जापान स्थलाकृतियां

जापान स्थलाकृतियां – जापान का धरातलीय स्वरूप सभी जगह एक जैसा नहीं है। यह स्थलाकृति या पूरे देश में विक्रय रूप में मिलती है। जापान के धरातलीय स्वरूप को भारत की तरह (पर्वत, पठार, मैदान व तटवर्ती क्षेत्र) विभाजित नहीं कर सकते। यहां पर पर्वत पठार मैदान टुकड़ों में चारों द्वीपो पर मिलते हैं। जापान में समुद्र, आंतरिक जलाशय एवं पर्वतीय छटा देखने योग्य है। इसी कारण यहां के लोग प्राकृतिक भू दृश्य को सानसुई कहते हैं। सान का अर्थ पर्वत और सुई का अर्थ जल से है।

जापान भौगोलिक स्थिति
जापान स्थलाकृतियां

जापान स्थलाकृतियां

धरातलीय विषमताओं तथा आंतरिक स्थलाकृतिक विशेषताओं के आधार पर जापान को निम्न भौतिक स्वरूपों में बांट सकते हैं-

  1. होकैडो प्रदेश
  2. आंतरिक उत्तरी प्रदेश
  3. बाह्य उत्तरी प्रदेश
  4. मध्यवर्ती फोसा मैग्ना कान्टो प्रदेश
  5. दक्षिण पश्चिमी प्रखण्ड

1. होकैडो प्रदेश

होकैडो के धरातलीय स्वरूप उत्तर दक्षिण दिशा में फैली दो पर्वत श्रेणियां किटामी और हिडाका तथा उनके मध्य स्थित इशीकारी और युफुत्सु मैदान से बना है। यह पर्वत श्रेणियां पूर्ववर्ती नदियों द्वारा काटी गई है। जिसके फलस्वरूप यहां पर पांच नदी बेसिन की उत्पत्ति हुई है। होकैडो द्वीप का कोई पर्वत अपरदन के कारण अधिक ऊंचा नहीं है। भ्रंशन के कारण भ्रंशित तट रेखा सर्वत्र पाई जाती है। तटीय सकहों पर सबसे अधिक ऊंचाई केप एरिमों के समीप है, जो समुद्र तल से 1000 फीट ऊंचा है।

जापान भूपृष्ठीय रचना
जापान स्थलाकृतियां

2. आंतरिक उत्तरी प्रदेश

यह प्रदेश हांशू धूप के पश्चिम में जापान सागर की तरफ स्थित है। इस आंतरिक प्रदेश में वलन और भ्रंशन की क्रियाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। यहां पर औऊ तथा उत्सू भ्रंशित पर्वतों की दो समानांतर श्रेणियां स्थित है। उत्सू पर्वत पर एचिगो तथा रेवा पहाड़ियां है। यह पर्वत मोगामी नदी द्वारा दो भागों में विभाजित है जो उत्तरी भाग रेखा श्रेणी और दक्षिणी भाग एचिगो श्रेणी के नाम से विख्यात है। इस प्रदेश की नदियों द्वारा अवसादो का निक्षेप होने से यहां पर दलदली मैदानों का निर्माण हुआ है। अनुमान है कि इन मैदानों का निर्माण लैगून झीलों के भर जाने के फलस्वरूप हुआ है।

3. बाह्य उत्तरी प्रदेश

यह प्रदेश पूर्वी टोहोकू में स्थित है। इस क्षेत्र में किटाकामी और अबूकुमा पधारो पर अपरदन कम हुआ है। कठोर एवं रवेदार चट्टाने अपठित होकर समप्राय मैदान बन गए हैं जिन पर कई अवशिष्ट पहाड़ियां दिखाई पड़ती हैं। आप जापान स्थलाकृतियां Hindibag पर पढ़ रहे हैं।

जापान
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4. मध्यवर्ती फोसा मैग्ना कान्टो प्रदेश

यह एक अलग तरह का भौतिक प्रदेश है। मध्य जापान में हांशू, शिकोकू और बोनिन यह तीनों मिलकर चूबू गांठ की रचना करते हैं। यह जापान का ब्लॉक पर्वत का सर्वोच्च क्षेत्र है। इसी क्रम में जापान का अल्पस पर्वत आता है जो 3100 मीटर से अधिक ऊंचा है। यहां फोसा मैग्ना निम्न भर्ती क्षेत्र जापान के प्रत्येक भौतिक विभाग को एक दूसरे से अलग करता है।

कान्टो मैदान इस क्षेत्र का एक उपभाग है। इस मैदान का निर्माण होकैडो के टोकाची मैदान की तरह हुआ है। टोन तथा अन्य नदियां प्रशांत महासागर और टोकियो की खाड़ी में निक्षेपण की क्रिया द्वारा मैदान का निर्माण कर रही है।

5. दक्षिण पश्चिमी प्रखण्ड

यह एक सम्मिश्र प्रदेश है। उत्तरी जापान की तुलना में यहां पर अपक्षय एवं अपरदन अधिक हुआ है। क्योटो, नारा और बीवा नदियों द्वारा अपरदन के कारण यहां की पर्वत श्रेणियों की ऊंचाई बहुत कम है। इस क्षेत्र के पठार भी अपरदन की वजह से सपाट दिखाई पड़ते हैं। इससे प्रदेश के दो उप भौतिक विभाग हैं।

  • जापान सागर विभाग
  • प्रशांत महासागरीय बाह्य विभाग

जापान सागर विभाग में कई भ्रंशन हुए हैं जिसके कारण आंतरिक प्रवाह की बीवा झील का निर्माण हुआ है लेकिन बाह्य विभाग में भ्रंशन नहीं हुआ है। यह क्षेत्र उत्थित मोड दार पर्वतों से बना है। यहां के धरातल वनाच्छादित हैं जो कायांतरित चट्टानों से बने हैं।

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