संस्कृत

शिक्षा दर्शन

संस्कृत गद्य साहित्य का विकास

संस्कृत गद्य साहित्य का विकास – संस्कृत वाडमय में गद्य का अतिशय महत्वपूर्ण स्थान है। जब हम गद्य के उद्भव के विषय में विचार करते हैं तो इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि मानव ने प्रारंभ में गद्य में ही परस्पर वार्तालाप प्रारंभ किया होगा। जब उसने अपने मनोभावों को साहित्यिक रूप में प्रस्तुत करना …

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CSJMU BEd Semester IV Syllabus

राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण

राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण – राजा शूद्रक महाकवि वाण द्वारा रचित कादंबरी का प्रमुख पात्र है। कादंबरी में एक कल्पना पर आधारित 3 जन्मों की कथा को वर्णित किया गया है। शूद्रक पूर्व जन्म में राजा चंद्रापीड तथा चंद्रपीड पूर्व जन्म में स्वयं चंद्रमा थे। शुकनास का चरित्रचित्रण राजा शूद्रक का चरित्र चित्रण राजा …

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शुकनास का चरित्रचित्रण

शुकनास का चरित्रचित्रण

शुकनास का चरित्रचित्रण – राजा तारापीड के अमात्य शुकनास एक कुशल एवं बुद्धिमान मंत्री हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर राज्य का संचालन अच्छी तरह से किया था। अपने कार्यकाल में राजा के प्रति स्वामी भक्ति राज्य की देखभाल अनुशासन प्रशासन आदि का कार्य बड़ी ही निपुणता से किया है। परंतु जब युवराज चंद्रापीड …

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हर्षचरित कथावस्तु

हर्षचरित कथावस्तु

हर्षचरित कथावस्तु – महाकवि बाणभट्ट की कीर्ति कौमुदी की विस्तारक दो रचनाएं हर्षचरित और कादंबरी हैं। हर्षचरित महाकवि बाणभट्ट की प्रथम रचना है। यह गद्य विद्या में आख्यायिका है। इसमें कुल 8 उच्छवास हैं। प्रथम तीन उच्छवासो में महाकवि बाणभट्ट ने आत्मकथा को प्रस्तुत किया है और शेष उच्छवासों में सम्राट हर्ष के संबंध में …

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