समाजशास्त्र

समाजशास्त्र मानव समाज का अध्ययन है। यह सामाजिक विज्ञान की एक शाखा है, जो मानवीय सामाजिक संरचना और गतिविधियों से सम्बन्धित जानकारी को परिष्कृत करने और उनका विकास करने के लिए, अनुभवजन्य विवेचन और विवेचनात्मक विश्लेषण की विभिन्न पद्धतियों का उपयोग करता है, अक्सर जिसका ध्येय सामाजिक कल्याण के अनुसरण में ऐसे ज्ञान को लागू करना होता है।

नगरीकरण

नगरीकरण

नगरीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें गाँव नगरों में परिवर्तित होते हैं। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप किसी भी देश की जनसंख्या में वृद्धि होने लगती है। नगरीकरण नगरीय बनने की एक प्रक्रिया है। इसका तात्पर्य व्यक्तियों अथवा सामाजिक प्रक्रियाओं को नगरीय क्षेत्रों के अनुरूप बनाना है। नगरीकरण नगरीकरण का आशय नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या नगरीय प्रक्रियाओं …

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भारत का विदेशी व्यापार

आधुनिकीकरण

आधुनिकीकरण की प्रक्रिया किसी एक ही दिशा या क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन को प्रकट नहीं करती वरन यह एक बहु-दिशा वाली प्रक्रिया है। साथ ही यह किसी भी प्रकार के मूल्यों से बंधी हुई नहीं है, परन्तु कभी-कभी इसका अर्थ अच्छाई और इच्छित परिवर्तन से लिया जाता है। पारम्परिक समाजों में होने वाले बदलावों …

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संस्कृतिकरण

संस्कृतिकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई निम्न हिन्दू जाति या कोई जनजाति अथवा कोई अन्य समूह किसी उच्च और प्रायः द्विज जाति की दिशा में अपने रीति-रिवाज कर्मकाण्ड, विचारधारा और पद्धति को बदलता है। सामान्यतः ऐसे परिवर्तनों के बाद निम्न जाति, जातीय संस्तरण की प्रणाली में स्थानीय समुदाय में उसे परम्परागत रूप से जो …

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मूल्यांकन

सामाजिक नियंत्रण

सामाजिक नियंत्रण का अर्थ उस ढंग से है जिससे सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था में एकता व स्थायित्व बना रहता है। अर्थात् वह किस प्रकार परिवर्तनशील संतुलन के रूप में क्रियाशील होती है। प्लेटो व अरस्तू से लेकर आधुनिक समय तक के सामाजिक विचारकों ने यह स्वीकार किया है कि समाज के अस्तित्व के लिये थोड़ी बहुत …

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सामाजिक परिवर्तन के प्राकृतिक कारक

सामाजिक परिवर्तन के प्राकृतिक कारक

सामाजिक परिवर्तन के प्राकृतिक कारक – परिवर्तन प्रकृति का नियम है प्रकृति आवश्यकतानुसार स्वयं परिवर्तन करती रहती है। प्राचीन ग्रीक दार्शनिक हेराक्लीट्स के अनुसार, एक व्यक्ति के लिए एक ही नदी में दो बार पैर रखना असम्भव है इसके दो कारण है। पहला दूसरी बार में नदी पहले जैसे नहीं रहेगी नदी के साथ-साथ वह …

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सामाजिक परिवर्तन के कारक, सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक

सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक

सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक – सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में जनसंख्यात्मक कारकों का भी अत्यधिक महत्व है। जनसंख्यात्मक कारक भी सामाजिक परिवर्तन के कारण होते हैं। अन्य शब्दों में जनसंख्या का आकार और घनत्व में परिवर्तन जन्म दर और मृत्यु दर के घटने-बढ़ने से कई परिवर्तन होते हैं। उदाहरण के लिए भारत में 1901 …

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सामाजिक परिवर्तन के कारक, सामाजिक परिवर्तन के जनसंख्यात्मक कारक

सामाजिक परिवर्तन के कारक

सामाजिक परिवर्तन के कारक – सामाजिक जीवन के सम्बन्धों में परिवर्तन अनेक कारणों से हो सकता है और होता भी है। ये कारण प्राकृतिक या भौगोलिक हो सकता है, जनसंख्यात्मक हो सकते हैं, प्राणिशास्त्रीय भी हो सकते हैं या आर्थिक प्रौद्योगिकीय या सांस्कृतिक भी हो सकते हैं। परन्तु इस सम्बन्ध में स्मरणीय है कि सामाजिक …

