श्यामपट परिभाषा उपयोग प्रकार व सावधानियाँ

प्राध्यापक के लिए चॉक तथा श्यामपट उतने ही आवश्यक हैं जितने कि एक सैनिक के लिए शस्त्र। अच्छा प्राध्यापक सदैव इनका प्रयोग करता है। लेकिन किस प्रकार से इनका सही एवं उचित उपयोग किया जाये यह युक्ति बहुत कम अध्यापकों को ज्ञात है। भारतवर्ष जैसे निर्धन राष्ट्र में यह एक सामान्य – शिक्षण की सहायक सामग्री है, जिनका उपयोग प्रत्येक विद्यालय में किया जाता है। हमारे पास ग्रामीण विद्यालयों में भी जहाँ कि अन्य श्रव्य दृश्य सामग्री का अभाव पाया जाता है, इसका ही प्रयोग किया जाता है। इस पर क्योंकि चॉक से लिखा जाता है अतः इसे चॉक बोर्ड भी कहा जाता है।

श्यामपट की परिभाषा

गुड्स की शैक्षिक डिक्शनरी में इसे परिभाषित करते हुये लिखा गया है- “परम्परागत शिक्षण सहायक सामग्री में श्यामपट सर्वाधिक उपयोगी उपकरण है।” यह छात्रों को दिये जाने वाले ज्ञान को सरल तथा स्थायी बनाने में सहायता करता है तथा शिक्षक को अपना आत्मविश्वास बनाये रखने में मदद करता है। इसका आविष्कार सर्वप्रथम जेम्स विलियम ने किया था।

श्यामपट के उपयोग

इसका साधारणत: अग्रलिखित कार्यों में उपयोग किया जाता है-

  1. पाठ का सारांश लिखने के लिए।
  2. किसी नाम या शब्द के सम्बन्ध को स्पष्ट बनाने एवं महत्ता प्रदान करने के लिए।
  3. पाठ की रूपरेखा लिखने के लिए।
  4. नियम, परिभाषा तथा शिक्षण बिन्दु देने के लिए।
  5. सूचना अंकन, तिथि का ज्ञान देने तथा तालिका आलेखन के लिए।
  6. मुख्य निर्देश तथा आदेश लिखने के लिए।
  7. किसी वस्तु के क्रम को स्पष्ट करने के लिए।
  8. चित्र, रेखाचित्र, ग्राफ, मानचित्र तथा लाक्षणिक उदाहरण देने के लिए।
  9. विभिन्न उपकरणों के चित्रों में विभिन्न भागों के आलेखन के लिए तथा
  10. कठिन शब्द तथा अक्षरों को स्पष्ट करने के लिए।

BLACKBOARD


B—Be kind and use me systematically.
L-Layout the writing plan in advance.
A-Arrange, Light, Angle and glare, arrangements.
C— Check coloured chalk, Eraser, Ruler, Pointer and other templates.
K-Keep it clean, neat, and orderly.

B-Be judicious-what to write and when to write.
0-Order (Stand on another side).
A — Attraction by colour, Capital letters, Underline and Pointer.
R— Writing bright, readable, Uniform, Straight and Horizontal.
D—Drawing with a purpose, easily, Neatly but systematically.

श्यामपट के प्रकार

मुख्यतः ये निम्नांकित प्रकार के होते हैं-

1. लकड़ी के श्यामपट

ये तीन प्रकार के होते हैं-

  1. स्थिर श्यामपट – एक बड़े लकड़ी के तख्ते पर काला रंग कर दिया जाता है तथा इसे दीवार पर फिक्स कर दिया जाता है। अतः इसे स्थिर श्यामपट कहा जाता है।
  2. स्टैण्ड पर श्यामपट – इसमें लकड़ी के बड़े तख्ते को दोनों ओर से काला रंग करके, लकड़ी के ही स्टैण्ड पर रख दिया जाता है। इस स्टैण्ड को आगे-पीछे व ऊपर-नीचे भी किया जा सकता है तथा इसे सरलता से कक्षा में या कक्षा के बाहर लाकर प्रयोग किया जा सकता है।
  3. चलित श्यामपट – इसको पुली की सहायता से चलित बनाया जाता है तथा इसे ऊपर-नीचे, कक्षा की आवश्यकतानुसार किया जा सकता है। जब इसका एक भाग पूरा भर जाये तो उसे ऊपर और खाली भाग को लिखने के लिए नीचे ले आते हैं।

