शिक्षा शास्त्र

कंप्यूटर सहायक अनुदेशन

कंप्यूटर सहायक अनुदेशन

कंप्यूटर सहायक अनुदेशन – विभिन्न शिक्षण यन्त्रों एवं कम्प्यूटर जैसे विकसित यन्त्रों ने विकास के क्षेत्र में अपना योगदान देकर आश्चर्यजनक परिणाम सामने रखे हैं। मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी अथवा तकनीकी के विकास ने इस दिशा में अपना प्रमुख योगदान दिया है। विश्व के समस्त क्षेत्रों को तकनीकी ने प्रभावित किया है। शिक्षा के क्षेत्र …

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बाल मनोविज्ञान परिभाषा, व्यवहार तकनीकी

व्यवहार तकनीकी

व्यवहार तकनीकी दो शब्दों से मिलकर बना है व्यवहार और तकनीकी। व्यवहार व्यक्ति की गति को कहा जाता है स्किनर के अनुसार, व्यवहार मानव की गति या किसी सन्दर्भ संरचना में उसका अंश है जिसे व्यक्ति बाह्य उद्देश्यों या शक्ति क्षेत्रों से प्राप्त करता है। व्यवहार तकनीकी व्यवहार तकनीकी वह विज्ञान है जो शिक्षा के …

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सूक्ष्म शिक्षण परिभाषाएं, अनुदेशन तकनीकी, अच्छे शिक्षण की विशेषताएं

अनुदेशन तकनीकी

अनुदेशन तकनीकी को निर्देशन तकनीकी भी कहते हैं। अनुदेशन का अर्थ उन क्रियाओं से होता है जो अधिगम में सुविधायें प्रदान करती हैं। इसमें शिक्षक और छात्र के मध्य अन्तःक्रिया आवश्यक नहीं होती। साधारणतया शिक्षण और अनुदेशन में कोई अन्तर नहीं किया जाता है। अनुदेशन और शिक्षण दोनों में छात्रों को सीखने की प्रेरणा दी …

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सेमिनार के उद्देश्य, शैक्षिक तकनीकी

शैक्षिक तकनीकी

शैक्षिक तकनीकी का अर्थ समझने से पूर्व हमें शिक्षा एवं तकनीकी का अर्थ समझने से पूर्व हमें शिक्षा एवं तकनीकी का अर्थ समझ लेना चाहिए। तकनीकी से सम्बन्धित एक अन्य शब्द विज्ञान भी है जिसका अर्थ समझना आवश्यक है। शिक्षा ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया को कहते हैं। शाब्दिक अर्थों में शिक्षा का अर्थ “बालक …

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रागदरबारी उपन्यास व्याख्या

कहानी शिक्षण

कहानी शिक्षण – कहानी सुनने और कहने की शिक्षा शिशु कक्षा से प्रारम्भ करने और कहानी लेखन की शिक्षा कक्षा 3 से प्रारम्भ करने की बात हम तत्सम्बन्धी अध्यायों में स्पष्ट कर चुके हैं। कहानियों में बच्चों की स्वाभाविक रुचि होती है इसलिए लिखित भाषा की शिक्षा का प्रारम्भ कहानी शिक्षण से ही करना चाहिए। …

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रागदरबारी उपन्यास, कफन कहानी सारांश

कहानी के तत्व

कहानी के तत्व – कहानी किसी भी प्रकार की हो, उसका कुछ कथानक अवश्य होता है, उसमें कुछ पात्र अवश्य होते इन पात्रों का अपना स्वभाव और चरित्र अवश्य होता है और वे आपस में कुछ वार्तालाप भी करते हैं। यदि कहानी उचित भाषा-शैली में न लिखी जाए तो उसका प्रभावहीन होना निश्चित है। फिर …

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जीवन परिचय के प्रकार, लेखकों का जीवन परिचय, जीवन परिचय

नाटक शिक्षण

नाटक शिक्षण – अनुकरण (अभिनय) मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। प्रारम्भ से ही बच्चे दूसरों का अनुकरण करते हैं। लकड़ी की डण्डी, बेंत अथवा बाँस आदि को जब बच्चे दोनों पैरों के बीच रखकर उसे घोड़ा मानकर, तिक-तिक करते हैं तो कितने प्यारे लगते हैं। कभी-कभी वे अपने माता-पिता और भाई-बहन आदि की भूमिका भी …

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नाटक के तत्व

नाटक के तत्व – नाटक साहित्य की प्राचीनतम विधा है। नाटक का अभिनय रंगमंच पर होता है, उसे देखने से दर्शक के हृदय में यथा भाव जाग्रत होते हैं, इसलिए इसे संस्कृत में दृश्य काव्य की संज्ञा दी गई है। परन्तु यहाँ हमें नाटक को साहित्य की विधा के रूप में देखना है न कि …

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कहानी

मौखिक पठन

लिखित भाषा का मुख से उच्चारण करते हुए पढ़ने और पढ़कर उसका अर्थ समझने की क्रिया को मौखिक पठन कहते हैं। अर्थ बोध एवं भावानुभूति मौखिक पठन के आवश्यक तत्त्व हैं, यह बात दूसरी है कि पाठक को यह अर्थ बोध एवं भावानुभूति किस सीमा तक होते हैं। यह तो पठनकर्ता के ज्ञान एवं कौशल …

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