जापान के वन महत्व वन विनाश

जापान के वन – प्राकृतिक वनस्पति के अंतर्गत सभी प्रकार के वन, झाड़ियां तथा घासें सम्मिलित की जाती हैं। जलवायु, धरातल तथा मिट्टी की विभिन्नता प्राकृतिक वनस्पति को निर्धारित करती है। शीतोष्ण कटिबंधीय मानसूनी जलवायु के कारण यहां विभिन्न प्रजाति के वृक्ष तथा अनेक प्रकार की वनस्पतियां पाई जाती हैं। यहां की अर्थव्यवस्था में वनों का अभूतपूर्व योगदान रहता है क्योंकि समस्त औद्योगिक मूल्य का लगभग 5% उत्पादन जंगलों से प्राप्त होता है। जापान के वन अधिकांश पर्वतीय ढालों पर पाए जाते हैं। वनों का क्षेत्रीय प्रतिशत इस प्रकार है-

क्रम संख्यावनों के नामक्षेत्र (प्रतिशत में)
1.चौड़ी पत्ती वाले वन44%
2.मिश्रित वन27%
3.शंकुधारी वन26%
चीन के वन, जापान के वन
जापान के वन

जापान के वन

जापान के अधिकांश क्षेत्र में वन आज भी अपनी प्राकृतिक अवस्था में है। जापान में मुख्य रूप से तीन प्रकार की वनस्पतियां मिलती हैं-

  1. शीतोष्ण कोणधारी वन
  2. शीतोष्ण पर्णपाती वन
  3. उपोष्ण वन मण्डल

शीतोष्ण कोणधारी वन

इन वनों को शंकुधारी वन तथा शीत प्रदेशीय वन भी कहते हैं। यह यहां के शीत प्रधान वाले प्रदेश में मिलते हैं। अत्यधिक शीत के कारण बर्फ से बचने के लिए वृक्ष शंकुधारी हो जाते हैं। इनकी पत्तियां कोणधारी होती हैं। फर और स्प्रूस इन वनों की प्रमुख प्रजाति हैं। ऐसे क्षेत्र में कहीं-कहीं पर पर्णपाती वृक्ष भी पाए जाते हैं। इन वनों से औद्योगिक कार्यों के लिए मुलायम लकड़ी प्राप्त होती है। इस प्रकार के वन 1200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। आप जापान के वन Hindibag पर पढ़ रहे हैं।

शीतोष्ण पर्णपाती वन

यह वन जापान के 25% भाग पर पाए जाते हैं। जापान के वन 300 मीटर से लेकर 1200 मीटर की ऊंचाई पर हांशू तथा होकैडो द्वीप पर अधिक पाए जाते हैं। इन क्षेत्रों में पाए जाने वाले वनों को मिश्रित वन इसलिए कहते हैं क्योंकि इन वनों में मानसूनी वन, पतझड़ वन एवं नुकीली पत्ती वाले सदाबहार वन मिश्रित रूप से पाए जाते हैं।

इन वनों का आर्थिक महत्व हांशू द्वीप में अधिक है। यह जापान का प्रमुख लकड़ी उत्पादक द्वीप है। यहां शंकुधारी वृक्षों का व्यावसायिक दृष्टि से अधिक महत्व है जिनका प्रयोग फर्नीचर व मकान बनाने के लिए किया जाता है।

चीन के वन
जापान के वन

उपोष्ण वन मण्डल

इस प्रकार के वन मध्य हान्शू के तटवर्ती तथा दक्षिणी-पश्चिमी जापान के 1000 मीटर ऊंचे भागों में पाए जाते हैं। इन वनों को मानसूनी वन व चौड़ी पत्ती वाले वन भी कहते हैं। इन वनों के अंतर्गत मुख्य रूप से चीड़, बांस तथा कपूर के वृक्ष मिलते हैं। बांसी इस क्षेत्र का मुख्य वृक्ष है। यह मकान बनाने के काम आता है। इस प्रकार की लकड़ी व्यावसायिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है।

जापान में वनों का महत्व

जापान की अर्थव्यवस्था के विकास में वनों का अधिक महत्व है। यहां पाई जाने वाली लकड़ी का प्रयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जो निम्न है-

