श्रेणी: समाजशास्त्र

पिछड़ा वर्ग समस्या समाधान सुझाव

पिछड़ा वर्ग समस्या समाधान सुझाव

पिछड़ा वर्ग समस्या समाधान सुझाव - पिछड़ा वर्ग शब्द का प्रयोग समाज के कमजोर वर्गों विशेषत: अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़े वर्गों के संदर्भ में किया जाता है। भारतीय संविधान में पिछड़ा वर्ग शब्द का प्रयोग किया गया है। सामान्यत: इन वर्गों में अनुसूचित जातियों, जनजातियों, भूमिहीन श्रमिकों एवं लघु कृषकों आदि को शामिल किया … पढ़ना जारी रखें पिछड़ा वर्ग समस्या समाधान सुझाव

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम - धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यकों की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 16 में कानून के समक्ष समानता एवं विधि के समान संरक्षण का आश्वासन दिया गया है। किसी भी … पढ़ना जारी रखें अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम – 7 Minority Development Programme

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम – 7 Minority Development Programme

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम - धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यकों की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 16 में कानून के समक्ष समानता एवं विधि के समान संरक्षण का आश्वासन दिया गया है। किसी भी … पढ़ना जारी रखें अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम – 7 Minority Development Programme

अल्पसंख्यक अर्थ 3 प्रकार व 13 अल्पसंख्यक की समस्याएं

अल्पसंख्यक अर्थ 3 प्रकार व 13 अल्पसंख्यक की समस्याएं

अल्पसंख्यक की समस्याएं - एक समाज या राष्ट्र में विभिन्न दो या अधिक वर्ग के लोग निवास करते हैं जिनमें एक वर्ग या समूह की संख्या आधी से कम होती है वह अल्पसंख्यक वर्ग के नाम से जाना जाता है। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि अल्प व्यक्तियों का समूह अल्पसंख्यक कहलाता है। … पढ़ना जारी रखें अल्पसंख्यक अर्थ 3 प्रकार व 13 अल्पसंख्यक की समस्याएं

अल्पसंख्यक अर्थ प्रकार समस्याएं

अल्पसंख्यक की समस्याएं - एक समाज या राष्ट्र में विभिन्न दो या अधिक वर्ग के लोग निवास करते हैं जिनमें एक वर्ग या समूह की संख्या आधी से कम होती है वह अल्पसंख्यक वर्ग के नाम से जाना जाता है। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि अल्प व्यक्तियों का समूह अल्पसंख्यक कहलाता है। … पढ़ना जारी रखें अल्पसंख्यक अर्थ प्रकार समस्याएं

धार्मिक असामंजस्यता 4 विशेषताएं व 4 कारण

धार्मिक असामंजस्यता 4 विशेषताएं व 4 कारण

धार्मिक असामंजस्यता - धर्म से समाज में नियंत्रण स्थापित होता है। धर्म से समाज में एकता संगठन व सामंजस्य की स्थापना होती है। एक से अधिक धर्म के अनुयाई साथ साथ रहने के कारण सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न होते हैं। बहुधर्मी वाले समाज में धार्मिक असामंजस्यता उत्पन्न होता है तथा समाज की एकता भंग होती है। … पढ़ना जारी रखें धार्मिक असामंजस्यता 4 विशेषताएं व 4 कारण

धार्मिक असामंजस्यता

धार्मिक असामंजस्यता

धार्मिक असामंजस्यता - धर्म से समाज में नियंत्रण स्थापित होता है। धर्म से समाज में एकता संगठन व सामंजस्य की स्थापना होती है। एक से अधिक धर्म के अनुयाई साथ साथ रहने के कारण सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न होते हैं। बहुधर्मी वाले समाज में धार्मिक असामंजस्यता उत्पन्न होता है तथा समाज की एकता भंग होती है। … पढ़ना जारी रखें धार्मिक असामंजस्यता

धर्म परिभाषा व धर्म व 5 मुख्य लक्षण विश्व के Top 4 धर्म

धर्म परिभाषा व धर्म व 5 मुख्य लक्षण विश्व के Top 4 धर्म

धर्म परिभाषा - धर्म मानव समाज का एक ऐसा शाश्वत, व्यापक और स्थाई तत्व है, जिसे समझे बिना हम समाज के रूप को समझने में असफल रहेंगे। प्रत्येक समाज में धर्म का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मानवीय व्यवहार तथा आचरण इससे प्रभावित रहता है। संपूर्ण विश्व की संचालक शक्ति के अस्तित्व को एक दृढ़ विश्वास … पढ़ना जारी रखें धर्म परिभाषा व धर्म व 5 मुख्य लक्षण विश्व के Top 4 धर्म

