मिश्रित अर्थव्यवस्था

मिश्रित अर्थव्यवस्था में सरकारी तथा निजी दोनों क्षेत्र एक साथ कार्य करते है। सरकारी क्षेत्र सरकार के संचालन व प्रबन्ध में ही रहता है तथा निजी क्षेत्र भी सरकार के द्वारा नियंत्रित होता है। निजी क्षेत्र सार्वजनिक हित के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकता। इस प्रकार मिश्रित अर्थव्यवस्था उत्पादन व अन्य आर्थिक गतिविधियों का समाजीकरण तथा पूर्ण आर्थिक स्वतन्त्रता में आस्था वाली विचारधाराओं का संयोजन है।

मिश्रित अर्थव्यवस्था

मिश्रित अर्थव्यवस्था मे पूँजीवाद व समाजवाद दोनों की विशेषतायें पायी जाती हैं। अर्थव्यवस्था में पूँजीवाद व समाजवाद के मध्य का मार्ग अपनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानवीय कल्याण को बढ़ाना होता है। मिश्रित अर्थव्यवस्था मे पूँजीवाद व समाजवाद दोनों की विशेषतायें पायी जाती हैं। अर्थव्यवस्था में पूँजीवाद व समाजवाद के मध्य का मार्ग अपनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानवीय कल्याण को बढ़ाना होता है।

परिभाषाएं

इसे विभिन्न विद्वानों द्वारा अग्रवत परिभाषित किया गया है –

मिश्रित अर्थव्यवस्था की पूर्व धारणाओं में से एक धारणा यह है कि मिश्रित अर्थव्यवस्था के अन्तर्गत उत्पादन एवं उपभोग से सम्बद्ध मुख्य निर्णयों को प्रभावित करने में निजी संस्थानों को स्वतन्त्र पूँजीवादी व्यवस्था के अधीन प्राप्त स्वतन्त्रता से कम स्वतन्त्रता प्राप्त होती है तथा सार्वजनिक उद्योग सरकार के कठोर नियंत्रण से मुक्त होते हैं।

जे. डब्ल्यू. ग्रोव के अनुसार

मिश्रित अर्थव्यवस्था को निजी और सरकारी स्वामित्व या नियंत्रित उपक्रमों की एक मिली-जुली व्यवस्था के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें व्यावसायिक क्रिया अनेक व्यावसायिक स्वरूपों अथवा अवस्थाओं द्वारा संचालित की जाती है न कि केवल एक के द्वारा।

मुण्ड एवं रोनाल्ड वोल्फ के शब्दों में

उत्पत्ति के साधनों का समाजीकरण आर्थिक शान्ति के लिए आवश्यक है और जितना शीघ्र यह हो जाता है उतना ही उत्तम है।

ए. सी. पीगू के अनुसार

मिश्रित अर्थव्यवस्था, एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था है जिसमें समुदाय के सभी वर्गों के आर्थिक कल्याण के संवर्धन के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र को विशेष भूमिकाएँ दी जाती है।

जे. डी. खत्री के अनुसार

इस प्रकार मिश्रित अर्थव्यवस्था पूँजीवाद एवं समाजवाद का मिला-जुला रूप है। इस प्रणाली के अन्तर्गत कुछ उपक्रमों पर सरकार का स्वामित्व एवं प्रबन्ध होता है तथा कुछ पर निजी उपक्रमों का स्वामित्व व नियंत्रण होता है। सरकार सार्वजनिक सेवाएं देती हैं जबकि उपभोक्ता माल उद्योगों पर निजी उपक्रमों का स्वामित्व होता है। कुछ उद्योगों में सरकारी व निजी उद्योग सहयोग करते हैं। सरकार निजी उद्योगों पर निगरानी रखती है।

वर्तमान अर्थव्यवस्था के सफल संचालन हेतु मिश्रित अर्थव्यवस्था से ठीक माना जाता है क्योंकि इस अर्थव्यवस्था में सरकार द्वारा विभिन्न आर्थिक गतिविधियों का आवंटन विभिन्न क्षेत्रों में उनके महत्व, प्रभाव, क्षेत्र कल्याणकारी तत्व शोषणकारी तत्व के आधार पर किया जाता है ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग समाज के कल्याण हेतु किया जा सके। मिश्रित अर्थव्यवस्था उदार अर्थव्यवस्था का रूप ले लेती है जिसमें मानवीय मूल्यों आर्थिक विकाससमाज कल्याण को एकीकृत किया जाता है।