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Syllabus

संचार

संचार से आशय शब्दों, पत्रों, सूचनाओं अथवा संदेशों द्वारा विचारों एवं सम्मतियों के विनिमय से होता हैं। संचार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हैं। संचार में सभी चीजें शामिल हैं जिनके माध्यम से व्यक्ति अपनी बात दूसरे व्यक्ति के मस्तिष्क में डालता है यह अर्थ का पुल है, इसके अंतर्गत कहने, सुनने और समझने की …

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दहेज प्रथा

दहेज प्रथा निबंध

दहेज प्रथा निबंध – आज भारत में अनेक समस्याएँ विद्यमान हैं उनमें दहेज प्रथा भी एक ऐसी बुराई है जो वर्तमान समाज के लिए कलंक बन गई है। यह एक ऐसी अमानवीय तथा घृणित समस्या है, जो भारतीय समाज की जड़ों को खोखला कर रही है तथा समाज की नैतिक व्यवस्था को ध्वस्त कर रही …

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Bhartiya samaj mein nari

भारतीय समाज में नारी

भारतीय समाज में नारी की स्थिति अनेक प्रकार के विरोधों से ग्रस्त रही है। एक तरफ़ वह परंपरा में शक्ति और देवी के रूप में देखी गई है, वहीं दूसरी ओर शताब्दियों से वह ‘अबला’ और ‘माया’ के रूप में देखी गई है। दोनों ही अतिवादी धारणाओं ने नारी के प्रति समाज की समझ को, …

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केंद्र सरकार के शैक्षिक उत्तरदायित्व

विद्यार्थी जीवन

विद्यार्थी जीवन – भारतीय संस्कृति में मानव जीवन को चार भागों ( आश्रमों ) में विभक्त किया गया है – ब्रह्मचर्य आश्रम , गृहस्थ आश्रम , वानप्रस्थ आश्रम तथा संन्यास आश्रम । जीवन का पहला आश्रम ब्रह्मचर्य आश्रम ही विद्यार्थी जीवन है । जीवन के इस भाग में विद्या का अध्ययन किया जाता था । …

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आर्थिक विकास

विस्थापन के कारण

विस्थापन के कारण – विस्थापन शब्द अंग्रेजी भाषा के Displacement शब्द से बना जिसका अर्थ है अपना स्थान बदलना। जब कोई व्यक्ति अथवा समूह किसी कारण से अपने स्थाई स्थान से हटा दिया जाता है तो इस क्रिया को विस्थापन कहते हैं। जबकि हटाए गए व्यक्ति को विस्थापित कहते हैं। उदाहरण के लिए भारत में …

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वृद्धों की योजनाएं

वृद्धों की योजनाएं

वृद्धों की योजनाएं वृद्धों की चौमुखी सहायता करने के लिए संस्थाओं द्वारा चलाई जाती हैं। वृद्धजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकारी और गैर सरकारी संस्थान मिलकर कार्य कर रहे हैं। वृद्धों की योजनाएं वृद्धों के लिए निम्नलिखित कल्याणकारी कार्यक्रम और योजनाएं चलाई गई है- 1. राष्ट्रीय वृद्धजन परिषद भारत सरकार की राष्ट्रीय …

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निर्धनता का सामाजिक प्रभाव, जातीय संघर्ष

जातीय संघर्ष

भारत में जातीय संघर्ष सर्वाधिक मिलता है। स्वतंत्र भारत में जाति संघर्षों में बाढ़ सी आई है। जातीय ऊंच-नीच, भेदभाव व संकीर्णता से अनेक तत्वो, विरोधो व संघर्षों को जन्म दिया है। जातीय संघर्ष एक जाति की उपजातियों में अथवा विभिन्न जातियों के विरोध तनाव व संघर्ष को जातीय संघर्ष कहा जाता है। आज एक …

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घरेलू हिंसा

जातीय संघर्ष निवारण

जातीय संघर्ष निवारण के लिए अनेक समाज शास्त्रियों ने अपने अपने सुझाव दिए हैं। स्वस्थ समाज के विकास के लिए आवश्यक है कि विकास के मार्ग की बाधाओं और समस्याओं को दूर किया जाए तथा अनुकूल परिस्थितियों का सृजन किया जाए। जातीय संघर्ष निवारण जातीय संघर्ष निवारण हेतु सुझाव निम्नलिखित हैं- 1. जातिवाद की समाप्ति …

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वृद्धो की समस्याएं

वृद्धो की समस्याएं

वृद्धो की समस्याएं – सामान्यत: 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की गणना वृद्ध वर्ग के अंतर्गत की जाती है लेकिन भारत में जहां व्यक्ति की औसत जीवन अवधि अपेक्षाकृत कम है 69 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को वृद्ध कहा जाता है। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, आयु संभावित में वृद्धि …

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धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

