धर्म परिभाषा लक्षण

धर्म परिभाषा – धर्म मानव समाज का एक ऐसा शाश्वत, व्यापक और स्थाई तत्व है, जिसे समझे बिना हम समाज के रूप को समझने में असफल रहेंगे। प्रत्येक समाज में धर्म का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मानवीय व्यवहार तथा आचरण इससे प्रभावित रहता है। संपूर्ण विश्व की संचालक शक्ति के अस्तित्व को एक दृढ़ विश्वास ही धर्म को जन्म देता है।

वह शक्ति जो संपूर्ण प्रकृति की क्रियाओं को संचालित करती है। मानव जीवन में सुख दुख प्रदान करती है तथा इस शक्ति के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए व्यक्ति पूजा पाठ तथा धार्मिक अनुष्ठान करता है। धर्म का संबंध मानव की श्रद्धा भावनाओं एवं भक्ति के साथ जुड़ा हुआ है। धर्म व्यक्ति के आंतरिक जीवन को ही नहीं अपितु उसके सामाजिक सांस्कृतिक तथा आर्थिक जीवन को भी प्रभावित करता है। धर्म आदि काल तथा आधुनिक सभी युगों में विद्यमान रहा है।

पर अलौकिक शक्ति में विश्वास रखना और इसको करना ही धर्म है। इसकी अभिव्यक्ति के प्रथक प्रथक साधन है कुछ लोग मंदिर दर्शन, सत्संग, भजन कीर्तन, पूजा अर्चना आदि करते हैं। देवी शक्ति में विश्वास और उसकी प्रसन्नता के लिए तथा अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए कामना करके पूजा करना सभी धर्म के अंतर्गत आते हैं।

धर्म परिभाषा

धर्म परिभाषा को विभिन्न विद्वानों ने निम्न प्रकार से परिभाषित किया है-

धर्म आध्यात्मिक तथा आसुरी शक्तियों में विश्वास करना है।

एडवर्ड टायलर

धर्म क्रिया की एक विधि है और साथ ही विश्वासों की एक व्यवस्था भी। धर्म एक समाजशास्त्रिय घटना के साथ-साथ एक व्यक्तिगत अनुभव भी है।

मैलीनास्की
धर्म परिभाषा, धार्मिक असामंजस्यता, बौद्धकालीन शिक्षा
धर्म परिभाषा

धर्म से मैं मनुष्य से श्रेष्ठ उन शक्तियों की संतुष्टि आराधना समझता हूं, जिस के संबंध में यह विश्वास किया जाता है कि यह प्रकृति और मानव जीवन को मार्ग दिखाती हैं और नियंत्रित करती हैं।

जेम्स फ्रेजर

धर्म परिभाषा – धर्म आध्यात्मिक शक्ति में विश्वास है।

एडवर टाइलर

धर्म को मैं मनुष्य से श्रेष्ठ उन शक्तियों की संतुष्टि आराधना समझता हूं जिनके संबंध में यह विश्वास किया जाता है कि वह मानव जीवन को मार्ग दिखाता और नियंत्रित करता है।

जेम्स फ्रेजर

धर्म वह है जो मानव को इस संसार और परलोक में आनंद की खोज के लिए प्रेरित करें। धर्म कार्य पर स्थापित है। धर्म मानव को रात दिन इस आनंद को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करता है।

स्वामी विवेकानंद

धर्म की विशेषताएं

धर्म की परिभाषाओं के अनुसार ही हम धर्म की विशेषताओं को निश्चित कर सकते हैं। यह विशेषताएं सभी धर्मों में विद्यमान होती हैं, उनका मूर्त स्वरूप प्रथक प्रथक हो सकता है। यह विशेषताएं इस प्रकार हैं-

  1. अलौकिक शक्ति में विश्वास – धर्म का आधार ही एक अलौकिक शक्ति है जिससे व्यक्ति सर्वशक्तिमान अदृष्टा मानता है। इस बात का विश्वास ही धर्म के अस्तित्व को बनाए है।
  2. आराधना प्रार्थना – धर्म के लोग जिस अलौकिक शक्ति में विश्वास करते हैं, उस को प्रसन्न करने के लिए पूजा, अर्चना, ध्यान, व्रत आदि करते हैं। ताकि उसकी कृपा उस पर बनी रहे और उनके प्रकोप से व्यक्ति बचा रहे।
  3. पवित्रता की धारणा – धर्म का पवित्रता से गहरा संबंध है और दुखी अपने धर्म में पवित्रता पर बल देते हुए लिखा है कि पवित्र वस्तुओं से संबंधित विश्वासों और आश्रमों की समग्र व्यवस्था है, जो इस पर विश्वास करने वालों को एक नैतिक समुदायों में संयुक्त करती है।
  4. निषेध – निषेध धर्म का संबंध कुछ निषादों से होता है इन्हें धर्म आचरण के विरुद्ध की जाने वाली क्रियाएं भी कहा जा सकता है निषेध से तात्पर्य उन क्रियाओं से है जो सभी दृष्टि से अमान्य है। जैसे झूठ बोलना, बेईमानी, व्यभिचार, दुराचार आदि नहीं करने चाहिए। इन कार्यों के बदले पाप की अवधारणा भी बनी हुई है।
  5. भावनात्मक लगाव – धर्म भावना प्रधान होता है, तर्क प्रधान नहीं। अलौकिक शक्ति के प्रति भावात्मक लगाव होता है, जिसकी अभिव्यक्ति उस शक्ति के प्रति श्रद्धा, भय, प्रेम आदि के रूप में की जाती है। सत्संग, प्रवचन, भजन कीर्तन आदि उसे प्रति अभिव्यक्त लगाव ही होता है।

