पंचतंत्र की कहानियां – 15 शिक्षाप्रद कहानियां

पंचतंत्र की कहानियां – 15 शिक्षाप्रद कहानियां

पंचतंत्र की कहानियां संस्कृत साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसमें सबसे अच्छी नीति-संबंधी और प्रेरक कहानियां हैं। भारतीय भाषाओं में ही नहीं, दुनिया की किसी भी भाषा में ऐसी प्रेरक कहानियाँ नहीं मिलतीं। यही कारण है कि दुनिया की कई भाषाओं में पंचतंत्र की कहानियों का अनुवाद किया गया है। ऐसी कई छोटी-छोटी किताबें हिंदी में प्रकाशित हुई हैं। इसमें पंचतंत्र की सर्वश्रेष्ठ और प्रेरणादायक कहानियों को सरल और प्राणिक भाषा में रखा गया है। कहानियों को उनके अनुसार नए सांचों में ढालने का प्रयास किया गया है।

पंचतंत्र की कहानियां

पंचतंत्र की कहानियां विष्णु शर्मा द्वारा 200 ईसवी पूर्व लिखी गई थीं। इन कहानियों में जानवरों के द्वारा मित्रता और शत्रुता के संबंध में सीख देने की कोशिश की गई है। इनमें से कुछ कहानियां इस प्रकार है-

  1. शेर और चूहा
  2. लकड़ियों का गट्ठर
  3. गाने वाली बुलबुल
  4. टिन का बहादुर सिपाही
  5. अबाबील की दूरदर्शिता
  6. नन्ही लाल मुर्गी
  7. सूर्य और हवा
  8. भेड़िया और सारस
  9. हिरण और शिकारी
  10. घमंडी पेड़
  11. कंजूस व्यक्ति
  12. जैसे को तैसा
  13. चालाकी नहीं चली
  14. आलसी चिड़िया
  15. खुजली

शेर और चूहा

जंगल का राजा शेर एक दिन पेड़ की छाया में सो रहा था।एक चूहा आया और शेर की नाक पर उछल-कूद करने लगा। शेर ने चूहे को दबोच लिया। मुझे माफ कर दीजिए मुझसे अनजाने में गलती हो गई है। मुझे न मारे किसी दिन मैं भी आपके काम आ सकता हूँ। शेर चूहे की बात सुनकर हँस पड़। एक छोटा सा जानवर इतने बड़े शेर का किस प्रकार भला कर सकता है? परंतु शेर को उस पर दया आ गयी| उसने चूहे को छोड़ दिया तथा उसे चेतावनी दी कि फिर कभी मुझे नींद से मत जगाना। कुछ दिन बाद एक शिकारी जंगल में आया। वह अपना जाल बिछाकर चला गया। शेर शिकारी द्वारा फैलाए जाल में फँस गया शेर ने जाल की रस्सी को तोड़ने की कोशिश की परंतु वह असफल रहा शेर ने अपने मित्र चूहे को धन्यवाद किया और कहा आज मैं जान गया कि छोटा सा जानवर भी विपत्ति में सहायक हो सकता है।

शिक्षा – कर भला सो हो भला

शेर और चूहा
पंचतंत्र की कहानियां

लकड़ियों का गट्ठर

एक वृद्ध पिता अपने तीन पुत्रों के साथ रहता था। तीनों पुत्र बहुत मेहनती थे पर आपस में झगड़ते रहते थे। एक दिन पिता ने सब बच्चों को बुलाया।  अपने बड़े पुत्र से पिता ने वह गट्ठर तोड़ने के लिए कहा। पुत्र अत्यंत बलशाली था। अपनी पूरी शक्ति लगाकर भी वह उसे तोड़ने में असफल रहा।  बारी-बारी से अन्य पुत्रों ने भी अपना जोर आजमाया पर सभी असफल रहे। अब पिता ने गट्ठर को खोलकर उन्हें एक-एक लकड़ी उठाने के लिए कहा।  सभी पुत्रों ने गट्ठर में से एक-एक लकड़ी उठा ली। पिता ने पुत्रों से कहा, “इन्हें तोड़ो।” सबने बड़ी सरलता से अपनी-अपनी लकड़ियाँ तोड़ डालीं और आश्चर्य से पिता की ओर देखने लगे ।  मुस्कराते हुए पिता ने कहा, “मेरी मृत्यु के पश्चात् तुम सब इसी गट्ठर की तरह इकट्ठे रहना। आपस में कभी लड़ाई नहीं करना। एकता बनाए रखना।  कोई भी शक्ति तुम्हें तोड़ नहीं पाएगी। यदि अलग हो जाओगे तो उस लकड़ी की भांति तुरंत टूट जाओगे।” पुत्रों को बात समझ आ गयी और उन्होंनें प्रेम से साथ रहने का वादा किया।

