधी-तूफान आदि के कारण जीव-जातियों का क्षरण हो रहा है। जैव विविधता … पढ़ना जारी रखें जैव विविधता ह्रास के कारण – 11 Top Reasons
सेमिनार के 4 प्रकार उपयोगिता सेमिनार के उद्देश्य
सेमिनार उच्च अध्यापन की एक अनुदेशनात्मक प्रविधि है जिसके अन्तर्गत किसी विषय पर एक पत्र प्रस्तुत किया जाता है जिस पर बाद में सामूहिक विचार-विमर्श किया जाता है ताकि विषय के जटिल पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। सेमिनार समूह के लिये एक स्थिति उत्पन्न करता है जहाँ पर लोगों में आपस में उस विषय … पढ़ना जारी रखें सेमिनार के 4 प्रकार उपयोगिता सेमिनार के उद्देश्य
पर्यवेक्षिक अध्ययन विधि के 5 गुण 6 दोष व सावधानियां
पर्यवेक्षिक अध्ययन विधि - सन् 1971 में डेजी मारविल जॉन ने इस पद्धति का सुझाव प्रस्तुत किया था। पर्यवेक्षित अध्ययन अपने नाम के अनुरूप अध्ययन की एक ऐसी विधि है जिसमें छात्र अपने निर्धारित कार्य के दौरान अपने सामाजिक अध्ययन - शिक्षक के उचित निर्देशन प्राप्ति के साथ अपनी समस्याओं का निराकरण भी प्राप्त करते … पढ़ना जारी रखें पर्यवेक्षिक अध्ययन विधि के 5 गुण 6 दोष व सावधानियां
मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?
मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों? - जहाँ तक शिक्षा के माध्यम की बात है लगभग सभी स्वतन्त्र देशों में शिक्षा का माध्यम वहाँ की मातृभाषाएँ ही हैं। जिन देशों में एक से अधिक मातृभाषाएँ हैं उन देशों में वहाँ की राष्ट्रभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया गया है। कुछ देश इसके अपवाद भी हैं। … पढ़ना जारी रखें मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?
समस्या समाधान विधि विशेषताएं 7 लाभ व 7 दोष
समस्या समाधान विधि छात्र की मानसिक क्रिया पर आधारित है क्योंकि इस विधि में समस्या का चयन करके छात्र स्वयं के विचारों एवं तर्क शक्ति के आधार पर मानसिक रूप से समस्या का हल ढूंढ़ कर नवीन ज्ञान प्राप्त करता है। समस्या समाधान विधि में विद्यालय का पाठ्यक्रम इस प्रकार संगठित किया जाता है कि … पढ़ना जारी रखें समस्या समाधान विधि विशेषताएं 7 लाभ व 7 दोष
समाजीकृत अभिव्यक्ति विधि परिभाषा गुण दोष सुझाव
समाजीकृत अभिव्यक्ति विधि शिक्षण की एक नवीन विधि है जिसमें शिक्षक के निर्देशन में परस्पर विचार-विमर्श कर सहयोग एवं सद्भाव के वातावरण में समूह के साथ कार्य करते हुए के छात्र विविध ज्ञान प्राप्त करते हैं। समाजीकृत अभिव्यक्ति विधि द्वारा कक्षा के वातावरण की कृत्रिमता को समाप्त कर उसके स्थान पर स्वाभाविकता उत्पन्न की जाती … पढ़ना जारी रखें समाजीकृत अभिव्यक्ति विधि परिभाषा गुण दोष सुझाव
देवनागरी लिपि 7 विशेषताएं व न्यूनताएं
देवनागरी लिपि एक ऐसी लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कुछ विदेशी भाषाएँ लिखीं जाती हैं। देवनागरी लिपि में 14 स्वर और 33 व्यंजन सहित 47 प्राथमिक वर्ण हैं। आज देवनागरी लिपि का उपयोग 120 से अधिक भाषाओं के लिए किया जा रहा है। अधिकतर भाषाओं की तरह देवनागरी भी बायें से दायें लिखी … पढ़ना जारी रखें देवनागरी लिपि 7 विशेषताएं व न्यूनताएं
पारिस्थितिक पिरामिड क्या है? यह कितने प्रकार के होते हैं?
पारिस्थितिक पिरामिड - प्रत्येक पारिस्थितिक तंत्र में प्राथमिक उत्पादों, प्रथम व द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ताओं तथा शीर्ष मांसाहारी जीवों की संख्या, जैव भार और ऊर्जा मात्रा में कुछ सम्बन्ध होता है। अगर उत्पादों एवं उपभोक्ताओं के बीच उनकी संख्या, जैवभार एवं ऊर्जा मात्रा के सम्बन्धों का आलेखी निरूपण किया जाये, तो एक स्तूपाकार आकृति बनती … पढ़ना जारी रखें पारिस्थितिक पिरामिड क्या है? यह कितने प्रकार के होते हैं?
