अर्थशास्त्र

अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण, विनिमय और उपभोग का अध्ययन किया जाता है। ‘अर्थशास्त्र’ शब्द संस्कृत शब्दों अर्थ (धन) और शास्त्र की संधि से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – ‘धन का अध्ययन’। किसी विषय के संबंध में मनुष्यों के कार्यो के क्रमबद्ध ज्ञान को उस विषय का शास्त्र कहते हैं, इसलिए अर्थशास्त्र में मनुष्यों के अर्थसंबंधी कार्यों का क्रमबद्ध ज्ञान होना आवश्यक है।

रुपयों का हिसाब

भुगतान संतुलन

भुगतान संतुलन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के आर्थिक लेन-देन या संव्यवहारों का लेखांकन है। यह विदेशों से प्राप्तियों व भुगतानों का विवरण-पत्र होता है। भुगतान संतुलन एक विवरण है जो एक वर्ष की अवधि में एक देश के कुल आयातों एवं निर्यातों के मूल्यों को बताता है। यह किसी देश का विश्व के अन्य देशों में होने …

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भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं

FDI FPI में अन्तर

FDI FPI में अन्तर क्या है? अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह विकासशील और विकसित देशों के पूँजी बाजारों में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। अन्तर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह के दो महत्वपूर्ण रूप हैं- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश किसी भी देश के आर्थिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका …

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व्यक्ति

भारत का विदेशी व्यापार

भारत का विदेशी व्यापार – भारत प्राचीन काल से ही विभिन्न देशों से व्यापार करता आ रहा है। उस समय भारतवासी व्यापार करने के लिए अन्य देशों में जाया करते थे। आगे चलकर यूरोपवासियों को भारत के साथ व्यापार करने की लालसा उत्पन्न हुई जिसके कारण पुर्तगाल, हालैण्ड, फ्रांस व इंग्लैण्ड के लोगों को भारत …

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Coin Currency

आर्थिक असमानता

आर्थिक असमानता अथवा आय तथा सम्पत्ति के असमान वितरण से अभिप्राय अर्थव्यवस्था उन परिस्थितियों से है, जिसमें कि राष्ट्र के कुछ लोगों की आय, राष्ट्र की औसत आय से बहुत अधिक तथा अधिकाश लोगों की आय, राष्ट्र की औसत आय से बहुत कम होती है। आय तथा सम्पत्ति के असमान द्वितरण की समस्या का सम्बन्ध …

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समावेशी विकास

समावेशी विकास

समावेशी विकास एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें समाज के सभी लोगों को समान अवसरों के साथ विकास का लाभ भी समान रूप से प्राप्त हो, अर्थात सभी वर्ग, क्षेत्र, प्रान्त के व्यक्तियों का बिना भेदभाव, एक समान विकास के अवसरों के साथ-साथ होने वाले देश के विकास को समावेशी विकास कहा जाता है या हम …

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A girl in tension

शिक्षित बेरोजगारी

शिक्षित बेरोजगारी – शिक्षा की सुविधायें तो बढ़ी हैं पर उपलब्ध नौकरियों की संख्या में उतनी अधिक वृद्धि नहीं हुई है। अब शिक्षित व्यक्तियों में यह विश्वास अधिक प्रचलित है कि चयन समिति के अधिकांश सदस्य भ्रष्ट और घूसखोर होते हैं, नियुक्तियों जातीयता या प्रान्तीयता के आधार पर की जाती है तथा अच्छी नौकरियाँ केवल …

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A girl in tension

बेरोजगारी

बेरोजगारी (Unemployment) – जब कोई व्यक्ति किसी भी कार्य को करने की पूर्ण क्षमता व योग्यता रखता हो तथा कार्य करने का इच्छुक भी हो, किन्तु उसे कोई कार्य न मिले तो यह बेरोजगारी कहलाती है। भारतीय अर्थव्यस्था में बेरोजगारी की भीषण समस्या व्याप्त है क्योंकि भारत की जनसंख्या जिस अनुपात में बढ़ रही है, …

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जनांकिकी, क्षेत्रीय असमानता के कारण

क्षेत्रीय असमानता के कारण

क्षेत्रीय असमानता के कारण – भारत में असमानता अर्थात आय तथा सम्पत्ति में पाई जाने वाली असमानता का मुख्य कारण जमींदारी प्रथा तथा भूमि के स्वामित्व में पाई जाने वाली असमानता है। स्वतन्त्रता से पहले देश में जमींदारी प्रथा पाई जाती थी। इसके फलस्वरूप भू-स्वामित्व में सारी असमानता पाई जाती थी। क्षेत्रीय असमानता के कारण …

