राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध व अंतर

राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध – राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र में अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। 18वीं शताब्दी तक तो दोनों का अध्ययन एक शास्त्र के अंतर्गत किया जाता था जिसे राजनीतिक अर्थशास्त्र कहा जाता था। इसका उदाहरण हमें प्राचीन काल की रचनाओं से भी मिलता है। प्राचीन काल में कौटिल्य ने व्यावहारिक राजनीति पर लिखी गयी पुस्तक का नाम ‘अर्थशास्त्र’ रखा था। यूनानी विद्वानों ने भी अर्थशास्त्र के लिए ‘पोलिटिकल इकोनॉमी’ शब्द का प्रयोग किया था। एडम स्मिथ ने राजनीतिक अर्थशास्त्र के दो उद्देश्य बताये हैं-

  1. प्रजा के भरण-पोषण के लिए साधन जुटाना
  2. लोक प्रशासन के व्यवस्थित संचालन के लिए पर्याप्त राजस्व उपलब्ध कराना
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राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध

राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध

19वीं शताब्दी तक अर्थशास्त्र तथा राजनीति विज्ञान राजनीतिक अर्थशास्त्र के अंतर्गत आते थे परन्तु आधुनिक समय में अर्थशास्त्र को ज्ञान की एक स्वतंत्र शाखा माना जाता है जो मानव के आर्थिक क्रियाकलापों का अध्ययन करता है। मार्शल ने अर्थशास्त्र को एक ओर तो धन का और दूसरी ओर मनुष्य का अध्ययन माना है। आधुनिक अर्थशास्त्र के चार स्तम्भ उत्पादन, वितरण, उपभोग तथा विनिमय हैं। आप राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध Hindibag पर पढ़ रहे हैं।

राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र दोनों एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं और दोनो का ही उद्देश्य मानव कल्याण है। दोनों का ही लक्ष्य मानव के हितों को साधना है। राजनीति विज्ञान का संबंध मानव को शांति, सुव्यवस्था तथा अराजकताविहीन जीवन प्रदान करने से है। यह तभी संभव है जब लोगों की आर्थिक आवश्यकतायें भली प्रकार से पूरी हों। इन आवश्यकताओं की पूर्ति का ध्येय अर्थशास्त्र निभाता है क्योंकि अर्थशास्त्र का उद्देश्य मनुष्य के आर्थिक कल्याण से है। राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध

परन्तु अर्थशास्त्र अपना यह उद्देश्य तभी पूरा कर सकता है जब देश के राजनीतिक धरातल पर शांति एवं सुव्यवस्था हो और समाज में किसी प्रकार की अराजकता न हो। इसी कारण से 17वीं तथा 18वीं शताब्दी के प्रारम्भिक उदारवादियों ने आर्थिक क्षेत्र में राज्य के अहस्त क्षेप की नीति का तो समर्थन किया परन्तु स्पष्ट रूप से इस बात की भी वकालत की कि समाज में शांति तथा व्यवस्था बनाये रखने का दायित्व राज्य द्वारा ही निभाया जाना चाहिए। इस प्रकार समाज की प्रगति के लिए अर्थशास्त्र तथा राजनीति विज्ञान दोनों ही आवश्यक है।

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राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध

अर्थशास्त्र का राजनीति विज्ञान पर प्रभाव

अर्थशास्त्र का राजनीति विज्ञान पर प्रभाव को निम्न रूपों में देखा जा सकता है –

  1. किसी देश की राजनीतिक परिस्थितियाँ उस देश की आर्थिक परिस्थितियों के ताने-बाने से प्रभावित होती हैं। 1789 की फ्रांस की राज्य क्रांति का मुख्य कारण वहाँ व्याप्त आर्थिक असंतोष था। यही नहीं, साम्यवाद की विचारधारा की उत्पत्ति के लिए भी पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की विसंगतियाँ ही मुख्य रूप से उत्तरदायी थीं। कार्ल मार्क्स ने तो आर्थिक दशाओं के आधार पर ही पूरे समाज की व्याख्या कर डाली थी। मार्क्स का स्पष्ट विचार था कि किसी युग की आर्थिक संरचना ही उस युग की राजनीतिक संरचना को निर्धारित करती है। मार्क्स की स्पष्ट मान्यता थी कि जिस वर्ग के हाथों में उत्पादन तथा वितरण के साधन होते हैं उसी वर्ग के हाथों में राजनीतिक सत्ता भी होती है।
  2. किसी देश की सरकार या उसके शासन तंत्र की रूपरेखा भी उस समाज की आर्थिक दशा से ही निर्धारित होती है। अरस्तू जैसे प्राचीन विचारक की भी मान्यता थी कि देश के शासन तंत्र के निर्माण में सम्पत्ति के वितरण तथा उसके वितरण की पद्धति की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के लिए, 16वीं तथा 17वीं शताब्दी में यूरोप में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई जिसके परिणामस्वरूप व्यापारी, बैंकर्स तथा बिचौलियों के एक मध्यम वर्ग का उदय हुआ, जिनकी एकमात्र रुचि अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार में थी। इसके लिए उनकी सबसे बड़ी आवश्यकता एक अराजकता विहीन समाज की थी। चूँकि यह कार्य केवल एक शक्तिशाली राजा द्वारा ही किया जा सकता था। अतः इसी कारण यूरोप में इस काल में निरंकुश राजतंत्रों की स्थापना हुई।
  3. स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र तथा अधिकार जैसी अवधारणाओं का महत्व आर्थिक दशाओं के संदर्भ में ही कुछ हो सकता है। राज्य का अंतिम ध्येय नागरिकों को सद्गुणी जीवन प्रदान करना अर्थात् उनके व्यक्तित्व की अन्तर्निहित क्षमताओं को पूर्ण विकास का अवसर उपलब्ध कराना है परन्तु प्रजा से इस प्रकार की आशा तभी की जा सकती है जब उसकी मौलिक आवश्यकतायें पूर्ण हो पाती हों परन्तु मौलिक आवश्यकताओं की आपूर्ति में अक्षम व्यक्ति से यह अपेक्षा करना कि वह आदर्श नागरिक के कर्तव्यों का निर्वहन करेगा, बेईमानी पूर्ण होगा। संभवतः इसी कारण मार्क्सवाद, स्वतंत्रता, समानता तथा अधिकार एवं लोकतंत्र जैसी अवधारणाओं पर सर्वाधिक जोर देता है। लास्की ने तो आर्थिक लोकतंत्र के अभाव में राजनीतिक लोकतंत्र को मृगमरीचिका मात्र बताया है।
अल्पविकसित देश
राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि अर्थशास्त्र का राजनीतिकशास्त्र पर व्यापक प्रभाव है और यह राजनीति शास्त्र से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है परन्तु यह संबंध एकांगी नहीं है बल्कि राजनीति शास्त्र भी अर्थशास्त्र के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण एवं उपयोगी है। राजनीति विज्ञान की उपयोगिता अर्थशास्त्र के लिए इस रूप में है कि आर्थिक नीतियों का निर्माण तथा अर्थव्यवस्था का नियमन राज्य द्वारा ही किया जाता है और यह राज्य का मुख्य कार्य एवं दायित्व भी है। आप राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध Hindibag पर पढ़ रहे हैं।

