बचत

कोई भी आय जो व्यय नहीं की जाती या व्यय नहीं हो पाती वह शेष रह जाती है। इसे बचत कहा जाता है। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है आय का वह भाग जो व्यय न किया जाय ‘बचत’ कहलायेगा।

बचत

बचत का अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय के संदर्भ में विशिष्ट महत्व है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक बचत विनियोग में परिवर्तित होती है, तो रोजगार के अवसरों के साथ-साथ राष्ट्रीय आय में भी वृद्धि होती है। बचत की मात्रा भी विनियोग और उसके परिणामस्वरूप होने वाली आय पर निर्भर है। यदि व्यक्ति की आय बढ़ती है तो स्वाभाविक ही उसकी बचत में वृद्धि होगी।

बचत

बचत के स्रोत

बचत के स्रोतों को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है –

  1. पारिवारिक क्षेत्र – इसमें परिवार लाभ न कमाने वाली संस्थायें, गैर कम्पनी व्यापारों की बचते आती है। इनका कुल बचतों में योगदान लगभग 82% है। इस प्रकार की बचते बैंक जमा, कारखानों, व्यवसायो, कृषि आदि में निवेश के रूप में की जाती है। पारिवारिक क्षेत्र की बचती का कुल बचतों से अनुपात 69% है। वर्ष 2006-07 में चालू कीमतों पर कुल पारिवारिक क्षेत्र की बचते 9,85,822 करोड़ थी।
  2. सरकारी क्षेत्र की बचते
    इसमें सरकारी विभाग जैसे- डाक विभाग, रेलवे, उर्जा परिवहन आदि के बचते होती है।
  3. निगमित क्षेत्र
    इसमें निजी कंपनियां, सार्वजनिक कंपनियां, सार्वजनिक क्षेत्र एवं सहकारी क्षेत्र आता है। कुल बच्चों में इनका योगदान 6% है।
बचत के स्रोत

बचत दर कम होने के कारण

बचत दर कम होने के निम्नलिखित कारण है-

  1. न्यून प्रति व्यक्ति आय
    भारत में प्रति व्यक्ति आय अत्यंत न्यून है। लगभग एक चौथाई आबादी गरीब है। लोग अपनी आय का एक बड़ा भाग उपभोग पर वह कर देते हैं इससे उनकी बचत नहीं हो पाती है।
  2. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को हानि
    लोक क्षेत्र के अधिकांश उपक्रम हानि पर चल रहे हैं। इसका पूंजी निर्माण प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों का अभाव
    हमारे देश की लगभग 70 पर्सेंट आबादी गांव में रहती है जहां पर बचत हेतु बैंकों का अभाव है जिससे ग्रामीण जनता बचत नागर के उपभोग की ओर आकृष्ट होती है।
  4. मुद्रा प्रभाव की समस्या
    भारत में मुद्रा प्रसार तीव्र गति से होने के कारण मूल्य बढ़े है जिससे घरेलू क्षेत्र में बचत नहीं हो पाती है।
  5. लोक कल्याण हेतु बड़े कोषों की आवश्यकता
    सरकार को विभिन्न लोक कल्याणकारी गतिविधियों जैसे-शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता आदि हेतु बड़े को आवंटित किए जाते हैं। यह सरकार की बचत क्षमता को प्रभावित करता है।
  6. विभेदात्मक कर संबंधियां
    भारत में विभेद आत्मक कर संबंधियों को अपनाया है। भारत में कृषि आय पर कोई कर नहीं लगाता है।
बचत दर कम होने के कारण

बचत में वृद्धि हेतु सुझाव

बचत के निम्नलिखित सुझाव हैं-

  1. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को चलाया जाना
  2. बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार
  3. स्थिर मूल्य नीति का निर्माण
  4. बचत पर उच्च आयकर सीमा
  5. अनुत्पादन व गैर-विकास वाले विवो में कटौती
  6. विनियो पर कर में छूट
  7. भविष्य निधि व बीमा क्षेत्र का व्यापक प्रचार प्रसार
  8. उत्पादन लागत में कमी
  9. वेतन नियंत्रण
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