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क्षेत्रीय असमानता के कारण

भारत में असमानता के कारण

भारत में असमानता के कारण निम्नलिखित हैं- भूमि के स्वामित्व में असमानता शहरी क्षेत्रों में सम्पत्ति का निजी स्वामित्व विरासत का कानून व्यावसायिक प्रशिक्षण की असमानता महंगाई वित्तीय संस्थाओं की ऋण नीति अप्रत्यक्ष करों का अधिक बोझ भ्रष्टाचार वेरोजगारी कर चोरी 1. भूमि के स्वामित्व में असमानता भारत में असमानता अर्थात आय तथा सम्पत्ति में …

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क्षेत्रीय असमानता के कारण

जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास

जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास – मानवीय शक्ति का आर्थिक विकास से प्रत्यक्ष रूप से सम्बन्ध रहा है, जिसको सभी ने स्वीकार किया है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि तकनीकी यंत्र, उपकरण, संपत्ति एवं पूँजी आर्थिक विकास में सहायता प्रदान करते हैं किन्तु उचित मानवीय साधनों के अभाव के कारण यह अपना पूर्ण …

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Niti Ayog Logo

नीति आयोग

दसवीं पंचवर्षीय योजना 2002-07 में पहली बार एन. डी ए सरकार में एक दस्तावेज में यह आह्वान किया गया कि यदि राज्य विकसित हो तो देश भी विकसित होगा। हम विकेन्द्रित नियोजन की ओर एक परिवर्तन देखते हैं। योजना को लोक योजना कहकर पुकारा जाता था। इसी योजनावधि में आया था जिसमे राज्यों को नियोजित …

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क्षेत्रीय असमानता के कारण

जनांकिकी

जनसंख्या के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त करने की अभिलाषा मानव में उसके अस्तित्वकाल से ही रही है। जनांकिकी का अस्तित्व मानव समाज के प्रारम्भ से ही रहा है भले ही उसे विशिष्ट विज्ञान के रूप में डनांकिकी का स्वरूप प्राप्त न रहा हो। वर्तमान समय में विश्व के सभी राष्ट्र मानव संसाधनों के विकास पर …

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बचत दर कम होने के सुझाव

मिश्रित अर्थव्यवस्था

मिश्रित अर्थव्यवस्था में सरकारी तथा निजी दोनों क्षेत्र एक साथ कार्य करते है। सरकारी क्षेत्र सरकार के संचालन व प्रबन्ध में ही रहता है तथा निजी क्षेत्र भी सरकार के द्वारा नियंत्रित होता है। निजी क्षेत्र सार्वजनिक हित के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकता। इस प्रकार मिश्रित अर्थव्यवस्था उत्पादन व अन्य आर्थिक गतिविधियों का समाजीकरण …

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भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं

पूंजी निर्माण

पूंजी निर्माण भी किसी देश की आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण निर्धारक तत्व है। पूँजी मानव द्वारा निर्मित उत्पत्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है और यह बचत का परिणाम होती है। अतः मानवीय प्रयत्नों द्वारा पूँजी की पूर्ति में वृद्धि की जा सकती है। इस प्रकार किसी देश में एक निश्चित अवधि में पूंजी के …

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रागदरबारी उपन्यास व्याख्या, उपयोगिता

समोत्पाद रेखा

समोत्पाद रेखा को अंग्रेजी में Iso-quant कहते हैं जो कि Iso तथा quant से मिलकर बना है, जिनका सामूहिक अर्थ होता है समान मात्रा। समोत्पाद वक्र ठीक उसी प्रकार दो स्थानापन्न उत्पादन साधनों के विभिन्न मात्रात्मक संयोगों से प्राप्त समान भौतिक उत्पादन स्तर को प्रदर्शित करते हैं जिस प्रकार उपभोग क्षेत्र में उदासीनता वक्र दो …

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रागदरबारी उपन्यास व्याख्या, उपयोगिता

उपयोगिता

सामान्य बोलचाल की भाषा में उपयोगिता का अर्थ किसी वस्तु के उपयोग या प्रयोग से मिलने वाले लाभ से लगाया जाता है, परन्तु अर्थशास्त्र में इस शब्द का अर्थ सामान्य अर्थ से कुछ अलग तथा व्यापक होता है। अर्थशास्त्र में उपयोगिता किसी वस्तु की क्षमता अथवा वह गुण है जिससे मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति होती …

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मांग की लोच

मांग की लोच

मांग की लोच व मांग की लोच के निर्धारक तत्व के बारे में चर्चा यहाँ की गयी है। मूल्य में परिवर्तन के परिणामस्वरूप माँग में जिस गति से परिवर्तन होता है उसे मांग की लोच कहते हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि मूल्य में परिवर्तन के फलस्वरूप मांग में परिवर्तन की …