2. सीमेण्ट का श्यामपट

विद्यालयों के कक्षा-कक्ष में लकड़ी के स्थान पर सीमेण्ट का प्रयोग ज्यादा होने लगता है। कक्षा भवन बनते समय ही कक्षा में सीमेण्ट का श्यामपट बना दिया जाता है जिस पर काला रंग कर दिया जाता है। इसे स्थिर श्यामपट भी कहा जाता है।

3. चुम्बकीय श्यामपट

इन चुम्बकीय श्यामपटों का प्रयोग इंग्लैण्ड में अपेक्षाकृत अधिक प्रयोग किया जाता है। ये लोहे के बने होते हैं तथा चुम्बक इन पर फिक्स्ड होती है। इसमें शिक्षक सरलता से चित्र, डायग्राम तथा चार्ट आदि चुम्बक की मदद से फिक्स्ड कर लेता है। ये छोटी तथा बड़ी दोनों प्रकार की कक्षाओं में उपयोगी सिद्ध हुए हैं।

4. ग्लास श्यामपट

ये सीमेण्ट से बने श्यामपट की भाँति स्थिर होते हैं। यह सीमेण्ट के स्थान पर ग्लास शीशे के बने होते हैं। ये ज्यादा मजबूत तथा उत्तम स्तर के माने जाते हैं। इन पर लिखावट भी ज्यादा स्पष्ट तथा प्रभावशाली होती है।

5. श्यामपट लपेट

इसे रौलर या लपेटने वाला श्यामपट भी कहा जाता है। यह Oil cloth पर बनाया जाता है। इसके नीचे तथा ऊपर दो साइड में लकड़ी की गोलाकार पट्टियाँ लगी होती हैं, जिससे इन्हें सरलता से लपेट कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है। इस प्रकार के श्यामपट का प्रयोग शिक्षण-प्रशिक्षण में काफी किया जाता है।

श्यामपट का सही उपयोग

श्यामपट का किस प्रकार से उपयोग किया जाये ताकि शिक्षण अधिक प्रभावशाली बन सके इस विषय पर कुछ विचार प्रस्तुत किये जा रहे हैं। श्यामपट पर लिखते समय ध्यान रखना चाहिए कि इस पर वाक्य सीधी पंक्तियों में लिखे गये हो तिरछे, ऊँचे-नीचे वाक्यों को लिखने से छात्रों की आँख पर बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही देखने में 1 भद्दा प्रतीत होता है। यह सामग्री स्पष्ट एवं पठनीय होनी चाहिए अन्यथा-

