विज्ञान क्लब के 8 उद्देश्य क्रियाएँ व विज्ञान क्लब के संगठन

विज्ञान क्लब एक ऐसा संगठन जिसके द्वारा वैज्ञानिक अभिवृत्ति का विकास हो, विज्ञान सम्बन्धी क्रियाओं में रुचि उत्पन्न हो तथा पाठ्यक्रम का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया जाय। छात्र की मूल प्रवृत्ति तथा इच्छाओं की सन्तुष्टि के साथ-ही-साथ सन्तुलित व्यक्तित्व का विकास भी सम्भव है। विज्ञान क्लब छात्र को विज्ञान के क्षेत्र में उसकी सृजनात्मक क्षमताओं के विकास के अवसर प्रदान कर नवीन ज्ञान के विकास में सहायता देता है। प्रत्येक बालक दूसरे से रुचि, क्षमताओं व कौशल में भिन्न होता है।

शिक्षण के दो प्रमुख सिद्धान्त हैं, क्रिया द्वारा सीखना तथा अनुभव द्वारा सीखना। यह सिद्धान्त विज्ञान-शिक्षण के लिए भी उतने ही आवश्यक है। जितना कि किसी अन्य विषय के शिक्षण के लिए। प्रत्येक बालक में वस्तुओं का निर्माण करने व तोड़-फोड़ की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। परन्तु वर्तमान पाठ्यक्रम बालक की रचनात्मक क्रियाओं को अभिव्यक्त करने के उचित अवसर प्रदान नहीं करता है। इसलिए स्वाभाविक ही है कि एक ऐसे संगठन की स्थापना की जाय। जिसके माध्यम से छात्र अपनी सृजनात्मक क्षमताओं का उपयोग कर सकें।

विज्ञान शिक्षण के दैनिक कार्यक्रम द्वारा प्रत्येक बालक की आवश्यकताओं की पूर्ति करना सम्भव नहीं है। विज्ञान क्लब एक ऐसा स्थान है जहाँ पर बालक अपनी रुचि के आधार पर क्रियाएँ करने के लिए स्वतन्त्र है। विज्ञान क्लब और कक्षा की क्रियाओं में यही अन्तर है कि जहाँ कक्षा का वातावरण औपचारिक होता है तथा छात्रों को अध्यापक द्वारा दिए कार्य करने होते हैं, इसमें छात्र अपने कार्यों को करने में स्वतन्त्र होते हैं। उसमें वे अध्यापक का प्रसन्न करने के लिए नहीं वरन् अपने लिए कार्य करते हैं।

विज्ञान क्लब

विज्ञान क्लब द्वारा विज्ञान का अध्ययन रुचिकर हो जाता है। प्रत्येक बालक में कुछ-न-कुछ कार्य करने की क्षमता होती है और विज्ञान क्लब में कार्य करते हुए वे अपने कौशल का विकास कर सकते हैं। वैज्ञानिक तथ्यों, प्रत्ययों व सिद्धान्तों का ज्ञान प्राप्त करते हैं। वे छात्र जो विज्ञान के किसी क्षेत्र में विशेष ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं, इसके क्रिया-कलापों द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

विज्ञान क्लब के कार्यों का कक्षागत परिस्थिति में भी स्थानान्तरण होता है। वे छात्र जो विज्ञान क्लब की गतिविधियों में रुचि लेने लगते हैं, कक्षा के क्रिया-कलापों में भी रुचि लेने लगते हैं। विज्ञान क्ल्ब के कार्यों के कारण सामान्य कक्षा के वातावरण में भी सजीवता बनी रहती है। वैज्ञानिकों का विचार है कि उच्च माध्यमिक स्तर तक विज्ञान क्लब का संगठन इस प्रकार किया जाय कि वे विभिन्न क्रियाओं द्वारा छात्रों की रुचियों को जाग्रत करें जिससे वे उचित विधियों और क्रियाओं द्वारा अवकाश के समय का उपयोग कर सकें।

अमेरिका, रूस, आदि पश्चिमी देशों में विज्ञान क्लब, विज्ञान-कार्यक्रमों के आयोजन होते रहते हैं। हमारे देशों में कुछ वर्षों पूर्व ही इस दिशा में कार्य आरम्भ हुआ तथा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् द्वारा विज्ञान क्लब की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद भी इसके क्षेत्र में संतोषजनक कार्य नहीं हुआ। इसका क्षेत्र मॉडल चार्ट तथा वैज्ञानिक सामग्री के निर्माण तक ही सीमित रहा।