मातृभाषा का क्या महत्त्व है? 4 Top Importance
सामान्यतः जिस भाषा को व्यक्ति अपने शिशु काल में अपनी माता एवं सम्पर्क में आने वाले अन्य व्यक्तियों का अनुकरण करके सीखता है, उसे उस व्यक्ति की मातृभाषा कहते हैं। परन्तु भाषा विज्ञान में इसे बोली कहा जाता है। भाषा वैज्ञानिक कई समान बोलियों की प्रतिनिधि बोली को विभाषा और कई समान विभाषाओं की प्रतिनिधि … पढ़ना जारी रखें मातृभाषा का क्या महत्त्व है? 4 Top Importance
भाषा के रूप कितने होते हैं? भाषा के 7 प्रकार
भाषा के रूप - संसार के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न भाषाओं का विकास हुआ है। ये भाषाएँ हजारों की संख्या में हैं। हमारे अपने देश भारत में ही सैकड़ों भाषाओं का प्रयोग होता है। किसी भी मनुष्य के लिए इन सबका सीखना सम्भव नहीं। अतः किसी मनुष्य को किन भाषाओं को सीखना चाहिए और किस … पढ़ना जारी रखें भाषा के रूप कितने होते हैं? भाषा के 7 प्रकार
पाठ्यक्रम संगठन के उपागम
पाठ्यक्रम संगठन के उपागम - पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धान्तों के उपरान्त यह जानना आवश्यक है कि उसका संगठन कैसे किया जाए? पाठ्यक्रम संगठन के लिए बालकों के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों के अतिरिक्त उनकी व्यक्तिगत भिन्नताओं के साथ ही पाठ्य सामग्री के विभिन्न स्वरूपों (पक्षों-ज्ञान, किया एवं भाव) आदि दृष्टिकोणों को ध्यान में रखना आवश्यक … पढ़ना जारी रखें पाठ्यक्रम संगठन के उपागम
व्याख्यान विधि के गुण व व्याख्यान विधि के दोष
व्याख्यान विधि - शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीनकाल से ही प्रचलित व्याख्यान विधि सामाजिक विज्ञान शिक्षण की प्रमुख विधि रही है। वस्तुतः व्याख्यान विधि उच्च कक्षाओं के शिक्षण कार्य में अपनाई जाने वाली एक प्रमुख विधि है जिसमें शिक्षार्थी एक श्रोता की भाँति और शिक्षक एक व्याख्याता की भाँति क्रिया करता है। यह विधि तब … पढ़ना जारी रखें व्याख्यान विधि के गुण व व्याख्यान विधि के दोष
बाघ परियोजना उद्देश्य व 27 बाघ रिजर्व परियोजनाएं
टाइगर प्रोजेक्ट (बाघ परियोजना) को 1 अप्रैल 1973 में शुरू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में बाघों की जनसंख्या को उचित स्तर पर बनाये रखना है ताकि वैज्ञानिक, सौन्दर्यात्मक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक मूल्य बनाए रखे जा सके। इससे प्राकृतिक धरोहर को भी संरक्षण मिलेगा जिसका लोगों को शिक्षा और मनोरंजन के रूप में लाभ … पढ़ना जारी रखें बाघ परियोजना उद्देश्य व 27 बाघ रिजर्व परियोजनाएं
सामाजिक अध्ययन पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत
सामाजिक अध्ययन पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत - पाठ्यक्रम, शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति का साधन होता है अर्थात् शैक्षिक क्रियाकलापों की पूर्णतया यों कहें कि शिक्षा प्रक्रिया को लक्ष्य तक पहुँचाने का मात्र एक साधन। पाठ्यक्रम के स्वरूप में शिथिलता या कोई भी दोष अधिगमकर्त्ता की निष्क्रियता को जन्म दे सकता है, जिससे शिक्षा के स्वरूप … पढ़ना जारी रखें सामाजिक अध्ययन पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत
सामाजिक अध्ययन विशेषताएं अवधारणा क्षेत्र प्रकृति
सामाजिक अध्ययन - 19वीं शताब्दी में विभिन्न विषयों जैसे इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीतिकशास्त्र और समाजशास्त्र का अध्ययन एक-दूसरे से पृथक् विषय के रूप में होता था। वास्तव में सामाजिक अध्ययन विषय का प्रादुर्भाव सन् 1892 में संयुक्त राज्य अमरीका में हुआ। 1921 में इस विषय के संबंध में विस्तृत अध्ययन करने के लिए अमेरिका में … पढ़ना जारी रखें सामाजिक अध्ययन विशेषताएं अवधारणा क्षेत्र प्रकृति
भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व व भाषा के 2 मूल आधार
भाषा भावाभिव्यक्ति एवं विचार-विनिमय का सांकेतिक साधन है। संसार के विभिन्न प्राणियों द्वारा प्रयुक्त भावाभिव्यक्ति के इन साधनों- अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और ध्वनि संकेतों को भाषा कहते हैं। इस अर्थ में संसार के सभी प्राणियों की अपनी-अपनी भाषाएँ हैं। अपने आदि काल में तो मनुष्य कार्य प्रायः अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और विभिन्न प्रकार … पढ़ना जारी रखें भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व व भाषा के 2 मूल आधार
वायु प्रदूषण परिभाषा प्रकार स्रोत रोकने के 5 उपाय
वायु प्रदूषण - वायु विभिन्न वायुमण्डलीय गैसों का यांत्रिक मिश्रण है जो मानव सहित विभिन्न जीवधारियों के जीवन का आधार है। एक सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 35 गैलन या 16 कि. ग्राम. वायु की जरूरत होती है। जिसे वह अपने आस-पास के आक्सीजन सम्पन्न वायुण्डल से प्राप्त करता है। बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन … पढ़ना जारी रखें वायु प्रदूषण परिभाषा प्रकार स्रोत रोकने के 5 उपाय






















