एक संगठन के प्रबन्धकीय कार्यों के उचित रूप से किये जाने के लिए यह आवश्यक है कि सभी प्राकीय कार्यों का समन्वय हो प्रबन्धक द्वारा कार्यों को संगठन के व्यक्तियों व विभागों को कार्यों का बंटवारा तथा अभिहस्ताकन करके किया जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु सभी व्याक्तियों एवं विभागों के प्रयासों एवं कार्यों में समन्वय हो।
प्रबन्धक समन्वय को सुनिश्चित करते हैं तथा पर्यावरण के साथ अपनी गतिविधियों को एकीकृत करते हैं। यह संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के अनुक्रम में संगठन के विभिन्न व्यक्तियों एवं विभागों की गतिविधियों को एक ही समय में सम्पादित करने की प्रक्रिया होती है।
समन्वय की परिभाषाएँ
समन्वय की कुछ सुस्वीकृत परिभाषाएं निम्नलिखित हैं-
ई. एफ. एल. बीच के अनुसार, “समन्वय का आशय विभिन्न सदस्यों में चालू कार्यों का समुचित आवंटन करके एवं यह तय करके कि सदस्य उन कार्यों को सद्भावनापूर्वक कर रहे हैं, संगठन में सन्तुलन एवं समूह भावना बनाये रखना होता है।
मूने व रेले के अनुसार, किसी सामान्य उद्देश्य की प्राप्ति के लिए की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों में एकता बनाये रखने के उद्देश्य से सामूहिक प्रयासों में सुव्यवस्था करने को समन्वय कहते हैं।
मैक्फारलेण्ड के अनुसार, समन्वय एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक कार्यकारी अधिकारी अपने अधीनस्थों में सामूहिक प्रयास का एक सुव्यवस्थित स्वरूप विकसित करता है तथा सामूहिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए गतिविधि सम्बन्धी एकता स्थापित करता है।
उपरोक्त परिभाषाओं के विश्लेषणात्मक अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि समन्वय एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से उद्यम की विभिन्न गतिविधियों में जाता है जिससे कि संस्था (संगठन) अपने निर्धारित लक्ष्यों को सरलतापूर्वक प्राप्त करते समय संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के दृष्टिकोण से संगठन के विभिन्न व्यक्तियों तथा विभागों के प्रयासों में एकीकरण करता है।

समन्वय की प्रकृति
समन्वय (Coordination) संगठन में एक महत्वपूर्ण प्रबंधन प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न कार्यों, विभागों, और संगठन के अंशों को हारमोनियस रूप से एक साथ काम करने में मदद करना है। यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि संगठन अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है और संगठन के सभी सदस्यों के काम को संगठित रूप से प्रबंधित करता है। इसकी प्रकृति इस प्रकार है-
- प्रबन्ध का कार्य नहीं वरन् सार समन्वय प्रथा का पृथक एवं भिन्न कार्य नहीं है। इसे प्रबन्ध का सार माना जाता है। यह सभी प्रबन्धकीय कार्यो का भाग है।
- प्रबन्धकीय उत्तरदायित्व – संगठन करने वाले कार्यकारी वर्ग पर होता है। इससे बचा नहीं जा सकता।
- सतत् प्रक्रिया – यह एक सतत् प्रक्रिया है। प्रबन्ध के सभी स्तरों पर इसकी सदैव आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया सतत् रूप से चलती रहती है।
- प्रयासों की एकता यह संगठन के विभिन्न कर्मचारियों तथा विभागों के प्रयासों में एकता लाता है। मैक्फारलेण्ड के अनुसार, कार्य की एकता समन्वय समस्या का हृदय है।
- विचारजन्य प्रयास का परिणाम समन्वय प्रबन्धको के जागरुक तथा विवेकपूर्ण प्रयासों का परिणाम होता है। यह लगनशील प्रयासों द्वारा सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
- सामूहिक प्रयास इसको संगठन की सामूहिक गतिविधियों में अच्छे सम्बन्ध स्थापित करने हेतु लाया जाता है। यह एक अवधारणा है जो समूह के प्रयासों पर लागू होती है।
- सामान्य इसका अन्तिम उद्देश्य कुछ सामान्य उदेश्य प्राप्त करना होता है।
- सहयोग से भिन्न समन्वय सहयोग से मित्र होता है। यह सहयोग को शामिल करता है।