सरकार द्वारा विज्ञान-क्लब की स्थापना में रुचि लेने के फलस्वरूप 1962 में सरकार द्वारा सहायता प्राप्त विज्ञान-क्लबों की संख्या 500 थी। तब से इनकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसको सफल व प्रभावशाली बनाने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक एवं अनुसन्धान परिषद् द्वारा Science-club sponsors work shop आयोजित की गई जिनमें उन क्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया जो विज्ञान क्लब द्वारा आयोजित की जा सकती है। विद्यालय में संसाधनों, धन, अभिप्रेरणा तथा प्रधानाचार्य का दृष्टिकोण आदि कारकों कारण इन कार्यों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई।

विज्ञान क्लब के उद्देश्य

विज्ञान क्लब समान स्तर, सम्मान रुचियों और समान उद्देश्यों के लिए कार्य करने वाले छात्रों का संगठन है। इसमें छात्र अनौपचारिक याताया में विज्ञान से सम्बन्धित समस्याओं का अन्वेषण करते हैं तथा अपनी-अपनी अभिरुचियों का अनुशीलन करते हैं। संसाधनों, क्षमता एवं इच्छा के अनुरूप विभिन्न स्तर के छात्रों के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं। इस प्रकार यह विज्ञान-शिक्षण के केन्द्र बिन्दु के रूप में विज्ञान को कक्षा व प्रयोगशाला से समुदाय तक जोड़ने वाली कड़ी के रूप में कार्य करता है। भारत जैसे विकासशील देश में विज्ञान क्लब के निम्न उद्देश्य है-

  1. विज्ञान की सहायक सामग्री जैसे चार्ट मॉडल का निर्माण तथा विज्ञान संग्रहालय में निर्माण।
  2. विज्ञान की पत्रिकाओं तथा अतिरिक्त पुस्तकें पढ़ने की आदत का विकास।
  3. छात्रों में विज्ञान के प्रति सामान्य जागरूकता तथा सामाजिक कार्यों में योगदान की प्रवृत्ति का विकास।
  4. वैज्ञानिक दृष्टिकोण व वैज्ञानिक कौशलों का विकास।
  5. वैज्ञानिक विधि का उपयोग तथा अभ्यास का प्रशिक्षण।
  6. विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में छात्रों में रुचि का विकास।
  7. छात्रों को स्वतन्त्र रूप से कार्य करने का अवसर देना।
  8. विज्ञान मेले व प्रदर्शनियों में सक्रिय भागीदारी।

विज्ञान क्लब एक विकासशील संगठन है। समय और आवश्यकता के अनुसार अन्य उद्देश्यों को सम्मिलित किया जा सकता है।

विज्ञान अर्थ परिभाषा प्रकृति क्षेत्र व 10 उपयोगशिक्षण प्रतिमान विकासात्मक वैज्ञानिक पूछताछ शिक्षण प्रतिमानआगमनात्मक विधि परिभाषा 5 गुण व 4 दोष
निगमनात्मक विधि परिभाषा 7 गुण व 5 दोषविज्ञान शिक्षण व विज्ञान शिक्षण की विधियांपरियोजना विधि अर्थ सिद्धांत विशेषताएं 7 गुण व 8 दोष
ह्यूरिस्टिक विधि के चरण 6 गुण व Top 5 दोषप्रयोगशाला विधि परिभाषा उपयोगिता गुण व दोषपाठ्यपुस्तक विधि परिभाषा गुण व Top 4 दोष
टोली शिक्षण अर्थ विशेषताएं उद्देश्य लाभअभिक्रमित शिक्षण की 5 विशेषताएं 6 लाभ 6 दोषइकाई योजना विशेषताएं महत्व – 7 Top Qualities of unit plan
मूल्यांकन तथा मापन में अंतरविज्ञान मेला Science Fair 6 Objectivesविज्ञान का इतिहास व भारतीय विज्ञान की 11 उपलब्धियाँ
विज्ञान शिक्षण के उद्देश्य Top 12 Objective7 प्रमुख भारतीय वैज्ञानिक और उनके योगदानविज्ञान शिक्षक की 13 विशेषताएँ
विज्ञान पाठ्य पुस्तक क्षेत्र आवश्यकता 10 विशेषताएँ व सीमाएँविज्ञान क्लब के 8 उद्देश्य क्रियाएँ व विज्ञान क्लब के संगठनविज्ञान क्लब के 8 उद्देश्य क्रियाएँ व विज्ञान क्लब के संगठन
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शैक्षिक निदान का अर्थ विशेषताएँ व शैक्षिक निदान की प्रक्रियापदार्थ की संरचना व पदार्थ की 3 अवस्थाएँ

