मूल्यांकन तथा मापन में अंतर

मूल्यांकन तथा मापन में अंतर यहां नीचे दी गयी टेबल में बहुत ही आसान भाषा में समझाया गया है। इसमें मापन और मूल्यांकन में अंतर बताने के लिए कई उदाहरण का प्रयोग किया है, जो हमारे दैनिक जीवन से संबंधित हैं। शिक्षा के अंतर्गत यदि छात्र की योग्यताओं एवं विशेषताओं की मात्रा को गणिती इकाइयों में निर्धारित करते हैं तो वह शैक्षिक मापन कहलाता है।

सामान्यतया मापन का तात्पर्य छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि के संदर्भ में लिया जाता है परंतु वास्तव में शिक्षा के क्षेत्र में किए जाने वाले सभी मापन शैक्षिक मापन के अंतर्गत आते हैं। छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि के अतिरिक्त उनकी बुद्धि, अभिरुचि, स्मृति, व्यक्तित्व, रुचि, अधिगम शैली आदि अनेक चरों का मापन किया जाता है।

मूल्यांकन तथा मापन में अंतर

मूल्यांकन तथा मापन में अंतर

मापन की अपेक्षा मूल्यांकन अधिक व्यापक है। मापन के अंतर्गत किसी व्यक्ति अथवा वस्तु के गुण अथवा विशेषताओं का वर्णन मात्रा ही किया जा सकता है जबकि मूल्यांकन के अंतर्गत उस व्यक्ति अथवा वस्तु के गुणों अथवा विशेषताओं को वांछनीय दृष्टि से दृष्टिपात किया जाता है। अतः मापन वास्तव में मूल्यांकन का एक अंग मात्र है मूल्यांकन से प्राप्त परिणामों की जांच की जाती है।

मापन वास्तव में स्थिति निर्धारण है जबकि मूल्यांकन उस स्थिति का मूल्यांकन है। किसी गुण अथवा विशेषता की कितनी मात्रा व्यक्ति में उपलब्ध है। इस प्रश्न का उत्तर मापन से प्राप्त होता है। जबकि उस व्यक्ति में उपस्थित गुण अथवा विशेषता की मात्रा किसी उद्देश्य की दृष्टि से कितनी संतोषप्रद है अथवा कितनी वांछनीय है इस प्रश्न का उत्तर मूल्यांकन से निर्धारित होता है। छात्रों की शैक्षिक उपलब्धि को अंकों में व्यक्त करना मापन का उदाहरण है। जबकि छात्रों के प्राप्त अंकों के आधार पर उनकी उपलब्धि के स्तर के संबंध में संतोषजनक अथवा संतोषजनक स्थिति का निर्धारण करना मूल्यांकन का उदाहरण है।

मूल्यांकन तथा मापन में अंतर
मूल्यांकन तथा मापन में अंतर

मूल्यांकन तथा मापन में अंतर निम्न है-

क्रम संख्यामूल्यांकनमापन
1मूल्यांकन एक विस्तृत प्रत्यय है।मापन मूल्यांकन के अंतर्गत आता है।
2मूल्यांकन एक नवीन धारणा है।मापन एक प्राचीन धारणा है।
3मूल्यांकन में विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए शिक्षण उद्देश्यों की जांच की जाती है।मापन में पाठ्यवस्तु कौशल योग्यता की जांच किसी उद्देश्य के बिना की जाती है।
4गुणों की माप एक पूर्ण इकाई के रूप में की जाती है।गुणों की माप परिणाम अंक औसत तथा प्रतिशत आदि अलग-अलग इकाइयों में की जाती है।
5मूल्यांकन के अंतर्गत छात्रों में हुए व्यावहारिक परिवर्तनों की जांच निरीक्षण परीक्षण व प्रवृत्ति मापक आदि विधियों के द्वारा की जाती है।इसके अंतर्गत व्यक्तित्व परीक्षण बुद्धि परीक्षण तथा निष्पत्ति परीक्षण की गणना की जाती है।
6मूल्यांकन में छात्रों के विभिन्न पक्षों सूचियों व्यवहारों व सामाजिक अनुकूलन को आंका जाता है।मापन में इन सब बच्चों का आकलन नहीं किया जाता है।
7मूल्यांकन द्वारा सुधार किया जा सकता है।मापन का उद्देश्य मापन करना ही होता है।
मूल्यांकनमूल्यांकन के क्षेत्रमूल्यांकन की आवश्यकता
मूल्यांकन का महत्वमूल्यांकन के प्रकारमूल्यांकन तथा मापन में अंतर
मूल्यांकन की विशेषताएं
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