समावेशी शिक्षा के उद्देश्य – 5 Best New Objectives

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य – 5 Best New Objectives

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य – शिक्षा का समावेशीकरण यह बताता है कि विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक सामान्य छात्र और एक दिव्यांग को समान शिक्षा प्राप्ति के अवसर मिलने चाहिए। पहले समावेशी शिक्षा की परिकल्पना सिर्फ विशेष छात्रों के लिए की गई थी लेकिन आधुनिक काल में हर शिक्षक को इस सिद्धांत को विस्तृत दृष्टिकोण में अपनी कक्षा में व्यवहार में लाना चाहिए। समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों को सामान्य बालकों से अलग शिक्षा देने की विरोधी है। समावेशी बालक

विशिष्ट बालकों के प्रकार

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य

समावेशी शिक्षा तथा सामान्य शिक्षा के उद्देश्य लगभग समान होते हैं। जैसे देश का विकास, बालकों को उपयुक्त शिक्षा के द्वारा मानवीय संस्थाओं का विकास, नागरिक विकास, समाज का पुनर्गठन तथा व्यावसायिक कार्य कुशलता आदि प्रदान किया जाना। इन उद्देश्यों के अतिरिक्त समावेशी शिक्षा के उद्देश्य का वर्णन निम्नलिखित है-

  1. शारीरिक अक्षमता वाले बालकों के माता-पिता को निपुणता तथा कार्य कुशलता के बारे में समझाना तथा बालकों के समक्ष आने वाली समस्याओं एवं कमियों का समाधान करना।
  2. शारीरिक विकृत बालकों की विशेष आवश्यकताओं की सर्वप्रथम पहचान करना तथा उनका निर्धारण करना।
  3. शारीरिक दोष की स्थिति के बढ़ने से पूर्व ही उसे रोकने के उपाय तथा बालकों के सीखने की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करने की नवीन विधियों का प्रशिक्षण देना।
  4. शारीरिक रूप से अक्षमता वाले बालकों का पुनर्वासन किया जाना चाहिए।
  5. शारीरिक रूप से विकृत बालकों की शिक्षण समस्याओं की जानकारी एकत्रित करना तथा सुधार के लिए सामूहिक संगठन की तैयारी करना।

विद्यालय शिक्षा में समावेशी शिक्षा का अधिक विकास करने के लिए विद्यालय में सुरक्षा, आवास, शौचालय तथा पीने के पानी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। और साथ ही साथ बच्चों की व्यक्तिगत विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए उनकी रचनात्मक क्षमताओं का विकास करना चाहिए। शिक्षकों को छात्रों के माता-पिता से निरंतर संपर्क बनाए रखने चाहिए, ताकि वे उनको बच्चों की उन्नति व अवनत के बारे में बता सके।

जहां तक संभव हो प्राथमिक शिक्षा को सर्वत्र सुलभ करना होगा। जल्दी से जल्दी इस समस्या का समाधान करना होगा। भाषागत् समस्याओं को ध्यान में रखकर कद जनित समस्याओं को त्वरित रूप से दूर करने का प्रयास करना होगा। अतः हमें एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की तरफ अग्रसर होना होगा, जो प्रत्येक व्यक्ति को आसानी से उपलब्ध हो सके।

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य

समावेशी शिक्षा के उद्देश्य समाज में सामाजिक न्याय और समानता को प्रमोट करना होता है। इसका मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित होता है-

  1. समाज में समानता की स्थापना: समावेशी शिक्षा के उद्देश्य समाज में समानता और समाजिक न्याय की स्थापना करना होता है। यह सभी वर्गों, जातियों, धर्मों, लिंगों, और आय समृद्धि के समृद्धि को पहुंचने का माध्यम होता है।
  2. सामाजिक समरसता को बढ़ावा: समावेशी शिक्षा से लोग सामाजिक समरसता का अभिवादन करने और अलग-अलग समुदायों के लोगों के बीच समरसता को बढ़ावा देने में मदद करती है।
  3. शिक्षा का अधिकार: समावेशी शिक्षा के माध्यम से हर किसी को शिक्षा का समान अधिकार मिलता है, चाहे वह गरीब हो या अमीर। इससे विशेष जातियों और समुदायों के लोगों के लिए शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित किया जाता है।
  4. कौशल विकास: समावेशी शिक्षा व्यक्तिगत और सामाजिक कौशलों का विकास करती है, जिससे लोग समृद्धि के माध्यम से अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
  5. सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता: समावेशी शिक्षा से लोग समाज में सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक होते हैं और वे अपने समुदाय के साथ सहयोग और समरसता को प्रोत्साहित करते हैं।
  6. व्यक्तिगत विकास: समावेशी शिक्षा व्यक्तिगत विकास को प्राथमिकता देती है, जिससे लोग अपने अद्वितीय प्रकृति को समझते हैं और अपनी क्षमताओं को पहचानते हैं।
  7. समृद्धि का निर्माण: समावेशी शिक्षा समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि शिक्षित और पूरी तरह से समरस्त लोग समृद्धि के सामाजिक और आर्थिक लाभों का हिस्सा बन सकते हैं।

समावेशी शिक्षा एक समृद्धि और समरसता की दिशा में अहम उपकारी भूमिका निभाती है और समाज को सशक्त बनाने में मदद करती है।

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