पंचायत समिति संरचना बैठक 32 कार्य बजट

पंचायत समिति ग्राम पंचायत और जिला परिषद् के बीच की एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के अन्तर्गत पंचायत समिति मध्यवर्ती पंचायत के रूप में भूमिका निभाता है। जिस प्रकार केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के प्रशासनिक एवं विधायी सम्बन्धी सारे कार्य संविधान के नियमों के अनुकूल संचालित होता है, उसी प्रकार पंचायत समिति के सारे कार्य संबंधित राज्य के पंचायत राज अधिनियम के विभिन्न धाराओं एवं नियमों के अनुकूल संचालित होता है।

एक बात और कि पंचायत समिति विभिन्न राज्यों अलग अलग नामों से जानी जाती है। उनके विभिन्न नामों का उल्लेख कर देना ठीक रहेगा ताकि पाठक नामों को ले कर भ्रमित न हो। पंचायत समिति अलग अलग नामों से जिन राज्यों में जानी जाती है इस प्रकार हैं-

  • बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान – पंचायत समिति
  • आंध्र प्रदेश – मंडल पंचायत
  • तमिलनाडू – पंचायत यूनियन
  • पश्चिम बंगाल – आंचलिक परिषद
  • असम – आंचलिक पंचायत
  • कर्नाटक – तालुका डेवलपमेंट बोर्ड
  • मध्य प्रदेश – जनपद पंचायत
  • अरुणाचल प्रदेश – अंचल समिति
  • उत्तर प्रदेश – क्षेत्र समिति

पंचायत समिति का गठन प्रखंड स्तर पर होता है। ग्राम पंचायत की तरह प्रत्येक पंचायत समिति का प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र होता है, जो लगभग 5000 की आबादी पर निर्धारित होता है।

पंचायत समिति की संरचना

लगभग 5000 की आबादी पर निर्धारित प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से पंचायत समिति के लिये एक प्रतिनिधि पंचायत समिति सदस्य के रूप में मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है। पंचायत समिति में प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र से सीधे चुनकर आये हुए सदस्यों के अतिरिक्त और भी निम्न सदस्य होते है-

  • सम्बन्धित प्रखंड या इसके निर्वाचन क्षेत्र का अंशतः या पूर्णतः प्रतिनिधित्व करने वाला लोक सभा एवं विधान सभा के सदस्य।
  • राज्य सभा एवं विधान परिषद के वे सदस्य जो पंचायत समिति क्षेत्र (प्रखंड) के अन्तर्गत निर्वाचक के रूप में पंजीकृत हों।
  • पंचायत समिति क्षेत्र (प्रखंड) में पड़ने वाली सभी ग्राम पंचायत के मुखिया
  • पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी मुखिया, होता है।

पंचायत समिति की अवधि

पंचायत समिति की अवधि पांच वर्षों की होती है। इसकी पहली बैठक से अगले पाँच वर्षों तक कार्यावधि होगी।

पंचायत समिति की बैठक

पंचायत समिति की साधारण बैठक दो माह में कम से कम एक बार बुलाना आवश्यक है। इस बैठक की सूचना कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा पंचायत समिति के सभी सदस्यो को बैठक की तिथि, स्थान, तथा बैठक के लिये विषय सूची के साथ दस दिन पूर्व भेजनी होती है। बैठक संबंधी मुख्य बातें इस प्रकार हैं一

