जनतंत्र अर्थ परिभाषा विशेषताएं सिद्धांत

जनतंत्र को गणतंत्र भी कहा जाता है। गण का अर्थ होता है – झुंड, समूह या जत्था। जनतंत्र को राजतंत्र भी कहा जाता है इसलिए लोकतंत्र के लिए गणराज्य शब्द का भी प्रयोग किया जाता है। सभी शब्दों से एक ही मत या विचार स्पष्ट होता है कि किसी भी देश या राष्ट्र में राजनैतिक रूप से जब जनता का शासन स्थापित किया जाता है तो वह लोकतंत्र कहलाता है।

साधारण तौर पर जनतंत्र से यह धारणा होती है कि राज्य,जनता, चुनाव, संसद आदि का निर्माण करना। जन तंत्र को सफल बनाने के लिए इसके सिद्धांतों तथा मूल्यों का प्रयोग जीवन के आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षिक सभी क्षेत्रों में किया जाना चाहिए। भारत में संसदीय, प्रजातांत्रिक प्राणी को मान्यता प्रदान की गई है जो कि वयस्क मताधिकार प्रणाली पर आधारित है। इसके अंतर्गत भारत के प्रत्येक वयस्क नागरिक अर्थात जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो,किसी भी धर्म, जाति या लिंग से संबंध रखता हो, उसे मताधिकार प्राप्त है।

जनतंत्र
जनतंत्र

जनतंत्र का अर्थ

जनतंत्र डेमोक्रेसी शब्द का हिंदी रूपांतर है। अंग्रेजी के शब्द की उत्पत्ति दो ग्रिक शब्दों – डेमोस और क्रेसी से हुई है। डेमोस का अर्थ है – जनता और क्रेसी का अर्थ है– शासन। इस प्रकार इसका शाब्दिक अर्थ हुआ “जनता के हाथ में शक्ति”। जनतंत्र केवल राजनीतिक प्रणाली ही नहीं है। इसका संबंध तथा इसके सिद्धांतों का प्रयोग जीवन के समस्त आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षिक आदि क्षेत्रों में किया जाना चाहिए।

“लोकतंत्र शासन की वह प्रणाली है जिसमें जनता का शासन, जनता द्वारा और जनता के लिए होता है।”

अब्राहम लिंकन

जनतंत्र की परिभाषा

जनतंत्र को अनेक शिक्षा शास्त्रियों ने निम्न प्रकार परिभाषित किया है-

“जनतंत्र जनता की सरकार है।”

अरस्तु

जनतंत्र एक ऐसी सरकार है,जिसमें शासन की शक्ति किसी व्यक्ति अथवा वर्ग के हाथों में न रहकर समस्त जनता के हाथों में सामूहिक रूप से होती है।

लार्ड ब्रा

सच्चे जनतंत्र का तात्पर्य है– सबसे योग्य तथा सबसे अच्छे नेतृत्व में सब की सब के द्वारा उन्नति।

मैजिनी

“जनतंत्र जीवन यापन का एक धन है ना कि केवल एक राजनीतिक व्यवस्था। वह उन अधिकारों तथा स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित रहता है जो कि किसी अमुक जाति,धर्म,लिंग तथा आर्थिक स्थिति के भेदभावो से ऊपर उठकर सबके ऊपर समान रूप से लागू होते हो।”

राधाकृष्णन विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग

जनतंत्र की विशेषताएं

जनतंत्र साम्यवाद और समाजवाद के मध्य की एक कड़ी है, जिसमें मानव जीवन से संबंधित समस्त क्षेत्रों को समाहित कर लिया जाता है। इसमें राज्य के सभी वर्गों के लोग अपने भेदभाव को मिटाकर व्यक्तिगत विकास करने के साथ-साथ सामाजिक समरसता भी उत्पन्न करते हैं। वैश्वीकरण के समय में यह ही एक ऐसा रास्ता है, जिस पर चलकर विश्व समाज की स्थापना की जा सकती है। जनतंत्र के प्रमुख लक्षण एवं विशेषताएं निम्न है-

