सरोज स्मृति सारांश

सरोज स्मृति सारांश

सरोज स्मृति सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का एक शोक गीत है। जिसमें कवि ने अपनी युवा कन्या सरोज की अकाल मृत्युपर अपने शोक संतप्त हृदय के उद्गार व्यक्त किए हैं। इस प्रसिद्ध लोकगीत में जीवन की पीड़ा और संघर्षों के हलाहल का पान करने वाले कविवर निराला के निजी जीवन के कुछ अंशों का उद्घाटन भी है। छायावादी कवि होने के कारण निराला ने अपनी बात को प्रतीकात्मक शैली में अभिव्यक्त किया है। किंतु अपवाद रूप में लिखी गई सरोज स्मृति जैसे कतिपय रचनाओं में उनकी आत्मचरित्र आत्मक शैली परिलक्षित होती है।

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आधुनिक हिन्दी काव्य

सरोज स्मृति

कवि का विद्रोह और क्रांति दर्शी समभाव पुत्री सरोज के प्रति उसका जीवन की ठोकर दर्शाई गई हैं। सरोज स्मृति कविता सरोज की मृत्यु के 2 वर्ष बाद सन 1935 ईस्वी में लिखी गई थी। अपनी पुत्री को संबोधित करते हुए इसमें कभी कहता है।मैं आज पूर्ण विकास का वर्णन कर रही हूं या मेरी मित्र नहीं है अपितु ज्योति की शरण में जाना है।यह सोचकर इस धरती से चली गई कि जब मेरे पिता समर्थ और असहाय अवस्था में जीवन रूपी मार्ग को पार करने का प्रयत्न करेंगे तो सामंतवाद में उन्हें संसार से पार उतार दूंगी इसके अलावा तेरे यहां से जाने का कोई कारण नहीं था।

Prachintam itihaas

सरोज जब सवा साल की थी। निराला जी की पत्नी की मृत्यु हो गई उनकी सास ने बहुत चाहा कि वह दूसरा विवाह कर ले कुंडली देखकर ज्योतिष ने भी बताया कि उनके भाग्य में विवाह का योग है। निराला ने आदमी उसका साहस दृढ़ निश्चय और पुरुषार्थ के साथ आज हुई जन्मपत्री अपनी 2 वर्षीय पुत्री सरोज को खेलने के लिए दे दी और स्वयं को मंगली बताते हुए विवाद से इंकार कर दिया।

जब सरोजी हुई और उसके विवाह का समय निकट आया और वर की तलाश शुरू हुई तो निराला का विद्रोही व्यक्तित्व प्राचीन दूरी और परंपराओं को तोड़ने के लिए व्यग्र हो उठा नियमों का बंधन तोड़ कर नवीन पद्धत से उन्होंने एक साहित्य विचारों वाले युवक से सरोज का विवाह किया। स्वयं लग्न के मंत्र पढ़े दहेज देकर मूर्ख नहीं बने शकुंतला की पुत्री को विदा किया।

कुछ दिन बाद इसी पुत्री ने लिया भाग कितने का दम भरने वाले से आहत होकर टूट गया है। निराला की सरोज स्मृति कविता करुणा व्यंग तथा दिव्य सौंदर्य का एक गीत है। जिसके शब्द में निराला की है इसमें का महत्व महान व्यक्तित्व प्रकट हुआ है।

आधुनिक ब्रजभाषा साहित्य, सरोज स्मृति

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की रचनाएँ

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