हिंदी शिक्षण विधि

भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व भाषा के रूप मातृभाषा
मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों? देवनागरी लिपि लेखन अर्थ
पठन अर्थ भाषा प्रयोगशाला सूक्ष्म शिक्षण
मौखिक पठन नाटक के तत्व नाटक शिक्षण
कहानी के तत्व कहानी शिक्षण
रागदरबारी उपन्यास व्याख्या

कहानी शिक्षण प्रकार कहानियों का चयन

कहानी शिक्षण – कहानी सुनने और कहने की शिक्षा शिशु कक्षा से प्रारम्भ करने और कहानी लेखन की शिक्षा कक्षा 3 से प्रारम्भ करने की बात हम तत्सम्बन्धी अध्यायों में स्पष्ट कर चुके हैं। कहानियों में बच्चों की स्वाभाविक रुचि होती है इसलिए लिखित भाषा की शिक्षा का प्रारम्भ कहानी शिक्षण से ही करना चाहिए। …

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रागदरबारी उपन्यास, कफन कहानी सारांश

कहानी के तत्व – कथावस्तु पात्र कथाकथन भाषा शैली उद्देश्य

कहानी के तत्व – कहानी किसी भी प्रकार की हो, उसका कुछ कथानक अवश्य होता है, उसमें कुछ पात्र अवश्य होते इन पात्रों का अपना स्वभाव और चरित्र अवश्य होता है और वे आपस में कुछ वार्तालाप भी करते हैं। यदि कहानी उचित भाषा-शैली में न लिखी जाए तो उसका प्रभावहीन होना निश्चित है। फिर …

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जीवन परिचय के प्रकार, लेखकों का जीवन परिचय, जीवन परिचय

नाटक शिक्षण के लक्ष्य नाटक शिक्षण की 5 प्रणालियां

नाटक शिक्षण – अनुकरण (अभिनय) मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। प्रारम्भ से ही बच्चे दूसरों का अनुकरण करते हैं। लकड़ी की डण्डी, बेंत अथवा बाँस आदि को जब बच्चे दोनों पैरों के बीच रखकर उसे घोड़ा मानकर, तिक-तिक करते हैं तो कितने प्यारे लगते हैं। कभी-कभी वे अपने माता-पिता और भाई-बहन आदि की भूमिका भी …

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Auditorium Stage

नाटक के तत्व – कथावस्तु पात्र संवाद भाषा शैली उद्देश्य अभिनय

नाटक के तत्व – नाटक साहित्य की प्राचीनतम विधा है। नाटक का अभिनय रंगमंच पर होता है, उसे देखने से दर्शक के हृदय में यथा भाव जाग्रत होते हैं, इसलिए इसे संस्कृत में दृश्य काव्य की संज्ञा दी गई है। परन्तु यहाँ हमें नाटक को साहित्य की विधा के रूप में देखना है न कि …

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कहानी

मौखिक पठन प्रकार महत्त्व तत्व तथा गद्य व पद्य में मौखिक पठन

लिखित भाषा का मुख से उच्चारण करते हुए पढ़ने और पढ़कर उसका अर्थ समझने की क्रिया को मौखिक पठन कहते हैं। अर्थ बोध एवं भावानुभूति मौखिक पठन के आवश्यक तत्त्व हैं, यह बात दूसरी है कि पाठक को यह अर्थ बोध एवं भावानुभूति किस सीमा तक होते हैं। यह तो पठनकर्ता के ज्ञान एवं कौशल …

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सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण तकनीकी

शिक्षण तकनीकी परिभाषाएं 7 विशेषताएं 7 अवधारणाएं

शिक्षण तकनीकी – शिक्षण विकास की एक महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है जो शिक्षक-छात्र की अन्तःप्रक्रिया द्वारा सम्पन्न होती है। वस्तुतः शिक्षण एक सोद्देश्य प्रक्रिया है, जिसका अन्तिम लक्ष्य बालक का पूर्ण विकास करना है। शिक्षण के दो प्रमुख तत्व माने गये हैं- (i) पाठ्यवस्तु तथा (ii) कक्षागत व्यवहार अथवा सम्प्रेषण शिक्षण तकनीकी में ये दोनों ही …

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सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण तकनीकी

शिक्षण कौशल परिभाषा विशेषताएं व 14 शिक्षण कौशल

शिक्षण कौशल – शिक्षण की प्रक्रिया में शिक्षक एक मदारी की भाँति क्रियाकलाप कर अपने पाठ को अधिगम कराने का प्रयास करता है साथ ही अपनी कला के कलात्मक पक्ष के निरन्तर विकास हेतु विभिन्न क्रियाओं अर्थात् शिक्षण कौशलों में सुधार हेतु प्रयास करता है। प्रभावशाली शिक्षण का विकास तभी होता है जब शिक्षण के …

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भाषा प्रयोगशाला

भाषा प्रयोगशाला के 8 लाभ और शिक्षण

भाषा प्रयोगशाला व्यष्टि शिक्षण और समूह शिक्षण में समन्वय करने और भाषा सीखने में बच्चों को सक्रिय रखने का एक आधुनिक प्रयास है। 1966 में अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने शैक्षिक तकनीकी की राष्ट्रीय परिषद् (National Council of Educational Technology, NCET) की स्थापना की। इस परिषद ने शिक्षा के क्षेत्र में वैज्ञानिक उपकरणों के प्रयोग की उपयोगिता …