  1. छात्र कक्षा में अध्यापक को बार-बार पूछकर तंग करेंगे।
  2. छात्रों में स्पष्टता का प्रादुर्भाव न हो सकेगा।
  3. कुछ छात्र इसका कार्य अस्पष्ट समझकर पूर्णरूपेण टाल देंगे।
  4. कक्षा में श्यामपट पर बड़े अक्षरों में लिखना चाहिए जिससे कि सबसे पिछली जगहों पर बैठे छात्र भी पढ़ सकें। प्राध्यापक को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वह जो कुछ भी लिख रहा है छात्रों के लिए लिख रहा है।
  5. श्यामपट पर लिखने के पश्चात् कक्षा की ओर मुख करके पढ़ाना चाहिए क्योंकि अध्यापक को छात्रों को पढ़ाना है न कि श्यामपट को। लेकिन यदि कहीं किसी वस्तु की सूचना आदि की व्याख्या करनी है तो लिखते समय भी प्राध्यापक बोल सकता है लेकिन उसकी आवाज तीव्र होनी चाहिए जिससे पूरी कक्षा सरलता से सुनने में समर्थ हो सके। इसी प्रकार प्राध्यापक इस पर चित्र बनाते समय भी इसकी ओर संकेत करते हुए व्याख्या कर सकता है। यह सत्य ही कहा गया है कि अध्यापक को पढ़ाने के साथ-साथ छात्रों की दृश्य एव श्रवण शक्तियों का प्रयोग करना चाहिए।
  1. श्यामपट पर लिखते समय इस प्रकार खड़ा होना चाहिए जिससे कि प्रत्येक छात्र भली-भाँति देख सके। कोई शब्द या वाक्य लिखते समय अध्यापक को इस प्रकार खड़ा नहीं होना चाहिए कि उसका लिखा हुआ इस पर ढक जाये।
  2. श्यामपट पर विषय अथवा पाठ का नाम लिखना चाहिए लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि वह इस पर यूनिट, दिनांक आदि लिखे क्योंकि ये सब छात्रों के लिए ही लिखी जाती है। छात्रों को इनका ज्ञान होता ही है। निरीक्षणकर्ता पाठ योजना के द्वारा परिचित हो सकते हैं अतः इन सबका लिखना समय का दुरुपयोग समझा जाता है।
  3. चित्र बनाते समय आवश्यकतानुसार रंगीन चॉकों का प्रयोग करना चाहिए जिससे कि वे अधिक प्रभावशाली लगें तथा छात्रों का ध्यान आकर्षित कर सकें।
  4. कक्षा से जाने से पूर्व इस पर जितना भी लिखा गया है मिटा देना चाहिए जिससे कि दूसरे अध्यापक को यह कार्य न करना पड़े और आपको भी साफ श्यामपट मिले।
शैक्षिक तकनीकीशैक्षिक तकनीकी के उपागमशैक्षिक तकनीकी के रूप
व्यवहार तकनीकीअनुदेशन तकनीकीकंप्यूटर सहायक अनुदेशन
ई लर्निंगशिक्षण अर्थ विशेषताएँशिक्षण के स्तर
स्मृति स्तर शिक्षणबोध स्तर शिक्षणचिंतन स्तर शिक्षण
शिक्षण के सिद्धान्तशिक्षण सूत्रशिक्षण नीतियाँ
व्याख्यान नीतिप्रदर्शन नीतिवाद विवाद विधि
श्रव्य दृश्य सामग्रीअनुरूपित शिक्षण विशेषताएँसूचना सम्प्रेषण तकनीकी महत्व
जनसंचारश्यामपट

व्यक्तित्व का श्यामपट कार्य से सम्बन्ध

श्यामपट प्राध्यापक के व्यक्तित्व का दर्पण है कक्षा में प्राध्यापक इस पर लिखता है तो वह कैसे खड़ा होता है किस प्रकार से समस्याओं का समाधान खोजता है तथा परिणाम निकालता है किस प्रकार से पढ़ाता है, किस प्रकार से यह कार्य करता है यह सभी एक प्राध्यापक के व्यक्तित्व के निर्णायक कारक हैं। इसपर प्राध्यापक को अधिक ध्यान देना चाहिए।

यह प्राध्यापक के विषय में तथा उसके व्यक्तित्व के विषय में हमें ज्ञान प्रदान करता है। इस पर यह अच्छा कार्य व्यवस्थित एवं सुगठित सामग्री स्पष्ट एवं सुन्दर लिखावट प्राध्यापक के अच्छे व्यक्तित्व की ओर संकेत करते हैं। अतः प्राध्यापक को चाहिए कि वह भली प्रकार एवं ध्यानपूर्वक इसका उपयोग करे ताकि उसका व्यक्तित्व अधिक प्रभावशाली बन सके। प्रभावशीलता प्राध्यापक का एक आवश्यक गुण है।

श्यामपट कार्य में सावधानियाँ

अच्छे प्राध्यापक को निम्नांकित सावधानियाँ इसके उपयोग के समय ध्यान में रखनी चाहिए-