  1. लकड़ी पर आधारित उद्योग – जापान के कुछ उद्योग का 5% भाग लकड़ी उद्योग का है। प्लाईवुड निर्यात के लिए तैयार किया जाता है।
  2. गृह निर्माण के लिए लकड़ी – जापान के घरों को बनाने हेतु लकड़ी का प्रयोग बहुतायत से किया जाता है।
  3. ऊर्जा की प्राप्ति – कमरों को गर्म करने में भी लकड़ी का प्रयोग किया जाता है।खाना बनाने में कुल ऊर्जा का 1% खर्च किया जाता है।
  4. वायु अवरोधक – वृक्ष तीवृ वायु को रोकने में सहायक होते हैं। आप जापान के वन Hindibag पर पढ़ रहे हैं।
  5. मृदा अपरदन पर नियंत्रण वृक्षों से मिट्टी का अपरदन कम होता है क्योंकि जड़े अंदर तक जल सोख लेती है।
  6. जल संरक्षण वृक्ष की जड़ों का वर्षा के जल संसाधन मैं विशेष योगदान है।
  7. बाढ नियंत्रण वन बाढ़ को रोकने में सहायक होते हैं।
चीन के वन, जापान के वन
जापान के वन

यहां के कुल उद्योग का 5% भाग लकड़ी उद्योग से प्राप्त होता है। इन उद्योगों में कागज,फर्नीचर तथा प्लाईवुड प्रमुख है। घरेलू मांग अधिक होने के कारण यहां घरों मेल लकड़ियों का प्रयोग अधिक मात्रा में किया जाता है। वनों के लकड़ियों से जापान को अधिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। ऊर्जा का प्रयोग कमरे में गर्म करने गए तथा विद्युत के रूप में किया जाता है। उपर्युक्त कारकों में वनों से अप्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त होता है। वृक्षों से वायु की गति धीमी हो जाती है। तीव्र गति से आने वाली आंधियों से भी कम हानि होती है।

वनों से भूमि क्षरण तथा कटाव रुकता है क्योंकि वृक्षों की जड़ें वर्षा के जल की गति को धीमी कर देती है और मिट्टी को पकड़ कर रखती हैं। वन बाढ़ों के प्रकोप को रोकने में सहायक होते हैं। वृक्षों की वजह से जल का प्रवाह धीमा रहता है। वृक्षों की पत्तियां भूमि में मिलकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है। वृक्षों की हरियाली नेत्रों के लिए लाभदायक रहती है। यह देश के प्राकृतिक सौंदर्य को भी बढ़ाते हैं। आप जापान के वन Hindibag पर पढ़ रहे हैं।

चीन के वन, जापान के वन
जापान के वन

जापान में वन विनाश से उत्पन्न समस्याएं

जापान में आर्थिक विकास की आवश्यकता की आपूर्ति हेतु वनों को तेजी से काटा जा रहा है। जापान में लुगदी की मांग में 4 गुना वृद्धि हुई है। जापान में वन विनास से निम्न समस्याएं उत्पन्न हुई है-

  1. मृदा अपरदन – घनघोर वर्षा से तीव्र ढाल वाले पहाड़ों पर मिट्टी अपरदन तो होकर बह जाती है जिसके कारण धान के खेत अनुपजाऊ हो जाते हैं।
  2. बाढ़ – भारी वर्षा द्वारा अर्जित अपरदन मिट्टी निचली घाटियों में जमा हो जाती है जिससे नदियों की निचली घाटियों में प्रायः बाढ़ें आती हैं।
  3. वन संसाधन का ह्रास – वन संसाधन ही यहां की प्रमुख आर्थिक संपत्ति है।
  4. पारिस्थितिकी असंतुलन – वन नष्ट होने से जापान में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ेगी अम्लीय वर्षा होगी तथा वन्य जंतुओं की संख्या घटेगी।

उपरोक्त समस्याओं के समाधान के लिए जापान में खाली क्षेत्रों पर पुनर्वनिकीकरण किया जा रहा है क्योंकि जापान का प्रमुख संपत्ति वन है।

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