  1. जनतंत्र में जनता के प्रत्येक मौलिक अधिकार की रक्षा की जाती है, क्योंकि यह ही इसके आधार स्तंभ होते हैं।
  2. यह आधुनिक मानवतावादी चिंतन पर आधारित एक लोकप्रिय शासन व्यवस्था है। यह मानवीय मूल्यों पर पूर्ण आस्था रखता है।
  3. यह जनशक्ति पर ही पूर्णता आधारित होता है। हम जानते हैं कि सत्ता का मूलाधार जनता है और जनता के ही विचार से सत्ता संचालित होती है। जनता का विश्वास प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि उनकी सुख-सुविधाओं कठिनाइयों और जीविका आदि का पूर्ण स्थान रखा जाए। जिससे उनका चौमुखी विकास हो सके।
  4. जन तंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है। जन तंत्र में अपनी बात कहने वाले ने दोनों प्रकार की स्वतंत्रता होती है। आधुनिक समय में समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट आदि अभिव्यक्ति के सशक्त साधन है। अतः मीडिया का निष्पक्ष, कल्याणकारी व सत्यप्रेमी होना जन तंत्र के लिए बहुत आवश्यक है।
  5. व्यक्ति महत्व एवं प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर जनतंत्र में व्यक्ति का विकास मनोवैज्ञानिक वातावरण में किया जाता है। यह चेतन और अचेतन मन की एकता है।
  6. जनतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति अपना जीवन शांतिपूर्वक तरीके से जी सकता है। समानता व सुरक्षा का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति को दिया जाता है।
  7. इसमें व्यक्ति के व्यक्तिगत और सामाजिक सम्मान के गौरव को भी रक्षा की जाती है। इसे मनुष्य स्वतंत्रता पूर्वक अपना जीवन यापन करता है। यह व्यवस्था मनुष्य को उसकी रचना एवं आवश्यकताओं के अनुसार कार्य करने के अवसर प्रदान करती है।

जनतंत्र के सिद्धांत

जनतंत्र के मूल सिद्धांत निम्नलिखित हैं-

  1. समानता का सिद्धांत
  2. स्वतंत्रता का सिद्धांत
  3. बंधुत्व का सिद्धांत
  4. समाजवाद का सिद्धांत
  5. न्याय का सिद्धांत
  6. धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत

समानता का सिद्धांत

जनतंत्र में सभी व्यक्ति समान होते हैं, ना कोई छोटा होता है और ना कोई पिछड़ा होता है। किसी भी आधार का कोई भेदभाव नहीं होता है। प्रत्येक व्यक्ति को समान सुविधाएं सुलभ होती हैं तथा यह भी आशा की जाती है कि वह अपने कर्तव्यों का पालन करें क्योंकि अधिकार एवं कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह सभी के लिए एक ही कानून, राजकीय सेवाएं, शिक्षा एवं स्वास्थ्य आदि की सेवाएं भी एक समान होती है।

स्वतंत्रता का सिद्धांत

स्वतंत्रता मनुष्य का जन्म सिद्ध अधिकार है। अतः मनुष्य को विचार करने, अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता को हो। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन नहीं करेगा। यह जनतंत्र का कट्टर विरोधी है। सभी व्यक्तियों को अपनी रुचि और इच्छाओं के अनुसार जीवन व्यतीत करने की स्वतंत्रता है।

बंधुत्व का सिद्धांत

स्वतंत्रता और समानता में व्यक्ति को एक दूसरे का भाई ही मानना चाहिए। प्रत्येक धर्म, जाति, लिंग आदि के व्यक्तियों ने आपस में प्रेम व भाईचारा बहुत आवश्यक है। यह सह अस्तित्व के सिद्धांत पर विश्वास रखता है। इनके माध्यम से वैमनस्य एवं युद्धों को रोका जा सकता है तथा मानव कल्याण में वृद्धि की जा सकती है क्योंकि किसी भी समस्या का हल हिंसा नहीं है।

समाजवाद का सिद्धांत

जनतंत्र समाजवादी विचारधारा से प्रेरित है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझना चाहिए। संविधान में आदर्श समाजवाद के धरना प्रस्तुत की गई है। यह पूंजीवादी व्यवस्था के स्थान व समाजवादी व्यवस्था पर विश्वास रखता है। समाज की आर्थिक विषमताओं को दूर करने के लिए यह आवश्यक है।

मौलिक अधिकार

न्याय का सिद्धांत

जनतंत्र में न्याय के लिए निष्पक्षता एवं समानता की व्यवस्था है। प्रत्येक विवाद का निपटारा न्यायालय के माध्यम से पूर्ण विश्वसनीय एवं सर्वमान्य तरीके से होता है। इसमें किसी भी प्रकार के पक्षपात नीति को नहीं अपनाया जाता है।

धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत

जनतंत्र राज्य पराया धर्मनिरपेक्ष भी होते हैं, क्योंकि उनका केवल एक ही धर्म को मानने वाली नहीं होती। जनता अनेक धर्मों एवं संस्कृतियों से संबंधित होती है। संविधान में किसी भी धर्म को राष्ट्र धर्म नहीं स्वीकार किया गया है। राष्ट्र के लिए प्रत्येक धर्म एक समान है और कोई भी धर्म ना तो श्रेष्ठ है ना ही किसी से निम्न।

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