शिक्षा : एकता में बहुत बल होता हैं।

गाने वाली बुलबुल

वर्षों पुरानी बात है… चीन में एक राजा था। उसके महल के पास में ही एक जंगल था। इस जंगल में रहने वाली एक बुलबुल बहुत ही मीठी आवाज में गाती थी।  एक दिन राजा ने अपने मंत्री को उसे लाने का आदेश दिया। मंत्री किसी तरह उसे पकड़ने में सफल हो गया। एक पिंजरे में बंद कर राजा के सामने बुलबुल को लाया गया।  पर कैद हो जाने के कारण बुलबुल उदास हो गई। उसने खाना-पीना-गाना सब छोड़ दिया। कई दिन व्यतीत हो गए। रानी को बुलबुल पर दया आई और उसने पिंजरा खोल दिया। बुलबुल उड़ती हुई अदृश्य हो गई।  राजा बुलबुल के संगीत का दीवाना था। उसने मंत्री से दूसरी चिड़िया लाने के लिए कहा। मंत्री ने राज्य के शिल्पकार से हू-ब-हू वैसी ही मिट्टी की बुलबुल बनवाई जो गाती भी थी।  राजा सोने से पहले उसका गाना सुनता था। एक दिन वह गिरकर टूट गई। राजा उदास और बीमार रहने लगा। एक दिन रानी की कृपा का प्रतिदान देने वही बुलबुल आई और खिड़की पर बैठकर गाने लगी।  राजा ठीक होने लगा। अब प्रतिदिन रात को बुलबुल आती, गाना गाती और राजा को सुलाकर चली जाया करती थी।

शिक्षा : स्वतंत्रता अनमोल है।

पंचतंत्र की कहानियां
पंचतंत्र की कहानियां

टिन का बहादुर सिपाही

शानू एक बहुत ही प्यारा बच्चा था। उसके पास रंग-बिरंगे खिलौने थे। उनमें टिन के सिपाही की पूरी सेना भी थी पर एक सिपाही लंगड़ा था। खिलौनों में एक गत्ते का महल और एक नर्तकी भी थी।  शानू ने लंगड़े सिपाही में कुछ विशेषता देखी और उसे सेना का कप्तान बना दिया। शाम के समय शानू जब बाहर खेलने जाता तो खिलौने सजीव होकर आपस में खेलना शुरु कर देते। कप्तान नर्तकी की सुंदरता से उसकी ओर आकर्षित होने लगा था।  एक दिन शानू के मित्र आए। एक मित्र ने लंगड़े कप्तान को बेकार समझकर खिड़की से बाहर नाली में फेंक दिया। कप्तान बहता-बहुता गटर चला गया और वहाँ से समुद्र में।  वहाँ उसे एक बड़ी मछली ने निगल लिया। वह मछली एक मछुआरे द्वारा पकड़ी गई। मछुआरे से उसे एक बावर्ची ने खरीद लिया। बावर्ची ने जब उसे काटा तो कप्तान बाहर निकला।  कप्तान को वह जगह जानी पहचानी सी लगी। तभी उसे नर्तकी दिखाई दी। बावर्ची कप्तान को शानू को देने जा रहा था कि अचानक उसका पैर एक छोटी गाड़ी पर पड़ा और बावर्ची फिसलकर गिरा ।  कप्तान हाथ से छूटकर अलाव में गिर पड़ा। कप्तान जलने लगा तभी हवा का झोंका नर्तकी को उड़ाकर आग में ले गया। अंततः कप्तान को उसकी नर्तकी मिल गई। 

