भारतीय शिक्षा प्रणाली का विकास

शिक्षा का व्यवसायीकरण, शैक्षिक प्रबंधन समस्याएं

शिक्षा का व्यवसायीकरण

माध्यमिक शिक्षा का व्यवसायीकरण को लेकर भारत सरकार ने कई आयोगों का गठन ही नहीं किया अपितु उनकी सलाह पर कार्य किया। परंतु फिर भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। इसके संबंध में कोठारी आयोग 1964 ने कहा है बार-बार सलाह देने के पश्चात भी दुर्भाग्य की बात यह है कि विद्यालय स्तर पर …

शिक्षा का व्यवसायीकरण Read More »

शिक्षा का व्यवसायीकरण

भारत में शिक्षा के निजीकरण के कारण

भारत में शिक्षा के निजीकरण के कारण – भारत में स्वतंत्रता से पूर्व निजी क्षेत्र की प्रधानता की, परंतु योजना काल में सार्वजनिक क्षेत्र का महत्व बढ़ा है तथा निजी क्षेत्र के महत्त्व में सापेक्षिक रूप से कमी आई है। सन 1991 में नई आर्थिक नीति की घोषणा की गई। इस नीति के अंतर्गत निजी …

भारत में शिक्षा के निजीकरण के कारण Read More »

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान – सर्व शिक्षा अभियान से माध्यमिक विद्यालयों में प्रवेश संख्या बढ़ी है और विद्यालय में ठहराव में सफलता मिली है। इसी प्रगति क्रम को आगे बढ़ाने के लिए NUEPA ने 2006 में योजना पर विचार किया गया। योजना को कार्यान्वित करने के लिए समय-समय पर रूपरेखा तैयार की गई। वर्ष 2009 …

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान Read More »

सर्व शिक्षा अभियान

सर्व शिक्षा अभियान

सर्व शिक्षा अभियान केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना का उद्देश्य भारत भर में सभी को जहां तक संभव हो शिक्षित करना है। अक्टूबर 1998 में राज्य सरकारों को शिक्षा मंत्रियों की एक कॉन्फ्रेंस यह तय करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने दिल्ली में बुलाई थी कि …

सर्व शिक्षा अभियान Read More »

ब्रिटिश काल में प्राथमिक शिक्षा

ब्रिटिश काल में प्राथमिक शिक्षा – ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर ब्रिटिश शासन तक सभी के काल में भारत में शिक्षा पद्धति ने नवीन दिशा ग्रहण की। इसाई धर्म के प्रचार के लिए आई हुई मिशनरियों के द्वारा ईसाई धर्म के प्रचारक भारत में शिक्षा का प्रसार करना चाहते थे। 1813 में …

ब्रिटिश काल में प्राथमिक शिक्षा Read More »

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम को समझने से पहले यह आवश्यक है कि हम इस पाठ्यक्रम की कमियों को देखें। विदेशी शिक्षण संस्थाओं के पाठ्यक्रम से इसकी तुलना करने पर हम पाते हैं कि हमारा प्राथमिक शिक्षा का पाठ्यक्रम अत्यधिक संकुचित व पुराना है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यह पाठ्यक्रम लाभदायक कुशलताओं का विकास तथा …

प्राथमिक शिक्षा पाठ्यक्रम Read More »

परीक्षा सुधार आवश्यकता

परीक्षा सुधार आवश्यकता

परीक्षा सुधार आवश्यकता – जैसे-जैसे समाज की विचारधाराओं में परिवर्तन होता चला गया। शिक्षा व्यवस्था व उसका स्वरूप भी परिवर्तित होता चला गया। जैसे ही शिक्षा के उद्देश्य परिवर्तित हुए तो उसी के आधार पर पाठ्यक्रम शिक्षाविद विधियां अनुशासन शिक्षा बालक परीक्षा का मूल्यांकन आदि सभी परिवर्तित हो जाते हैं जैसे कि शिक्षा की इतिहास …

परीक्षा सुधार आवश्यकता Read More »

हण्टर आयोग 1882, सैडलर आयोग, शैक्षिक प्रबन्धन कार्य, वेदान्त दर्शन

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम 2005

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम 2005 – वर्तमान में कोई भी घटना, समस्या, प्रदूषण, प्राकृतिक आपदा, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय ना रहकर अंतरराष्ट्रीय रूप धारण कर लेती है। जैसे आतंकवाद आणविक शक्ति का दुरुपयोग प्राकृतिक संसाधनों का अधिक दोहन, भूकंप इत्यादि। इसलिए पाठ्यक्रम ने भी विश्व स्तरीय रूप ले लिया है। विश्व के विद्वानों अर्थशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों, राजनीतिज्ञों और महापुरुषों, …

