बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध थे। जिनका जन्म 563 ईसा पूर्व कपिलवस्तु के निकट लुंबिनी नामक ग्राम में शाक्य कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। इनकी माता का नाम महामाया था। महात्मा बुद्ध के जन्म के सातवें दिन इनकी माता की मृत्यु हो गई। उनका पालन पोषण इन्हीं की मौसी प्रजापति गौतमी ने किया था। इसलिए इन्हें गौतम बुद्ध के नाम से भी जानते हैं। महात्मा बुध का विवाह 547 ईसा पूर्व में 16 वर्ष की आयु में यशोधरा नामक राजकुमारी से हुआ था।

बौद्ध धर्म

इन्हीं से इन्हें राहुल नामक पुत्र की उत्पत्ति है। 530 ईसा पूर्व सांसारिक दुखों से पीड़ित होकर इन्होंने ग्रह तक त्याग कर दिया था। गृह त्याग की घटना इतिहास में महाभिनिष्क्रमण के नाम से जाना जाता है। यशोधरा को गोपा के नाम से जाना गया। गृह त्याग करने के बाद सिद्धार्थ ने वैशाली के अलारकलाम से शाक्य दर्शन की शिक्षा प्राप्त की।

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बौद्ध धर्म

बिना अन्न जल निद्रा के 6 वर्ष की घोर तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की रात्रि में उरुवेला में निरंजन नदी के तट पर पीपल के वृक्ष के नीचे इन्हें ज्ञान की प्राप्त हुई थी। ज्ञान प्राप्त कि यह घटना संबोधी के नाम से जानी गई थी। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात सिद्धार्थ बुद्ध के नाम से जाने गए थे और वे स्थान बोधगया कहलाया था। ज्ञान प्राप्ति के बाद अपने जीवन का पहला उपदेश मृगदाऊ ऋषिपटनम में दिया था। उपदेश देने की यह घटना धर्मचक्र परिवर्तन के नाम से जानी जाती है। महात्मा बुद्ध ने अपने जीवन के उपदेश पाली भाषा में दिए थे। जबकि अपने जीवन के सर्वाधिक उपदेश श्रावस्ती में दिए थे।

80 वर्ष की आयु में 483 ईसा पूर्व कुशीनगर में इनकी मृत्यु हो गई। इनकी मृत्यु इतिहास में महापरिनिर्वाण के नाम से जानी गई। सुजाता नाम की स्त्री बुद्ध को खीर खिलाने की घटना से संबंधित है।

बौद्ध धर्म

महात्मा बुद्ध ने दुखों को समाप्त के लिए अष्टांगिक मार्ग को पालन करने के लिए कहा था। यह अष्टांगिक मार्ग निम्न है-

  1. सम्यक दृष्टि
  2. सम्यक संकल्प
  3. सम्यक वाक्
  4. सम्यक कर्म
  5. समिति जीविका
  6. सम्यक व्यायाम
  7. सम्यक ज्ञान
  8. सम्यक समाधि

त्रिपिटक शैली बौद्ध धर्म से संबंधित है। यह धर्म पूर्ण रूप से अनीशवरवादी था। यह धर्म आत्मा-परमात्मा पर विश्वास नहीं करता परंतु पुनर्जन्म पर विश्वास करता था। बौद्ध धर्म में शामिल होने के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष है। इन्होंने तीन रत्न दिए-

  1. बुद्धम
  2. धम्म
  3. संघ
बौद्ध धर्म की शाखाएं
  • जातक कथाएं महात्मा बुध के पूर्व जन्म से संबंधित है। महात्मा बुद्ध ने अपने प्रिय शिष्य आनंद के कहने पर संघ में महिलाओं को प्रवेश किया।
  • पहली महिला प्रजापति गौतमी थी।
  • बौद्धों का सबसे पवित्र त्यौहार वैशाख है जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जानते हैं।
  • कमल और सांड इनके जन्म से संबंधित थे।
  • घोड़ा गृह-त्याग से संबंधित था।
  • पीपल ज्ञान प्राप्त से संबंधित था।
  • पदचिन्ह उपदेश देने से संबंधित थे। स्तूप मृत्यु से संबंधित था।
  • महात्मा बुद्ध की प्रथम मूर्ति मथुरा कला के अंतर्गत बनाई गई, जबकि सर्वाधिक मूर्तियां गांधार के अंतर्गत बनाई गई।

बौद्ध धर्म की दो शाखाएं

महात्मा बुद्ध की मृत्यु के बाद बौद्ध धर्म हीनयान और महायान नामक दो शाखाओं में बट गया। दोनों शाखाओं के विद्वान अपने-अपने ढंग से बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रतिपादन करते रहे।

1. हीनयान-महात्मा बुद्ध को महामानव मानने लगे।
2. महायान-भगवान मानकर मूर्ति बनाने लगे।

बौद्ध धर्म
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बौद्ध महा संगीति

बौद्ध धर्म में चार संगीतियां हुई-

  1. प्रथम बौद्ध संगीत 483 ईसा पूर्व में राजगृह में अजातशत्रु के शासनकाल में हुई जिसके अध्यक्ष महा कश्यप थे।
  2. द्वितीय बौद्ध संगीत 383 ईसा पूर्व वैशाली में काला शोक के शासन काल में हुई जिसके अध्यक्ष सर्वकामी थे।
  3. तृतीय बौद्ध संगीति 254 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र में अशोक के शासनकाल में हुई जिसके अध्यक्ष मेघवाल पुत्र थे।
  4. चतुर्थ बौद्ध संगीति प्रथम शताब्दी में कनिष्क के शासनकाल में हुई जिसके अध्यक्ष वसुमित्र थे।
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