शिक्षा : कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अबाबील की दूरदर्शिता

बहुत साल पहले की बात है… पक्षियों का एक झुंड एक खेत के ऊपर से जा रहा था। पक्षियों के झुंड में एक नन्ही अबाबील भी थी। अबाबील अपनी दूरदर्शिता के लिए प्रसिद्ध है।  उसने सभी चिड़ियों से कहा, “इस किसान से सावधन रहना। चलो, नीचे चलकर, हम सब मिलकर, सारे बीजों को चुगकर निकाल लेते हैं। किसान सन के बीज बो रहा है। “  सभी चिड़ियों ने कहा, “तो बोने दो, हमें उससे क्या करना है?” अबाबील ने समझाया, “सन से रस्सियाँ बनाई जाती हैं और फिर उन्हीं रस्सियों से जाल बनाया जाता है जो हम जैसी चिड़ियों तथा मछलियों को पकड़ने के काम में लाया जाता है। इन्हें निकाल दो अन्यथा पछताओगे । “  अबाबील के कहने पर किसी ने भी उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। थोड़े समय बाद सन में अंकुर फूट गए और पौधे बनने लगे। फसल तैयार हो गई और उससे रस्सी बनाई गई।  रस्सी से जाल बुना गया और वही जाल चिड़ियों को पकड़ने में काम लाया जाने लगा। अबाबील का कहना सही निकला। 

शिक्षा : पहले से ही सावधानी बरतना अच्छा होता है।

नन्ही लाल मुर्गी

एक नन्ही लाल मुर्गी अपने तीन मित्रों कुत्ता, बत्तख, और बिल्ली के साथ रहती थी। नन्ही लाल मुर्गी बहुत मेहनती थी परन्तु उसके दोस्त आलसी थे।  एक दिन उसे एक मक्के का दाना मिला। मेहनती मुर्गी ने अकेले ही दाना बोया। जब उसमें मक्के लगे तो अकेले ही काटा। फिर वो उसे चक्की वाले के पास ले गई।  चक्की वाला मुर्गी की मेहनत से बहुत प्रसन्न हुआ। उसने मक्के का आटा पीसा और उसे दे दिया। घर आकर अपने आलसी मित्रों को शिक्षा देने के लिए नन्ही लाल मुर्गी ने मात्र अपने लिए सूप बनाया और सब देखते रह गए। 

शिक्षा : मेहनत का फल मीठा होता है।

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सूर्य और हवा

एक समय की बात है… सूर्य और हवा में बहस छिड़ गई कि कौन अधिक बलवान है। हवा अपने आपको बलशाली बता रही थी पर सूर्य उसे बड़ा नहीं मान रहा था। मामला उलझता ही जा रहा था।  तभी उन्हें सामने से एक यात्री आता दिखाई दिया। यात्री को देखकर हवा को एक युक्ति सूझी। उसने सूर्य से कहा, “देखो, एक यात्री आ रहा है। हममें से जो भी उसकी चादर उतरवा देगा वही बलशाली होगा। तुम बादलों की ओट में हो जाओ।”  सूर्य बादलों के पीछे छिप गया।

हवा जोर से चलने लगी। हवा की गति जितनी बढ़ती यात्री उतनी ही तेजी से अपनी चादर को पकड़ लेता ताकि ठंड से बचा रहे। जोर लगा-लगा कर हवा थक गई, हार गई पर किसी भी प्रकार वह यात्री की चादर नहीं उतरवा पाई। अंततः वह शांत हो गई।  अब सूर्य की बारी आई। वह बादलों के पीछे से निकलकर चमकने लगा। तेज गर्मी से परेशान होकर यात्री ने अपनी चादर उतार दी। हवा ने अपनी हार मान ली और सूर्य विजयी हुआ। 