कल्याणकारी राज्यों के अभ्युदय के साथ ही राज्य के कार्य क्षेत्र में व्यापक रूप से अप्रत्याशित वृद्धि हो गयी है जिसके परिणामस्वरूप जीवन के अन्य क्षेत्रों की भांति आर्थिक क्षेत्र में भी राज्य की भूमिका अत्यधिक बढ़ गयी है। आज प्रायः सभी देशों में तीव्र आर्थिक विकास के लिए विकास के योजनाबद्ध मॉडल अपनाये जा रहे हैं। इसके अन्तर्गत योजनाओं के स्वरूप तथा प्राथमिकताओं का निर्धारण उनके लिए कार्यक्रमों का निर्माण तथा उसे पूरा करने के लिए पूँजी का प्रबंध करना राज्य का ही उत्तरदायित्व है। यही नहीं मुद्रा निर्माण तथा बैंकिंग क्षेत्र पर तो राज्य का पूर्ण एकाधिकार है।

अतः अर्थव्यवस्था के प्रत्येक पहलू के लिए के राज्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण है जो राजनीतिशास्त्र का आज भी मुख्य विषय है। उपरोक्त के अतिरिक्त अर्थव्यवस्था के स्वरूप के निर्धारण में भी राज्य की भूमिका सर्वोपरि होती है। राज्य ही यह भी निर्धारित करता है कि देश में किस क्षेत्र को अधिक महत्व दिया जायेगा – सार्वजनिक क्षेत्र को या निजी क्षेत्र को। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि अर्थशास्त्र तथा राजनीतिशास्त्र एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए। हैं और दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। इस संदर्भ में गार्नर का यह कथन अत्यंत सारगर्भित है कि राजनीतिक तथा आर्थिक जीवन अन्तः मिश्रित हैं।

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राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र संबंध

राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र अंतर

राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र में निम्न रूप से अंतर किया जा सकता है-

क्रम संख्याराजनीति विज्ञानअर्थशास्त्र
1.राजनीति विज्ञान में राज्य सरकार विभिन्न राजनीति विज्ञान के विपरीत अर्थशास्त्र में प्रकार की राजनीतिक संस्थाओं, समाज की राजनीतिक प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है।राजनीति विज्ञान के विपरीत अर्थशास्त्र में धन, उत्पादन, वितरण, सार्वजनिक वित्त आदि का अध्ययन किया जाता है।
2.राजनीति विज्ञान मनुष्य के राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन करता है।अर्थशास्त्र व्यक्ति के आर्थिक व्यवहार का अध्ययन करता है।
3.राजनीति विज्ञान का संबंध मुख्यतय: व्यक्तियों से होता है।अर्थशास्त्र का संबंध मुख्यत: वस्तुओं से होता है।
4.राजनीति विज्ञान मूल्यों का अध्ययन करता है।अर्थशास्त्र में कीमतों का अध्ययन किया जाता है।
5.राजनीति विज्ञान तथ्यात्मक के साथ-साथ आदर्शात्मक अर्थात् मूल्यपरक भी होता है।अर्थशास्त्र मात्र तथ्यात्मक या वर्णनात्मक होता है।
6.राजनीति विज्ञान का क्षेत्र अर्थशास्त्र से अत्यधिक व्यापक है।अर्थशास्त्र का क्षेत्र राजनीति विज्ञान की तुलना में बहुत संकीर्ण है।
7.राजनीति विज्ञान मानव जीवन के सभी पक्षों का अध्ययन करता है।अर्थशास्त्र मनुष्य के केवल आर्थिक पक्ष तक सीमित होता है।
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