धर्म परिभाषा लक्षण

धर्म परिभाषा लक्षण

धर्म परिभाषा - धर्म मानव समाज का एक ऐसा शाश्वत, व्यापक और स्थाई तत्व है, जिसे समझे बिना हम समाज के रूप को समझने में असफल रहेंगे। प्रत्येक समाज में धर्म का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मानवीय व्यवहार तथा आचरण इससे प्रभावित रहता है। संपूर्ण विश्व की संचालक शक्ति के अस्तित्व को एक दृढ़ विश्वास … पढ़ना जारी रखें धर्म परिभाषा लक्षण

भारतीय समाज में धर्म की भूमिका – 7 सकारात्मक नकारात्मक पहलू

भारतीय समाज में धर्म की भूमिका – 7 सकारात्मक नकारात्मक पहलू

धर्म संस्कृति का एक हिस्सा है। धर्म मानवीय जीवन से संबंधित अनेक अनेक कार्यों की पूर्ति करता है, इसी मानवीय लगाव के कारण आदि काल से लेकर वर्तमान काल तक सभी समाजों में धर्म ही दिखाई देता है। धर्म जीवन के मूल्यों का महत्वपूर्ण अर्थ स्पष्ट करता है। सदाचार की भावना से मनुष्य में आत्म … पढ़ना जारी रखें भारतीय समाज में धर्म की भूमिका – 7 सकारात्मक नकारात्मक पहलू

भारतीय समाज में धर्म की भूमिका

धर्म संस्कृति का एक हिस्सा है। धर्म मानवीय जीवन से संबंधित अनेक अनेक कार्यों की पूर्ति करता है, इसी मानवीय लगाव के कारण आदि काल से लेकर वर्तमान काल तक सभी समाजों में धर्म ही दिखाई देता है। धर्म जीवन के मूल्यों का महत्वपूर्ण अर्थ स्पष्ट करता है। सदाचार की भावना से मनुष्य में आत्म … पढ़ना जारी रखें भारतीय समाज में धर्म की भूमिका

लैंगिक असमानता के कारण व क्षेत्र

लैंगिक असमानता के कारण व क्षेत्र

लैंगिक असमानता का आशय समाज में स्त्रियों एवं पुरुषों में भेदभाव किए जाने से है। लैंगिक असमानता का प्रयोग जैविकीय एवं सामाजिक दोनों भावो में किया जाता है। जीव विज्ञान में लिंग का आशय विशिष्ट जैविककीय संरचना से है। इसमें विशेष शारीरिक व मानसिक दशाओं का समावेश होता है। समाजशास्त्र में स्त्री पुरुषों का अध्ययन … पढ़ना जारी रखें लैंगिक असमानता के कारण व क्षेत्र

लैंगिक असमानता

लैंगिक असमानता

लैंगिक असमानता का आशय समाज में स्त्रियों एवं पुरुषों में भेदभाव किए जाने से है। लैंगिक असमानता का प्रयोग जैविकीय एवं सामाजिक दोनों भावो में किया जाता है। जीव विज्ञान में लिंग का आशय विशिष्ट जैविककीय संरचना से है। इसमें विशेष शारीरिक व मानसिक दशाओं का समावेश होता है। समाजशास्त्र में स्त्री पुरुषों का अध्ययन … पढ़ना जारी रखें लैंगिक असमानता

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां – 6 धर्म की आधुनिक प्रवृत्तियां

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां – 6 धर्म की आधुनिक प्रवृत्तियां

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां - यदि धर्म रूढ़िवादी पर्वती का तथा वस्तु स्थित बनाए रखने का समर्थक है, परंतु आधुनिक समाज में तेजी से बदलती परिस्थितियों के प्रवेश के प्रवेश में यह स्वयं को बचाने में असमर्थ हो गया, जिसके परिणाम स्वरूप धर्म में नई प्रवृतियां दिखाई दी। धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां धार्मिक संकीर्णता में … पढ़ना जारी रखें धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां – 6 धर्म की आधुनिक प्रवृत्तियां