संघर्ष अर्थ व विशेषताएं

संघर्ष वह प्रयत्न है जो किसी व्यक्ति या समूह द्वारा शक्ति, हिंसा या प्रतिकार अथवा विरोधपूर्ण किया जाता है। संघर्ष अन्य व्यक्तियों या समूहों के कार्यों में प्रतिरोध उत्पन्न करते हुए बाधक बनता है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है ऐसा प्रश्न जो स्वयं के स्वार्थ के लिए व्यक्तियों या सामूहिक कार्य में …

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तलाक की आवश्यकता तलाक के 5 कारण तलाक के विरोध में 3 तर्क

तलाक – भारतीय समाज में अनेकों वैवाहिक समस्याएं विद्यमान है। आज के दिनो में एक प्रमुख समस्या तलाक या विवाह-विच्छेद की है, जोकि व्यक्तिक विघटन को प्रोत्साहित करती है। जब किसी व्यक्ति का विवाह किसी लड़की के साथ होता है तो वे दोनों पवित्र अग्नि के समक्ष मेरे लेकर एक दूसरे का सुख दुख में …

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मानवाधिकार आयोग

मानवाधिकार आयोग

भारत में राष्ट्रीय स्तर व राज्य स्तर दोनों पर मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई है। जिसका मुख्य उद्देश्य मानव के अधिकार का संरक्षण करना, जागरूकता फैलाना व शोध कार्य करना है। राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय मानवाधिकार आयोगों का अध्ययन हम लोग करने वाले हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 3 …

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हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

मानवाधिकार

मानवाधिकार का व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास तथा समाजपयोगी कार्यों में महत्वपूर्ण स्थान होता है। अधिकार, सामाजिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। अधिकारों के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। राज्य द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व, विकास हेतु अनेक सुविधाएं दी जाती हैं। राज्य के द्वारा व्यक्ति को प्रदान की जाने वाली बाहरी …

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दहेज प्रथा

दहेज उस धन या संपत्ति को कहते हैं जो विवाह के समय कन्या पक्ष द्वारा वर पक्ष को दिया जाता है। हिंदू विवाह से संबंधित विभिन्न समस्याओं में से दहेज समस्या एक भीषण समस्या है। दहेज वह संपत्ति है जो विवाह के अवसर पर लड़की के माता-पिता या अन्य निकट संबंधियों द्वारा दी जाती है। …

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घरेलू हिंसा

घरेलू हिंसा

घरेलू हिंसा, भारतीय समाज में अनेक प्रकार की समस्याएं पाई जाती हैं, जिनका समाधान करने के लिए परिवार का प्रत्येक सदस्य प्रयत्नशील रहता है। कभी-कभी पारिवारिक समस्याएं इतना विकराल रूप धारण कर लेती हैं कि परिवार के सदस्यों द्वारा उनका समाधान कर पाना असंभव हो जाता है। इस स्थिति में परिवार के सदस्य हिंसा का …

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सामाजिक प्रक्रियाएं

दलित समस्या समाधान

दलित समस्या समाधान – जिन वर्गों का प्रयोग हिंदू सामाजिक संरचना सोपान में निरंतर स्थान रखने के लिए समुदायों के लिए किया जाता है वह दलित व अनुसूचित जातियां कहलाती हैं। ‘निम्नतम’ स्थान का आधार इन जातियों के उस व्यवसाय से जुड़ा है, जिसे अपवित्र कहा गया है। यहां पर दलितों की विवेचना अनुसूचित जाति …

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पिछड़ा वर्ग समस्या समाधान सुझाव

पिछड़ा वर्ग समस्या समाधान सुझाव – पिछड़ा वर्ग शब्द का प्रयोग समाज के कमजोर वर्गों विशेषत: अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़े वर्गों के संदर्भ में किया जाता है। भारतीय संविधान में पिछड़ा वर्ग शब्द का प्रयोग किया गया है। सामान्यत: इन वर्गों में अनुसूचित जातियों, जनजातियों, भूमिहीन श्रमिकों एवं लघु कृषकों आदि को शामिल किया …

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अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम

अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम – धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यकों की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार ने अनेक प्रयास किए हैं। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 16 में कानून के समक्ष समानता एवं विधि के समान संरक्षण का आश्वासन दिया गया है। किसी भी …

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मानवाधिकार

अल्पसंख्यक अर्थ प्रकार समस्याएं

अल्पसंख्यक की समस्याएं – एक समाज या राष्ट्र में विभिन्न दो या अधिक वर्ग के लोग निवास करते हैं जिनमें एक वर्ग या समूह की संख्या आधी से कम होती है वह अल्पसंख्यक वर्ग के नाम से जाना जाता है। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि अल्प व्यक्तियों का समूह अल्पसंख्यक कहलाता है। …