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लेखन, हिंदी रचनाएं

लेखन अर्थ लेखन के Top 7 आधार लेखन कौशल का विकास

लेखन अर्थ – भाषा के माध्यम से कुछ भी लिखना लेखन कहलाता है। परन्तु भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में लेखन का अर्थ है- अर्थपूर्ण लेखन, भाव एवं विचारों की लिखित रूप में अभिव्यक्ति भाव एवं विचार लेखन के मूल तत्त्व होते है। इस प्रकार अपने भाव एवं विचारों को लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त …

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सूक्ष्म शिक्षण, शिक्षण तकनीकी

सूक्ष्म शिक्षण परिभाषाएं सिद्धांत 5 विशेषताएं कमियां सीमाएं

सूक्ष्म शिक्षण – शिक्षण के द्वारा ही शिक्षक, छात्रों में पाठ्य उद्देश्यों की प्राप्ति कर उसमें वांछित दक्षताओं का विकास करता है। शिक्षण कार्य की कुशलता शिक्षक के स्वःज्ञान पर निर्भर है, साथ ही शिक्षण कला कुशलता हेतु शिक्षक की दक्षता भी आवश्यक है। शिक्षा तकनीकी की यह धारणा है कि शिक्षक जन्मजात नहीं होते …

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भाषा, कफन कहानी के उद्देश्य, पठन

पठन अर्थ पठन के 6 आधार व पठन कौशल विकास

पठन अर्थ – लिखित भाषा को बाँचने की क्रिया को पढ़ना अथवा पठन कहा जाता है; जैसे-पम्फलेट पढ़ना, समाचार पत्र पढ़ना और पुस्तकें पढ़ना। परन्तु भाषा शिक्षण के सन्दर्भ में पढ़ने का अर्थ होता है। पठन अर्थ किसी के द्वारा लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्त भाव एवं विचारों को पढ़कर समझना। अर्थ बोध एवं …

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भाषा के रूप, पाठ्यक्रम के उद्देश्य, मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों? – जहाँ तक शिक्षा के माध्यम की बात है लगभग सभी स्वतन्त्र देशों में शिक्षा का माध्यम वहाँ की मातृभाषाएँ ही हैं। जिन देशों में एक से अधिक मातृभाषाएँ हैं उन देशों में वहाँ की राष्ट्रभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाया गया है। कुछ देश इसके अपवाद भी हैं। …

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देवनागरी लिपि

देवनागरी लिपि 7 विशेषताएं व न्यूनताएं

देवनागरी लिपि एक ऐसी लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कुछ विदेशी भाषाएँ लिखीं जाती हैं। देवनागरी लिपि में 14 स्वर और 33 व्यंजन सहित 47 प्राथमिक वर्ण हैं। आज देवनागरी लिपि का उपयोग 120 से अधिक भाषाओं के लिए किया जा रहा है। अधिकतर भाषाओं की तरह देवनागरी भी बायें से दायें लिखी …

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भाषा के रूप, पाठ्यक्रम के उद्देश्य, मातृभाषा ही शिक्षा का माध्यम क्यों?

मातृभाषा का क्या महत्त्व है? 4 Top Importance

सामान्यतः जिस भाषा को व्यक्ति अपने शिशु काल में अपनी माता एवं सम्पर्क में आने वाले अन्य व्यक्तियों का अनुकरण करके सीखता है, उसे उस व्यक्ति की मातृभाषा कहते हैं। परन्तु भाषा विज्ञान में इसे बोली कहा जाता है। भाषा वैज्ञानिक कई समान बोलियों की प्रतिनिधि बोली को विभाषा और कई समान विभाषाओं की प्रतिनिधि …

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भाषा के रूप, मातृभाषा, प्राथमिक स्तर पर पर्यावरण शिक्षा

भाषा के रूप कितने होते हैं? भाषा के 7 प्रकार

भाषा के रूप – संसार के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न भाषाओं का विकास हुआ है। ये भाषाएँ हजारों की संख्या में हैं। हमारे अपने देश भारत में ही सैकड़ों भाषाओं का प्रयोग होता है। किसी भी मनुष्य के लिए इन सबका सीखना सम्भव नहीं। अतः किसी मनुष्य को किन भाषाओं को सीखना चाहिए और किस …

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भाषा, कफन कहानी के उद्देश्य, पठन

भाषा परिभाषा प्रकृति महत्व व भाषा के 2 मूल आधार

भाषा भावाभिव्यक्ति एवं विचार-विनिमय का सांकेतिक साधन है। संसार के विभिन्न प्राणियों द्वारा प्रयुक्त भावाभिव्यक्ति के इन साधनों- अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और ध्वनि संकेतों को भाषा कहते हैं। इस अर्थ में संसार के सभी प्राणियों की अपनी-अपनी भाषाएँ हैं। अपने आदि काल में तो मनुष्य कार्य प्रायः अंग-प्रत्यंगों के संचालन, भाव-मुद्राओं और विभिन्न प्रकार …

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