विज्ञान क्लब की क्रियाएँ

विज्ञान क्लब की क्रियाओं की कोई निश्चित सूची नहीं है। छात्रों की रुचि व अभिवृत्ति के आधार पर क्रियाओं की व्यवस्था की जा सकती है। छात्रों द्वारा निम्न क्रियाएँ आयोजित की जाती हैं-

  1. दैनिक जीवन के उपयोग की वस्तुएँ जैसे, साबुन, इंक, बूटपालिश, क्रीम आदि का निर्माण।
  2. विज्ञान संग्रहालय के लिए विभिन्न वस्तुओं, सामग्री का संग्रह व व्यवस्था।
  3. विज्ञान क्षेत्र से सम्बन्धित व्यक्ति के व्याख्यान का आयोजन करवाना।
  4. स्वयं निर्मित उपकरणों का निर्माण।
  5. वैज्ञानिकों के जन्मदिन व आविष्कारों का निर्माण।
  6. वैज्ञानिक विषयों पर नाटक का प्रदर्शन।
  7. प्राथमिक चिकित्सा के सम्बन्ध में चिकित्सक से जानकारी।
  8. क्षेत्र भ्रमण सामुदायिक संसाधनों के सर्वेक्षण से सम्बन्धित क्रियाएँ।
  9. विज्ञान प्रदर्शनियों तथा मेलों का आयोजन।
  10. चित्र, चार्ट व मॉडल का निर्माण।
  11. वैज्ञानिक रुचियों के विषय पर पेपर रीडिंग प्रतियोगिता।
  12. व्याख्यान सेमीनार का आयोजन।

विज्ञान क्लब का संगठन

विज्ञान क्लब के संगठन में निम्न बातों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है-

  1. विज्ञान क्लब के लिए स्थान, सामग्री आदि की व्यवस्था।
  2. विज्ञान क्लब का आकार, सदस्यों की संख्या।
  3. सदस्यों व कार्यकारिणी का चुनाव।
  4. क्लब की मीटिंग के लिए दिन व स्थान का चुनाव।

इसके अतिरिक्त विज्ञान क्लब का एक संविधान होना आवश्यक है। सामान्यतया शिक्षण संस्था का प्रधान इसका संरक्षक तथा विज्ञान अध्यापक इसका प्रवर्तक होगा। विज्ञान के छात्रों के अलावा अन्य छात्र जो विज्ञान में रुचि लेते हों, उन्हें भी सदस्य बनने का अवसर दिया जाय। प्रारम्भ में विद्यालय को क्लब के लिए आर्थिक संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए। क्लब की एक निर्वाचित कार्यकारिणी होनी चाहिए। जिसका चुनाव छात्रों में से ही हो तथा कार्यकारिणी में निम्न सदस्य होने चाहिए-

  1. सभापति
  2. सचिव
  3. सहायक सचिव
  4. कोषाध्यक्ष
  5. पुस्तकालयाध्यक्ष
  6. स्टोर कीपर
  7. प्रचार अधिकारी
  8. कक्षा प्रतिनिधि

क्लब के सदस्य प्राप्त साधनों तथा स्थितियों के अनुसार क्रियाओं का चुनाव कर सकते हैं। विज्ञान-क्लब की सफलता विज्ञान- अध्यापक पर निर्भर करती है। इसीलिए विद्यालय प्रशासन का कर्तव्य है कि वह विज्ञान- शिक्षक को क्लब के संचालन के लिए अधिक-से-अधिक सुविधाएँ प्रदान करें। योग्य व अनुभवी अध्यापक कठिनाइयों के होते हुए भी विज्ञान क्लब का संचालन सफलतापूर्वक कर सकता है। फिर भी विद्यालय का यह दायित्व है कि वह आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था में सहयोग दें। तभी विज्ञान शिक्षण के उद्देश्य की प्राप्ति हो सकती है।

विज्ञान क्लब और कक्षा शिक्षण

विज्ञान क्लब विज्ञान-शिक्षण का महत्वपूर्ण साधन है। क्लब के सदस्यों द्वारा बनाई सामग्री को शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। क्लब के कार्यों को कक्षा के सम्मुख प्रस्तुत करके छात्रों को रसायन विज्ञान विषय में रुचि विकसित की जा सकती है। विज्ञान क्लब की क्रियाओं को कक्षा शिक्षण से सम्बन्धित कर अधिगत उपलब्धि को बढ़ाया जा सकता है।

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