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम 2005 Read More »

लार्ड कर्जन की शिक्षा नीति, मुदालियर आयोग

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम निर्माण 2005

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम निर्माण 2005 – मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा बुलाई गई राष्ट्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कार्यकारिणी सभा में चिंतन किया गया कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम 2000 में क्या सुधार किया जाए? 14 जुलाई से 19 जुलाई 2004 में बुलाई गई सभा में निर्णय लिया गया कि 21 वी शताब्दी के लिए …

राष्ट्रीय पाठ्यक्रम निर्माण 2005 Read More »

संतुलित पाठ्यक्रम आवश्यकता

संतुलित पाठ्यक्रम आवश्यकता – पाठ शालाओं की आत्मा होने के कारण पाठ्यक्रम में एकात्मक संतुलन और संजीवता होनी चाहिए। शिक्षा ऐसे जीवन के लिए होती है जो स्थिर न रहकर परिवर्तनशील होता है। शिक्षण एक निरंतर चलते रहने वाला कार्य है। इसीलिए यह थोड़े वर्षों में ही नहीं हो सकता। शैशव से मृत्यु तक का …

संतुलित पाठ्यक्रम आवश्यकता Read More »

वैदिककालीन शिक्षा, उच्च शिक्षा के उद्देश्य,

केंद्र सरकार के शैक्षिक उत्तरदायित्व

केंद्र सरकार के शैक्षिक उत्तरदायित्व – 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता पूर्व 1945 ईस्वी में शिक्षा विभाग का स्वतंत्र अस्तित्व प्रकाश में आ चुका था। स्वाधीन भारत की सरकार ने सन 1947 में ही शिक्षा मंत्रालय का गठन कर दिया और भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद को बनाया …

केंद्र सरकार के शैक्षिक उत्तरदायित्व Read More »

प्राथमिक शिक्षा प्रशासन

शिक्षा निदेशक के कार्य

शिक्षा निदेशक के कार्य शिक्षा निदेशक के कुछ मुख्य कार्य निम्न है – शिक्षा निदेशक संपूर्ण राज्य में शिक्षा प्रशासन के प्रति उत्तरदाई होता है। वाह शिक्षामंत्री को शैक्षिक एवं प्रशासनिक विषयों में सलाह देता है। राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों की कार्यकारिणी परिषद का वह पदेन सदस्य होता है। इस प्रकार वह विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण …

शिक्षा निदेशक के कार्य Read More »

मैकाले का विवरण पत्र 1835, त्रिभाषा सूत्र, राज्य स्तर पर शैक्षिक प्रशासन

केंद्र सरकार की शैक्षिक सलाहकार समितियां

केंद्र सरकार की शैक्षिक सलाहकार समितियां – केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत शिक्षा विभाग है जो केंद्रीय सरकार के शिक्षा विषयक कार्यों और उत्तर दायित्वों का निर्वहन करता है। शिक्षा विभाग के कार्य काफी विस्तृत है। इस दृष्टि से केंद्रीय सरकार ने शिक्षा विभाग के विभिन्न क्षेत्रों को समुन्नत बनाने के …

केंद्र सरकार की शैक्षिक सलाहकार समितियां Read More »

मुक्त विश्वविद्यालय

दूरस्थ शिक्षा लक्षण

दूरस्थ शिक्षा लक्षण – प्राचीन काल से ही हमारे देश में दूरस्थ शिक्षा की व्यवस्था रही है। समय के साथ-साथ इसका भी स्वरूप बदलता रहा है। वर्तमान में यह पद्धति अत्यधिक विकसित हो चुकी है। काल में जहां ऋषि मुनि ज्ञान देने के लिए गांव गांव जाते थे या अपनी कुटिया में रहकर ज्ञान देते …

दूरस्थ शिक्षा लक्षण Read More »

मुक्त विश्वविद्यालय

मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य

मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य – मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा की एक ऐसी प्रणाली है जिसके द्वार सबके लिए खुले हैं। इसमें प्रवेश पाने के लिए आयु व आधारभूत शैक्षिक योग्यता आदि का कोई बंधन नहीं होता। इसमें सब युवक अथवा वृद्ध अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जो किसी कारण उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह …

मुक्त विश्वविद्यालय के उद्देश्य Read More »