वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण – वायु विभिन्न वायुमण्डलीय गैसों का यांत्रिक मिश्रण है जो मानव सहित विभिन्न जीवधारियों के जीवन का आधार है। एक सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 35 गैलन या 16 कि. ग्राम. वायु की जरूरत होती है। जिसे वह अपने आस-पास के आक्सीजन सम्पन्न वायुण्डल से प्राप्त करता है। बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन के दहन, वृक्षों की कटाई और समुद्र में लैकटन के घटाव से वायु में जहरीली गैसों और अशुद्धियों की मात्रा बढ़ने लगती है और वायु प्रदूषित हो जाती है।

वायु के दूषित होने की प्रक्रिया अथवा वायुमण्डल में हानिकारक तत्वों की मात्रा का बढ़ना वायु प्रदूषण कहलाता है।

वायु प्रदूषण परिभाषा

वायु प्रदूषण परिभाषा

वायु प्रदूषण वह स्थिति है जिसमें वायुमण्डल में में मानव और विभिन्न जीवधारियों को हानि पहुँचाने वाले विषैले तत्व एकत्रित हो जाते हैं। वायु के प्रदूषकों में कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन एवं कणिकीय पदार्थ प्रमुख हैं। जब मानवीय अथवा प्राकृतिक कारणों से गैसों की निश्चित मात्रा एवं अनुपात में अवांछनीय परिवर्तन हो जाता है तो वायु में इन गैसों नाइट्रोजन, 78.09%, आक्सीजन 20.95%, आर्गन 0.93% तथा कार्बन डाइऑक्साइड 0.03% के अतिरिक्त कुछ अन्य विषाक्त गैसों या कणिकीय पदार्थ मिल जाते हैं तो उसे वायू प्रदूषण कहते हैं।

जब ने दूषित पदार्थों का सान्द्रण मानव ने तथा पर्यावरण को हानि पहुँचाने की सीमा तक बढ़ जाता है तो उसे वायु प्रदूषण कहते है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार

प्राकृतिक तथा मानव जनित स्त्रोतों से उत्पन्न बाहरी तत्वों के वायु में मिश्रण के कारण वायु की असन्तुलित दशा को वायु प्रदूषण कहते हैं।

प्रो० डॉ० सविन्द्र के अनुसार
वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण के प्रकार

वायु प्रदूषण का वर्गीकरण दो आधार पर किया जा सकता है-

  1. प्रदूषकों के प्रकार के आधार पर – वायु के प्रदूषण के आधार पर सामान्य तौर पर वायु प्रदूषण को दो प्रमुख प्रकारों में विभाजित किया जाता है-
    • गैसीय प्रदूषण
    • कणिकीय वायु प्रदूषण
  2. प्रदूषकों के स्रोत के आधार पर – प्रदूषकों के स्रोत के आधार पर वायु प्रदूषण को निम्न प्रकार में विभाजित किया जाता है-
    • स्वचालित वाहनों से प्रदूषण
    • औद्योगिक वायु प्रदूषण
    • तापी प्रदूषण
    • नगरीय प्रदूषण
    • ग्रामीण हवा प्रदूषण
    • नाभिकीय वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण के स्रोत

वायु प्रदूषण के दो प्रमुख स्रोत प्राकृतिक तथा मानव जनित स्रोत है।

  1. प्राकृतिक स्रोतों से उत्पन्न प्रदूषक – प्राकृतिक स्रोतों से उत्पन्न वायु को प्रदूषित करने वाले प्रदूषकों को निम्न वर्गों में विभाजित किया जाता है –
    • ज्वालामुखी के उद्गार से उत्पन्न प्रदूषक – धूल, राख, धुआँ, कार्बन डाईआक्साइड, हाइड्रोजन तथा अन्य गैसें ।
    • पृथ्वोत्तर स्रोत से उत्पन्न प्रदूषक – कामेट, मस्तरायड, मोटीयर आदि के पृथ्वी से टक्कर के कारण उत्पन्न कास्मिक, धूल आदि।
    • हरे पौधों से उत्पन्न प्रदूषक – पौधों की पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन द्वारा निस्सृत वाष्प, फूलों के पराग, पौधों के श्वसन द्वारा निर्मुक्त कार्बन डाईआक्साईड, वनों में आग लगने से उत्पन्न कार्बन डाईआक्साइड आदि।
    • कवक से उत्पन्न प्रदूषक कवक के बीजाणु, वाइरस आदि।
  2. मानव जनित स्रोतों से उत्पन्न प्रदूषक – मानव जनित स्रोतों से उत्पन्न वायु प्रदूषकों को निम्न वर्गों में विभाजित किया जा सकता है –
    • रसोईघरों तथा घरेलू तापन, कारखानों, नगरों, नगर पालिकाओं एवं घरों के कचरों को जलाने, स्वचालित वाहनों, कोयले एवं डीजल से चालित रेल के इंजनों, वायुयानों आदि से निस्सृत विभिन्न गैसें।
    • कारखानों, खदानों तथा नगरी केन्द्रों से निस्सृत ठोस कणिकीय पदार्थ।
    • कारखानों तथा रसोईघरों से निर्मुक्त ऊष्मा आदि।
वायु प्रदूषण के स्रोत