समन्वय के उद्देश्य
समन्वय के उद्देश्य निम्नलिखित होते हैं-
- विशेषज्ञीकरण के लाभों को प्राप्त करना – संगठन श्रम विभाजन एवं विशेषशीकरण सिद्धान्त पर आधारित होते है। प्रबन्धको द्वारा कार्य को विशिष्टीकृत कार्यों तथा विभागों में बांटा जाता है। प्रत्येक विशेष अपने कार्य पर एकाग्रचित होता है। प्रबन्धकों द्वारा विशेषज्ञीकरण के लाभों को प्राप्त करने के लिए सभी विशेषज्ञों तथा विभागों के कार्यों में समन्वय किया जाता है।
- अभिगम में अन्तर का समाधान करना – इसका उद्देश्य अभिगम में अन्तर का समाधान करना होता है। कार्यों में एकता लाने के लिए प्रबन्धक सामान्य अभिगम से प्रत्येक व्यक्ति के अभिगम में अन्तर का समाधा करते हैं।
- अन्तर्निर्भर इकाइयों के अनुपालन का एकीकरण करना – कुछ संगठनों में एक विभाग का कार्य अन्य विभागों के कार्यों पर निर्भर करता है। इसके कारण अनुपालन हेतु समन्वय की आवश्यकता होती है।
- हितों में अन्तर का समाधान करना – हितों में अन्तर का समाधान करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। प्रबन्धक व्यक्तियों तथा संगठनात्मक लक्ष्यों में अन्तर में समन्यय का प्रयास करते हैं।
- प्रबन्धकीय प्रक्रिया की प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना – इसका उद्देश्य सम्पूर्ण प्रबन्धकीय प्रक्रिया की प्रभावशीलता को सुनिश्चित करना होता है। इसके द्वारा नियोजन को अधिक उद्देश्यपूर्ण, संगठन को अधिक व्यवस्थित तथा नियंत्रण को अधिक नियंत्रणकारी बनाया जाता है।
- विविधता में एकता स्थापित करना।
- संगठन में कर्मचारियों को बनाये रखना।
- उत्पादकता बढ़ाना।
- परिवर्तन की सुविधा देना।
- मानवीय सम्बन्ध बनाये रखना।
- संसाधनों एवं प्रयासों की बर्बादी को कम करना।
- कार्य के दोहरीकरण से बचना।
- लागतो को कम करना।
- ख्याति को बढ़ाना आदि।

समन्वय के उपयोग
इसका उपयोग संगठनों, टीमों, और प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन में विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है ताकि संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिले। समन्वय के उपयोग के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र: निम्नलिखित हैं-
- संगठनिक प्रबंधन (Organizational Management): यह संगठन के विभिन्न विभागों और अंशों के बीच सहयोग और संचालन को सुचारू बनाता है। यह विभागों के बीच कार्यों को समर्थन और सम्मिलन प्रदान करता है ताकि संगठन के लक्ष्यों को सही तरीके से प्राप्त किया जा सके।
- समृद्धि और विकास (Growth and Development): इससे संगठन के विभिन्न विभागों और कार्यक्रमों के बीच विकास और समृद्धि को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह विभागों के बीच सहयोग के माध्यम से नए प्रोजेक्ट्स और नई विकसितियों को प्रोत्साहित करता है।
- टीम प्रबंधन (Team Management): समन्वय टीमों के सदस्यों के बीच सहयोग और संचालन को सुचारू बनाने में मदद करता है। यह टीमों के बीच साझा दिशा और साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- प्रोजेक्ट प्रबंधन (Project Management): प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। यह विभिन्न टास्क्स और डेडलाइन को संचालन करने में मदद करता है, ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सके।
- संगठनों के बीच सहयोग (Collaboration Across Organizations): बड़े संगठनों और सरकारी विभागों के बीच सहयोग के लिए समन्वय का उपयोग किया जा सकता है। यह विभिन्न संगठनों के बीच जानकारी साझा करने, प्रक्रिया साझा करने, और साझा प्रोजेक्ट्स को प्रबंधित करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
- समृद्धि और विकास (Growth and Development): समन्वय संगठन के विभिन्न विभागों और कार्यक्रमों के बीच विकास और समृद्धि को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह विभागों के बीच सहयोग के माध्यम से नए प्रोजेक्ट्स और नई विकसितियों को प्रोत्साहित करता है।
- कर्मचारी मानसिकता (Employee Morale): समन्वय कर्मचारी मानसिकता को बेहतर बनाने में मदद करता है, क्योंकि यह उन्हें साझा दिशा में काम करने और संगठन के साथ अपने संदर्भों को जोड़ने का मौका प्रदान करता है।
समन्वय के उपयोग का मुख्य उद्देश्य संगठन को सही दिशा में मार्गदर्शन करना और संगठन के सभी सदस्यों को एक साथ काम करने में मदद करना होता है ताकि संगठन अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सके और साथ ही सफलता प्राप्त कर सके।