जापान भौगोलिक स्थिति

जापान भौगोलिक स्थिति – द्वीपों का देश जापान पूर्व का ब्रिटेन कहा जाता है। इसे उगते हुए सूरज का देश भी कहा जाता है। जापान उत्तरी गोलार्द्ध तथा पूर्वी गोलार्ध में एक द्वीप दुनिया के नाम से स्थित है। जापान की प्रगति का मुख्य कारण उसकी भौगोलिक स्थिति है। जापान द्वीप समूह के पश्चिम में केवल 800 किलोमीटर की दूरी पर सोवियत रूस, कोरिया तथा चीन देश स्थित हैं। प्रशांत महासागर को पार कर पूर्व दिशा में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको है।

चीन स्थिति भूवैज्ञानिक संरचना
जापान भौगोलिक स्थिति

जापान भौगोलिक स्थिति

जापान का विस्तार 30° उत्तरी अक्षांश से 45° उत्तरी अक्षांश तक तथा देशांतरीय विस्तार 128° पूर्वी देशांतर से 146° पूर्वी देशांतर के मध्य है। यह प्रशांत महासागर के अग्नि मेखला पर स्थित होने के कारण यहां हमेशा ज्वालामुखी और भूकंप की घटनाएं होती रहती हैं। वर्तमान समय में 1780 से अधिक छोटे-छोटे द्वीप हैं। जापान चार बड़े द्वीपों (होकैडो, हांशू, शिकोकू तथा क्यूथू) तथा अन्य कई छोटे द्वीपों से बना है।

जापान एशिया महाद्वीप के पूर्व यूरेशियन प्लेट के पूर्वी सीमांत पर स्थित मोड़दार एवं ज्वालामुखी संरचना वाले द्वीपों का एक पुंज है। उसकी उत्तर दक्षिण सीमा की लंबाई 22 किमी है और कुल क्षेत्रफल लगभग 3,69,661 वर्ग किमी है, जो ग्रेट ब्रिटेन के लगभग बराबर है। जापान का दक्षिणी पश्चिमी भाग कोरियाई प्रायद्वीप से 180 किमी दूर है। जापान के किसी भाग से एशियाई मुख्य भूमि को नहीं देखा जा सकता।

जापान भौगोलिक स्थिति
जापान भौगोलिक स्थिति

जापान की द्वीपीय स्थिति और इसका अपने पड़ोसी देशों के साथ समुद्री संबंध ही देश के भूगोल का केंद्रीय बिंदु है।

डॉ के सी के अनुसार

जापान द्वीप के पूरब में पश्चिमी प्रशांत महासागर है तथा द्वीप के पूर्वी किनारे के सहारे महासागरीय खाई है जो प्रशांत प्लेट के यूरेशियाई प्लेट के नीचे अधोगमन से निर्मित हुई है। इसी खाई में जापान गर्त स्थित है। जिसकी गहराई समुद्र तल से लगभग 28000 फीट है। कोरिया के समीप जापान 175 किमी चौड़ा सुशिमा जल संयोजन द्वारा एशिया महाद्वीप से अलग है। समुद्र के चारों ओर से घिरा होने के कारण यहां यातायात की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त यह विश्व के प्रमुख जल एवं वायुमार्गो पर स्थित है।

जापान
जापान मानचित्र का अध्ययन

इसकी प्राकृतिक बनावट इसके विकास में कुछ सीमा तक बाधक है क्योंकि सभी द्वीप एक दूसरे से अलग है। वही कटे-फटे तट होने के कारण जापान से उत्तम बंदरगाह की सुविधा उपलब्ध है।

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