भारत में वायु प्रदूषण

आधुनिक उद्योगों, विविध परिवहन यानों, शक्ति प्लान्टस, कारखानों, दहन प्रक्रमों, कृषि प्रक्रमो, ऊर्जा प्रक्रमो इत्यादि द्वारा छोड़े गये प्रदूषक विश्व के समक्ष प्रमुख समस्या उत्पन्न कर दिये हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के नगरों में विश्व में सर्वाधिक वायु प्रदूषण मिलता है। वहाँ सड़क वाहनों की संख्या 100 मिलियन से अधिक है। वायु प्रदूषण मुख्य रूप से तीव्र दर से होने वाले औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के माध्यम से होता है। भारत के महानगरों में सर्वाधिक Air Pollution होता है।

इसके अलावा ताप शक्ति घरों तथा कई औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं कारखानों से भी भारी मात्रा में वायु प्रदूषकों का वायुमण्डल में उत्सर्जन होता है। भारत मे महानगरों में हवा प्रदूषण इस दर से बढ़ रहा है कि वह विश्व के विकसित देशों के महानगरों के हवा प्रदूषण प्रदूषण के स्तर की ओर अग्रसर हो रहा है। इस सन्दर्भ में भारत के कुछ नगरों के हवा प्रदूषण के उदाहरण प्रस्तुत हैं।

  1. नागपुर स्थित (NEERI) की 1998 की रपट के अनुसार कोलकाता मेट्रोपोलिटन डिस्ट्रिक्ट में समस्त स्रोत से 1305 टन प्रदूषकों का प्रतिदिन वायुमडल में उत्सर्जन होता है।
  2. भारत की राजधानी दिल्ली महानगर में वायु प्रदूषकों की सहनशक्ति से अधिक हो गया है। प्रदूषण 60% से अधिक भाग 10,00,000 पंजीकृत वाहनों (सन् 1989) से होता है।
  3. मुम्बई भारत का सबसे अधिक प्रदूषित महानगर है। विभिन्न स्रोतों से 1000 टन प्रदूषकों के प्रति चार घण्टों मे उत्सर्जन द्वारा महानगर की वायु प्रदूषित होती है।
  4. V.S. Gupta तथा सहयोगियों द्वारा औद्योगिक सूरत नगर में 1980-81 में किये गये अध्ययन से ज्ञात होता है कि सूरत नगर में विभिन्न स्रोतों से उत्सर्जित निलम्बित कणिकीय पदार्थों का एक न मीटर भीतर वायु में सान्द्रण 394 माइक्रोग्राम तक पहुँच गया।
भारत में वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण का पर्यावरण में प्रभाव

वायु प्रदूषण का कुप्रभाव मानव के स्वास्थ्य पर पड़ता ही है साथ ही साथ जलवायु, वनस्पति, पदार्थ, भवन इत्यादि पर भी पड़ता है। जिनका वर्णन निम्नांकित है। वायु प्रदूषण का प्रभाव निम्न कारणों पर पड़ता है। जो निम्न है.

इतिहास पर आक्रमण

विश्व में अनेकों ऐतिहासिक भवन हैं। जो वायु प्रदूषण का शिकार होते जा रहे हैं। रोम में ट्रोजन का स्तम्भ, लन्दन में सेन्टपाल नैथीड्रल, पश्चिमी जर्मनी में कोलीन कथीड्रल आदि मथुरा के खनिज तेल शोधन कारखाने के कारण ताजमहल व मथुरा के मंदिरों पर कुप्रभाव पड़ने की आशंका है। जिसे रोकने के लिए प्रयास जारी है।

स्वास्थय पर प्रभाव

विविध प्रकार के वायु प्रदूषक मानव स्वास्थ्य को विभिन्न रूपों में कुप्रभावित करते हैं तथा अनेकों रोग पैदा करते हैं। वायु प्रदूषण का मानव के स्वास्थ्य पर तुरन्त प्रभाव पड़ता है। कुछ कुप्रभाव तो दीर्घकालीन होते हैं। जैसे नागासाकी व हिरोशिमा पर हुई बम वर्षा का कुप्रभाव आज भी जापानी लोग कुष्ट, अन्धापन, लगड़ापन इत्यादि के रूप में भोग रहे हैं। शहरी जीवन में आज सिरदर्द, खाँसी, तपेदिक इत्यादि आम बीमारियाँ हो गयी हैं।

जलवायु पर प्रभाव

वायु प्रदूषण द्वारा मौसम और जलवायु दोनों कुप्रभावित होते हैं। गाँवों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों का मौसम अधिक कुप्रभावित होता है। जाड़े के दिनों में ईंधनों के अधिक प्रयोग से तापमान अप्रेक्षाकृत अधिक हो जाता है। वायुमण्डल में विविक्त का अधिभ्य हो जाने पर सौर्य शक्ति भी नगरीय क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में 15% से 20% तक पहुँचती है।