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धर्म परिभाषा, धार्मिक असामंजस्यता, बौद्धकालीन शिक्षा

धार्मिक असामंजस्यता

धार्मिक असामंजस्यता – धर्म से समाज में नियंत्रण स्थापित होता है। धर्म से समाज में एकता संगठन व सामंजस्य की स्थापना होती है। एक से अधिक धर्म के अनुयाई साथ साथ रहने के कारण सांप्रदायिक विवाद उत्पन्न होते हैं। बहुधर्मी वाले समाज में धार्मिक असामंजस्यता उत्पन्न होता है तथा समाज की एकता भंग होती है। …

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बौद्धकालीन शिक्षा

धर्म परिभाषा लक्षण

धर्म परिभाषा – धर्म मानव समाज का एक ऐसा शाश्वत, व्यापक और स्थाई तत्व है, जिसे समझे बिना हम समाज के रूप को समझने में असफल रहेंगे। प्रत्येक समाज में धर्म का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मानवीय व्यवहार तथा आचरण इससे प्रभावित रहता है। संपूर्ण विश्व की संचालक शक्ति के अस्तित्व को एक दृढ़ विश्वास …

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भारतीय समाज में धर्म की भूमिका

धर्म संस्कृति का एक हिस्सा है। धर्म मानवीय जीवन से संबंधित अनेक अनेक कार्यों की पूर्ति करता है, इसी मानवीय लगाव के कारण आदि काल से लेकर वर्तमान काल तक सभी समाजों में धर्म ही दिखाई देता है। धर्म जीवन के मूल्यों का महत्वपूर्ण अर्थ स्पष्ट करता है। सदाचार की भावना से मनुष्य में आत्म …

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लैंगिक असमानता

लैंगिक असमानता का आशय समाज में स्त्रियों एवं पुरुषों में भेदभाव किए जाने से है। लैंगिक असमानता का प्रयोग जैविकीय एवं सामाजिक दोनों भावो में किया जाता है। जीव विज्ञान में लिंग का आशय विशिष्ट जैविककीय संरचना से है। इसमें विशेष शारीरिक व मानसिक दशाओं का समावेश होता है। समाजशास्त्र में स्त्री पुरुषों का अध्ययन …

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धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां – यदि धर्म रूढ़िवादी पर्वती का तथा वस्तु स्थित बनाए रखने का समर्थक है, परंतु आधुनिक समाज में तेजी से बदलती परिस्थितियों के प्रवेश के प्रवेश में यह स्वयं को बचाने में असमर्थ हो गया, जिसके परिणाम स्वरूप धर्म में नई प्रवृतियां दिखाई दी। धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां 1. धार्मिक संकीर्णता …

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जाति अर्थ परिभाषा लक्षण

भारतीय सामाजिक संस्थाओं में जाति एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्था है। डॉक्टर सक्सेना का मत है कि जाति हिंदू सामाजिक संरचना का एक मुख्य आधार रही है, जिससे हिंदुओं का सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन प्रभावित होता रहा है। श्रीमती कर्वे का मत है कि यदि हम भारतीय संस्कृति के तत्वों को समझना चाहते हैं …

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निर्धनता का सामाजिक प्रभाव, जातीय संघर्ष

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव

निर्धनता का सामाजिक प्रभाव क्या है? निर्धनता अनेक सामाजिक बुराइयों को जन्म देती है। निर्धनता के समाज पर अनेक प्रभाव पड़ते हैं। जिन्हें निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है- निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निर्धनता समाज को और अधिक निर्धन करती है। निर्धनता का सामाजिक प्रभाव निम्न है- 1. अपराधों में वृद्धि निर्धनता एक अभिशाप है …

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चीन जनसंख्या वृद्धि

भारत में निर्धनता के कारण

भारत में निर्धनता के कारण – कभी कभी अपनी जीविका चलाने के लिए आवश्यक वस्तुओं को एकत्र करना भी मुश्किल हो जाता है। आवश्यक वस्तुओं के अभाव में निर्धनता का सामना करना पड़ता है। उत्पादन के ठीक होने किंतु उसका वितरण असमान होने पर भी निर्धनता का जन्म होता है। उत्पादन के साधनों पर कुछ …

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निर्धनता अर्थ एवं परिभाषा

भारत में निर्धनता की परिभाषा पौष्टिक आहार के आधार पर दी गई है। योजना आयोग के अनुसार किसी व्यक्ति को गांव में यदि 2400 कैलोरी और शहरों में 2100 कैलोरी प्रतिदिन की ऊर्जा का भोजन उपलब्ध नहीं होता है तो यह माना जाएगा कि वह व्यक्ति गरीबी की रेखा के नीचे अपना जीवन व्यतीत कर …

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