  1. पंचायत समिति की प्रत्येक बैठक साधारणतः पंचायत समिति के मुख्यालय में की जाती है।
  2. पंचायत समिति की बैठक का कोरम कुल सदस्यों की संख्या के आधे सदस्यों की उपस्थिति से पूरा होगा। बैठक में कोरम पूरा नहीं होने पर बैठक दोबारा बुलाने का प्रावधान है। इस प्रकार दोबारा बुलाई गई बैठक में कुल सदस्यों की संख्या के पांचवें भाग, यानि 20 प्रतिशत की उपस्थिति से कोरम पूरा होने का प्रावधान है। इससे कम विधिमान्य नहीं होगा।
  3. पंचायत समिति की बैठक की अध्यक्षता प्रमुख और उनकी अनुपस्थिति में उप प्रमुख को करता है। यदि प्रमुख/उप प्रमुख दोनो अनुपस्थित हो तो उपस्थित सदस्यों के बीच से एक सदस्य का चयन अध्यक्षता के लिये किया जायगा।
  4. साधारण बैठक में सभी विषयों का निर्णय उपस्थित सदस्यों के बहुमत से होगा। किसी विषय पर मत विभाजन की स्थिति में मतदान के द्वारा निर्णय किया जायगा। अध्यक्षता करने वाला सदस्य चाहे तो मतदान में मतो की संख्या घोषित होने से पहले भाग ले सकता है। मत बराबर होने की स्थिति में वह अपना निर्णायक मत देगा‌।
  5. पंचायत समिति की बैठक में विचारार्थ आये हुए मामले पर वैसा प्रमुख/उप प्रमुख/सदस्य मतदान नहीं करेगा या बैठक में भाग नहीं लेगा जिसका प्रत्यक्ष अर्थिक या निजी लाभ निहित हो।
  6. प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का लिखा जाना और उसपर अध्यक्षता करने वाले का हस्ताक्षर होना आवश्यक है। कार्यवाही पंजी पंचायत समिति के कार्यालय में रखी जायगी। कार्यपालक पदाधिकारी पंजी का संरक्षक होगा।
  7. पंचायत समिति की बैठक में सम्बंन्धित पदाधिकारी उपस्थित रहेगें जिन्हें समय से बैठक की सूचना दी जायगी।

