सुमित्रानंदन पंत कविताए और व्याख्या से सम्बंधित प्रश्न BA में पूछे जाते है। पंत की काव्य कृति चिदंबरा पर इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ है। पंत ने अपनी कविता नौका विहार में जिस चांदनी रात का वर्णन किया है। वह शुक्ल पक्ष की दशमी की तिथि की उदित चांदनी का वर्णन है। कभी चांदनी रात के प्रथम प्रहर में कालाकांकर के राजभवन से लगी हुई नदी में अपने मित्रों के साथ नौका विहार कर रहा है।चंद्रमा की ज्योत्सना के प्रभाव से नदी के धवलता मैं रजत के कांति का आभास सर्वत्र होता है। उसी का अलंकारता भाषा में प्रस्तुत कविता में वर्णन किया गया है।

सुमित्रानंदन पंत जीवन परिचय
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सुमित्रानंदन पंत कविताए
जगत के जीवन पत्र कविता में कवि ने पतझड़ में डाल से टूटकर झड़ते हुए पत्तों के बहाने समाज में परिवर्तन के आकांक्षा व्यक्त की है। इस कविता में कवि ने जीवन जगत में नई चेतना एवं नवोद साह के संचार की कामना को बादल के माध्यम से व्यक्त किया है।

दर्शन अनुभूति के बाद की उस गंभीर ज्ञानात्मक अवस्था को कहा जाता है। जिसमें व्यक्ति भावना के क्षेत्र में उधर्वोमुख होकर जीवन और जगत के प्रति विश्लेषण की प्रवृत्ति अपनाता है। दर्शन के रूप में सामाजिक तथा आध्यात्मिक दर्शन में संकरी होने के कारण अंत में दार्शनिक बाद विवादों से मुक्त खंडन मंडात्मक प्रवत्ति नहीं पाई जाती।
अपितु उन्होंने अपने प्रत्येक सिद्धांत को जीवन की उपयोगिता की कसौटी पर परख कर स्वीकार है। पंत के काव्य पर उपनिषदों की विचारधारा के साथ ही अद्वैतवाद, मार्क्सवाद तथा गांधीवाद का प्रभाव भी देखा जा सकता है। उपनिषदों का मूल तत्व है। जिज्ञासा भाव पंत के इस भाव के मौन नियंत्रण कविता में देखा जा सकता है।
वह प्रारंभ से ही प्रकृति और उसके पीछे अव्यक्त सत्ता के प्रति जिज्ञासु है। ‘ना जाने तपक तड़ित में मौन निमंत्रण देता मुझको मौन’ सोनजुही कविता के रचयिता पंत ने सोनजुही लता के सौंदर्य का वर्णन प्रस्तुत कविता में किया है। सुमित्रानंदन पंत कविताए जो
- पंत जी ने अपनी कविता नौका विहार में प्रतापगढ़ जनपद में स्थित कालाकाकर नामक स्थान पर नौका विहार करते हुए चांदनी रात में गंगा की अपूर्व शोभा का वर्णन किया है।
- पंत जी को प्रकृति का सुकोमल कवि कहा जाता है।
- पंत जी के पिता जमींदार थे।
- छायावादी युग को पंत जी ने सृजन का सुंदर युग कहा है।
- पंत जी प्रगतिवादी विचारधारा से भी प्रभावित थे।
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