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प्रेम पचीसी की विशेषताएं

प्रेम पचीसी की विशेषताएं – प्रेम पचीसी सनेही जी द्वारा ब्रज भाषा में रचित एक लघु कृति है जिसमें मात्र 25 छंद हैं। सनेही जी की एक मुख्य विशेषता यह है कि वे श्रंगार प्रधान रचनाएं ब्रज भाषा में लिखते थे जबकि राष्ट्रीय कविताएं खड़ी बोली में लिखते थे। प्रेम पचीसी की विशेषताएं प्रेम पचीसी …

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भ्रमर-दूत की विशेषताएं

भ्रमर-दूत की विशेषताएं

भ्रमर-दूत की विशेषताएं – कवि ने भ्रमर-दूत में जो छंद प्रयुक्त किया है वह रोला एवं दोहे का मिश्रण है। प्रारंभ की दो पंक्तियां रोला छंद की हैं तथा बाद की दो पंक्तियां दोहा छंद की हैं। अंत में एक आधी पंक्ति और भी जोड़ दी गई है। इस प्रकार इस काव्य ग्रंथ में आदि …

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भक्तिकालीन ब्रज साहित्य

ब्रजभाषा रचनाकार कृतियां

ब्रजभाषा रचनाकार कृतियां – भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक काल के प्रथम चरण तक हिंदी के कवियों ने ब्रज भाषा में ही काव्य रचना की। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ब्रजभाषा बहुत लंबे समय तक काव्य भाषा पद पर प्रतिष्ठित रही। लगभग 600 वर्षों तक ब्रज क्षेत्र की बोली ब्रजभाषा काव्य भाषा के पद पर …

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लोकगाथा

लोकगाथा वर्गीकरण विशेषताएं उत्पत्ति

किसी कथा विशेष पर आधारित प्रबंधात्मक पद्य वध काव्य को लोकगाथा कहा जाता है। इसमें गायक लोकजीवन में चली आ रही कथा को अपने ढंग से प्रस्तुत करता है। हिंदी लोक गाथा का रचयिता भी लोकगीतों की भांति अज्ञात होता है। नल दमयंती माधवानल, कामकन्दला, हरिश्चंद्र तारामती, लैला मजनू, हीर रांझा, शीरी फरहाद आदि से …

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आधुनिक ब्रजभाषा साहित्य, सरोज स्मृति

लोक साहित्य

लोक साहित्य दो शब्दों से मिलकर बना है – लोक तथा साहित्य। लोक शब्द का तात्पर्य जनसामान्य से है। इस प्रकार लोक साहित्य का तात्पर्य जन सामान्य समाज के साहित्य से है। लोक साहित्य का अर्थ हिंदी साहित्य की एक अन्य विधा के रूप में अशिक्षित और अर्धशिक्षित तथा असभ्य माने जाने वाले श्रमजीवी समाज …

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Prachintam itihaas

रीतिकालीन ब्रज साहित्य

रीतिकालीन ब्रज साहित्य – रीतिकाल ब्रजभाषा के काव्य रूप का चरमोत्कर्ष काल रहा है। रीतिकाल में सभी कवियों ने चाहे वह ब्रजभाषा क्षेत्र के रहे हैं अथवा उसके बाहर के रहे हो सभी ने ब्रज भाषा में ही अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। रीति ग्रंथ, मुक्तक काव्य ग्रंथ या अन्य छिटपुट ग्रंथ जो कि रीतिकालीन कवियों …

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भक्तिकालीन ब्रज साहित्य

भक्तिकालीन ब्रज साहित्य

भक्तिकालीन ब्रज साहित्य – ब्रजभाषा एक सुधीर अवधि तक इस देश की काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित रही और इसी के अनुपात में ब्रज भाषा साहित्य भी प्रचुर मात्रा में रचा गया। ब्रजभाषा में रचित काव्य को हम कालक्रम की दृष्टि से तीन भागों में विभाजित कर सकते हैं- भक्तिकालीन ब्रज साहित्य रीतिकालीन ब्रज …