शिक्षा : कभी भी अपनी ताकत और योग्यता पर घमंड नहीं करना चाहिए।

भेड़िया और सारस

एक बार एक भेड़िया अपना शिकार खा रहा था। तभी एक हड्डी का टुकड़ा उसके गले में अटक गया। जिससे उसे गले में दर्द होने लगा। भेड़िया दर्द से छटपटाने लगा।  उसे साँस लेने में भी कठिनाई होने लगी। कइयों से उसने सहायता माँगी और बदले में पुरस्कार देने का भी वायदा किया पर किसी ने उसकी सहायता नहीं की।  अंत में एक सारस को उस पर दया आई। उसने भेड़िए को कहा, “तुम करवट लेकर अपना मुँह खोलकर लेट जाओ।”  भेड़िया अपना मुँह खोलकर लेट गया। सारस ने अपनी लंबी चोंच उसके गले में डाली और फँसी हुई हड्डी को खींचकर निकाल दिया। भेड़िए की जान में जान आ गई।  सारस ने भेड़िए से अपने पुरस्कार की माँग की तो भेड़िए ने कहा, “मूर्ख पक्षी, तुम अपने भाग्य को सराहो कि अभी तक जीवित हो।  जब तुमने अपनी चोंच मेरे मुँह में डाली थी, चाहता तो तभी तुम्हें चट कर जाता। क्या तुम्हारा जीवित रहना किसी पुरस्कार से कम है?” 

शिक्षा : भले के साथ ही भलाई करनी चाहिए।

सूर्य
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हिरण और शिकारी

एक हिरण था। पोखर में पानी पीने गया। पानी पीते समय उसने पानी में अपनी परछाई देखी। हिरण प्रसन्न होते हुए सोचने लगा, “ईश्वर ने मुझे इतने सुंदर सींग दिए हैं…  काश! मेरे पैर भी इतने ही खूबसूरत होते। ये इतने पतले हैं कि मैं इन्हें देखकर दुखी हो जाता हूँ।” तभी एक शिकारी ने निशाना साधकर हिरण पर तीर छोड़ दिया।  हिरण ने अपने फुर्तीले पैरों से छलांग लगाई और दूर निकल गया। पर उसके सींग एक पेड़ में उलझ गए। हिरण ने बहुत जोर लगाया पर भागने में सफल नहीं हुआ। शिकारी ने उसे पकड़ लिया। 

शिक्षा : अपनी ताकत को पहचानो।

घमंडी पेड़

सड़क के किनारे एक बरगद और एक आम का पेड़ था। आम के पेड़ पर रसीले एवं मीठे आम लगते थे। सभी लोग उसकी छाँव में विश्राम करने के साथ-साथ उसके मीठे फलों का भी आनंद लेते थे।  बूढ़े बरगद की तरफ कोई भी ध्यान नहीं देता था। धीरे-धीरे उस आम के पेड़ को अपने ऊपर बड़ा घमंड हो गया। वह बरगद के पेड़ से बोला,  “प्रत्येक व्यक्ति मुझे ओ मेरे स्वादिष्ट फलों को ही पसंद करता है, तुम्हें तो कोई पूछता भी नहीं।” बरगद का पेड़ बोला. “इतना घमंड अच्छा नहीं,  प्रत्येक वस्तु का अपना एक विशेष महत्व और उपयोग होता है।” इसके अगले ही दिन कुछ बच्चों ने उस घमंडी पेड़ के सारे आम तोड़ डाले और टहनियों एवं पत्तों को भी नुकसान पहुंचाया।  अब आम का पेड़ बड़ा ही भद्दा लग रहा था। आम के पेड़ की ऐसी स्थिति देखकर बरगद का पेड़ बोला, “घमंड हमेशा मुसीबत में डालता है। तुम्हारी खूबसुरती ही तुम्हारे लिए मुसीबत बन गई, जबकि मैं अब भी यहाँ पर वैसे ही सुरक्षित खड़ा हूँ।”

