शैक्षिक नेतृत्व

शैक्षिक नेतृत्व के प्रत्यय को अब तक हम उद्योग तथा व्यापार, राजनीति तथा समाजशास्त्र में ही देखते आए हैं किंतु वर्तमान में यह पाया गया है कि शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की अन्य क्षेत्रों में। शैक्षिक नेतृत्व की उपयोगिता शिक्षा प्रशासन तथा शिक्षण अधिगम के क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से पाते हैं।

शैक्षिक नेतृत्व

आधुनिक युग में शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक एवं जटिल होता जा रहा है जिसमें शिक्षा से संबंधित सभी व्यक्तियों को कार्य करना पड़ता है। इनमें से कुछ व्यक्ति प्रशासक के रूप में कार्य करते हैं तथा अन्य व्यक्तियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे प्रशासक के आदेश एवं निर्देशानुसार कार्य करें।

आज शैक्षिक नेतृत्व शिक्षा जगत के अंतर्गत एक नवीन संदर्भ में स्पष्ट हो रहा है, जिसकी सहायता से प्रशासन एवं संगठन संबंधी कार्यवाहक योजनाएं, नीतियों आदि का निर्धारण किया जाता है।

आज शैक्षिक नेतृत्व का अर्थ शैक्षिक समूह में उसके नेता के शैक्षिक व्यवहारों के समन्वित रूप में लगाया जाता है। अतः शैक्षिक नेतृत्व का अर्थ व्यक्ति या नेता के उस व्यवहार से होता है जो दूसरों का आदर्श हो पथ प्रदर्शन करें परामर्श प्रदान करें एवं समूह को स्वेच्छा पूर्वक कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करे।

शैक्षिक नेतृत्व

शैक्षिक नेतृत्व वह प्रक्रिया है जिसमें अनुयाई इच्छा पूर्वक दूसरे को नियंत्रण तथा निर्देशन स्वीकार करते हैं।

साक्षी नेतृत्व एक प्रक्रिया है जिसके नेता अपने समूह के निर्देशन करने में पहल करता है।

किसी भी शिक्षण संस्थान में सचिन नेतृत्व अपने अनुयायियों के लिए आदर्श एवं प्रेरणा स्रोत होता है। उसका चरित्र, व्यक्तित्व, कार्यशैली, व्यवहार, मूल्य, आदर्श सभी उसे अपने अनुयायियों के बीच महान बनाते हैं।

शैक्षिक प्रशासन में नेतृत्व

शैक्षिक प्रशासन में नेतृत्व की बात सबसे पहले अमेरिका में उठाई गई। शिक्षा तकनीकी के विकास के साथ ही साथ शिक्षा प्रशासन में सफल नेतृत्व के महत्व को भी स्वीकार किया गया। विज्ञान, तकनीकी तथा शैक्षिक विचारधाराओं में परिवर्तन के साथ ही साथ शिक्षा प्रशासन में नेतृत्व की मांग भी बढ़ रही है।

शिक्षा प्रशासन में नेतृत्व के बढ़ते हुए महत्व के कारण आज हम केंद्रीय शिक्षा प्रशासन से लेकर स्थानीय शिक्षा प्रशासन तक नेतृत्व की बात करने लगे हैं। आज यह बात सर्वत्र स्वीकार की जा रही है कि शिक्षा प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर कुशल एवं प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता है।

शैक्षिक नेतृत्व में नैतिकता और शिष्टाचार

शिक्षा के क्षेत्र में नेता के व्यक्तित्व में नैतिकता और शिष्टाचार के विषय पर अब तक बहुत कम ध्यान दिया जाता है। अभी हाल ही में शोधकर्ता द्वारा नेतृत्व के लिए नैतिकता के महत्व को समझा गया और इस क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया जा रहा है। क्योंकि आज शिक्षा के क्षेत्र में एक नेता में शिष्टाचार और नैतिकता की भावना होना आवश्यक हो गया है।

नेता की जिम्मेदारी बन जाती है कि विद्यार्थियों में शिष्टाचार का भाव रखें और यह तभी संभव है जब नेता में खुद नैतिकता और शिष्टाचार का भाव हो उनकी समस्याओं को सुनकर उनका हल निकाले। नेतृत्व में नैतिकता हमें अनेक स्थानों में देखने को मिलती है। जागृत नेता अनुयायियों की मनोवृत्ति ओं और व्यवहार को परिवर्तित करने की चेष्टा करता है और उन में नैतिक मूल्य जागृत करता है।

नैतिक नेताओं द्वारा अपने शिष्टाचार का प्रयोग सामाजिक निर्माण तथा अन्य लोगों की भलाई के लिए किया जाता है। कभी-कभी नेता अपने पद का दुरुपयोग करते हैं जो एक समस्या है। जैसे स्वयं को अधिक वेतन देना, अधिक बोनस देना और खर्चों को कम करने, पुराने कर्मचारियों की छटनी करना आज विश्वास का विषय नेता की सत्यता और निष्ठा से जुड़ा हुआ होता है क्योंकि किसी भी शैक्षिक संगठन में नैतिक मूल्यों का पालन आधिशासियों द्वारा स्थापित होता है।

अतः यह आशा की जाती है कि वह स्वयं में उच्च नैतिक मूल्यों और शिष्टाचार के मानकों का पालन करेंगे।

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