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ब्रज भाषा साहित्य

आधुनिक ब्रजभाषा साहित्य

आधुनिक ब्रजभाषा साहित्य – आधुनिक काल के संधि काल के कवियों में 19वीं शताब्दी के द्विजदेव ने ब्रजभषा को अत्यंत स्वच्छ रूप में प्रयुक्त किया था जिसकी प्रशंसा आचार्य शुक्ल ने निम्न पंक्तियों में की है- “यह अयोध्या के महाराज थे और बड़ी ही सरस कविता करते थे। इनमें बड़ा भारी गुण भाषा की स्वच्छता …

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कक्षा 9 लेखकों का जीवन परिचय

ब्रजभाषा उत्पत्ति विकास क्षेत्र

ब्रजभाषा उत्पत्ति विकास क्षेत्र – पश्चिमी हिंदी की प्रमुख बोलियों में ब्रजभाषा का महत्वपूर्ण स्थान है। ब्रजभाषा अपनी साहित्यिक समृद्धि के कारण मध्यकाल की काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हो गई थी। अपनी विकासमान प्रकृति के कारण यह 16 वीं शताब्दी तक संपूर्ण मध्यप्रदेश की साहित्यिक भाषा के पद पर प्रतिष्ठित हो गई थी। …

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हिंदी भाषा का विकास

हिन्दी भाषा का विकास

हिन्दी भाषा का विकास आरंभ में बहुत ही धीमी गति से हुआ। विश्व में लगभग 3000 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं। हिन्दी उनमें से एक है। हिंदी, भारोपीय शाखा के भारतीय ईरानी शाखा के भारतीय आर्य उपशाखा की एक भाषा है। हिंदी भाषा की उत्पत्ति, विकास, उपभाषा और बोलियों के बारे में संक्षिप्त जानकारी …

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जीवन परिचय के प्रकार, लेखकों का जीवन परिचय, जीवन परिचय

साहित्य पुरस्कार

साहित्य पुरस्कार का मतलब ऐसे पुरस्कार से है जो कि साहित्य के क्षेत्र में उन्नति को दर्शाता है। कुछ साहित्य पुरस्कार संविधान में वर्णित भाषा के अनुसार ही दिए जाते हैं जबकि कुछ पुरस्कार भारतीय संविधान में वर्णित भाषा के अतिरिक्त भी कई भाषाओं में दिए जाते हैं। जैसे साहित्य अकादमी पुरस्कार भारतीय संविधान की …

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अधिगम, सन्धि

सन्धि एवं सन्धि विच्छेद

दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को व्याकरण में सन्धि कहते हैं। दिए गए शब्द को सन्धि विच्छेद के नियमों की सहायता से अलग अलग करना सन्धि विच्छेद कहलाता है। सन्धि दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को व्याकरण में सन्धि कहते हैं। दूसरे शब्दों में दो निर्दिष्ट अक्षरों के पास- पास आने …

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प्रेमचंद कहानी समीक्षा, गणित शिक्षण में पाठ्य पुस्तक का महत्व, यूक्लिड और उनके ग्रंथ, हिंदी विराम चिन्ह

हिंदी विराम चिन्ह

हिंदी विराम चिन्ह – विराम का अर्थ है, ठहराव या रुकना। जिस तरह हम काम करते समय बीच-बीच में रुकते और फिर आगे बढ़ते हैं वैसे ही लेखन में भी विराम की आवश्यकता होती है, अतः पाठक के मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए भाषा में विरामों का उपयोग आवश्यक है। उदाहरण : मोहन पढ़ रहा …

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हिंदी वर्णमाला

प्रत्येक भाषा की तरह हिंदी भाषा में भी वर्णो की एक लिस्ट है। वैसे तो भारत में अनेक भाषाए बोली जाती है लेकिन हिंदी भाषा को सबसे अधिक बोला जाता है। हिंदी वर्णमाला के बारे में स्वर व व्यंजन के बारे में और अधिक जानेंगे। हिंदी वर्णमाला वर्णों के समुदाय को ही वर्णमाला कहते हैं। …

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CSJMU BEd Semester IV Syllabus

राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण

राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण – राजा शूद्रक महाकवि वाण द्वारा रचित कादंबरी का प्रमुख पात्र है। कादंबरी में एक कल्पना पर आधारित 3 जन्मों की कथा को वर्णित किया गया है। शूद्रक पूर्व जन्म में राजा चंद्रापीड तथा चंद्रपीड पूर्व जन्म में स्वयं चंद्रमा थे। शुकनास का चरित्रचित्रण राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण राजा …

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