ट्री
पंचतंत्र की कहानियां

कंजूस व्यक्ति

एक दिन एक कंजूस व्यक्ति के दोस्त ने अपने मित्र की कंजूसी की आदत छुड़ाने की सोची। वह उसे बाजार ले गया और बोला, “प्रिय मित्र, तुम क्या खाना पसंद करोगे?”  कंजूस बोला, “भूख लगी है, चलो भोजन किया जाए।” वे एक होटल में जाकर। कंजूस के दोस्त ने होटल मालिक से पूछा, “भोजन कैसा है?” होटल मालिक ने कहा,  “मिठाई की तरह स्वादिष्ट!” कंजूस का दोस्त बोला, “क्यों न भोजन के स्थान पर कुछ मीठा खाया जाए।”

फिर वे एक शहद बेचने वाले की दुकान पर गए और पूछा.  “शहद कैसा है?” शहद बेचने वाला बोला, “एकदम शुद्ध बिल्कुल पानी की तरह।’” कंजूस का दोस्त बोला, “अरे, फिर यूँ ही पैसे क्यों व्यर्थ करें।  चलो, घर चलते हैं। मैं तुम्हें घर पर शुद्ध शहद के रूप में पानी दूंगा।” फिर घर पहुँचकर कंजूस के दोस्त ने उसे पानी से भरा एक बर्तन थमा दिया। कंजूस समझ गया कि उसके दोस्त ने उसे सबक सिखाने के लिए ही ऐसा किया है। इसलिए उसने उस दिन से कंजूसी छोड़ दी।

जैसे को तैसा – पंचतंत्र की कहानियां

एक आम विक्रेता घूम-घूमकर आम बेच रहा था। कुछ देर बाद वह एक पान की दुकान के पास पान खाने के लिए रुका। उधर पान बेचने वाले ने आम देखे तो वह आम बेचने वाले से चिल्लाकर बोला,  “आम वाले! अगर तुम्हें बुरा न लगे तो पान के बदले आम दोगे?” आम विक्रेता खुशी-खुशी तैयार हो गया। लेकिन पान बेचने वाला उसे धोखा देना चाहता था।  उसने एक छोटा-सा पान का पत्ता लिया और एक छोटा पान बनाकर आम विक्रेता को दे दिया। आम विक्रेता ने उससे चूना डालने को कहा। लेकिन पान वाला बोला,  “जाओ और पान को दीवार से रगड़ो। चूना अपने आप मिल जाएगा।” आम विक्रेता समझ गया कि पान वाला उसे धोखा दे रहा है। इसलिए उसने पान वाले को हरा आम दिया। हरा आम देखकर पान वाला बोला, “मुझे पीला पका हुआ आम दो।” उसकी बात सुनकर आम विक्रेता हँसते हुए बोला, “जाओ और पीले रंग से पुती हुई दीवार से आम को रगड़ो तो वह पीला हो जाएगा।”  इस प्रकार आम विक्रेता ने पान वाले के साथ वैसा ही व्यवहार किया, जैसा कि उसने किया था। इसे ही कहा जाता है- ‘जैसे को तैसा’।

चालाकी नहीं चली

भोलू और गोलू नामक दो कौवे अच्छे मित्र थे। एक दिन उन दोनों में अपनी-अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए झगड़ा होने लगा। उन्होंने तय किया कि जो चुनौती को पूरा कर लेगा, वही श्रेष्ठ होगा। चुनौती यह थी कि दोनों को अपनी चोंच में एक एक भरा हुआ थैला लेकर उड़ना था। जो अपने थैले को लेकर आकाश में अधिक ऊपर उड़ेगा, वही श्रेष्ठ होगा। गोलू बहुत ही चालाक कौआ था। उसने अपने थैले में रूई और भोलू के थैले में नमक भरा और दोनों ने उड़ान भरी। जल्दी ही थैले का वजन कम होने के कारण गोलू भोलू से अधिक ऊपर उड़ने लगे। और भारी वजन होने के कारण भोलू ऊँची उड़ान भरने में असमर्थ था।  तभी बारिश शुरू हो गई। रूई पानी सोखने के कारण भारी हो गई और नमक घुलनशील होने के कारण पानी में घुल गया। इसके फलस्वरूप गोलू का थैला भारी और भोलू का थैला हल्का हो गया। अब भोलू ने गोलू के मुकाबले अधिक ऊँची उड़ान भरी। इस तरह भोलू वह चुनौती जीत गया।

