समूह निर्देशन

निर्देशन कार्यक्रम के आधारभूत तत्वों को मितव्ययता, कुशलता एवं प्रभावी ढंग से पूर्ण करने का एक साधन समूह निर्देशन है।यह निर्देशन की एक पद्धति है जिसके द्वारा छात्रों को उनके विकास में सहायता प्रदान की जाती है। सामूहिक निर्देशन क्रियाएं अन्य क्रियाओं में सहयोग प्रदान करती हैं। उनका विकल्प नहीं है। निसंदेह पहले निर्देशन पर व्यक्तिगत प्रक्रिया के रूप में विशेष बल दिया गया किंतु वर्तमान में शैक्षिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों में परिवर्तन के फल स्वरुप सामूहिक निर्देशन की ओर विद्वानों का ध्यान आकृष्ट हुआ।

विद्यार्थियों की बहुत सी आवश्यकताओं की पूर्ति सर्वोत्तम ढंग से समूह में कार्य करने पर होती है। निर्देशन सेवाओं में संतुलित कार्यक्रम में व्यक्तिगत व सामूहिक कार्य एक दूसरे के पूरक होते हैं।

समूह निर्देशन

समूह निर्देशन किसी भी समूह का वह उद्यम है जिसमें व्यक्ति को समूह में अपनी समस्या का समाधान सुझाया जाता है और समायोजन का प्रयास किया जाता है।

समूह निर्देशन प्रक्रिया में समूह को सार्थक अनुभव प्रदान किए जाते हैं जिससे बालक सामाजिक व्यवहार में दक्ष हो सके।

व्यावसायिक निर्देशन, शैक्षिक पर्यवेक्षण, समूह निर्देशन
समूह निर्देशन

समूह निर्देशन वाह कोई भी सामूहिक क्रिया है जो कुल निर्देशन कार्यक्रम को सुविधा देने या सुधार करने हेतु संपन्न की जाती है।

सामूहिक निर्देशन व्यक्ति के उत्तम विकास में सामूहिक अनुभवों में सहायता प्रदान करने एवं शिक्षित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु चेतनापूर्ण प्रयास है।

समूह निर्देशन की आवश्यकता

समूह निर्देशन की आवश्यकता इसलिए है-

  1. समूह में विद्यार्थियों को भावात्मक अभिव्यक्ति का अवसर प्राप्त होता है जिसके कारण तनाव में न्यूनता आती है।
  2. विद्यालय में अनेक विद्यार्थियों की समस्याएं समान होती हैं यदि इन पर पृथक पृथक रूप से विचार किया जाए तो अधिक समय लगता है। अतः समय की बचत हेतु सामान्य समस्याओं पर एक समूह में विचार विनिमय करना अधिक औचित्यपूर्ण है।
  3. अधिकांश विद्यालयों में पर्याप्त निर्देशन कार्मिक हो यह आवश्यक नहीं। अतः निर्देशन कार्यकर्ता के लिए बढ़ती हुई विद्यार्थी संख्या के कारण व्यक्तिगत रूप से निर्देशन देना संभव नहीं हो पाता।
  4. कुछ क्रियाओं हेतु सामूहिक निर्देशन उपयुक्त रहता है। यथा व्यवसाय के बारे में, शिक्षण संस्थाओं के बारे में, विद्यालय नियमों के बारे में, समान अधिगम संबंधी कठिनाइयों को हल करने हेतु।
  5. व्यक्तिगत परामर्श के लिए उचित पृष्ठभूमि तैयार करने में सहायक विद्यार्थी समूह निर्देशन की प्रक्रिया के दौरान परामर्श किया निर्देशन परामर्शदाता से परिचित हो जाते हैं फिर उनको अपनी व्यक्तिगत समस्याओं हेतु उनके पास जाने में संकोच नहीं होता है।
  6. विद्यार्थियों के मन से यह भावना दूर हो जाती है कि अमुक समस्या उनकी ही है।समूह में उन्हें आभास होता है कि ऐसी समस्याएं अन्यों की भी हैं। इससे उनके मन का संकोच समाप्त हो जाता है।
  7. समूह में विद्यार्थी मनोभावों पर नियंत्रण करना सीखते हैं व उनमें उचित अभिवृत्ति ओं का विकास होता है। इस प्रकार समूह निर्देशन व्यक्तित्व विकास में सहायक होता है।
  8. सभी वर्ग के विद्यार्थियों के प्रति समान भाव रखने की वृद्धि का विकास होता है। पिछड़े, भिन्न आर्थिक स्तर वाले, भिन्न लिंगी विद्यार्थियों के प्रति उनका दृष्टिकोण विकसित होता है।
  9. निर्देशन कर्मिको की कुशलता में वृद्धि होती है। समूह निर्देशन के माध्यम से वह अनेक विद्यार्थियों के संपर्क में आता है। जिससे वह भिन्न-भिन्न प्रकार की समस्याओं से अवगत होता है और अपनी निर्देशन सेवा में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित होता है।
समूह निर्देशन
समूह निर्देशन

समूह निर्देशन के उद्देश्य

आर्थर ई• ट्रेक्सलर ने समूह निर्देशन के पांच उद्देश्य बताएं हैं-

  1. उपस्थापन
  2. सीखने के अनुभवों की व्यवस्था
  3. व्यक्तिगत परामर्श की आवश्यकता का अनुभव होने पर उसकी व्यवस्था
  4. समायोजन एवं चिकित्सा

1. उपस्थापन

विद्यार्थियों को अपरिचित वातावरण तथा नवीन अनुभवों का ज्ञान कराना। नए विद्यालयों महाविद्यालयों में प्रवेश लेने के बाद छात्र कुसुमायोजित ना हो सके। इसके लिए उन्हें परिदर्शन की व्यवस्था कर विद्यार्थियों को वहां के माहौल से परिचित करा दिया जाए। शैक्षिक अवसरों एवं व्यावसायिक संभावनाओं की विविधता की जानकारी भी सामूहिक निर्देशन से दी जा सकती है।

2. सीखने के अनुभवों की व्यवस्था

विद्यार्थियों के कुछ अनुभव कक्षा में विषयाध्ययन द्वारा प्राप्त अनुभवों से भिन्न हो सकते हैं। यथा पुस्तकालय के उपयोग को समझना, सामान्य रुचि वाले व्यवसायियों की जानकारी देना आदि। इन्हें समूह निर्देशन द्वारा प्रदान किया जा सकता है।

3. व्यक्तिगत परामर्श की आवश्यकता का अनुभव होने पर उसकी व्यवस्था

यदि विद्यार्थी की सामूहिक निर्देशन से समस्या का हल नहीं निकलता है तो वह व्यक्ति निर्देशन की आवश्यकता का अनुभव करता है और वह परामर्शक के पास वार्ता हेतु जाता है तो इस समय इस सम्मेलन की भूमिका तैयार करने में समय नष्ट होने से बच सकता है।

4. समायोजन एवं चिकित्सा

समूह निर्देशन का एक उद्देश्य समायोजन में सहायता देना है।कई बार सामूहिक वार्ता के समय यह पता लगाया जा सकता है कि कौन समायोजन संबंधी समस्या का सामना कर रहा है। समूह निर्देशन के माध्यम से चिकित्सा संबंधी कार्य भी संपन्न हो सकता है।

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