वनस्पति पर प्रभाव

वायु प्रदूषण मानव और पशु को जितना कुप्रभावित कर रहा है उससे तनिक भी कम कुप्रभाव पौधों पर नहीं पड़ रहा है। इससे पौधे दो रूपों में प्रभावित होते हैं। प्रथम पौधों की शारीरिक प्रक्रिया इससे कुप्रभावित होती है। जिससे पौधों का गुण बदल जाता है। उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है तथा उत्पादकता कम हो जाती है। इससे कोई दृश्य प्रभाव नहीं दिखलायी पड़ता है। द्वितीय दृश्य हानि द्वारा जैसे SO2, हाइड्रोजन, ओजोन, इत्यादि पौधों को कुप्रभावित करते हैं।

पदार्थों पर प्रभाव

वायु प्रदूषण का विविध पदार्थों यथा धातु, भवन, पेन्ट, चमड़ा, कागज, कपड़े, डाई, रबर इत्यादि पर भी कुप्रभाव पड़ता है। SO2 से प्रदूषित वायु का भवन निर्माण पदार्थों तथा जंग लगने लगता है तथा उनका स्वरूप विकृत हो जाता है, वायु प्रदूषण से घर में रखे कपड़े गंदे हो जाते हैं।

वायु प्रदूषण का पर्यावरण में प्रभाव

वायु प्रदूषण रोकने के उपाय

मानव जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक देश वायु प्रदूषण के कुप्रभावों के सम्बन्ध में ज्ञान अर्जित करे और वायु प्रदूषण को नियोजित ढंग से रोके क्योंकि पृथ्वी व वायुमण्डल दोनों एक-दूसरे से सम्बन्धित है और मानव की संयुक्त सम्पत्ति। वायु प्रदूषण रोकने के निम्न उपाय हैं –

  1. जन सामान्य में यह भावना उत्पन्न की जाये कि वह वायु प्रदूषण कम से कम करें।
  2. वायु प्रदूषण की हानियों से लोगों को अवगत कराया जाये।
  3. वायुमण्डल में विषैली गैसों को जाने से रोका जाए।
  4. चिमिनियों के ऊपर ऐसे फिल्टर लगाये जाए कि राख व कण फैलने न पावे।
  5. चिमनियों के ऊपर ऐसे यंत्र लगायें जाये जो धुआँ को चतुर्दिक फैलाये जिससे एक ही दिशा में धुआँ फैलने न पाए।
  6. उद्योगों से होने वाले वायु प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिए Fairic filter इत्यादि लगाने चाहिए।
  7. नये कल कारखाने को मानव बस्तियों के समीप नहीं स्थापित किया जाना चाहिए।
  8. पंखे और फिल्टर युक्त ऊँची-ऊँची चिमनियों को बनाया जाए।
  9. नगरों के बाहर बाह्य पक्ष (By Pass) बनाये जाए ताकि वाहनों को नगर के भीतर से होकर गुजरना बंद हो सके।
  10. नगर के भीतर से मल-मूत्र हटाने की उत्तम व्यवस्था की जाए।
  11. प्राचीन भारत में यज्ञ और हवन होता था जिससे वायुमण्डल पवित्र होता था। आज भी आवश्यकता इस बात की है कि अधिक से अधिक हवन किए जाए। वायु प्रदूषण रोकने के लिए हवन अत्यन्त कारगर सिद्ध हो रहा है।
  12. वन संरक्षण व वृक्षारोपण द्वारा भी वायु प्रदूषण कम होता है।
  13. वायु प्रदूषण फैलाने वालों के लिए कठोर दंड का विधान होना चाहिए। (14) वायु प्रदूषण की समस्या पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रत्येक देश में शोध केन्द्र की स्थापना की जानी चाहिए।
वायु प्रदूषण रोकने के उपाय

वायु प्रदूषण को अंग्रेजी में क्या कहते हैं?

Air Pollution

हवा प्रदूषण कैसे होता है?

वाहनों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाले गैसों के कारण हवा (वायु) प्रदूषित होती है।

प्रदूषित वायु से कौन-कौन से रोग हो सकते हैं?

प्रदूषित वायु से श्वास संबंधी रोग जैसे ब्रोंकाइटिस, बिलिनोसिस, गले का दर्द, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर आदि हो जाते हैं। श्वास रोगों के अतिरिक्त वायु में सल्फर-डाई-ऑक्साइड और नाइट्रोजन-डाई- ऑक्साइड की अधिकता से कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह आदि हो जाते हैं।

हवा प्रदूषण रोकने के उपाय क्या होने चाहिए?

निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करें क्योंकि सड़क पर जितनी कम गाड़ियाँ रहेंगी उतना कम प्रदूषण भी होगा। अपने बच्चों को निजी वाहन से स्कूल छोड़ने की जगह उन्हें स्कूल की बस में जाने के लिए प्रोत्साहित करें।

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