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मांग

मांग

अर्थशास्त्र के अन्दर माँग शब्द की व्याख्या विभिन्न रूपों में की गई है। एक ओर मांग को मनोवैज्ञानिक ढंग से परिभाषित करते हुए आवश्यकता का पर्यायवाची बताया गया है तथा दूसरी ओर भौतिक दृष्टि किसी वस्तु की उस मात्रा की ओर संकेत किया गया है जो बाजार में किसी निश्चित मूल्य पर बिकने के लिए …

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उत्पादन फलन

उत्पादन फलन

उत्पादन फलन – एक दी हुई तकनीक के अंतर्गत उपादानों के विभिन्न संयोग एवं उनसे प्राप्त होने वाले उत्पादनों के भौतिक सम्बन्ध को उत्पादन फलन कहा जाता है। उत्पादन फलन से यह पता चलता है कि एक निश्चित अवधि में उपादानों के परिवर्तन से उत्पादन आकार में किस तरह और कितनी मात्रा में परिवर्तन होता …

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लेखन विकास, संस्कृत निबंध संग्रह

चुनाव की समस्या

चुनाव की समस्या एक बड़ी समस्या है। अर्थशास्त्र का भलीभाँति अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि व्यक्ति की आवश्यकताएँ अनन्त होती है जबकि इन आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन सीमित होते हैं। इस बात को स्पष्ट करते हुए प्रमुख अर्थशास्त्री प्रो. रॉबिन्स ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “An Essay on the Nature and Significance …

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बचत

बचत

कोई भी आय जो व्यय नहीं की जाती या व्यय नहीं हो पाती वह शेष रह जाती है। इसे बचत कहा जाता है। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है आय का वह भाग जो व्यय न किया जाय ‘बचत’ कहलायेगा। बचत बचत का अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय के संदर्भ में विशिष्ट महत्व है। …

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अल्पविकसित देश, मार्क्सवादी सिद्धान्त

अल्पविकसित देश

अल्पविकसित देश – मोटे तौर पर विश्व के देशों को दो भागों में बाँटा जाता है विकसित तथा अल्पविकसित अथवा घनी तथा निर्धन राष्ट्र निर्धन देशों को कई नामों से पुकारा जाता है जैसे निर्धन, पिछडे अल्पविकसित, अविकसित और विकासशील देश। ये सभी शब्द पर्यायवाची शब्द है, परन्तु इनके प्रयोग में मतभेद रहा है। इसी …

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आर्थिक विकास महत्त्व

भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास

भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास – यदि 100 वर्षों के भारत के आर्थिक इतिहास का अवलोकन किया जाये तो भारतीय अर्थव्यवस्था की समृद्धि पुनः नितांत गरीबी व पिछड़ापन तथा पुनः आर्थिक प्रगति के दृष्टांत दिखाई पड़ते हैं। यहाँ भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास को अतीत एवं वर्तमान की आर्थिक दशाओं में विश्लेषित किया गया है। ब्रिटिश शासन …

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भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं

भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं – प्रथम पंचवर्षीय योजना के अनुसार, “एक अल्पविकसित अर्थव्यवस्था, एक ओर श्रम शक्ति दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों कामोवेश कम अनुपात में उपयोग द्वारा जानी जाती है।” ऐसी परिस्थितिकनीकों में विकास के अभाव तथा कुछ अवरोधक सामाजिक आर्थिक तत्वों के कारण होती है। जो अर्थव्यवस्था में स्फूर्ति शक्तियों को उभारने में रुकावट …

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भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास

आर्थिक विकास विशेषताएं

आर्थिक विकास विशेषताएं – आर्थिक विकास शब्द का उपयोग एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के मात्रात्मक मापों की व्याख्या करने के लिये नहीं बल्कि उन आर्थिक, सामाजिक तथा अन्य परिवर्तनों को व्यक्त करने के लिये किया जाता है, जो संवृद्धि उत्पन्न करते हैं। इसके लिये उत्पादन की तकनीकी में सामाजिक दृष्टिकोण में तथा संस्थाओं में परिवर्तन …

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महंगाई की समस्या

महँगाई की समस्या

भारत की आर्थिक समस्याओं के अंतर्गत महँगाई की समस्या बहुत विकराल समस्या है । वस्तुओं के मूल्य इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं कि आम आदमी को जीवनयापन करना दूभर हो गया है । बढ़ती महँगाई का चित्रण काका हाथरसी ने इन पंक्तियों में किया है- वे दिन आते याद जेब में पैसे रखकर, सौदा …

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