पंचायत समिति के कार्य एवं दायित्व

  1. केन्द्र तथा राज्य सरकार एवं जिला परिशद द्वारा सौपे गये कार्य सभी ग्राम पंचायत के वार्षिक योजनाओं पर विचार विमर्श एवं समेकन करना तथा समेकित योजनाओं को जिला परिषद में प्रस्तुत करना
  2. पंचायत समिति का वार्षिक योजना बजट पेश करना
  3. प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित व्यक्तियों को राहत देना
  4. प्राकृतिक आपदाओं में प्रमुख को पच्चीस हजार रुपया तक खर्च करने का अधिकार है
  5. कृषि एवं उद्यान की उन्नति एवं विकास करना, खेती के उन्नत तरीको का प्रचार-प्रसार करना और किसानो के प्रशिक्षण का इंन्तजाम करना,
  6. सरकार के भूमि विकास एवं भूसंरक्षण कार्यकलापों के कार्यान्वयन में सरकार और जिला परिषद् की सहायता करना,
  7. लघु सिंचाई कार्यों के निर्माण एवं अनुरक्षण में सरकार और जिला परिषद् की सहायता करना
  8. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम एवं स्कीमो का आयोजन करना और कार्यान्वयन करना,
  9. पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा का विकास एवं विस्तार करना,
  10. मत्स्य उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करना,
  11. खादी ग्राम एवं कुटीर उद्योग को प्रोत्साहित करना,
  12. ग्रामीण आवास योजनाओं का कार्यान्वयन तथा आवास स्थल का वितरण करना
  13. ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का कार्यान्वयन, मरम्मत एवं संरक्षण करना
  14. जल प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण,
  15. ग्रामीण स्वच्छता योजनाओं का कार्यान्वयन,
  16. सामाजिक एवं फार्म वानिकी के अन्तर्गत अपने नियंत्रणाधीन सड़कों के किनारे और अन्य सार्वजनिक भूमि पर वृक्ष लगाना एवं उनका संरक्षण करना,
  17. सड़क, भवन, पुल, जल मार्ग तथा संचार के योजनाओं को कार्यान्वयन एवं संरक्षण करना,
  18. गैर परम्परागत उर्जा स्रोतों का पता लगाना उसके विकास हेतु आवश्यक कार्य करना,
  1. शिक्षा के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालय भवनों का निर्माण मरम्मत एवं संरक्षण आदि कार्य करना,
  2. तकनीकी प्रशिक्षण तथा व्यवसायिक शिक्षा का विकास करना,
  3. वयस्क एवं अनौपचारिक शिक्षा एवं सर्वशिक्षा अभियान का कार्यान्वयन करना,
  4. सांस्कृतिक कार्यकलाप के अन्तर्गत सांस्कृतिक एवं खेल कूद कार्यकलापों का कार्यान्वयन,
  5. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अन्तर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यक्रमों का कार्यान्वयन करना,
  6. महिलाओं एवं बच्चो के कार्यक्रम को कार्यान्वयन करना तथा इनके विकास हेतु कार्यक्रम का निर्माण करना,
  7. समाज कल्याण, जिसमें शारीरिक तथा मानसिक रूप से निःशक्त लोगों के कल्याण हेतु कार्यक्रम तैयार करना तथा सरकार द्वारा चलाये जा रहे योजनाओं को कार्यान्वयन कराना,
  8. कमजोर वर्गों खास कर अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जन जातियों को कल्याण के लिए सरकार द्वारा चलायी गई योजनाओं का कार्यान्वयन करना,
  9. जन-वितरण प्रणाली के अन्तर्गत आवश्यक वस्तुओं का वितरण सुनिश्चित कराना,
  10. ग्रामीण विद्युतीकरण के कार्यक्रमों का कार्यान्वयन,
  11. सहकारिता के अन्तर्गत सहकारी कार्य-कलापों का विकास करना,
  12. पंचायत समिति क्षेत्र के अन्तर्गत वाचनालय एवं पुस्तकालय खोलने से सम्बंन्धित क्रिया-कलापों को बढावा देना,
  13. समय-समय पर सरकार द्वारा निर्देशित या सौपें गये अन्य कार्य करना,

पंचायत समिति द्वारा कराधान

पंचायत समिति वाहनों के रजिस्ट्रेशन (जो किसी अन्य अधिनियम के अधीन निबंधित न हो), तीर्थ स्थलों, हाटों, मेलों में सफाई व्यवस्था के लिए शुल्क, जल शुल्क, विद्युत शुल्क तथा संपत्ति कर आदि वसूल कर सकती है। इसके आलावा उक्त सभी प्रकार की आवासीय एवं वाणिज्यिक संपत्तियों पर भी कर या शुल्क वसूल कर सकती है। सरकार द्वारा नियमावली के गठन के बाद एवं अधिसूचित शुल्क / फीस के आधार पर शुल्क वसूल कर सकती है।

पंचायत समिति का बजट

प्रत्येक पंचायत समिति प्रत्येक वर्ष ऐसे समय और उस रीति से जैसे कि विहित की जाय, अगले वित्तीय वर्ष के लिये अपनी प्राप्तियों एवं वितरणों का बजट तैयार करती है। बजट बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत से पारित कराई जाती है और वैसी बैठक के लिए कुल सदस्यों के 50 प्रतिशत से कम में कोरम नहीं हो सकती।

पंचायत समिति का अंकेक्षण

पंचायत समिति के लेखा की संपरीक्षा (अंकेक्षण) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत प्राधिकार करता है और प्रतिवेदन की एक प्रति पंचायत समिति को एक माह के भीतर भेज दी जाती है।

प्रतिवेदन प्राप्त होने पर पंचायत समिति प्रतिवेदन में बतायी गई त्रुटियों अथवा अनियमितताओं का समाधान करती है और विहित प्राधिकार को तीन माह के अन्दर की गई अथवा की जानेवाली अपनी कार्रवाई की सूचना भेजती है।

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