धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां – यदि धर्म रूढ़िवादी पर्वती का तथा वस्तु- स्थित बनाए रखने का समर्थक है, परंतु आधुनिक समाज में तेजी से बदलती परिस्थितियों के प्रवेश के प्रवेश में यह स्वयं को बचाने में असमर्थ हो गया, जिसके परिणाम स्वरूप धर्म में नई प्रवृतियां दिखाई दी।

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

  1. धार्मिक संकीर्णता में कमी
  2. धार्मिक कट्टरता का कम होना
  3. मानवतावादी धर्म का विकास
  4. धर्म का व्यवसायीकरण
  5. धार्मिक कर्मकांडो का सरलीकरण
  6. धर्म मनोरंजन के साधन के रूप में
धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां
धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

1. धार्मिक संकीर्णता में कमी

पुराने समय में धर्म की प्रकृति बहुत स संकीर्ण थी । सभी अपने धर्मों को अन्य धर्मों की अपेक्षा श्रेष्ठ समझते थे तथा दूसरे धर्मों को ग्रह की दृष्टि से देखते थे। इसी दृष्टिकोण के कारण दो धर्मों में कभी आपसी मेल नहीं हुआ किंतु आज समय बदल चुका है आज सभी धर्म एक दूसरे को सम्मान देने लगे हैं यही आधुनिक समाज की सबसे बड़ी उपलब्धि है। धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

2. धार्मिक कट्टरता का कम होना

आधुनिक समय में धार्मिक कट्टरता की भावना में कमी आई है। आज के मनुष्य के लिए पहले जितने कठोरता से धर्म का पालन करना संभव नहीं है, किसी लिए समाज में व्याप्त कुरीतियों में कमी आई है। पहले जहां हरिजनों को छूना वर्जित था आज देश सर्वजनिक स्थानों में बिना रोक-टोक जा सकते हैं इसी क्रम में बाल विवाह सती प्रथा समाप्त हो गई है तथा विधवा पुनर्विवाह देता अंतर जाति विवाह का चलन हो गया है।

3. मानवतावादी धर्म का विकास

समाजशास्त्र के प्रतिपादक के आरगस्ट कामट ने आपने मानवता के धर्म के अंतर्गत मानवतावादी धर्म की कल्पना की थी। श्री काम के मतानुसार मानवता धर्म का उद्देश, दूसरों के कार्य के लिए समर्थ होना और उनके लिए शारीरिक बौद्धिक उन्नत करना है। इस धर्म का मुख्य सिद्धांत प्रेम है या हिंसात्मक कार्यों का बहिष्कार करता है। गांधी जी ने भी ऐसे ही धर्म की कल्पना की थी। धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

4. धर्म का व्यवसायीकरण

आज के समय मैं धर्म जीविकोपार्जन का एक साधन बन गया है। आज धर्म के ठेकेदार धर्म के प्रति उतने निष्ठावान नहीं है और ना ही धार्मिक क्रियाओं को उतनी निष्ठा से संपन्न कराते हैं जितनी की पहले करते थे। आज इनका एकमात्र उद्देश्य किसी ना किसी प्रकार से अधिक धन अर्जित करना है।

धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां
धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

अब छोटे-छोटे कारों के लिए अधिकधिक दक्षिणा देना आवश्यक हो गया है। समाचारों में नित्य प्रति ऐसी घटनाओं को पढ़ने को मिलता है जिसमें संतान प्राप्ति अथवा दुगना धन कमाने या नक्षत्रो की शांति हेतु प्रलोभन देकर धन लूटा जाता है। इस प्रकार धर्म का यह व्यवसायीकरण हमें सभी धर्मों में देखने को मिलेगा।

5. धार्मिक कर्मकांडो का सरलीकरण

औद्योगीकरण के फलस्वरूप मानव मशीन की तरह काम करने लगा है। इतने व्यस्त जीवन में धार्मिक आडंबरो खोकर पाना अब संभव नहीं है अतः और धर्म का सरलीकरण किया जा रहा है। पहले विवाहों मैं बहुत अधिक समय लगता था मैं बहुत समय लगता था किंतु सरलीकरण द्वारा या काम तीन-चार घंटे में आसानी से संपन्न हो जाता है। धर्म में आधुनिक प्रवृत्तियां

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6. धर्म मनोरंजन के साधन के रूप में

आज के समय में अलौकिक शक्तियों से लोगों का विश्वास छोटे छूटता जा रहा है। तीर्थ स्थलों की मात्रा धार्मिक निष्ठा से प्रेरित होकर नहीं बल्कि मनोरंजन का चिकित्सक की सलाह पर हवा बदलने के लिए की जाती है। धार्मिक उत्सवों मैं भजन कीर्तन मनोरंजन के लिए तथा एक दूसरे से मिलने जलने के लिए किए जाते हैं इससे यह बात स्पष्ट हो जाती है कि आज धर्म का अलौकिक एवं अभूत पूर्ण शक्ति के रूप में महत्त्व घटता जा रहा है।

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