  1. कक्षा में समझाने के लिए किया गया रफ कार्य तथा श्यामपट के कार्य को मिलाया न जाये। अच्छा तो यही होगा कि रफ कार्य समाप्त होते ही मिटा देना चाहिए या उसे पृथक रूप से करना चाहिए।
  2. यदि कक्षा के समक्ष इसपर कुछ चित्र प्रस्तुत करने हैं तो प्राध्यापक को पहले ही निर्धारित कर लेना चाहिए कि इसके किस व कितने भाग में उसे चित्र बनाना है तथा कितने माग में उसका संक्षिप्त वर्णन करना है तथा किस व कितने भाग में रफ कार्य करना है।
  3. जब छात्र यह सामग्री को लिखने में व्यस्त हों तो प्राध्यापक को अध्यापन प्रारम्भ नहीं कर देना चाहिए। जब छात्र पूरा सारांश उतार लें तब ही प्राध्यापक को अध्यापन कार्य शुरू करना चाहिए।
  4. श्यामपट पर कार्य करने के पश्चात् छात्रों का ध्यान आकर्षित करने वाली विभिन्न व व्यर्थ की चेष्टाएँ नहीं करनी चाहिए जैसे-चॉक को हाथ में झुलाना (चॉक से खेलते रहना) या डस्टर इधर-उधर घुमाना आदि। ऐसी चेष्टाएँ छात्रों को अध्ययन से विलग करती हैं।
  5. इस पर लिखते समय कक्षा में ऐसा वातावरण पैदा नहीं करना चाहिए जिससे कृत्रिमता का आभास हो, अन्यथा छात्र भली-भाँति अपना ध्यान पढ़ाई की ओर नहीं कर पायेंगे।
  6. यदि कोई चित्र अधिक जटिल हो तो रौलर बोर्ड की सहायता लेनी चाहिए। चित्र को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए रौलर बोर्ड पर चित्र की प्रारम्भिक रूपरेखा तैयार कर लेनी चाहिए। कक्षा में जाकर उसे अधिक विकसित करना प्रभावशाली होता है।
  7. श्यामपट पर लिखते समय कभी गलत अक्षर, वाक्य या सूचना नहीं लिखनी चाहिए।
  8. यह सामग्री योजना पहले से ही तैयार कर लेनी चाहिए।
  9. इसकी ओर मुँह करके नहीं बोलना चाहिए।
  10. श्यामपट पर अक्षर लगभग 22/½ इंच के आकार में लिखे जाने चाहिए ताकि कक्षा का पिछली बैंच पर बैठा हुआ छात्र भी देख सके।
  1. डायग्राम आदि बनाते समय रंगीन चॉक का प्रयोग करना चाहिए।
  2. विभिन्न अर्थों व बातों पर बल देने के लिए भी रंगीन चॉक का उपयोग किया जाना चाहिए।
  3. श्यामपट पर लिखते समय शिक्षक को अपनी नजर छात्रों के क्रियाकलापों पर भी रखनी चाहिए।
  4. लिखते समय शिक्षक को लगभग 45° के कोण पर खड़ा होकर लिखना चाहिए ताकि अधिकतम छात्र इस पर क्या लिखा जा रहा है–पढ़ते जायें।
  5. शिक्षक इस पर जो कुछ लिखे कक्षा की ओर मुख करके वह बोलता भी जाये।
  6. इस पर सारांश छात्रों के सक्रिय सहयोग से विकसित किया जाना चाहिए।
  7. इस पर मानचित्र / रेखाचित्र पर छात्रों के ध्यान को केन्द्रित करने के लिए Pointer का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  8. इस पर ‘डस्टर’ से अक्षर आदि मिटाने की आदत डालें, हाथ कागज या उँगली से न मिटायें।
  9. श्यामपट पर जो लिखें, महत्त्वपूर्ण बातें, संक्षिप्त में ही लिखें-अनावश्यक विस्तारपूर्ण वाक्य न लिखें।
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