पंचतंत्र की कहानियां
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आलसी चिड़िया

चिक्की, मिक्की नाम की दो चिड़िया एक घोंसले में रहती थीं। दोनों बहुत आलसी थीं। सर्दी का मौसम था। चारों तरफ ठंडी हवा चल रही थी।  बर्फवारी भी हो रही थी। संयोग से उनके घोंसले में एक छेद हो गया। छेद से ठंडी हवा आने के कारण उनका घोंसला एकदम ठंडा हो जाता था।  चिक्की और मिक्की दोनों को भारी ठंड लगती। चिक्की ने सोचा, ‘मुझे आश्चर्य है कि मिक्की इस छेद को क्यों ठीक नहीं करवाती है।’ वहीं दूसरी तरफ मिक्की ने सोचा, ‘चिक्की बड़ी आलसी है। वह क्यों नहीं इस छेद को ठीक करती?’ इस तरह दोनों ही एक-दूसरे से उस छेद को बंद करवाने की उम्मीद लगाए बैठी थीं। फलस्वरूप उनके घोंसले का छेद वैसे ही बना रहा।  धीरे-धीरे बर्फवारी तेज हो गई और हवा भी तेज चलने लगी। अब छेद के रास्ते बर्फ उनके घोंसले में प्रवेश कर गई। अब आलसी चिड़िया ठंड से काँपने लगीं,  लेकिन किसी ने भी छेद को बंद करने की कोशिश नहीं की अंतिम दोनों ठंड से मर गईं। इस प्रकार, अपने आलसी स्वभाव के कारण दोनों चिड़ियाँ अकाल मौत का शिकार बनीं।

खुजली – पंचतंत्र की कहानियां

एक दिन एक राजा ने एक भिखारी को महल के दरवाजे के सामने अपनी पीठ रगड़ते हुए देखा। उसने अपने सिपाहियों से भिखारी को पकड़कर राजदरबार में ले आने को कहा। सिपाही फौरन गए और भिखारी को पकड़कर ले आए। राजा ने उससे पूछा, “तुम महल के दरवाजे के सामने अपनी पीठ क्यों खुजला रहे थे?” भिखारी बोला,  “महाराज, मेरी पीठ में खुजली हो रही थी, इसलिए मैं महल के दरवाजे के सामने पीठ खुजला रहा था।” राजा ने यह सुनने के बाद अपने सिपाहियों को आदेश दिया, “इस भिखारी को बीस स्वर्ण मुद्राएँ दी जाएँ।” जल्दी ही यह खबर पूरे राज्य में आग की तरह फैल गई। कुछ समय बाद राजा ने दो अन्य भिखारियों को महल के सामने अपनी पीठ रगड़ते देखा। उन्हें भी बुलवाकर राजा ने उनसे पीठ खुजाने का कारण पूछा। उन्होंने भी जवाब दिया कि उनकी पीठ में खुजली हो रही थी। यह सुनकर राजा ने अपने सिपाहियों से कहा,  “इन भिखारियों की पीठ की खुजली ठीक करने के लिए इनकी पीठ पर बीस-बीस कोड़े लगाओ।” यह सुनकर दोनों तुरंत बोले, “लेकिन महाराज,  आपने तो एक अन्य भिखारी को वीस स्वर्ण मुद्राएँ दी थीं।” राजा बोला, “उसने सच कहा था, लेकिन तुम दोनों झूठ बोल रहे हो। यदि चाहते तो तुम दोनों एक-दूसरे की पीठ खुजला सकते थे। तुम दोनों यहाँ सिर्फ लालच के कारण ही आए हो।” दोनों भिखारी अपनी करनी पर शर्मिंदा थे।

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