विश्व के कुछ धर्म

धर्म का शाब्दिक अर्थ होता है, ‘धारण करने योग्य’सबसे उचित धारणा, अर्थात जिसे सबको धारण करना चाहिये’। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन या बौद्ध आदि धर्म न होकर सम्प्रदाय या समुदाय मात्र हैं।

शैव धर्म

  • यह भगवान शिव से संबंधित है और इनकी पूजा करने वाले शैव कहलाते हैं।
  • शिवलिंग उपासना का प्रारंभिक पुरातत्व छात्र हमें हड़प्पा संस्कृति से प्राप्त होता है।
  • शिवलिंग की उपासना का स्पष्ट वर्णन हमें मत्स्य पुराण में होता है।
  • ऋग्वेद में पहली बार भगवान शिव का उल्लेख मिलता है जबकि अथर्व वेद भव, शिव, पशुपति कहा गया है।
  • पशुपति संप्रदाय का सर्वप्रथम वर्णन हमें वामन पुराण में देखने को मिलता है। जो इसका सबसे प्राचीन संप्रदाय है। पशुपति के संस्थापक लकुलिश थे जो भगवान शिव के 18 अवतार में से एक थे।
  • पशुपति संप्रदाय के अनुयायियों को पंचथार्तिक कहकर पुकारा जाता था।
  • एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर की स्थापना राष्ट्रकूट शासकों ने कराई थी।
  • कुशाल शासकों की जितनी भी मुद्राएं प्राप्त होती थी, उनमें से अधिकतर में शिव और नंदी का अंकन होता था जिससे पता चलता है कि वह इस धर्म के अनुयाई थे।
  • चोल वंश के प्रतापी शासक राजराज प्रथम ने तज तांजोर में राजराजेश्वर मंदिर का निर्माण कराया था। जिसे वृद्धेश्वर मंदिर से भी जाना जाता है।

इस्लाम धर्म

  • इसके प्रवर्तक मुहम्मद साहब थे। जिनका जन्म 570 ईसवी में मक्का में हुआ था।
  • इनके पिता का नाम अब्दुल्ला और उनकी माता अमीना थी।
  • इनका विवाह 25 वर्ष की उम्र में विधवा के साथ हुआ उनकी पत्नी का नाम खदीजा था
  • उनकी पुत्री फातिमा तथा दामाद अली हुसैन थे।
  • मोहम्मद साहब को 610 ईसवी में हीरा नामक गुफा में इन्हीं ज्ञान की प्राप्त हुई थी।
  • कुरान इस्लाम धर्म का सबसे प्राचीन ग्रंथ है।
  • 623 ईसवी में मोहम्मद साहब की मृत्यु मदीना में हुई थी।
  • इनकी मृत्यु के बाद यह धर्म दो भागों में बट गया शिया और सुन्नी
    • शिया समुदाय के लोग अली हुसैन की दीक्षा पर विश्वास करते थे।
    • सुन्नी समुदाय के लोग मोहम्मद साहेब की दीक्षा पर भरोसा करते थे।
  • मोहम्मद साहब के जन्म दिवस पर ईद- ए -मिलाद -उल नबी त्यौहार मनाया जाता है।

वैष्णव धर्म

  • वैष्णो धर्म के प्रवर्तक भगवान कृष्ण थे।
  • इसका पहली बार उल्लेख छांदोग्य उपनिषद में मिलता है।
  • इसी उपनिषद में भगवान श्री कृष्ण के अवतार मिलता है।उपनिषद में भगवान श्रीकृष्ण को देवी देवकी और वसुमित्र के पुत्र तथा अंगिरास का शिष्य बताया गया है।
  • मत्स्य पुराण, भगवान कृष्ण के 10 अवतार का प्रमाण प्रकट करता है।
  • वैष्णो धर्म को दो भागों में बांटा गया था-
    1. वैष्णव संप्रदाय
    2. आजीवक संप्रदाय

ईसाई धर्म

  • ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह जी थे।
  • इस धर्म का पवित्र ग्रंथ बाइबिल है।
  • इनका जन्म जेरूसलम के निकट बेथलेहम नामक स्थान पर हुआ था।
  • उनके पिता का नाम जोसेफ और माता का नाम मरियम मेरी था।
  • ईसा मसीह को रोमन गवर्नमेंट ने इन्हें 33 ईसवी में सूली पर चढ़ा दिया था।
  • इनका पवित्र चिन्ह क्राश है।
  • उनके जन्मदिन को क्रिसमस डे या बड़ा दिन के नाम से मनाते हैं।
निर्धनता अर्थ एवं परिभाषाभारत में निर्धनता के कारणनिर्धनता का सामाजिक प्रभाव
जाति अर्थ परिभाषा लक्षणधर्म में आधुनिक प्रवृत्तियांलैंगिक असमानता
भारतीय समाज में धर्म की भूमिकाधर्म परिभाषा लक्षणधार्मिक असामंजस्यता
अल्पसंख्यक अर्थ प्रकार समस्याएंअल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रमपिछड़ा वर्ग समस्या समाधान सुझाव
दलित समस्या समाधानघरेलू हिंसादहेज प्रथा
मानवाधिकारमानवाधिकार आयोगतलाक
संघर्ष अर्थ व विशेषताएंभारत में वृद्धो की समस्याएंभारत में वृद्धो की समस्याएं
जातीय संघर्षभारतीय समाज में नारीवृद्धों की योजनाएं

धर्म परिभाषा, धर्म क्या है, धर्म की कोई चार विशेषताएं बताइए।, धर्म को परिभाषित कीजिए। धर्म का अर्थ क्या है? धर्म परिभाषा को लिखिए।

guest

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments