हिंदी शिक्षण विधि

सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण तकनीकी

सूक्ष्म शिक्षण

सूक्ष्म शिक्षण – शिक्षण के द्वारा ही शिक्षक, छात्रों में पाठ्य उद्देश्यों की प्राप्ति कर उसमें वांछित दक्षताओं का विकास करता है। शिक्षण कार्य की कुशलता शिक्षक के स्वःज्ञान पर निर्भर है, साथ ही शिक्षण कला कुशलता हेतु शिक्षक की दक्षता भी आवश्यक है। शिक्षा तकनीकी की यह धारणा है कि शिक्षक जन्मजात नहीं होते …

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भाषा, कफन कहानी के उद्देश्य, पठन

पठन अर्थ

पठन अर्थ – लिखित भाषा को बाँचने की क्रिया को पढ़ना अथवा पठन कहा जाता है; जैसे-पम्फलेट पढ़ना, समाचार पत्र पढ़ना और पुस्तकें पढ़ना। परन्तु भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में पढ़ने का अर्थ होता है। पठन अर्थ किसी के द्वारा लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त भाव एवं विचारों को पढ़कर समझना। अर्थ बोध एवं …

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भाषा के रूप, पाठ्यक्रम के उद्देश्य, मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों? – जहाँ तक शिक्षा के माध्यम की बात है लगभग सभी स्वतन्त्र देशों में शिक्षा का माध्यम वहाँ की मातृभाषाएँ ही हैं। जिन देशों में एक से अधिक मातृभाषाएँ हैं उन देशों में वहाँ की राष्ट्रभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया गया है। कुछ देश इसके अपवाद भी हैं। …

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देवनागरी लिपि

देवनागरी लिपि

देवनागरी लिपि एक ऐसी लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कुछ विदेशी भाषाएँ लिखीं जाती हैं। देवनागरी लिपि में 14 स्वर और 33 व्यंजन सहित 47 प्राथमिक वर्ण हैं। आज देवनागरी लिपि का उपयोग 120 से अधिक भाषाओं के लिए किया जा रहा है। अधिकतर भाषाओं की तरह देवनागरी भी बायें से दायें लिखी …

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भाषा के रूप, पाठ्यक्रम के उद्देश्य, मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा

सामान्यतः जिस भाषा को व्यक्ति अपने शिशु काल में अपनी माता एवं सम्पर्क में आने वाले अन्य व्यक्तियों का अनुकरण करके सीखता है, उसे उस व्यक्ति की मातृभाषा कहते हैं। परन्तु भाषा विज्ञान में इसे बोली कहा जाता है। भाषा वैज्ञानिक कई समान बोलियों की प्रतिनिधि बोली को विभाषा और कई समान विभाषाओं की प्रतिनिधि …

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भाषा के रूप, मातृभाषा, प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा

भाषा के रूप

भाषा के रूप – संसार के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न भाषाओं का विकास हुआ है। ये भाषाएँ हजारों की संख्या में हैं। हमारे अपने देश भारत में ही सैकड़ों भाषाओं का प्रयोग होता है। किसी भी मनुष्य के लिए इन सबका सीखना सम्भव नहीं। अतः किसी मनुष्य को किन भाषाओं को सीखना चाहिए और किस …

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भाषा, कफन कहानी के उद्देश्य, पठन

भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व

भाषा भावाभिव्यक्ति एवं विचार-विनिमय का सांकेतिक साधन है। संसार के विभिन्न प्राणियों द्वारा प्रयुक्त भावाभिव्यक्ति के इन साधनों- अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और ध्वनि संकेतों को भाषा कहते हैं। इस अर्थ में संसार के सभी प्राणियों की अपनी-अपनी भाषाएँ हैं। अपने आदि काल में तो मनुष्य कार्य प्रायः अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और विभिन्न प्रकार …

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