मिश्रित अर्थव्यवस्था की विशेषताएं

  1. लोक व निजी क्षेत्र का विभाजन – मिश्रित अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक व निजी क्षेत्र का स्पष्ट व निश्चित विभाजन होता है। ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं।
  2. सार्वजनिक व निजी क्षेत्र का एक साथ विकास – समग्र आर्थिक विकास हेतु सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों की भूमिकाओं को परिभाषित करना तथा इनका साथ-साथ विकास करना मिश्रित अर्थव्यवस्था का आवश्यक लक्षण है।
  3. लोकहित – मिश्रित अर्थव्यवस्था लोकहित को सर्वोच्च वरीयता दी जाती है। इस प्रकार निजी क्षेत्र को नियंत्रित व निर्देशित करती है।
  4. राजकीय नियंत्रण – राजकीय अर्थव्यवस्था में सरकार द्वारा नियंत्रण हेतु अनेक विधियों, नियमों, नीतियों को तय किया जाता है तथा यह प्रयास किया जाता है। कि निजी क्षेत्र राष्ट्रीय लक्ष्यों की पूर्ति में सहयोग करे।
  5. उद्योगों का वर्गीकरण – मिश्रित अर्थव्यवस्था में उद्योगों का अग्रवत बाँटा जाता है –
    1. कुछ विशिष्ट माल एवं सेवाये सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों द्वारा उत्पादित की जाती है।जबकि कुछ माल व सेवाएं निजी क्षेत्र के लिए आरक्षित होती हैं।
    2. कुछ क्षेत्र सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के लिए होते हैं।
    3. कुछ विशिष्ट माल एवं सेवाओं हेतु संयुक्त क्षेत्र में उद्योग स्थापित किये जाते हैं।
  6. विभिन्न क्षेत्रों का अस्तित्व – मिश्रित अर्थव्यवस्था का यह महत्वपूर्ण लक्षण है कि इसमें विभिन्न क्षेत्र जैसे सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, सहकारी क्षेत्र को शामिल किया जाता है तथा इनके प्रभावी प्रचालन हेतु प्रयास किये जाते हैं। समाज एवं सरकार को इन क्षेत्रों से लाभ मिलता है।
  7. आर्थिक नियोजन – मिश्रित अर्थव्यवस्था में पूँजीवाद एवं समाजवाद दोनों के गुण पाये जाते हैं तथा लोक क्षेत्र च निजी क्षेत्र का अस्तित्व होता है।
  8. अन्य विशेषताएं – मिश्रित अर्थव्यवस्था की कुछ अन्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
    1. आधारभूत उद्योगों तथा राष्ट्रीय महत्व के उद्योगों का सार्वजनिक क्षेत्र में होना।
    2. सार्वजनिक क्षेत्र का भी तीव्रगति से विकास होना।
    3. पूँजीवाद एवं समाजवाद दोनों के लक्षणों का समावेश होना।
    4. आर्थिक नियोजन का महत्वपूर्ण स्थान होना।
    5. निजी क्षेत्र के उद्योगों तथा एकाधिकारी प्रवृत्तियों पर पर्याप्त नियंत्रण होना।
    6. सहकारी क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करने के सतत् प्रयास जारी रखना।

1. लोक व निजी क्षेत्र का विभाजन

मिश्रित अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक व निजी क्षेत्र का स्पष्ट व निश्चित विभाजन होता है। ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करते हैं।

2. सार्वजनिक व निजी क्षेत्र का एक साथ विकास

समग्र आर्थिक विकास हेतु सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों की भूमिकाओं को परिभाषित करना तथा इनका साथ-साथ विकास करना मिश्रित अर्थव्यवस्था का आवश्यक लक्षण है।

3. लोकहित

मिश्रित अर्थव्यवस्था लोकहित को सर्वोच्च वरीयता दी जाती है। इस प्रकार निजी क्षेत्र को नियंत्रित व निर्देशित करती है।

4. राजकीय नियंत्रण

राजकीय अर्थव्यवस्था में सरकार द्वारा नियंत्रण हेतु अनेक विधियों, नियमों, नीतियों को तय किया जाता है तथा यह प्रयास किया जाता है। कि निजी क्षेत्र राष्ट्रीय लक्ष्यों की पूर्ति में सहयोग करे।

5. उद्योगों का वर्गीकरण

मिश्रित अर्थव्यवस्था में उद्योगों का अग्रवत बाँटा जाता है –

(i) कुछ विशिष्ट माल एवं सेवाये सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों द्वारा उत्पादित की जाती है।जबकि कुछ माल व सेवाएं निजी क्षेत्र के लिए आरक्षित होती हैं।

(ii) कुछ क्षेत्र सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के लिए होते हैं।

(iii) कुछ विशिष्ट माल एवं सेवाओं हेतु संयुक्त क्षेत्र में उद्योग स्थापित किये जाते हैं।

6. विभिन्न क्षेत्रों का अस्तित्व

मिश्रित अर्थव्यवस्था का यह महत्वपूर्ण लक्षण है कि इसमें विभिन्न क्षेत्र जैसे सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, सहकारी क्षेत्र को शामिल किया जाता है तथा इनके प्रभावी प्रचालन हेतु प्रयास किये जाते हैं। समाज एवं सरकार को इन क्षेत्रों से लाभ मिलता है।

7. आर्थिक नियोजन

मिश्रित अर्थव्यवस्था में पूँजीवाद एवं समाजवाद दोनों के गुण पाये जाते हैं तथा लोक क्षेत्र च निजी क्षेत्र का अस्तित्व होता है।

8. अन्य विशेषताएं

मिश्रित अर्थव्यवस्था की कुछ अन्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

(i) आधारभूत उद्योगों तथा राष्ट्रीय महत्व के उद्योगों का सार्वजनिक क्षेत्र में होना।

(ii) सार्वजनिक क्षेत्र का भी तीव्रगति से विकास होना। (iii) पूँजीवाद एवं समाजवाद दोनों के लक्षणों का समावेश होना।

(iv) आर्थिक नियोजन का महत्वपूर्ण स्थान होना।

(v) निजी क्षेत्र के उद्योगों तथा एकाधिकारी प्रवृत्तियों पर पर्याप्त नियंत्रण होना।

(vi) सहकारी क्षेत्र के विकास को गति प्रदान करने के सतत् प्रयास जारी रखना।

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