शैक्षिक नेतृत्व एवं प्रबंधन

बच्चे खेलते हुए

प्रधानाचार्य के कर्तव्य

प्रधानाचार्य के कर्तव्य का तात्पर्य एक विद्यालय को आदर्श विद्यालय कैसे बनाया जाए, उसका प्रबंधन विख्यात कैसे किया जाए। प्रधानाचार्य के कुछ मुख्य कर्तव्य होते हैं जिनके द्वारा वह प्रबंधन प्रक्रिया को निखारने का प्रयास करता है। प्रधानाचार्य के कर्तव्य प्रधानाचार्य के कर्तव्य निम्नलिखित हैं- प्रधानाचार्य के प्रशासन संबंधी कर्तव्य विद्यालय के कार्यालय सम्बन्धी कर्तव्य …

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प्रौढ़ शिक्षा, विद्यालय प्रबंधन

विद्यालय प्रबंधन

विद्यालय प्रबंधन एक विशिष्ट प्रक्रिया है जिसका कार्य विद्यालय के मानवीय एवं भौतिक संसाधनों को ऐसी गतिशील संगठन इकाइयों में परिवर्तित करना है। जिसके द्वारा उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इस प्रकार से कार्य किया जा सके कि शिक्षार्थियों के लिए उन्हें संतुष्टि प्राप्त हो सके और जो कार्य कर रहे हैं, उनमें उच्च नैतिक स्तर …

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प्रयोगशाला

प्रयोगशाला लाभ सिद्धांत महत्त्व

विद्यालयों में प्रयोगशालाओं का अपना स्थान होता है। आधुनिक युग में शिक्षा को आधिकारिक व्यावहारिक तथा जीवन से संबंधित किया जा सकता है। इसके लिए शिक्षा तथा शिक्षण के जगत में एक नारा चला है- करके सीखना। करके सीखने के लिए भी प्रयोगशालाओं तथा उन में विभिन्न प्रकार के उपकरणों तथा साज-सज्जाओं का होना अनिवार्य …

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हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं

शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं निम्न हैं- कागजी प्रक्रिया वित्तीय प्रबंधन मूलभूत सुविधाओं का अभाव पाठ्यक्रम निर्माण की समस्या शैक्षिक नीति निर्माण की समस्या नियोजन की समस्या 1. कागजी प्रक्रिया शैक्षणिक संस्थानों पर बोझिल कागजी प्रक्रिया और मानवीय प्रक्रियाओं का भार होता है और उन्हें उपस्थिति, शुल्क, प्रवेश, परिवहन आदि पर रिकॉर्ड बनाए रखना मुश्किल होता है। …

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प्रबन्धन,

शैक्षिक प्रबंधन कार्य

शैक्षिक प्रबंधन कार्य – विद्यालय का मुख्य उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। बालक सजग गतिशील तथा विशिष्ट जीव है। प्रत्येक बालक दूसरे बालक से क्षमताओं तथा विशेषताओं में भिन्न है। अतः आवश्यक है कि विद्यालय का वातावरण ऐसा हो कि सभी बालकों को विकास के पूर्ण अवसर प्राप्त हो सके। विद्यालय का प्रबंधन …

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प्रबन्धन,

प्रबन्धन अर्थ परिभाषा विशेषताएं

शिक्षा, उद्योग तथा व्यापार जैसे क्षेत्रों में प्रबंधन का अपना महत्त्व है। प्रबन्धन के द्वारा समस्त मानवीय एवं भौतिक संसाधनों की व्यवस्था तथा उनका अधिकतम उपयोग किया जाता है। इससे कार्यप्रणाली में गति आती है, संसाधनों का मितव्ययतापूर्ण उपयोग होता है तथा उद्देश्यों की पूर्ति सहजता के साथ हो जाती है। प्रबन्धन प्रबन्धन वह तत्व …

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शिक्षा दर्शन

शैक्षिक पर्यवेक्षण

शैक्षिक पर्यवेक्षण शैक्षिक प्रशासन का महत्वपूर्ण अंग है। जिसके द्वारा व्यक्तियों को किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए क्रियाशील रखा जाता है। शैक्षिक पर्यवेक्षण का कार्य उस समय प्रारंभ होता है जब शिक्षक कक्षा में होता है। शैक्षिक पर्यवेक्षण का संबंध मुख्यतः मानवीय तत्व से होता है। यह विद्यालय में मुख्यता विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा …