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां - यदि धर्म रूढ़िवादी पर्वती का तथा वस्तु- स्थित बनाए रखने का समर्थक है, परंतु आधुनिक समाज में तेजी से बदलती परिस्थितियों के प्रवेश के प्रवेश में यह स्वयं को बचाने में असमर्थ हो गया, जिसके परिणाम स्वरूप धर्म में नई प्रवृतियां दिखाई दी। धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां धार्मिक संकीर्णता में … पढ़ना जारी रखें धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

जाति अर्थ परिभाषा लक्षण

जाति अर्थ परिभाषा लक्षण

भारतीय सामाजिक संस्थाओं में जाति एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्था है। डॉक्टर सक्सेना का मत है कि जाति हिंदू सामाजिक संरचना का एक मुख्य आधार रही है, जिससे हिंदुओं का सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन प्रभावित होता रहा है। श्रीमती कर्वे का मत है कि यदि हम भारतीय संस्कृति के तत्वों को समझना चाहते हैं … पढ़ना जारी रखें जाति अर्थ परिभाषा लक्षण

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव – 7 effects of poverty in hindi

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव – 7 effects of poverty in hindi

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव क्या है? निर्धनता अनेक सामाजिक बुराइयों को जन्म देती है। निर्धनता के समाज पर अनेक प्रभाव पड़ते हैं। जिन्हें निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है- निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निर्धनता समाज को और अधिक निर्धन करती है। निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निम्न है- अपराधों में वृद्धि भिक्षावृत्ति … पढ़ना जारी रखें निर्धनता का सामाजिक प्रभाव – 7 effects of poverty in hindi

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव क्या है? निर्धनता अनेक सामाजिक बुराइयों को जन्म देती है। निर्धनता के समाज पर अनेक प्रभाव पड़ते हैं। जिन्हें निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है- निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निर्धनता समाज को और अधिक निर्धन करती है। निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निम्न है- अपराधों में वृद्धिभिक्षावृत्तिचरित्र का … पढ़ना जारी रखें निर्धनता का सामाजिक प्रभाव

भारत में निर्धनता के कारण – 10 Reasons of Poverty in Hindi

भारत में निर्धनता के कारण – 10 Reasons of Poverty in Hindi

भारत में निर्धनता के कारण - कभी कभी अपनी जीविका चलाने के लिए आवश्यक वस्तुओं को एकत्र करना भी मुश्किल हो जाता है। आवश्यक वस्तुओं के अभाव में निर्धनता का सामना करना पड़ता है। उत्पादन के ठीक होने किंतु उसका वितरण असमान होने पर भी निर्धनता का जन्म होता है। उत्पादन के साधनों पर कुछ … पढ़ना जारी रखें भारत में निर्धनता के कारण – 10 Reasons of Poverty in Hindi

भारत में निर्धनता के कारण

भारत में निर्धनता के कारण

भारत में निर्धनता के कारण निम्न है- अशिक्षा - भारत में सन 2001 की जनगणना के अनुसार अब तक जनसंख्या का केवल 65.38% भाग ही साक्षर है, इस प्रतिशत में व्यक्ति भी सम्मिलित है जो मामूली रूप से लिख पढ़ सकते हैं।उद्योगों की कमी - भारत में आदमी प्रमुख उद्योग शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित … पढ़ना जारी रखें भारत में निर्धनता के कारण

निर्धनता अर्थ एवं परिभाषा

निर्धनता अर्थ एवं परिभाषा

भारत में निर्धनता की परिभाषा पौष्टिक आहार के आधार पर दी गई है। योजना आयोग के अनुसार किसी व्यक्ति को गांव में यदि 2400 कैलोरी और शहरों में 2100 कैलोरी प्रतिदिन की ऊर्जा का भोजन उपलब्ध नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि वह व्यक्ति गरीबी की रेखा के नीचे अपना जीवन व्यतीत कर … पढ़ना जारी रखें निर्धनता अर्थ एवं परिभाषा

निर्धनता का अर्थ एवं परिभाषा

निर्धनता का अर्थ एवं परिभाषा

भारत में निर्धनता की परिभाषा पौष्टिक आहार के आधार पर दी गई है। योजना आयोग के अनुसार किसी व्यक्ति को गांव में यदि 2400 कैलोरी और शहरों में 2100 कैलोरी प्रतिदिन की ऊर्जा का भोजन उपलब्ध नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि वह व्यक्ति गरीबी की रेखा के नीचे अपना जीवन व्यतीत कर … पढ़ना जारी रखें निर्धनता का अर्थ एवं परिभाषा