समाजशास्त्र

man and woman hugging each other

नातेदारी

मानव समाज में नातेदारी व्यवस्था का विकास इन सभी प्रयत्नों का एक संयुक्त परिणाम है। एक साधारण से अवलोकन से यह स्पष्ट हो जाता है कि जो व्यक्ति हमसे विवाह या रक्त के द्वारा सम्बन्धित होते हैं, उन सभी से हमारे सम्बन्ध समान प्रकृति के नहीं होते। कुछ व्यक्तियों से हम अधिक निकटता महसूस करते …

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वंश क्रम

वंश समूह

वंश समूह का तात्पर्य व्यक्तियों के उस समूह से होता है जिसमें एक ज्ञात पूर्वज से सम्बन्धित अनेक पीढ़ियों के रक्त सम्बन्धियों का समावेश होता है। ऐसा पूर्वज कोई काल्पनिक या पौराणिक व्यक्ति न होकर पांच-छः पीढ़ी पहले का कोई वास्तविक व्यक्ति होता जिससे आगे की पीढ़ियों की कड़ियां सदस्यों को ज्ञात होती हैं। जब …

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वंश क्रम

वंश क्रम

नातेदारी से एक बड़े और विस्तृत समूह का बोध होता है जिसके सदस्य पिता तथा माता पक्ष के अनेक पीढ़ियों से सम्बन्धित होते हैं। वास्तव में हममें से प्रत्येक व्यक्ति जन्म के एक विशेष परिवार का सदस्य अवश्य होता हैं चाहे हम उस परिवार में जीवन व्यतीत करें या न करें। साथ ही, हम अपने …

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मातृसत्ता

मातृसत्ता

मातृसत्ता शब्द का प्रयोग दो अर्थों में किया जाता है। इसका पहला अर्थ इस सामान्य धारणा से मिलता-जुलता है कि मातृसत्ता सामाजिक संगठन का एक विशेष रूप है जिसमें परिवार की मुखिया कोई स्त्री होती तथा वंशक्रम माता की ओर चलता है। मार्शल ने समाजशास्त्र के शब्दकोश में लिखा है कि मातृसत्ता का दूसरा अर्थ …

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पितृसत्ता

पितृसत्ता – सामान्य शब्दों में कहा जा सकता है कि जब किसी समाज की संरचना में सत्ता का केन्द्र पुरुषों की प्रस्थिति होती है, तब इस दशा को हम पितृसत्ता कहते हैं। वास्तव में पितृसत्ता एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें परम्परा और व्यवहार के नियमों द्वारा स्त्रियों की तुलना में पुरुषों की शक्ति, अधिकारों और …

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एकाकी परिवार

एकाकी परिवार विश्व के सभी समाजों की एक सार्वभौमिक विशेषता है, लेकिन भारतीय समाज में इस तरह के परिवार भारत की सामाजिक संरचना में होने वाले परिवर्तनों का परिणाम हैं। भारत में औद्योगीकरण और नगरीकरण के फलस्वरूप जैसे-जैसे स्थान परिवर्तन करने की प्रवृत्ति बढ़ती गई संयुक्त परिवारों की जगह एक ऐसी परिवार व्यवस्था विकसित होने …

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भारतीय संयुक्त परिवार

भारतीय संयुक्त परिवार भारत की पूरी सांस्कृतिक विरासत में विशेष महत्व रहा है। एक साधारण भारतीय के लिए परिवार का अर्थ संयुक्त परिवार से ही होता है। संयुक्त परिवार की प्रकृति को स्पष्ट करते हुए इरावती कर्वे ने लिखा है, “संयुक्त परिवार ऐसे व्यक्तियों का समूह है, जो एक ही घर में रहते हैं, एक …

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जनजातीय विवाह

जनजातीय विवाह

जनजातीय विवाह को समझते समय हमारा ध्यान सबसे पहले जनजातीय समाज की और जाता है। इसका कारण यह है कि जनजातियां किसी भी समाज में सभ्यता के विकास की मौलिक प्रतिनिधि होती है तथा उन्हीं की विशेषताओं को समझकर हम सभ्यता के विकास के विभिन्न स्तरों की समझ सकते हैं। जनजाति से हमारा तात्पर्य आदिवासियों …

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ईसाई विवाह

ईसाई विवाह को परिभाषित करते हुए कहा गया है कि “विवाह समाज में एक पुरुष तथा स्त्री के बीच का एक समझौता है, जो साधारणतया सम्पूर्ण जीवनभर के लिए होता है तथा इसका उद्देश्य यौन सम्बन्धी पारस्परिक सहयोग तथा परिवार की स्थापना करना है।” ईसाई विवाह में पति-पत्नी के स्थायी सम्बन्ध को स्पष्ट करते सेण्ट …

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