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शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका

शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका

शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार की भूमिका – केंद्र सरकार माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। यह माध्यमिक शिक्षा से संबंधित मामलों में राज्य सरकारों को परामर्श एवं वित्तीय सहायता प्रदान करती है तथा उनका पथ प्रदर्शन एवं नेतृत्व भी करती है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार माध्यमिक शिक्षा में …

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पर्यवेक्षण

आधुनिक युग में निरीक्षण संबंधी नवीन धारणा को प्रयोग करने के लिए पर्यवेक्षण नामक शब्द का प्रयोग किया गया। पर्यवेक्षण अंग्रेजी शब्द Supervision का हिंदी रूपांतरण है। यह दो शब्द Super और Vision का सन्धि है, जिसका अर्थ होता है क्रमश: ‘उच्च और दृष्टि’। किस प्रकार व उच्च बुद्धि है जो विद्यालय को गति प्रदान …

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हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन

राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन – भारत में कुल 29 राज्य हैं। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक अध्यक्ष होता है। उसको शासन कार्यों में परामर्श देने के लिए प्रत्येक राज्य में एक मंत्रिपरिषद होता है। मंत्री परिषद का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है। मंत्रिपरिषद के मंत्रियों में एक शिक्षा मंत्री होता है। शिक्षा मंत्री शिक्षा से संबंधित …

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नेतृत्व, अच्छा शैक्षिक प्रशासक

आदर्श शैक्षिक प्रशासक

एक आदर्श शैक्षिक प्रशासक के लिए विद्यालय प्रबंधन एवं विद्यालय के कर्मचारियों में उचित समन्वय होना अत्यंत आवश्यक है। विद्यालय हो या अन्य कोई संस्थान बिना उचित समन्वय एवं सहयोग के विकास नहीं कर सकता है। आदर्श शैक्षिक प्रशासक के गुण विद्यालय में तो विभिन्न पृष्ठभूमि के छात्र तथा शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी वर्ग आते …

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प्राथमिक शिक्षा प्रशासन

प्राथमिक शिक्षा प्रशासन

भारत में प्राथमिक शिक्षा प्रशासन के दो महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 45 के अनुसार सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति और सार्वभौमिक शिक्षा के स्तर पर बेसिक शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा के आदर्श या नमूने के रूप में लागू करना। सन 1976 से पूर्व शिक्षा पूर्ण रूप से राज्यों का …

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वैदिककालीन शिक्षा, उच्च शिक्षा के उद्देश्य,

केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड

यह मंडल सबसे प्राचीन संस्था है। शिक्षा संबंधी मामलों में प्रांतीय सरकारों की ओर सलाह देने के लिए इसकी स्थापना 1921 ईस्वी में की गई थी। यह बोर्ड मंत्रालय की समस्त क्रियाओं की महत्वपूर्ण धुरी है, जिसके चारों ओर संपूर्ण कार्यक्रम फैला हुआ है। संगठन केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड के संगठन इस प्रकार है केंद्रीय …

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शैक्षिक नेतृत्व

शैक्षिक नेतृत्व

शैक्षिक नेतृत्व के प्रत्यय को अब तक हम उद्योग तथा व्यापार, राजनीति तथा समाजशास्त्र में ही देखते आए हैं किंतु वर्तमान में यह पाया गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की अन्य क्षेत्रों में। शैक्षिक नेतृत्व की उपयोगिता शिक्षा प्रशासन तथा शिक्षण अधिगम के क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप …

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उच्च शिक्षा के उद्देश्य, विश्वविद्यालय शिक्षा प्रशासन, नेता के सामान्य गुण

डायट

डायट के माध्यम से प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों, औपचारिकेत्तर तथा प्रौढ़ शिक्षा के कार्यकर्ताओं को उनके शैक्षिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक किया जाता है। नई शिक्षा नीति 1986 में प्राथमिक स्तर की शिक्षा के विकास तथा अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के क्रियान्वयन हेतु सन 1988 में जिला स्तरीय या मंडलीय शिक्षा तथा प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना …

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